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नई दिल्ली। कर्नाटक में एक बार फिर से सत्ता के लिए नाटक खेला जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन दो विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। वहीं, अब मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कांग्रेस के पांच विधायक कभी भी इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सरकार पर संकट आना लाजिमी है। गौरतलब है कि 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत के लिए 113 का आंकड़ा चाहिए। दो विधायकों के इस्तीफा देने के बाद अभी कांग्रेस-जेडीएस सरकार 118 के आंकड़े पर है।हालांकि, कर्नाटक के सीएम लगातार कह रहे हैं कि वे सरकार को लेकर निश्चिंत हैं। वहीं, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया भाजपा के स्थानीय से लेकर शीर्ष नेताओं तक पर सरकार को गिराने के लिए साजिश का आरोप लगा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस के मुखिया एचडी देवगौड़ा का कहना है कि सरकार को कोई खतरा नहीं, ये सब मीडिया का किया धरा है। मीडिया ने इस मामले को ज्यादा उछाल दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सरकार में संकट की घड़ी है और अंदरखाने इससे निपटने की कोशिशें जारी हैं। इसी बीच, कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि एक या दो को छोड़कर सभी विधायक हमारे संपर्क में हैं। सभी विधायक कांग्रेस की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। एक अकेला विधायक भी इस्तीफा देने नहीं जा रहा है। हमारी ताकत का एहसास सबको हो जाएगा।वहीं, भाजपा नेता वमन आचार्य ने दावा किया है कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी नेता सीएन अश्वथनारायण से संपर्क किया है। यदी सरकार गिरती है तो जनादेश के मुताबिक, हम सरकार बनाएंगे।
भाजपा पर खरीद फरोख्त के आरोप;-प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा पर 'ऑपरेशन लोटस' के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उलटा कांग्रेस-जदएस गठबंधन भाजपा विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। लिहाजा पार्टी के सभी विधायकों को गुरुग्राम शिफ्ट कर दिया है।हालांकि सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के 10 और जेडीएस के तीन विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। भाजपा की कोशिश है कि ये 13 विधायक जल्द से जल्द इस्तीफा दे दें। भाजपा अगले हफ्ते प्रदेश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकती है। बताते चलें कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई थीं और पार्टी नेता बीएस येद्दयुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी, लेकिन बाद में कांग्रेस और जेडीएस ने हाथ मिलाकर एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बना ली थी।दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस और जदएस ने मिलकर सरकार तो बना ली थी, लेकिन उनके पास बड़ा बहुमत नहीं है। ऐसे में अगर 13 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो दिक्कत बढ़ जाएगी। रविवार को राज्य के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार ने भी माना था कि तीन कांग्रेस विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। इस बारे में जब उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर से पूछा गया तो उनका जवाब था, 'उन्हें रहने दीजिए.. वे वहां क्यों गए हैं, कोई नहीं जानता। वे छुट्टियां मनाने गए होंगे या मंदिर दर्शन को गए होंगे या फिर नेताओं से मिलने गए होंगे।'

नई दिल्ली। लगातार 15 साल तक दिल्ली की सीएम रहीं शीला दीक्षित बुधवार को भव्य समारोह के बीच दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करेंगी। पार्टी कार्यालय में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में दिग्गज नेता पहुंचे हैं। इनमें दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन भी शामिल हैं। वहीं, समारोह में 1984 सिख दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर भी देखे गए। इतना ही नहीं, समारोह में सबसे अगली पंक्ति में बैठे जगदीश टाइटलर ने भाजपा- आम आदमी पार्टी (AAP) को कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका दे दिया। अब इस पर हंगामा शुरू हो गया है।केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा- 'उनके परिवार ने हाल ही में क्या किया? राहुल जी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह सब बयां करता है कि उनके मन में सिख दंगा पीड़ितों के लिए कोई भावना नहीं है।' यहां पर बता दें कि पूर्व कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दोषी करार दिए जाने के बाद दंगा पीड़ितों और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने कहा था कि जल्द ही अदालत से टाइटलर को भी सजा मिलेगी। ऐसे में 1984 में हुए भीषण सिख दंगों का आरोप टाइटलर पर भी है। इस मामले में कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सासंद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। टाइटलर के औपचारिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। समारोह में मौजूदगी पर समाचार एजेंसी एएनआइ के संवाददाता द्वारा 1984 में हुए सिख दंगों को लेकर सवाल उठाने पर जगदीश टाइटलर ने कहा- 'इस पर मैं क्या टिप्पणी कर सकता है, जब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। आप इसमें मेरे नाम का जिक्र क्योें कर रहे हैं। क्या मेरे नाम पर FIR है? क्या कोई केस है? नहीं। अगर नहीं तो फिर क्यों मेरा नाम लिया जा रहा है? किसी ने कहा और आपने विश्वास कर लिया।' पदभार ग्रहण के बाद शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी के साथ पार्टी के गठबंधन के सवाल पर शीला दीक्षित ने नहीं कहा है। शीला ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाना गलत था। ऐसे में हम किसी गठबंधन के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। इससे पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) अध्यक्ष का पद संभालने से पहले ही आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर अहम बयान दिया था। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआइ से बातचीत में कहा था कि राजनीति पूरी तरह चुनौती भरी होती है और इस चुनौती का मुकाबला भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों हमारे लिए चुनौती हैं। वहीं, उन्होंने दिल्ली में AAP से गठबंधन पर कहा कि अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है।शीला दीक्षित के ताजपोशी समारोह में दिल्ली में सियासी बदलाव की झलक भी दिखाई दी। बुधवार को हुए इस पदभार ग्रहण समारोह की तैयारियों का जिम्मा शीला कैबिनेट के तीन पूर्व मंत्रियों ने स्वयं संभाल संभाला। समारोह स्थल पर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए। अपने तीनों सिपहसालारों यानी कार्यकारी अध्यक्षों हारून यूसुफ, राजेश लिलोठिया और देवेंद्र यादव के साथ प्रदेश कार्यालय राजीव भवन पहुंची। औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के बाद शीला दीक्षित कार्यालय के पीछे पंडाल में दिल्ली के तमाम नेताओं, संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी। समारोह में प्रदेश प्रभारी पीसी चाको तो संभवतया अपनी कुछ व्यस्तताओं के कारण न आएं, लेकिन वरिष्ठ पार्टी नेता अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा की उपस्थिति दर्ज हो सकती है।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के बैंक खातों में कुछ हजार रुपये की रकम जमा हुई है। कई ऐसे बैंक उपभोक्ता भी हैं, जिनके खाते में दो बार रकम ट्रांसफर हुई है। अचानक जमा हुई इस रकम से कई उपभोक्ता भी हैरान हैं। वहीं, केतुग्राम गंगाटिकुरी यूको बैंक के मैनेजर धर्मराज मंडल ने मामले से सस्पेंस हटाते हुए बताया कि ये रकम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की है। उन्होंने बताया कि बीमा योजना की ये रकम शाखा के 107 उपभोक्ताओं के खाते में आई है। जिसमें कुल 10.81 लाख रुपया भेजा गया है। बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बंगाल में फसल बीमा योजना के नाम से चल रही है।कृषि अधिकारी आशीष बारुई ने कहा तकरीबन 4 हजार लोगों को यह रुपया भेजा जा रहा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि एआईसी की ओर से लोगों के खाते में निफ्टी के माध्यम से आया है। कृषि अधिकारी का कहना है कि साढ़े तीन हजार से 14 हजार तक रुपये आया है।बुधवार सुबह अचानक खबर आई की बर्धमान जिले के इन बैंक उपभोक्ताओं के खाते में अचानक से 10 से 25 हजार रुपये जमा हो गए हैं। पूर्वी बर्धमान जिले की केतुग्राम दो नंबर पंचायत समिति के शिबलून, बेलून, टोलाबाड़ी, सेनपाड़ा, अम्बालग्राम, नबग्राम और गंगाटीकुरी जैसे इलाकों में बैंक उपभोक्ताओं के खाते में रकम जमा होने का मामला सामने आया था। ज्यादार बैंक उपभोक्ताओं के खाते में दो-दो बार रकम ट्रांसफर हुई है।
