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नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के बीच आपसी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि कर्नाटक में दोनों पार्टियां मिलकर सरकार चला रहे हैं। अब जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष एच विश्वनाथ ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं को गठबंधन सरकार में बिखराव करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा, 'वे (कांग्रेस नेता) 2022 में राजनीति कर सकते हैं, लेकिन अभी सही वक्त नहीं है। हम सिद्धारमैया को कांग्रेस में लाए थे और हमने ऐसी स्थिति पैदा की, जिसने उन्हें सीएम बना दिया। दरअसल, एच विश्वनाथ की ओर से राज्य के पूर्व सीएम सिद्धारमैया पर दिए गए एक बयान के बाद से यह विवाद शुरू हो गया है।इससे पहले विश्वनाथ ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के काम-काज पर सवाल उठाया था। इसके बाद विश्वनाथ के बयान के विरोध में खुद सिद्दारमैया ने कमान संभाली और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की समन्वय समिति की अगली बैठक में इस मामले को उठाने की बात कही। बताया जा रहा है कि यह विवाद उस वक्त से शुरू हुआ है, जब यह अटकलें जाने लगी थीं कि लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आने के बाद दोनों पार्टियों के बीच हुआ गठबंधन टूट सकता है। हालांकि किसी भी पार्टी के नेता ने गठबंधन में दरार की बात नहीं की।विश्वनाथ ने कहा था कि सिद्धारमैया के चमचे उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, लेकिन कुमारस्वामी ही अगले चार साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा था, 'अगला चुनाव होने में अभी 4 साल बाकी हैं तो हम अभी से भविष्य के बारे में अनुमान क्यों लगाएं? इतना तय है कि यह सरकार अगले 4 साल तक चलेगी। 4 साल बाद सिद्दारमैया मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह देखने वाली बात होगी।'
कुमारस्वामी ने भी दिखाए थे तेवर;-हाल ही में जनवरी में खुद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी कहा था कि अगर कांग्रेस अपने विधायकों को उनके काम करने के तरीके की आलोचना करने से नहीं रोक सकती तो वे अपना इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था, 'कांग्रेस को निश्चित ही अपने विधायकों को नियंत्रित करना चाहिए और मामले को सुलझाना चाहिए। अगर वे खुली बैठकों में मेरे खिलाफ टिप्पणी करते रहेंगे तो मैं इस्तीफा देना चाहूंगा।'वहीं विश्वनाथ सिर्फ सिद्दारमैया ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला था। उन्होंने संसद में अविश्वास प्रस्ताव की बहस के दौरान कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी के गले लगने को बचकानी हरकत बताया। उन्‍होंने कहा इसकी कोई जरूरत नहीं थी, ये एक बचकानी हरकत थी।

नई दिल्ली। सोमवार को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर सोने की तस्करी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 25 किलो सोना भी बरामद किया गया है, जिसकी कीमत आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है।राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) के अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों तस्कर ओमान से आ रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि एयरपोर्ट स्टाफ के कुछ लोग भी तस्करी में शामिल हैं इसलिए पिछले छह महीने से यहां कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। इससे पहले केरल के कोच्चि और तिरुवनंतपुरम के अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर 42 लाख रुपए का सोना जब्त किया गया था। सीमा शुल्क की खूफिया टीमों ने इस मामले में खाड़ी देशों से आए तीन यात्रियों को गिरफ्तार किया था। उस वक्त रियाद से आए मल्लपुरम के दो लोगों के पास से कुल 601.800 ग्राम सोना बरामद किया गया जिसकी कीमत 17.42 लाख रुपए बताई गई थी। जबकि तिरुवनंतपुरम में सीमा शुल्क अधिकारियों ने 816.38 ग्राम वजन के सोने के साथ एक यात्री को धर दबोचा था।

