नई दिल्ली। देश में कोरोना की स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी नजर रखे हुए है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता 6,900 मीट्रिक टन है। लगभग 6 फीसदी कोरोना मरीज फिलहाल ऑक्सीजन बेड पर हैं। इसका मतलब है कि 2,800 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कोरोना और अन्य मरीज इस्तेमाल कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। राज्य यह सुनिश्चित करें कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की मैनेजमेंट सही से हो।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक दैनिक मृत्यु दर;-राज्यों के अनुसार कोरोना की स्थिति बताते हुए राजेश भूषण ने बताया कि 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के 5000 से कम एक्टिव केस हैं। 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5000 से 50,000 के बीच कोरोना के एक्टिव केस हैं। देश के शीर्ष पांच राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे अधिक दैनिक मृत्यु दर है। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में कोरोना की एवरेज पॉजिटिविटी रेट 8.4 फीसद है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रूस काफी समय से वैक्सीन बना रहा है। उम्मीद है कि कोरोना की वैक्सीन भी अच्छी होगी। वैक्सीन को लेकर भारत की उच्च स्तरीय कमिटी रूस के संपर्क में है और इसे लेकर मेकनिज्म पर बात चल रही है।

कोरोना वैक्सीन पर सीरम इंस्टीट्यूट अब फेज-III का करेगा ट्रायल:-आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया कि देश में तीन कोरोना वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में हैं। कैडिला और भारत बायोटेक ने फेज-1 का ट्रायल पूरा कर लिया है। सीरम इंस्टीट्यूट ने फेज II-B3 का ट्रायल पूरा कर लिया है, जो कि अब फेज III की मंजूरी के बाद इसका ट्रायल किया जाएगा। इस ट्रायल में 14 स्थानों पर 1500 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा।

प्लाज्मा थेरेपी पर हो रहा है अध्ययन: ICMR;-इसके साथ ही प्रोफेसर बलराम भार्गव ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग 100 वर्षों से अधिक समय से किसी न किसी रूप में किया जा रहा है और विभिन्न वायरस संक्रमणओं के लिए किया जाता है। वहीं, अब इसका उपयोग कोरोना संक्रमण में किया जा रहा है। यह कोरोना के इलाज में कितना मदद करता है या नहीं इस पर अभी अध्ययन किया जा रहा है।

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