ये हैं तीन बैंक:-बताया जा रहा है कि जिन तीन बैंकों में रकम ट्रांसफर हुई है, उसमें यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल है। इन बैंक उपभोक्ताओं के खाते में अचानक से 10 से 25 हजार रुपये जमा होने की बात जैसे ही इलाके में फैली, इन बैंकों के बाहर उपभोक्ताओं की लाइन लग गई है। कोई अपनी पासबुक अपडेट करा रहा है तो कोई खाते से रकम निकाल रहा है। ऐसे भी बहुत से लोग हैं, जो उनके खाते में जमा होने वाली रकम के बारे में जानकारी लेने के लिए बैंक पहुंच रहे हैं।

नई दिल्ली। टेलिकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने DTH सर्विसेज को लेकर नए नियम बनाए हैं जिसके तहत ग्राहकों को केनलव उन चैनल्स का पैसा देना होगा जिन्हें वो देखना चाहते हैं। इससे ग्राहकों का हर महीने का टीवी बिल कम हो जाएगा। इसके लिए ग्राहकों को 31 जनवरी 2019 तक का समय दिया गया है। वो इस समय तक अपने मनपसंद चैनल्स का चुनाव कर सकते हैं।नए नियमों के तहत कोई भी DTH प्रोवाइडर जैसे Airtel DTH TV, Tata Sky या Dish TV 100 नॉन-एचडी चैनल्स के लिए 130 रुपये (बिना GST) से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकते हैं। वहीं, अगर यूजर किसी पेड चैनल का चुनाव करते हैं तो उन्हें उसकी MRP की राशि देनी होगी। TRAI के नए आदेश के मुताबिक, Sony, Zee, Star, Discovery, Sun, Turner और Viacom ने उन टीवी चैनल्स की जानकारी दे दी है जो फ्री टू एयर के अंतर्गत आते हैं और जिनके लिए पैसा देना होगा।
नए प्लान्स को सब्सक्राइब करने से पहले जानें ये 10 जरुरी बातें:
1. इन प्लान्स के अलावा सभी मुख्य ब्रॉडकास्टर्स ने अलग-अलग कुछ अन्य प्लान्स भी पेश किए हैं। वैसे तो कंपनियों ने हर चैनल की MRP बता दी है लेकिन आपको इन MRP पर ब्रॉडकास्टर के जरिए ऑफर भी दिया जा सकता है। वहीं, इनके बेस पैक्स 130 रुपये से कम हैं।
2. Airtel DTH TV की वेबसाइट पर 99 रुपये का बेस पैक है जिसमें SD चैनल्स दिए गए हैं। वहीं, Tata Sky का बेस पैक भी 99 रुपये से शुरू होता है। दोनों में ही SD चैनल दिए गए हैं। TRAI के नए नियमों के तहत, ग्राहक इन SD चैनल्स में से किसी भी अन्य चैनल को बेस पैक में एड कर सकते हैं। अगर ग्राहक किसी पेड चैनल को एड करते हैं तो उन्हें उसका अलग से चार्ज देना होगा।
3. नए नियमों के मुताबिक, अगर ग्राहक इन 100 चैनल्स के अलावा भी कोई चैनल देखना चाहते हैं तो उन्हें अन्य 25 चैनल्स के लिए 20 रुपये चुकाने होंगे। TRAI की मानें तो काफी कम लोग या फिर 10 से 15 फीसद लोग ही ऐसे होते हैं जो 100 चैनल से ज्यादा देखते हैं। BARC द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, 80 फीसद लोग 40 से ज्यादा चैनल नहीं देखते हैं।
4. TRAI का कहना है कि अगर ग्राहक ध्यानपूर्वक हर चैनल का चुनाव करे तो उन्हें मौजूदा समय के मुताबिक काफी कम पैसे देने होंगे।
5. TRAI द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 40 ब्रॉडकास्टर्स के 330 चैनल्स से ज्यादा HD और SD चैनल हैं। वहीं, निजी FTA चैनल्स की संख्या 535 से भी ज्यादा है।
6. 40 ब्रॉडकास्टर्स में से करीब 17 ने कुछ चैनल्स को बंडल कर डिस्काउंट के साथ उपलब्ध कराया है। उदाहरण के तौर पर: 9 चैनल्स की कीमत 63 रुपये है। लेकिन अगर इन्हें एक साथ लिया जाता है तो इन्हें मात्र 31 रुपये में लिया जा सकता है।
7. FTA चैनल्स को पेड चैनल्स के साथ क्लब नहीं किया जा सकता है। वहीं, HD चैनल्स को भी उसके SD वर्जन के साथ क्लब नहीं किया जा सकता है।
8. ग्राहक सर्विस प्रोवाइडर को छोड़ बाजार से एक सेट टॉप बॉक्स भी खरीद सकता है। हालांकि, आपको यह देखना भी जरुरी है कि यह सेट टॉप बॉक्स आपके टीवी के साथ कंपेटीबल है या नहीं।
9. TRAI ने आदेश दिए हैं कि 31 जनवरी तक ग्राहकों को सर्विस में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं दी जाएगी। लेकिन इसके बाद उन्हें बेसिक प्लान पर माइग्रेट कर दिया जाएगा जिसमें कोई भी पेड चैनल नहीं होंगे।
