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पटना। महागठबंधन में सीटों को लेकर काफी दिनों से चल रही खींचतान और विवादों पर आज विराम लग गया। पटना के होटल मौर्या में महागठबंधन की सभी सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर आज शाम चार बजे के बाद हुई संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में इसका औपचारिक एलान कर दिया गया। राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने इसकी विधिवत घोषणा करते हुए कहा कि राजद को 20, कांग्रेस को नौ, रालोसपा को पांच, हम को तीन, वीआइपी को भी तीन माले को राजद कोटे से एक सीट दी गई है। वहीं, शरद यादव की पार्टी लोजद के उम्मीदवार राजद के टिकट पर ही फिलहाल चुनाव लड़ेंगे।
प्रेस कांफ्रेंस में नहीं मौजूद थे बड़े नेता:-महागठबंधन की प्रेस कांफ्रेंस से पहले राबड़ी देवी के आवास पर सभी दलों के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें सीटों के मामले पर मंथन किया गया। उसके बाद लोग प्रेस कांफ्रेंस में बड़े नेताओं का इंतजार करते रहे, क्योंकि पहले से उम्मीद जताई जा रही थी कि तेजस्वी यादव सहित गठबंधन के बड़े नेता भी प्रेस कांफेंस में पहुंचेंगे। लेकिन बस सभी दलों के प्रदेश अध्यक्ष होटल मौर्या पहुंचे और फिर प्रेस कांफ्रेंस में देरी होने को लेकर माफी मांगी और फिर राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को मीडिया के सामने रखा। इससे पहले दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता मदन मोहन झा ने बताया कि उम्मीदवारों के नामों का एेलान भी जल्द किया जाएगा वहीं, नामों की घोषणा से पहले बिहार कांग्रेस में टिकट को लेकर बवाल शुरू हो गया है। शुक्रवार को पार्टी कार्यालय सदाकत आश्रम में औरंगाबाद के टिकट प्रत्याशी निखिल कुमार के समर्थकों ने जमकर बवाल काटा।
कांग्रेस मुख्यालय परिसर में हुआ हंगामा:-समर्थकों को जब यह जानकारी मिली कि पार्टी ने निखिल कुमार का टिकट काट दिया गया है, इसके बाद सदाकत आश्रम परिसर में सुबह से हंगामा चलता रहा। इसपर मदन मोहन झा ने कहा कि हर समर्थक चाहता है कि उसके नेता को टिकट मिले, लेकिन सबको टिकट मिले, ये तो संभव नहीं। जल्द ही सबको पता चल जाएगा कि कौन उम्मीदवार होगा, कौन नहीं होगा।
शरद यादव पहुंचे पटना, कही ये बात...:-वहीं, महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर लोकतांत्रिक जनता दल के मुखिया शरद यादव भी शुक्रवार की दोपहर पटना पहुंचे। पटना पहुंचने पर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर ही हम पटना आये हैं।हालांकि शरद ने कहा कि अभी कुछ नहीं कह सकते हैं कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा वहीं, औरंगाबाद से कांग्रेस नेता निखिल कुमार का टिकट कट जाने के बाद समर्थकों द्वारा कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में हंगामा किये जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसी फैसले से लोग सहमत और असहमत हो जाते हैं। ऐसे में ऐसी घटनाएं आम होती हैं।