हैदराबाद। तेलंगाना बोर्ड ऑफ सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट (SSC) के दसवीं कक्षा के नतीजे सोमवार को घोषित कर दिए है। नतीजे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए है। 5.2 लाख विद्यार्थी लंबे समय से दसवीं के नतीजों के इंतजार कर रहे थे। बोर्ड ने हैदराबाद में अपने हेडक्वाटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद रिजल्ट जारी किया। विद्यार्थी bse.telangana.gov.in पर जाकर परिणाम देख सकते है। बता दें कि तेलंगाना बोर्ड ने SSC की परीक्षाएं 16 मार्च से 3 अप्रैल, 2019 तक आयोजित की गई थी।
बोर्ड परीक्षा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण तारीख
परीक्षा शुरु: 16 मार्च 2019
परिक्षा खत्म: 3 मार्च 2019
परिणाम की घोषणा: 13 मई 2019
परिणाम जारी होना का समय: 11:30 बजे
आधिकारिक वेबसाइट: bse.telangana.gov.in
इस तरह देखें नतीजे
-सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.bse.telangana.gov.in पर जाएं।
-इसके बाद TS SSC Result 2019 के लिंक पर क्लिक करे
-इसके बाद जानकारी भरें जैसे की अपना रोल नंबर।
-सारी जानकारी भरने के बाद इसे सबमिट कर दें
-विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि परिणाम घोषित होने के साथ ही लाखों छात्र एक साथ परिणाम देखेंगे ऐसे में हो सकता है कि बोर्ड की वेबसाइट खुलने में थोड़ी दिक्कत करे। इसलिए घबराएं नहीं। कुछ देर बाद वेबसाइच फिर से शुरू हो जाएगी। आप bse.telangana.gov.in के अलावा results.cgg.gov.in पर भी परिणाम देख सकते हैं।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में एक नेता ऐसी भी हैं, जो PM Narendra Modi को भी डांट सकती है। नरेंद्र मोदी ने खुद इस बारे में बताया है और कहा है कि बीजेपी में सिर्फ लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ही ऐसी नेता हैं, जो उन्हें डांट लगा सकती है। इंदौर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सुमित्रा महाजन के कुशल सदन संचालन की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'लोकसभा स्पीकर के तौर पर 'ताई' ने बड़ी कुशलता और संयम से कार्य किया। इस दौरान मोदी ने सुमित्रा महाजन से उनके रिश्तों को लेकर बातें शेयर की।सुमित्रा महाजन की लोकसभा सीट इंदौर में मोदी ने मंच से कहा, 'आप सब तो मुझे प्रधानमंत्री के रूप में जानते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि हमारी पार्टी में अगर मुझे कोई डांट सकता है, तो वह ताई ही हैं।' साथ ही पीएम ने कहा, 'मैंने और ताई ने भाजपा संगठन में साथ-साथ काम किया है। कार्य के प्रति उनके समर्पण को ध्यान में रखते हुए मैं इंदौर को विश्वास दिलाता हूं कि शहर के विकास के मामले में ताई की कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहेगी।'वहीं मोदी ने इंदौर में स्वच्छता को लेकर भी लोगों का और महाजन का शुक्रिया अदा किया। आपको बता दें कि स्वच्छ सर्वेक्षण में इंदौर भारत का सबसे साफ शहर है। साथ ही मोदी ने रैली के मंच से कांग्रेस पर भी हमला बोला और मध्यप्रदेश के मुद्दों पर बात की।गौरतलब है कि सुमित्रा महाजन इंदौर सीट से साल 1989 से 2014 के बीच लगातार आठ बार चुनाव जीत चुकी हैं। हालांकि इस बार उन्होंने चुनाव ना लड़ने का फैसला किया और अब बीजेपी ने पार्टी के स्थानीय नेता शंकर लालवानी (57) पर विश्वास जताया है और इंदौर से चुनावी मैदान में उतारा है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के चेयरमैन और इंदौर नगर निगम के सभापति रह चुके लालवानी अपने राजनीतिक करियर का पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंत्री स्तर के सदस्यों की दिल्ली में बैठक जारी है। दो दिवसीय यह बैठक 14 मई तक चलेगी। इस बैठक में चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया, टर्की समेत 16 विकासशील देशों के मंत्री और अधिकारी कई महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करेंगे।