10. हर केबल ऑपरेटर या DTH कंपनी को 999 चैनल नंबर पर एक इंफॉर्मेशन चैनल चलाने के आदेश दिए गए हैं जिससे ग्राहकों को हर चैनल की कीमत का पता लग सके।

नई दिल्ली। प्रख्यात साहित्यकार व आलोचक नामवर सिंह (92) ब्रेन हेमरेज के कारण मंगलवार को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराए गए हैं। सोमवार रात बेड से गिरने के कारण उनके मस्तिष्क में चोट लगी थी। इससे उनके मस्तिष्क में खून का थोड़ा थक्का जम गया है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य में सुधार है और हालत स्थिर बनी हुई है।वह दक्षिणी दिल्ली में अलकनंदा अपार्टमेंट में रहते हैं। परिवार के अनुसार रात में खाना खाने के बाद वह सो रहे थे। रात करीब दो बजे वह बेड से गिर पड़े। उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।वहां सिटी स्कैन में पता चला कि मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया है। बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। ट्रॉमा सेंटर में भी डॉक्टरों ने उनकी कई जांचें की। परिवार के सदस्यों के अनुसार वह हल्की बातचीत भी कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। उनको ब्रेन हेमरेज की खबर से साहित्य जगत आहत है

कानपुर। पुराने नोट बदलने के बाद अब बारी सिक्कों की है। पुराने नोट की तरह सरकार अब पुराने सिक्कों को भी बंद करेगी। इनकी जगह मार्केट में अब नए सिक्के आएंगे। साथ ही सरकार पहली बार मार्केट में 20 रुपये का नया सिक्का भी लाएगी। सरकार ने लंबे मंथन के बाद ये फैसला लिया है।भारत सरकार एक रुपये से लेकर दस रुपये तक के सभी सिक्कों का कलेवर भी बदलने जा रही है। इन सिक्कों के प्रोटोटाइप यानी डिजाइन तैयार हो गए हैं, जिन्हें फाइनल करने के लिए आज दिल्ली में बैठक होने जा रही है। इस बैठक में नई डिजाइन वाले सिक्कों के साथ बीस रुपये के नए सिक्के की भी भारतीय सिक्का अधिनियम 2011 के तहत वैधानिकता के संबंध ;में अहम निर्णय होंगे। बीस का सिक्का अष्टकोणीय आकार का हो सकता है।
दृष्टिबाधित दिव्यांग भी आसानी से पहचान पाएंगे:-दैनिक जागरण को मिली जानकारी के मुताबिक सिक्के इस प्रकार ढाले जाएंगे कि दृष्टिबाधित दिव्यांग इन्हें आसानी से पहचान सकें। भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग के अनु सचिव ने इस संबंध में पत्र जारी कर सिक्कों की डिजाइन फाइनल करने से संबंधित लोगों की बैठक बुलाई है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक बीस रुपये के नोट जारी करने की तैयारी कर रही थी, जिसकी डिजाइन अंतिम चरण में थी। माना जा रहा है कि कागज की खपत को देखते अभी सिक्कों को ही जारी किया जाएगा। ऐसे में आरबीआइ अभी बीस रुपये के नए नोट जारी करने से रुक सकती है।
मार्च 2019 तक 26 हजार करोड़ रुपये के सिक्के होने का अनुमान:-भारतीय प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (सिक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन इंडिया लिमिटेड-एसपीएमसीआइएल) ने इससे पहले वर्ष 2011 में सिक्कों की डिजाइन में बदलाव किया था। इसे ‘भारतीय सिक्कों की नई श्रृंखला 2011’ कहा गया था। तब 50 पैसे से लेकर दस रुपये तक, सभी सिक्कों में रुपये का चिह्न् शामिल किया गया था। भारतीय बाजार इस समय सिक्कों के बोझ तले दबा हुआ है। मार्च 2018 तक भारतीय बाजार में कुल 25,600 करोड़ रुपये के सिक्के प्रचलित थे, जिनके मार्च 2019 तक बढ़कर 26 हजार करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
सामाजिकता का संदेश भी देंगे सिक्के:-भारत सरकार से जुड़ी शेप एंड साइज संस्था सिक्कों की डिजाइन के बारे में विशेषज्ञों से सुझाव लेती है। फिर डिजाइन को फाइनल किया जाता है। इन कमेटियों में मुद्रा, कला, विज्ञान, संस्कृति और समाज से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इसके अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन (एनआइडी) से भी सुझाव लिए जाते हैं। माना जा रहा है, नए सिक्कों की डिजाइन में एनआइडी अहमदाबाद ने अहम सुझाव दिए हैं। नए कलेवर के सिक्के सामाजिकता का संदेश भी देंगे। इन सिक्कों में भारत सरकार द्वारा चलाए गए सामाजिक सरोकार के अभियानों को शामिल किया है।