नई दिल्ली। Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के लिए शुक्रवार को बड़ी खबर आई है। क्रिकेटर गौतम गंभीर ने दिल्ली में एक सादे कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उऩ्होंने केंद्रीय मंत्रियों अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी गौतम गंभीर में भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर गौतम गंभीर ने कहा- 'मैं पीएम नरेंद्र मोदी के विजन से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हो रहा हूं। इससे जुड़ने का अवसर पाकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं।' वहीं, अनुमान लगाया जा रहा है कि वह नई दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। गौतम गंभीर के करीबियों ने भी पिछले दिनों इसका संकेत दे दिया था कि वह नई दिल्ली से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।गौरतलब है कि दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर 12 मई को चुनाव होना है, लेकिन आम आदमी पार्टी के बाद भारतीय जनता पार्टी भी अपने उम्मीदवारों का ऐलान जल्द ही कर सकती है, ताकि प्रत्याशियों को ज्यादा प्रचार का मौका मिले। यहां पर बता दें कि नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र जनसंघ के दौर से ही भाजपा का गढ़ रहा है, इसलिए पार्टी के कई कद्दावर नेताओं व केंद्रीय मंत्रियों की ख्वाहिश इस सीट से चुनाव लड़ने की है। यहां की वर्तमान सांसद मीनाक्षी लेखी की दावेदारी के साथ दौड़ में क्रिकेटर गौतम गंभीर का नाम तेजी से उछला है।
पंजाबी उम्मीदवारों के लिए अनुकूल रही है सीट;-नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में पंजाबी समुदाय के मतदाताओं की संख्या अधिक होने की वजह से यह सीट पंजाबी समुदाय के लिए अनुकूल मानी जाती है। दरअसल इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाले मोती नगर, पटेल नगर, ग्रेटर कैलाश, मालवीय नगर, कस्तूरबा नगर पंजाबी बाहुल्य इलाके हैं। इन कॉलोनियों में भारत के विभाजन के बाद बड़ी संख्या में पंजाबी समुदाय के लोग आकर बस गए थे। यही नहीं पिछला रिकॉर्ड देखा जाए तो ज्यादातर इस समुदाय के नेताओं ने ही यहां पर जीत हासिल की है। इसमें राजेश खन्ना, जगमोहन, अजय माकन जैसे नेताओं के साथ ही मौजूदा सांसद मीनाक्षी लेखी भी शामिल हैं।

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोर कमेटी के सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा पर भाजपा नेताओं को 1800 करोड़ रुपये देने के आरोप लगाए हैं। सुरजेवाला ने कहा कि हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं। उन्होंने ये आरोप एक मैगजीन में प्रकाशित ख़बरों के आधार पर लगाए। वहीं भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा आरोप झूठा और निराधार है, संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करूंगा।कांग्रेस के आर सुरजेवाला ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक के सीएम थे, उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भुगतान किया गया। इन वरिष्ठ नेताओं में राजनाथ सिंह से लेकर जेटली तक शामिल हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर 1800 करोड़ रुपये की रिश्वत का भी आरोप है।सुरजेवाला ने पूछा कि क्या यह सही है या गलत? बीएस येदियुरप्पा के सिग्नेचर वाली डायरी 2017 से आयकर विभाग के पास थी। अगर ऐसा है तो मोदी और भाजपा ने इसकी जांच क्यों नहीं करवाई? सुरजेवाला ने पूछा, भाजपा ये बताए कि क्या वो इस मामले की जांच करवाएगी या नहीं। अब तो लोकपाल और दूसरी बॉडीज़ भी हैं।' उन्होंने कहा कि अगर इस डायरी में कोई सच्चाई नहीं है तो बीजेपी इसकी जांच क्यों नहीं करवाती।
बीएस येदियुरप्पा का जवाब;-कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर भाजपा नेता बी एस येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता दिमागी रूप से दिवालिया हो चुके हैं, वे मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता से निराश हैं, उन्होंने लड़ाई शुरू होने से पहले ही हार मान ली है।आईटी विभाग के अधिकारी पहले ही साबित कर चुके हैं कि दस्तावेज जाली और नकली हैं। उन्होंने आगामी चुनावों में फायदा उठानो के लिए मीडिया में एक कहानी रची है।कांग्रेस नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे अप्रासंगिक और झूठे हैं। मैं संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ चर्चा कर रहा हूं।