बता दें कि WTO (World Trade Organisation) की इस बैठक में 16 विकासशील देशों के अलावा 6 सबसे कम विकसित देशों के मंत्री और अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं।विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) एक बहुपक्षीय संस्था है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नियमन करती है। इसकी स्थापना पहली जनवरी 1995 को हुई और इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में है। फिलहाल 164 देश इसके सदस्य हैं। भारत शुरू से ही डब्ल्यूटीओ का सदस्य रहा है। आज विश्व का 98 फीसद व्यापार डब्ल्यूटीओ के दायरे में होता है। डब्ल्यूटीओ का मकसद संरक्षणवाद (प्रोटेक्शनिज्म) को खत्म कर भेदभावरहित, पारदर्शी और मुक्त व्यापार व्यवस्था बनाना है ताकि सभी देश एक-दूसरे के साथ बिना किसी बाधा (अत्यधिक टैरिफ या प्रतिबंध) के व्यापार कर सकें

 

 

 

नई दिल्‍ली। सिजोफ्रेनिया के मरीजों में कुछ विशेष तौर से दिखने वाले लक्षण कैटेटोनिक कहे जाते है। इसमें व्यक्ति ज्यादा चलता फिरता नहीं है और किसी भी निर्देशों का पालन नहीं कर पाता है। इसकी चरमता पर ऐये व्यक्ति मोटर की गतिविधियों की अत्यधिक और अजीब सी आवाज निकालकर नकल उतारते है। इसे कैटेटोनिक उत्साह कहा जाता है।शोधकर्ताओं का कहना है कि अंकुरित ब्रोकोली में पाए जाने वाले रसायन से सिजोफ्रेनिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है। 81 लोगों पर दो साल तक किए परीक्षण के बाद अमेरिका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि इसकी मदद से सिजोफ्रेनिया का ऐसा उपचार विकसित किया जा सकता है। सिजोफ्रेनिया एक मनोरोग है जिसके कारण व्यक्ति अपनी काल्पनिक दुनिया में जीने लगता है। ब्रोकली या पत्ता गोभी के नियमित सेवन से पाचन संबंधी समस्याओं से निजात मिल सकती है। इसमें आंत को स्वस्थ रखने वाले मिश्रण पाए जाते हैं। ब्रोकली में पाया जाने वाला मिश्रण इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। आंत के स्वस्थ रहने पर पाचन तंत्र भी दुरस्त रहता है।शोधकर्ताओं के मुताबिक, सिजोफ्रेनिया के लक्षणों का सामना कर रहे व्यक्ति के मस्तिष्क में ग्लूटामेट नामक रसायन की कमी हो जाती है। यह रसायन मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार में अहम भूमिका निभाता है। चूहों के मस्तिष्क की कोशिकाओं पर किए गए प्रयोग के बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि अंकुरित ब्रोकोली से निकाला गया सल्फोरेफेन रसायन इसकी मात्रा को संतुलित करने में मददगार होगा।
सिजोफ्रेनिया के लक्षण:-इलाज में मार्डन तकनीकी की वजह से पहले की तुलना में अब कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया कम पाया जाता है। सिजोफ्रेनिया की बजाय कैटेटोनिक को न्यूरोडेवलेपमेंटल (एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने के समय प्रभावित करती है), साइकोटिक बाइपोलर, और डिप्रेसिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक बीमारियों में ज्यादा देखा जाता है। कैटेटोनिया के रोगी को अत्यधिक और कम मोटर गतिविधि के बीच में देखा जा सकता है। माडर्न तकनीकी की वजह से कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के मरीज अपने लक्षणों को आसानी से समझने लगे है, जिससे उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो गई है।
सिजोफ्रेनिया के कारण
जेनेटिक्स- सिजोफ्रेनिया का इतिहास रखने वाले परिवार में इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा ज्यादा रहता है।
वायरल संक्रमण - कुछ अध्ययनों के अनुसार वायरल संक्रमण के कारण बच्चों में एक प्रकार का पागलपन के विकास होने की संभावना ज्यादा रहती है।