नई दिल्‍ली। अतंरिक्ष विज्ञान के लिए और खासकर भारत के लिए यह दिन बेहद अहम है। इस दिन भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला अपनी अंतरिक्ष यात्रा के लिए रवाना हुईं थीं। वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। यह घटना आज इसलिए भी अहम हो जाती है, क्‍योंकि भारत का लक्ष्‍य 2022 तक अंतरिक्ष में मानव भेजने की है। इसमें खास बात यह है कि इस योजना में इस्‍तेमाल की जाने वाली तकनीक इसरो की है।
कौन थीं कल्‍पना चावला:-नासा की अंतरिक्ष वैज्ञानिक रहीं कल्पना चावला का जन्‍म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा करनाल में ही हुई। 1982 में उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 1984 में अमेरिका के टेक्सस विश्विद्यालय से उन्होंने अंतरिक्ष वैमानिकी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1994 में उन्हें संभावित अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना। कल्‍पना को अंतरिक्ष यात्रियों के 15वें दल में शामिल किया गया। नवंबर 1996 में नासा ने एसटीएस-87 मिशन में विशेषज्ञ की हैसियत से भाग लेने की घोषणा की। 19 नवंबर, 1997 को वह दिन आया जब करनाल की बेटी कल्पना ने अंतरिक्ष के गहन अंधेरे में भारत का नाम रोशन किया। कल्‍पना ने 376 घंटे 34 मिनट अंतरिक्ष में बिताए। उन्‍होंने यहां कई महत्वपूर्ण प्रयोगों को अंजाम देते हुए धरती के 252 चक्कर लगाए यानि 65 लाख मील की दूरी तय की।
भारत का मानव मिशन- 2022 :-वर्ष 2018 में स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से मानव मिशन-2022 की घोषणा की थी। इस योजना के तहत अंतरिक्ष में दो मानवरहित यानों के साथ-साथ एक ऐसा यान भेजे जाने की परिकल्पना है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री भी होंगे। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है। इस परियोजना के तहत 28 दिसंबर, 2018 को भारत के महत्वाकांक्षी मानव मिशन के क्रियान्वयन की दिशा में केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के गगनयान मिशन को मंजूरी दी थी।
क्‍या है गगनयान योजना:-प्रधानमंत्री ने ‘गगनयान-भारत का पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम’ की घोषणा की थी। उन्होंने घोषणा की थी कि 2022 (भारतीय स्वतंत्रता के 75 साल) तक या उससे पहले भारत की धरती से भारतीय यान द्वारा भारत की कोई एक लड़की या लड़का अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो द्वारा लिया गया यह अब तक का काफी महत्वकांक्षी और बेहद जरूरी अंतरिक्ष कार्यक्रम है, क्योंकि इससे देश के अंदर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के युवाओं को भी बड़ी चुनौतियां लेने के लिए प्रेरित करेगा और देश की मर्यादा को बढ़ाने में भी सहयोग करेगा। इसके लिए इसरो ने आवश्यक पुन: प्रवेश मिशन क्षमता, क्रू एस्केप सिस्टम, क्रू मॉड्यूल कॉन्फ़िगरेशन, तापीय संरक्षण व्यवस्था, मंदन एवं प्रवर्तन व्यवस्था, जीवन रक्षक व्यवस्था की उप-प्रणाली इत्यादि जैसी कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया है।
जीएसएलवी एमके-3 लॉन्च व्हिकल का होगा उपयोग;-गगनयान को लॉन्च करने के लिए जीएसएलवी एमके-3 लॉन्च व्हिकल का उपयोग किया जाएगा, जो इस मिशन के लिए आवश्यक पेलोड क्षमता से परिपूर्ण है। अंतरिक्ष में मानव भेजने से पहले दो मानव रहित गगनयान मिशन किए जाएंगे। 30 महीने के भीतर पहली मानव रहित उड़ान के साथ ही कुल कार्यक्रम के 2022 से पहले पूरा होने की उम्मीद है। मिशन का उद्देश्य पांच से सात वर्षों के लिए अंतरिक्ष में तीन सदस्यों का एक दल भेजना है। इस अंतरिक्ष यान को 300-400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा में रखा जाएगा। कुल कार्यक्रम की लागत 10,000 करोड़ रुपये से कम होगी। इसरो द्वारा विकसित यह पहला मानव मिशन होगा, हालांकि इससे पहले भी कुछ भारतीय अंतरिक्ष में जा चुके हैं।

नई दिल्‍ली। भारत और ब्रिटेन के बीच 27 साल पहले प्रत्‍यर्पण संधि हुई थी। इस संधि का सीधा मतलब यह हुआ कि अगर कोई अपराधी भारत से भागकर ब्रिटेन चला जाए तो ब्रिटेन उसे भारत को सौंप देगा। यह संधि आज भी जस की तस है, इसके बावजूद भारत के कई अपराधी ब्रिटेन में शरण लिए हुए हैं। खासकर इन दिनों ललित मोदी, नीरव मोदी और विजय माल्‍या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खूब सियासत हुई।पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप का लंबा दौर चला। भारत सरकार इन भगोड़ों को वापस लाने में अब तक कामयाब नहीं हो पायी है। आइए जानते हैं कि आखिर ब्रिटेन में कितने अपराधियों ने शरण ले रखी है। उन भगोड़े अपराधियों पर क्‍या हैं आरोप? इसके साथ यह भी जानेंगे कि आखिर वो कौन से प्रावधान हैं, जो इन भगोड़ों के लिए कवच का काम करते हैं।