लखनऊ। बसपा ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के 11 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि इस लिस्ट में नगीना से गिरीश चंद्र चुनाव मैदान में हैं। इससे पहले इस सीट से मायावती के लडऩे की चर्चा थी लेकिन मायावती ने चुनाव लडऩे से ही इन्कार कर दिया है।उम्मीदवारों की सूची में सहारनपुर से हाजी फजर्लुरहमान, बिजनौर से मलूक नागर, नगीना से गिरीश चन्द्र, अमरोहा से कुंवर दानिश अली, गौतमबुद्ध नगर से सतबीर नागर, बुलंदशहर से योगेश वर्मा, अलीगढ़ से अजीत बालियान, आगरा से मनोज कुमार सोनी, फतेहपुर सीकरी से राजबीर सिंह और ऑवला सीट से रुचि वीरा के नाम शामिल हैं।अमरोहा लोकसभा सीट से कुंवर दानिश अली चुनाव लड़ेंगे। मूल रूप से हापुड़ के रहने वाले कुंवर दानिश अली दक्षिण भारत में कांग्रेस व जेडीएस गठबंधन समन्वय समिति के संचालक रहे हैं। कुछ दिन पहले ही बसपा की सदस्यता ग्रहण की है। उनके दादा दादा कुंवर महमूद अली दूसरे विधानसभा चुनाव (1957) में डासना विधानसभा क्षेत्र से विधायक तथा 1977 में हापुड़ लोकसभा सीट से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए थे।

दिनों का फेर है साहब, वरना हर होली पर हास्य रस के कवियों का सीजन होता था लेकिन इस बार हास्य के कवि ‘सिजंड’ लकड़ी की तरह पड़े हैं! आलम यह है कि महामूर्ख सम्मेलन तक में वीर रस की कविताएं सुनी जा रही हैं। हास्य के कवियों को कतई उम्मीद नहीं थी कि इस बार होली पर वीर रस के कवि उन्हें खो खो के खेल की तरह ‘खो’ दे देंगे। पूरे देश में वीर रस का ज्वार आया है और इस ज्वार के बरक्स, हास्य कवियों को ज्वर चढ़ आया है। होली के अवसर पर जिस शहर में कवि सम्मेलन हो रहा था, वह शहर कवियों की हूटिंग करने के लिए बदनाम था। होली कवियों का श्राद्ध पक्ष होता है। कवि सम्मेलन के न्योते पर न्योते चले आते हैं। सालभर की कमाई फागुन में हो जाती है। आज के आयोजन का हाल सुना रहा हूं। संचालक जी ने माइक थाम लिया है। वह इस ऐतिहासिक शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में, ऐतिहासिक कवियों का ऐतिहासिक श्रोताओं से उसी तरह परिचय करवा रहे हैं, जैसे किसी दंगल से पूर्व पहलवानों का करवाया जाता है!...और लीजिए कवि सम्मेलन शुरू हो गया। संचालक जी ने सर्वप्रथम गीतकार ‘मरे’ जी को बुलाया। ‘मरे’ जी देखने में भले ही मरे हुए लग रहे थे पर उनका माइक तक चलना, उन्हें जीवित होने का प्रमाण पत्र दे रहा था। गले को साफ करके श्रोताओं को सहमी नजरों से देखते हुए गीत पढ़ा, ‘मैं दर्द पी रहा हूं। मैं दर्द पी रहा हूं....’ इतना सुनते ही श्रोताओं ने फील्डिंग टाइट कर दी और बोले, ‘झूठ बोलते हो। हमने देखा था आप थोड़ी देर पहले मादक द्रव पी रहे थे।’ संचालक जी ने हस्तक्षेप किया, ‘आप विश्व के सर्वश्रेष्ठ श्रोता हैं।’ श्रोता बोले ‘तो विश्व की सर्वश्रेष्ठ कविता आने दो।’ संचालक के आदेश पर ‘मरे’ जी ने दूसरा गीत पढ़ा, ‘मैं जिंदा क्यों हूं। मैं जिंदा क्यों हूं...’