भ्रूण कुपोषण - अगर गर्भावस्था के दौरान भ्रूण कुपोषण से ग्रस्त है, वहाँ एक प्रकार का पागलपन विकसित होने का अधिक खतरा है।
प्रारंभिक जीवन के दौरान तनाव - प्रारंभिक जीवन मेंगंभीर तनाव के कारण एक प्रकार के पागलपन के विकास होने का खतरा रहता है।
जन्म के समय माता-पिता की आयु - ज्यादा उम्र के माता पिता के बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा रहती है।
सिजोफ्रेनिया का इलाज:-सिजोफ्रेनिया एक ऐसी स्थिति है जो सारी जिंदगी रहती है, हालांकि कैटेटोनिक लक्षण हमेशा रहे ऐसा जरूरी नहीं है। सिजोफ्रेनिया के मरीजों को एक स्थायी आधार पर उपचार की आवश्यकता होती है; यहां तक ​​कि जब लक्षण गायब हो जाये और रोगी को लगने लगे वे बेहतर हो गए हैं। सभी प्रकार के सिजोफ्रेनिया का इलाज एक ही तरीके से किया जाता है। बीमारी के तथ्यों, गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तरीकों में अंतर हो सकता है।

नई दिल्ली। कारोबारी सहूलियत रैंकिंग में सुधार और दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े दावों के बावजूद एक सच्चाई यह सामने आई है कि बड़ी संख्या में भारत के अमीर लोग दूसरे देश चले जाते हैं। एएफआरएशिया बैंक और रिसर्च फर्म न्यू व‌र्ल्ड वेल्थ की ताजा रिपोर्ट 'ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू (जीडब्ल्यूएमआर) 2019' में कहा गया है कि पिछले साल देश की नागरिकता छोड़कर कहीं और जा बसने वाले अमीरों के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है। ऐसे हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (एचएनडब्ल्यूआइ) यानी अमीरों की संख्या गत साल करीब 5,000 थी। यह देश के कुल एचएनडब्ल्यूआइ का दो फीसद है।
अमीरों की पसंद अमेरिका और आस्ट्रेलिया;-अमीरों द्वारा छोड़ दिए जाने वाले देशों की सूची में पहले स्थान पर चीन है। अमेरिका के साथ ट्रेड वार का असर चीन पर दिखने लगा है। अमेरिका द्वारा नया शुल्क थोपे जाने के बाद चीन पर आने वाले समय में और भी गंभीर असर हो सकता है। सूची में दूसरे स्थान पर रूस है। रूस की अर्थव्यवस्था भी अनेक आर्थिक प्रतिबंधों से प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक देश छोड़ने वाले अमीरों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य हैं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया।भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यहां आर्थिक असमानता काफी अधिक है। भारत की कुल संपत्ति का 48 फीसद हिस्सा एचएनडब्ल्यूआइ के हाथ में है। जबकि इस मामले में पूरी दुनिया का औसत 36 फीसद है।रिपोर्ट में भारत की सराहना करते हुए हालांकि यह भी लिखा गया है कि अगले 10 साल में भारत की कुल संपत्ति में तेजी से इजाफा होने वाला है। जीडब्ल्यूएमआर रिपोर्ट में कहा गया है कि संपत्ति सृजन के मामले में भारत ब्रिटेन और जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा और 2028 तक यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा संपत्ति बाजार बन जाएगा।
संपत्ति सृजन में दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद की बड़ी भूमिका:-रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में अगले 10 साल में संपत्ति बनाने में दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद की बड़ी भूमिका रहेगी। दिल्ली अपनी विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था व कई अन्य सेक्टरों की अपनी ताकत के बल पर संपत्ति सृजन में योगदान करेगा। बंगलुरु के पास आइटी और आरएंडडी उद्योग की ताकत है। हैदराबाद देश की फार्मास्यूटिकल राजधानी होने के नाते और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) के बल पर देश के संपत्ति सृजन में योगदान करेगा।