इन अपराधियों को भारत लाने में असहाय हुआ:-विजय माल्‍या और ललित मोदी पर वित्‍तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप है। कई हजार करोड़ का घपला कर ये दोनों ब्रिटेन में शरण लिए हुए हैं। रविशंकरन पर भी गंभीर आरोप हैं। उस पर भारतीय नौसेना के कागजों के लीक का मामला है। टाइगर हनीफ 1993 में गुजरात विस्‍फोट मामले का वांछित है। नदीम सैफी पर गुलशन कुमार हत्‍याकांड का आरोप लगा, हालांकि बाद में वह बरी हुए। रेमंड वर्ली ने ब्रिटेन की नागरिता तक ले ली है, उस पर गोवा में बाल दुर्व्यवहार का मामला है।
16 प्रत्यर्पण अनुरोध के मामले लंबित पड़े:-गुजरात दंगों के मामले में समीर भाई वीनू भाई पटेल को 18 अक्टूबर 2016 को ब्रिटेन से भारत लाया गया था। लोकसभा में एक सवाल के जबाव में केंद्र सरकार ने यह बात स्‍वीकार की थी कि पिछले तीन वर्षों में मात्र एक भगोड़े अपराधी को ब्रिटेन से प्रत्‍यर्पित किया गया है। ब्रिटेन सरकार के पास भारत के 16 प्रत्यर्पण अनुरोध के मामले लंबित पड़े हैं। भारत, ब्रिटेन में बस चुके कुछ भारतीयों को वापस लाने की कोशिश में है, जिसमें प्रमुख रूप से ललित मोदी, नीरव मोदी और विजय माल्या भी शामिल हैं।
ब्रिटेन की शरण में अन्‍य अपराधी;-रेमंड एंड्रू वर्ली, रवि शंकरन, अजय प्रसाद खेतान, वीरेंद्र कुमार रस्‍तोगी, आनंद कुमार जैन, वेलु उर्फ बूपालन उर्फ दिलीपन उर्फ निरंजन, जेके अंगुराला, आशा रानी अंगुराला, जकूला श्रीनिवास नामक भगोड़ों के मामले में ब्रिटेन सरकार ने भारत के प्रत्‍यर्पण प्रस्‍तावों को अ‍स्‍वीकार कर दिया था। ब्रिटेन की अदालत ने प्रत्यर्पण के लिए अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ऋषिकेश सुरेंद्र कारडिले, पैट्रिक चार्ल्स बॉवेरिंग और कार्तिक वेनु गोपाल नामक भगोड़ों के बारे में गिरफ्तारी वारंट जारी करने से तक इन्कार कर दिया था।
क्‍या है यूरोपीय संघ के अनुच्छेद 8 का प्रावधान:-ब्रिटिश अदालतें आमतौर पर राजनीतिक कारणों के आधार पर या उन देशों से प्रत्यर्पण के अनुरोधों से इन्कार करती हैं, जहां किसी व्यक्ति को यातना या मौत की सजा का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में इस आधार पर इन्कार कर दिया गया है कि प्रत्यर्पित व्यक्ति को पारिवारिक जीवन के अधिकार से वंचित कर देगा। मानव अधिकार के यूरोपीय सम्मेलन के अनुच्छेद 8 के तहत भगोड़ाें के लिए ढील प्रदान करते हैं। दरअसल, प्रत्यर्पण का सामना करने वाले व्यक्तियों के पास यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के पास पहुंचने का अंतिम विकल्प है। कम से कम जब तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अपना निकास पूरा नहीं कर लेता यह प्रावधान लागू रहेगा।

नई दिल्ली। हाल ही में सैन फ्रांसिस्को से आई एक खबर में बताया गया कि फेसबुक के दफ्तर (Facebook Office) में काम के दौरान कर्मचारियों का मुस्कराना जरूरी है। यह मात्र एक फरमान नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान रहे, ऐसे प्रयास प्रबंधन द्वारा भी किए गए हैं। दरअसल, फेसबुक (Facebook) चाहता है कि उसके दफ्तरों में खुशनुमा महौल बना रहे और कर्मचारी बिना किसी तनाव के अच्छे ढंग से अपने काम को अंजाम दे सकें। इस बात का खुलासा फेसबुक के कुछ पूर्व कर्मचारियों (Employees) ने हाल ही में किया, जिसके कारण यह खबर बन सकी।उनके अनुसार, सोशल मीडिया कंपनी (Social Media) की सीओओ शेरिल सैंडबेग का मंत्र है कि खुद का उत्साहवर्धन करते रहना चाहिए, जिससे आपका काम और खिल सके। गौरतलब है कि सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक काम करने के माहौल के मामले में दुनिया की सबसे अच्छी जगहों में से एक मानी जाती है। यहां न सिर्फ प्रोफेशनलिज्म है, बल्कि कर्मचारियों को कैफे व रेस्तरां में फ्री मील्स जैसी सुविधाएं मुफ्त में दी जाती हैं। मुख्य दफ्तर की छत पर नौ एकड़ में फैला बगीचा भी एक खुशनुमा माहौल पैदा करता है।अब कंपनियां यह बात समझ रही हैं कि अच्छा काम करने के लिए और बाजार में आगे रहने के लिए खुशनुमा माहौल की कितनी जरूरत है। कंपनी की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों का खुश रहना बेहद जरूरी है। जाहिर है कि फेसबुक की इस पहल को अन्य कंपनियां भी अपनाना चाहेंगी।