गुरुग्राम। भारत सरकार ने आतंकियों की मदद कर रहे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। दरअसल आतंकियों की आर्थिक मदद कर रहे फाइनेंसरों की संपत्तियों को जब्त करना शुरू किया गया है। इस सिलसिले में एनआईए द्वारा 13 लोगों और उनकी संपत्तियों की पहचान की गई है।पहले दौर की जांच में 7 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त किया है, जिसका उपयोग आतंकियों को फंडिंग के रूप में किया गया है। गुरुग्राम में ज़हूर अहमद शाह वटाली के बंगले पर छापेमारी की गई है। फिलहाल वटाली तिहाड़ जेल में बंद है।प्रवर्तन निदेशालय को बंगले से जो दस्तावेज मिले है उससे साफ संकेत मिलता है कि वताली को सीधे तौर पर दिल्ली में पैसे हाफिज सईद, सईद सलाहुद्दीन, आईएसआई और पाकिस्तान से मिल रहे है।गैरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इससे पहले कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों में आतंकियों की 13 संपत्तियों को जब्त किया था। यह कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर के आतंकी और अलगाववादी संगठनों की वित्तीय आक्सीजन रोकने की कवायद के तहत की गई है। यह कार्रवाई हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर सैयद सलाउद्दीन के खिलाफ दर्ज आतंकी फंडिग से जुड़े मामले में की गई थी।ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत एक प्रोविजनल कैलेंडर जारी कर 1.22 करोड़ रुपये मूल्य की 13 संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया था। ईडी के मुताबिक, यह सभी संपत्तियां बांडीपोरा के रहने वाले मोहम्मद शफी शाह और जम्मू कश्मीर के छह अन्य नागरिकों के नाम पर थी। यह सभी लोग आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करते हैं।

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध रूप से 10,000 अमेरिकी डॉलर के विदेशी मुद्रा रखने के जुर्म में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर 14.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।ईडी ने विदेशी मुद्र अधिनियम (FEMA) के तहत इस मामले की जांच की। जांच पूरे होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने FEMA के तहत आदेश जारी करते हुए गिलानी पर 14.40 लाख का जुर्माना लगाया है।गिलानी के पास से कथित रूप से बरामद किेए गए 10,000 यूएस डॉलर (लगभग 6.8 लाख रुपये) जब्त कर लिए गए है। आयकर विभाग द्वारा गिलानी के खिलाफ शिकायत करने के बाद ईडी ने जांच शुरू की। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के पूर्व अध्यक्ष यासिन मलिक के खिलाफ भी इस तरह की कार्यवाही चल रही है।गौरतलब है कि गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह से प्रवर्तन निदेशालय (ED) टेरर फंडिंग मामले में पूछताछ करेगी । दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को पूछताछ की इजाजत दे दी। इसके अलावा इस मामले में जुड़े अन्य आरोपितों से भी पूछताछ की जाएगी।गिलानी के बेटे को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने टेरर फंडिंग मामले में सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी को दिल्ली में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। गौरतलब है कि पाकिस्‍तान की आंखों का तारा बने गिलानी हमेशा ही भारत के खिलाफ आम कश्‍मीरी को सड़कों पर उतरकर पथराव करने, नारेबाजी करने की अपील करते दिखाई देते आए हैं।

मुंबई। भारत से करोड़ों रुपये लेकर भागे कारोबारी महुल चोकसी ने मुंबई के पीएमएल कोर्ट में एक याचिका दायर कर कोर्ट में पेश होने से छूट मांगी है। इसके लिए चोकसी ने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया है।इस याचिका में चोकसी ने कहा है कि वो लंबे समय से बीमार है। अपनी याचिका में मेहुल चोकसी ने दिल की बीमारी सहित पैरों में दर्द और दिमाग में खून का थक्का जमा होने की बात भी कही है।गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस ने दावा किया है कि भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी ने ब्रिटेन में नई कंपनी के पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस ने पूछा कि वह चोकसी के प्रत्यर्पण के प्रयासों के प्रति कितनी गंभीर है।बता दें कि पीएनबी बैंक में घोटाले के बाद भगोड़े आरोपित मेहुल चोकसी, उसके परिवार और उसकी कंपनियों द्वारा भारतीय स्टेट बैंक से भी 405 करोड़ कर्ज लेने की बात सामने आई थी। स्टेट बैंक ने इस कर्ज की वसूली प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

नई दिल्ली। Pulwama Terror Attack में शामिल आतंकियों तक पहुंचने में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देर रात लाल किले के पास से लाजपत राय मार्केट से जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आतंकी का नाम सज्जाद खान है, जो कि कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है। दिल्‍ली की अदालत ने आतंकी सज्‍जाद खान को 29 मार्च तक एनआइए की हिरासत में भेज दिया है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार सज्‍जाद पुलावामा हमले के मास्टरमाइंड मुदस्सर का करीबी व सहयोगी माना जा रहा है। पकड़े गए आंतकी सज्जाद खान के दो भाई भी जैश-ए-मुहम्मद से जुड़े हुए थे। जिन्हें सेना ने पहले ही एनकाउन्टर में मार गिराया था। स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि आतंकी सज्जाद को दिल्ली में जैश-ए-मुहम्मद द्वारा स्लीपर सेल स्थापित करने का काम सौंपा गया था। गौरतलब है कि जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के पीछे जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी मुदस्सर अहमद खान उर्फ मुहम्मद भाई का दिमाग था। मुदस्सर को इसी महीने सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। तो वहीं अब उसके एक और करीबी सज्जाद खान को दिल्ली से जिंदा पकड़ लिया गया है। मालूम हो कि 14 फरवरी को हुई इस घटना में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