नई दिल्ली। Xiaomi के स्मार्टफोन के लिए अब ऑनलाइन सेल का इंतजार नहीं करना होगा। कंपनी जल्द Mi Express Kiosk वेंडिंग मशीन भारत में इंस्टॉल करने वाली है। इस कियोस्क के जरिए ग्राहक Xiaomi के स्मार्टफोन्स खरीद सकेंगे। यह वेंडिग मशीन ठीक उसी तरह काम करेगा जैसे आप मैट्रो के टोकन के लिए कियोस्क का इस्तेमाल करते हैं। इस नए कियोस्क के जरिए फैन्स अपनी पसंद के Xiaomi स्मार्टफोन्स को खरीद सकेंगे।Xiaomi ने अपने Mi Express Kiosk को इस तरह से डिजाइन किया है कि यह सभी क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, कैश और UPI को एक्सेप्ट कर सके। इस नए वेंडिंग मशीन के जरिए ग्राहकों और फैन्स को स्मार्टफोन खरीदने के लिए परेशानी का सामना नहीं करना होगा। इस नए वेंडिंग मशीन तकनीक के जरिए कंपनी भारत में रिटेल में स्मार्टफोन बेचने के लिए नई स्ट्रेटेजी डेवलप कर रही है। इसकी मदद से फैन्स Xiaomi के सभी बजट स्मार्टफोन्स को खरीद सकेंगे।Xiaomi वेंडिंग मशीन के जरिए भारत में स्मार्टफोन बेचने वाली पहली कंपनी बन गई है। Mi Express Kiosks को भारत में ही रिसर्च करके डेवलप किया गया है। इस तकनीक की वजह से ऑफलाइन मार्केट के जरिए कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को यूजर्स तक पहुंचाने वाली है। Mi Express Kiosks को जल्द ही देश के सभी मेट्रो सिटी में इंस्टॉल किया जाएगा। इसे शॉपिंग मॉल्स, एयरपोर्ट, मैट्रो स्टेशन, टेक पार्क में इंस्टॉल किया जाएगा, जिसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा यूजर्स इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।आपको बता दें कि Xiaomi ने हाल ही में भारत में Redmi Y3 और Redmi 7 को लॉन्च किया है। इस स्मार्टफोन के लॉन्च के समय कंपनी के कंट्री हेड मनु कुमार जैन ने कहा था कि इस साल के अंत तक कंपनी 10,000 से ज्यादा Mi Store भारत में खोलने की प्लानिंग कर रही है। इसकी मदद से भारत के टीयर टू और टीयर थ्री शहरों और गावों में Xiaomi के स्मार्टफोन्स ग्राहकों को उपलब्ध कराया जा सकेगा।

जगदलपुर। आजकल छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित पूरे जंगल में फूलों से लदे बांस को सहज ही देखा जा सकता है। एक ओर जहां ग्रामीणों में फूल और बीज को लेकर उत्सुकता है तो दूसरी ओर कुछ अनहोनी का डर भी सता रहा है, क्योंकि अंधविश्वास है कि जिस वर्ष बांस में फूल आते हैं, उस साल अकाल पड़ता है। जंगल में ग्रामीण बांस के फूल से गिरने वाले बीज को एकत्र कर रहे हैं। वे खाद्य पदार्थ के रूप में इसका उपयोग करते हैं। इसके बीज को पिसवाकर रोटी बनाई जाती है, जिसे बेहद पौष्टिक बताया जाता है। बांस के पौधों में लगभग 40-45 साल बाद फूल आते हैं। बीज मिलने की उत्सुकता के बीच ग्रामीण अकाल पड़ने की चिंता में भी डूब गए हैं।
40 से 50 साल बाद होता है यह परिवर्तन:-हालांकि, वैज्ञानिक इसे महज अंधविश्वास बताते हैं। बताया गया कि एक ही प्रजाति के जितने भी बांस होते हैं, उनमें प्राकृतिक रूप से एक साथ फूल आते हैं। यह परिवर्तन 40 से 50 साल बाद होता है। फूल आने के बाद बांस सूख जाता है। इधर सूखे बांस के फूलों से बीज झरते हैं। जंगल के लोग भी इस बीज को संग्रहित कर रखते हैं और समयानुसार इसे खाद्य के रूप उपयोग करते हैं। बस्तर जिले के ग्राम चिलकुटी के रामधन बघेल और अन्य ग्रामीण बताते हैं कि आमतौर पर बांस में फूल आने को ग्रामीण अशुभ मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिस साल बांस में फूल आते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।
फूल आने के साथ ही बांस का जीवन चक्र हो जाता है समाप्त;-बस्तर वन परिक्षेत्राधिकारी देवेंद्र वर्मा इसे मिथ्या बताते हुए कहते हैं कि हर पेड़-पौधे में फल-फूल आने का निर्धारित समय होता है। बांस में 40-50 साल बाद फूल आते हैं और इसके साथ ही उक्त बांस का जीवन चक्र समाप्त हो जाता है, इसलिए इसे किसी भ्रांति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ग्राम गुमलवाड़ा, कोलावाड़ा, कालागुड़ा के ग्रामीण बताते हैं कि बांस के दाने झरने से उसे खाने के लिए जंगली चूहों की संख्या बढ़ गई है। पारद करने जाने वाले ग्रामीण इन दिनों इन चूहों का जमकर शिकार कर रहे हैं।