गुणवत्ता के लिए खुश रहना जरूरी;-अगर आप खुश हैं, तो इसका असर आपके काम पर दिखाई देता है। खुश रहने से आपके काम की गुणवत्ता भी बढ़ती है, क्योंकि तनाव की अनुपस्थिति में काम पर फोकस बढ़ जाता है। खुश रहने से आत्मविश्वास का स्तर नीचे नहीं गिरता। आत्मविश्वास बरकरार रहने से कार्य क्षमता को प्रोत्साहन मिलता है। ऐसा एम्प्लॉई अपने बॉस से बेहतर तरीके से काम के मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है। हंसने-मुस्कुराने और खुश रहने से कर्मचारी चुस्त व फुर्तीले बने रहते हैं।
खुश रहना आसान नहीं;-हालांकि आज के तमाम तरह की कठिनाइयों के दौर में खुश रहना या हंसना-मुस्कराना आसान भी नहीं है। कई लोग ऐसे जीवन को चुनौती के रूप में स्वीकारते हैं, तो वे खुश रहते हैं, लेकिन जो अपने जीवन से ही असंतुष्ट हैं, उन कर्मचारियों के लिए कंपनियां कुछ भी कर लें, वे खुश नहीं रह सकते। यह मानकर चलना चाहिए कि खुशी कहीं से आती नहीं है, बल्कि वह हमारे अंदर ही होती है, बस हमें उसे अपनी सकारात्मक सोच की रोशनी देकर उजागर ही करना होता है। फिर भी वर्कप्लेस पर भीतर से खुश रहने के लिए आप इन तरीकों को आजमा सकते हैं।
करें अपनी रुचि का काम:-कार्यस्थल पर यदि आपको रुचि का काम नहीं मिला है, तो आप लाख कोशिश करने के बाद भी उसे अच्छे ढंग से नहीं कर पाएंगे। ऐसे में आप कभी खुश नहीं रह पाएंगे। यदि कार्यालय में आपको आपकी रुचि से अलग काम दिया गया है, तो यह बात अपने सीनियर्स को बताएं और उन्हें यकीन दिलाएं कि आप अमुक काम को कहीं अधिक बेहतर तरीके से कर सकते हैं। जब आपको अपनी पसंद का काम मिल गया, फिर देखिए आपके चेहरे पर खुशी होगी और काम में गुणवत्ता।
बनाएं नियमित रूटीन:-जब आप एक नियमित रूटीन का पालन करेंगे, तो इससे आपको बड़ा सुकून मिलेगा। आप प्रोडक्टिव और खुश रहेंगे। निश्चित समय पर ऑफिस आएं, तय समय पर भोजन और नाश्ता इत्यादि करें, समय पर मीटिंग्स में पहुंचें। जब आप अपना तय रूटीन बना लेते हैं, तो शरीर भी उसे अपना लेता है और वह आपके लिए सहज हो जाता है। इससे आपका तन-मन का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप खुश रहेंगे।
थामें सकारात्मकता का दामन;-खुशी का स्रोत स्वस्थ शरीर और सेहतमंद दिमाग होता है। जब आपका तन-मन ही गड़बड़ है, तो आपका व्यवहार भी दूसरों से अच्छा नहीं होगा। क्रोधी और तुनक मिजाज लोगों को कोई भी पसंद नहीं करता। इसके लिए सबसे ज्यादा काम आती है, हमारी सकारात्मक दृष्टि। वर्कप्लेस पर सकारात्मक रहने का पूरा प्रयास करना चाहिए, ताकि आपका व्यवहार भी लोगों से अच्छा हो। अच्छा व्यवहार तमाम तरह की खुशियां लेकर आता है।
संबंधों में हो निकटता:-यह सही है कि हम काम करने के लिए ऑफिस आते हैं, लेकिन यह कतई जरूरी नहीं है कि हम लगातार काम में जुटे रहें। इससे हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसलिए बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें और इसका सदुपयोग लोगों से नेटवर्क बनाने में करें। जैसे लंच टाइम या छोटे अंतराल पर आप वर्कप्लेस के ही अधिक से अधिक लोगों से मिलें। इससे आपको काम के विभिन्न तरीकों व आइडियाज का तो ज्ञान होगा ही, आप खुश भी रहेंगे। अगर आप सेल्स में काम करते हैं, तो आपको किसी दूसरे डिपार्टमेंट जैसे एकाउंट्स के लोगों से मिलना चाहिए, इससे एक दूसरे की कार्यशैली का पता चलता है। और, संबंधों के प्रगाढ़ होने से खुशी आती है।
दूसरों के मददगार बनें;-जब आप पूरे होश में रहेंगे, तो काम अच्छा होगा और गलतियां होने की आशंका भी नहीं रहेगी। तब आपको सिर्फ अपनी परेशानी ही नहीं, दूसरों की परेशानी भी दिखाई देगी। अगर आप अपने साथियों की परेशानी में मददगार बनते हैं, तो आपके भीतर खुशी आती है। किसी के बारे में बुरा सोचते रहने से कुंठा आएगी, वहीं आप अच्छा-अच्छा सोचेंगे तो खुशी और उल्लास का दामन आप सदैव पकड़े रहेंगे।