 

 

 

 

नई दिल्‍ली। World Water Day 2019- पानी हम सबकी सबसे बड़ी जरूरत है और इसी पानी को लेकर आज पूरी दुनिया चिंतित है। स्वच्छ पीने योग्य पानी लगातार कम होता जा रहा है। यही नहीं, हमारी लापरवाही के चलते समुद्र का जलस्‍तर भी लगातार बढ़ रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि समुद्र का जलस्तर भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इस पानी को पी तो नहीं सकते। हम इंसानों का अस्तित्व ही पानी से है और अगर स्वच्छ पीने योग्य पानी नहीं होगा तो धरती से इंसान का सफाया भी तय है। इसके बाद भी हम अपने-आप में कोई बड़ा बदलाव लाने को तैयार नहीं दिख रहे।
भारत के हालात चिंताजनक:-स्वच्छ पीने योग्य पानी को लेकर भारत में हालात काफी चिंताजनक हैं। पिछले साल जारी हुई एक रिपोर्ट बताती है कि देश के 16 राज्‍यों के भूजल में खतरनाक रसायन मौजूद हैं। यह भी आप जानते ही हैं कि देश में पीने के लिए भूजल का इस्तेमाल कितने बड़े पैमाने पर होता है, ऐसे में देश की एक बड़ी आबादी के ऊपर खतरा मंडरा रहा है। यह कुछ नहीं बल्कि सीधे-सीधे हमारी लापरवाही का एक नमूनाभर है। देश में हिमाचल प्रदेश के शिमला सहित कई ऐसे जिले हैं जहां लोगों के दिन का एक बड़ा हिस्सा पानी की खोज में खप जाता है। पानी की कमी से हर साल सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है, सूखे के कारण किसान फसल की बुवाई नहीं कर पाते और खेतों में खड़ी फसल सूख जाती है। इसके बावजूद हम खुद में कोई परिवर्तन करने को तैयार नहीं होते।
बाढ़ कर देती है बुरा हाल:-हमारे देश की समस्या अकेले सूखा नहीं है। जहां एक तरफ देश में लोग सूखे की मार से तिलमिला रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग बाढ़ का दंश भी झेलने को मजबूर होते हैं। मानसून के महीनों में लगभग हर साल आने वाली बाढ़ से हर साल भारी मात्रा में जानमाल का नुकसान होता है, लेकिन आसमान से गिरती बूंदों को सहेजने की कला को हम भूल चुके हैं। हमने वर्षा जल संचय की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को छोड़ दिया है। पानी को लेकर जिस तरह से पिछले दशक में हमारी सोच बिगड़ी है उसे एक बार फिर पटरी पर लाने की जरूरत है। अगर हम अब भी पानी के प्रति सजग नहीं हुए तो हमारी आने वाली नस्‍लों को हम कुछ नहीं दे पाएंगे। हो सकता है आने वाले वक्त में हमारी नस्लों को पानी की बूंद-बूंद के लिए लड़ाई लड़नी पड़े। कहा तो यह भी जाता है कि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह पानी के लिए ही होगा। आइये जानते हैं पानी और इसके संचयन को लेकर क्‍या कहते हैं जल विशेषज्ञ।