फूल के लिए नहीं होता निश्चित समय;-महासमुंद के वन मंडालाधिकारी (डीएफओ) आलोक तिवारी बताते हैं कि बांस में फूल आने का कोई निश्चित समय नहीं होता। देश में कई प्रजाति के बांस पाए जाते हैं। लेकिन एक ही प्रजाति के बांस में एक ही समय फूल आते हैं। वहीं पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिकों के शोध में जो तथ्य सामने आए हैं, उसमें बांस की विभिन्न् प्रजातियों मे विभिन्न् अंतराल पर फूल आते हैं। यह अंतराल 40 से 45 वर्ष तक या इससे भी अधिक का हो सकता है।
1979 में फूल आए थे तब पड़ा था अकाल:-बांस में आए फूल के बारे में कई लोगों ने बताया कि जिंदगी में उन्होंने पहली या दूसरी बार बांस में फूल देखा है। महासमुंद जिले के 66 वर्षीय हृदयलाल साखरे, शंकरलाल बताते हैं कि बांस में फूल का खिलना उस पौधे के नष्ट होने की निशानी है। यह बात उन्होंने अपने पूर्वजों से सुनी थी। अब वे देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1979 में बांस में फूल आए थे। उसके बाद इस साल देखने को मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इसे संयोग ही कहा जाएगा कि 1979 में प्रदेश में अकाल पड़ा था। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र के निवासी 80 वर्षीय पुरुषोत्तम साखरे ने बताया कि वे तीसरी बार फूल देख रहे हैं। करीब सात-आठ साल की उम्र में उनके दादाजी ने पहली बार दिखाया था। वे बांस में फूल आने को अशुभ नहीं मानते। उन्होंने इसे प्रकृति की रचना बताते हुए कहा कि इसका विपत्ति या अनहोनी से कोई सरोकार नहीं है।
बढ़ जाती हैं चूहों की संख्या:-महासमुंद डीएफओ तिवारी बताते हैं कि जिस क्षेत्र में बांस में फूल लगते हैं, तो वहां आसपास काफी संख्या में चूहे आ जाते हैं। बांस का बीज खाने के साथ उनकी प्रजनन क्षमता बढ़ने से इनकी संख्या में वृद्धि हो जाती है। फिर यही चूहे आसपास के खेत और घरों में फसल व अनाज को नुकसान पहुंचाते हैं। चूहों की संख्या बढ़ने से जहां संक्रामक बीमारियां फैलती वहीं फसल और अनाज को चट कर जाने से इलाकों में नुकसान उठाना पड़ता है। लोक इसे ही विपत्ति और अकाल की दृष्टि से देखते हैं।

नई दिल्ली। बजट विमान वाहक गोएयर घरेलू रुट्स पर सस्ते हवाई सफर की पेशकश कर रही है। टिकट की शुरुआती कीमत 1,375 रुपये होगी। इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए आपको 16 मई तक टिकट बुक करानी होगी। इस अवधि के दौरान बुक कराए गए टिकिटों पर आप 6 अक्टूबर 2019 तक यात्रा कर सकते हैं। गोएयर में सबसे सस्ता किराया (1375 रुपये) बगडोगरा से गुवाहाटी रुट के लिए है।हवाई सफर करने वाले अहमदाबाद से बेंगलुरू के लिए 2,599 रुपये में (15 से 18 जुलाई 2019 तक का ट्रैवलिंग पीरियड), अहमदाबाद से चेन्नई के लिए 3,348 रुपये में (ट्रैवल पीरियड जून 2019 तक), अहमदाबाद से मुंबई तक 1,899 रुपये में (ट्रैवल पीरियड 1 जुलाई से 31 जुलाई तक), बेंगलुरु से अहमदाबाद तक 3,938 रुपये (ट्रैवलिंग पीरियड जून 2019 तक), बेंगलुरू से पटना तक 3,779 रुपये (12 अगस्त से 31 अगस्त 2019 तक) में अपनी टिकट बुक करा सकते हैं।वहीं चेन्नई से अहमदाबाद तक के लिए आपको 3,750 रुपये (ट्रैवल पीरियड जून 2019 तक), गुवाहाटी से बगडोगरा तक के लिए 1,649 रुपये (ट्रैवल पीरियड जून 2019 तक), गुवाहाटी से दिल्ली तक 4,377 रुपये (ट्रैवल पीरियड जून 2019 तक) में अपनी टिकट बुक करवा सकते हैं। वहीं एक अन्य ऑफर में गोएयर कंपनी की मोबाइल एप के जरिए टिकट बुक कराने पर डिस्काउंट की भी पेशकश कर रहा है। ग्राहक मोबाइल एप के जरिए टिकट बुक कराने पर 10 फीसद की छूट का लाभ भी उठा सकते हैं।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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