टीम को और खुद को दें शाबाशी:-जैसा कि फेसबुक की सीओओ ने कहा, हमें खुद को प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही यदि आप टीम लीडर हैं, तो अपनी टीम को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। अच्छे काम के लिए खुद को और टीम को शाबाशी दें। टीम के सदस्यों को कुछ पारितोषक कंपनी की ओर से दिला सकें तो और भी अच्छा। उनके और आपके चेहरे पर खुशी आएगी और काम निर्बाध गति से चलता रहेगा।
हंसने-मुस्कुराने का फायदा
-खुलकर हंसने से हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही बना रहता है।
-हंसने से हमारे शरीर में ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है, इससे हृदय सही ढंग से काम करता है।
-हंसने से हमारी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, जिससे बीमारियों से लडऩे में फायदा होता है।
-हंसने से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बनता है, जो हमें सुकून की नींद देने में मदद करता है।
-हंसने से आप सामाजिक रूप से सक्रिय होते हैं और आपका तनाव खुद ही कम हो जाता है।

नई दिल्‍ली। तमिलनाडु में पोंगल त्योहार के दौरान खेले जाने वाले लोकप्रिय खेल जलीकट्टू को लेकर एक बार फिर लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह देखा जा रहा है। पिछले वर्ष इस खेल से हुई मौतों को लेकर बड़ा बवाल मचा था। यहां तक की सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल पर प्रतिबंध तक लगा दिया था, जिसके बाद राज्‍य सरकार ने केंद्र से अध्‍यादेश लाकर इसपर कानून बनाने तक की बात कही थी। आपको बता दें कि कई दूसरे देशों में भी इस तरह के खेल होते हैं। जहां तक भारत की बात है तो अक्‍‍‍‍सर इस खेल में लोग घायल होते हैं, तो कई बार कुछ की मौत भी हो जाती है। बहरहाल, जलीकट्टू को लेकर हम सभी के मन में कुछ सवाल जरूर उठते हैं, जैसे आखिर जलीकट्टू क्‍या है और इसको क्‍यों खेला जाता है? आइए आपको बताते हैं, इन सभी सवालों के जवाब...
क्या है जलीकट्टू;-जलीकट्टू तमिलनाडु का चार सौ वर्ष से भी पुराना पारंपरिक खेल है, जो फसलों की कटाई के अवसर पर पोंगल के समय आयोजित किया जाता है। इसमें 300-400 किलो के सांड़ों की सींगों में सिक्के या नोट फंसाकर रखे जाते हैं और फिर उन्हें भड़काकर भीड़ में छोड़ दिया जाता है, ताकि लोग सींगों से पकड़कर उन्हें काबू में करें। सांड़ों को भड़काने के लिए उन्हें शराब पिलाने से लेकर उनकी आंखों में मिर्च डालने और उनकी पूंछों को मरोड़ा तक जाता है, ताकि वे तेज दौड़ सकें।
जलीकट्टू का मतलब:-कहा जाता है कि जल्ली/सल्ली का अर्थ ही होता है 'सिक्का' और कट्टू का 'बांधा हुआ। सांडों के सींग में कपड़ा बंधा होता है जिसे खिलाड़ी को पुरस्कार राशि पाने के लिए निकालना होता है।
इस खेल के नियम :-खेल के शुरू होते ही पहले एक-एक करके तीन सांडों को छोड़ा जाता है। ये गांव के सबसे बूढ़े सांड होते हैं। इन सांडों को कोई नहीं पकड़ता, ये सांड गांव की शान होते हैं और उसके बाद शुरु होता है जलीकट्टू का असली खेल। मुदरै में होने वाला ये खेल तीन दिन तक चलता है।
सालों पुरानी है जलीकट्टू परंपरा:-तमिलनाडु में जलीकट्टू 400 साल पुरानी परंपरा है। जो योद्धाओं के बीच लोकप्रिय थी। प्राचीन काल में महिलाएं अपने वर को चुनने के लिए जलीकट्टू खेल का सहारा लेती थी। जलीकट्टू खेल का आयोजन स्वंयवर की तरह होता था जो कोई भी योद्धा बैल पर काबू पाने में कामयाब होता था महिलाएं उसे अपने वर के रूप में चुनती थी।
जलीकट्टू और बुलफाइटिंग कितना में अंतर;-जलीकट्टू की तुलना स्पेन में खेले जाने वाली बुलफाइटिंग से भी की जाती है। हालांकि समर्थकों का कहना है कि जल्लीकट्टू यूरोपीय देश स्पेन में होनेवाली बुलफाइटिंग से अलग है और इसमें स्पैनिश स्पोर्ट्स की तरह हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता और न ही खेल का मतलब है अंत में जानवर का खात्मा।
जलीकट्टू पर प्रतिबंध:-साल 2011 में यूपीए सरकार ने जलीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद एनडीए सरकार ने 8 जनवरी 2016 में इसको हरी झंडी दे दी। बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पाबंदी लगाते हुए राज्य सरकार की याचिका भी खारिज कर दी थी जिसमें 2014 के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा एक प्रस्ताव भी पास कर चुकी है। प्रस्ताव के तहत जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई थी।

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