समाज को आए समझ:-राजेंद्र सिंह को तो आप जानते ही होंगे। दुनिया उन्हें जलपुरुष के नाम से भी जानती है। वे कहते हैं - देश में 90 से ज्यादा शहर ऐसे हैं जो बेपानी हो गए हैं। इनकी हालत अफ्रीका के केपटाउन से भी ज्यादा खतरनाक है। ये बेपानी होकर लोगों के जीवन में बीमारी, लाचारी और बेकारी बढ़ा रहे हैं। बारहमासी बन चुका जलसंकट समाज की उस खामी का संकेत देता है, जिसमें किसी भी समस्या के खिलाफ खड़े होने की उसमें स्वप्रेरित स्फूर्त होती थी। आज ऐसा लगता है जैसे समाज की स्वावलंबन की विचारधारा खत्म हो गई है। और वह सरकार सापेक्षी बन गया है। उसकी सरकार से ही अपेक्षाएं रहती हैं। हमारे राजनेता भी समाज में स्वयं कर सकने की सृजनशीलता को नष्ट कर रहे हैं। समाज को परावलंबी बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि अब समाज स्वयं पानी संरक्षण और उसका अनुशासित उपयोग भूलता जा रहा है। जब समाज की जल उपयोग दक्षता खत्म हो जाती है तो वह समाज केवल सरकार की तरफ देखने में जुट जाता है। इसलिए भारत आज पूर्णत: बेपानी बनने के रास्ते पर चल पड़ा है।शहरों को पानीदार बनाने की सरकार में प्रतिबद्धता और सद्इच्छा नजर नहीं आ रही है। जल संकट के खिलाफ हमारे राज और समाज दोनों को मिलकर तुरंत प्रभाव से खड़े होने की जरूरत है। यदि अभी हम नहीं जागे तो हम बेपानी तो होंगे ही लेकिन हमारी हालत सीरिया से ज्यादा बदतर होगी। भारत सीरिया न बने इसके लिए बारिश के जल का सभी शहर संरक्षण करें और अनुशासित होकर जल उपयोग दक्षता बढ़ाएं। देश को जल का सम्मान, कम उपयोग, धरती से हम जितना लेते हैं, उससे ज्यादा वापस लौटाने, जल का परिशोधन, पुनर्उपयोग और जल से प्रकृति को पुनर्जीवित करके सभी नदियों को शुद्ध सदानीरा बनाने का संकल्प लेना होगा।यह संकल्प तभी पूरा होगा जब हम सब मिलकर धरती से जल निकालने का काम कम करें। जल भरने का काम अधिक करें। जब हम धरती के साथ जल के लेनदेन का सदाचारी व्यवहार करेंगे तो इस देश का कोई भी शहर बेपानी नहीं होगा। आज हम जल के सदाचार और सम्मान को भूल गए हैं। इसलिए धरती और भगवान के प्रति हमारा व्यवहार बदल रहा है। हमारा भगवान है, भ से भूमि, ग से गगन, व से वायु, अ से अग्नि और न से नीर। यही हमारे वेदों में भगवान था, और जब तक हम इसे अपना भगवान मानकर नीर को ब्रह्मांड और सृष्टि का निर्माता मानकर उसका रक्षण पोषण करते थे, तभी तक हम दुनिया को सिखाने वाले पानीदार राष्ट्र थे। भारतीय के व्यवहार में नीर, नारी और नदी के सम्मान ने किसी भी भारतीय शहर को बेपानी नहीं होने दिया था।
ताल-तलैया बनेंगे खेवैया;-जल विशेषज्ञ अरुण तिवारी कहते हैं - पुराने से पुराने नगर बसाते वक्त स्थानीय जल ढांचों की उपेक्षा नहीं की गई। यहां तक की ठेठ मरुभूमि के नगर जैसलमेर को बसाते वक्त जल स्वावलंबन के लिए स्थानीय तालाब घड़ीसर पर ही भरोसा किया गया। नदियों के किनारे बसे नगरों ने भी नदी से पानी लाने की बजाय, अपने झीलों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों पर आधारित जलतंत्र को विकसित किया। यमुना किनारे शाहजहानाबाद बसाने के बहुत बाद तक स्थानीय जल जरूरत की पूर्ति का काम 300 से अधिक तालाबों-बावड़ियों के बूते होता रहा। अंग्रेजों ने जब नई दिल्ली बसाई, तो वे नल ले आए। नलों में पानी पहुंचाने के लिए रेनीवेल और ट्युबवेल ले आए। पाइप से पानी पहुंचाने की इस नई प्रणाली के आने से हैंडपंप, कुएं, बावड़ियां और तालाब उपेक्षित होने शुरू हो गए। इसी उपेक्षा का ही परिणाम है कि दिल्ली जैसे तमाम शहर आज उधार के पानी पर जिंदा हैं।झीलों के लिए मशहूर बेंगलुरु, आज जीरो डे की त्रासदी के कगार पर आ पहुंचा है। तालों वाले शहर भोपाल की जलापूर्ति अपर्याप्त हो चली है। झालों और तालों की समृद्धि पर टिका नैनीताल के पानी की गुणवत्ता संकट में है। बेवकूफियां कई हुईं। ढाई लाख की आबादी को पानी पिलाने की क्षमता वाले गुड़गांव एक्युफर के सीने पर 20 लाख की आबादी का बोझ डाल दिया। भूजल संकट की वजह से जिस नोएडा एक्सटेंशन के बिल्डर्स को निर्माण हेतु भूजल निकालने से हरित अदालत ने मना कर दिया, उसी नोएडा एक्सटेंशन में 15 मंजिला इमारतें बना दी गईं। हाईवे डिजायन के वक्त ध्यान ही नहीं दिया गया कि यह शिमला को पानी पिलाने वाले 19 पहाड़ी नालों के जलग्रहण क्षेत्र घटाकर एक दिन उन्हें सुखा देगा। नगरीय जल प्रबंधन की बर्बादी का कारनामा ऊंची शिक्षा, अधिक आय और अधिक सुविधा की चाहत ने लिख दिया।1980 से पहले भी लोग कमाने के लिए गांवों से नगरों में जाते थे। लेकिन नगरों में बस जाने की इच्छा पिछली सदी के आठवें दशक के बाद ज्यादा बलवती हुई। 21वीं सदी में नगर आया बहुमत गांव वापस नहीं जाना चाहता। गांवों में भी जिनके पास अतिरिक्त पैसा है, वे नजदीकी तहसील-जिले के नगर में जाकर बसने लगे हैं। पलायित आबादी के बोझ ने नगरों की जमीनों के दामों को आसमान पर पहुंचा दिया। बढ़ी कीमतों ने पानी-हरियाली के हिस्से की जमीनों को भी लील लिया। ऐसे में यदि नगरों के अपने पानी और उनके भविष्य को बचाना है, तो प्रत्येक नगरवासी को गांवों के वर्तमान और स्थनीय जल ढांचों को बचाने में योगदान देना ही होगा।
प्रकृति ही इलाज:-इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में एमिरटस वैज्ञानिक, भरत शर्मा कहते हैं - छोटे-बड़े सब शहर तेजी से पानी की कमी की तरफ बढ़ रहे हैं। पानी का लगातार गिरता स्तर लोगों की चिंता, चिड़चिड़ाहट, आपसी बैर व लड़ाई-झगड़ों और पानी के दाम को बढ़ा रहा है। यह स्थिति बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई, शिमला, दिल्ली समेत कई शहरों, कस्बों और गांवों की है। इसके पीछे कई कारण हैं। तेजी से होता शहरीकरण जिसमें बिना किसी योजनाबद्ध तरीके के तहत गांवों से लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं, तेजी से बढ़ती जनसंख्या और पानी के इस्तेमाल की बदलती पद्धतियां। इसके अलावा अधिकतर शहरों में जल प्रबंधन की टिकाऊ प्रणाली मौजूद नहीं है।सालाना 250 अरब घन मीटर भूजल निकालने के साथ भारत दुनिया में सर्वाधिक भूजल इस्तेमाल करने वाला देश बन गया है। देश में भूजल के तकरीबन 16 ब्लॉक ऐसे हैं जो गंभीर स्थिति में हैं और जहां पानी का दोहन क्षमता से अधिक हो चुका है। बेंगलुरु में अतिक्रमण के चलते जल स्रोत 79 फीसद से अधिक खाली हो चुके हैं। बिल्ट-अप एरिया 77 फीसद तक बढ़ गया है। दो दशकों में जल निकालने के कुएं 5,000 से 4.50 लाख हो जाने के कारण भूजल स्तर 12 मीटर से गिरकर 91 मीटर पहुंच गया है।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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