नई दिल्ली। यूनेस्को (UNESCO) की वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट (Global Education Monitoring Report) में कहा गया है कि महिलाओं एवं लड़कियों को स्कूल की किताबों (textbooks) में कम प्रतिनिधित्व दिया गया है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं एवं लड़कियों को यदि शामिल किया भी गया है तो कई मुल्‍कों की स्‍कूली किताबों में उन्हें पारंपरिक भूमिकाओं में दिखाया गया है। वार्षिक रिपोर्ट के इस चौथे संस्करण में बताया गया कि पाठ्यपुस्तकों में शामिल महिला पात्रों की संख्या पुरुषों पात्रों की तुलना में कम होती है। यही नहीं पाठ्य पुस्‍तकों में महिलाओं को कम प्रतिष्ठित पेशों में दर्शाया गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि पाठ्यपु‍स्‍तकों में पुरुषों को डॉक्टर जबकि महिलाओं को नर्सों के रूप में दिखाया जाना, महिलाओ को भोजन, फैशन या मनोरंजन से संबंधित विषयों में दिखाया जाना, महिलाओं को स्वैच्छिक भूमिकाओं में जबकि पुरुषों को अच्‍छी नौकरियों में दिखाया जाना शामिल है। हालांकि रिपोर्ट में कुछ देशों की ओर से की जा रही उन कोशिशों का भी जिक्र है जो लैंगिक संतुलन के लिहाज से पाठ्यपुस्तक में बदलाव चाहते हैं। यदि अफगानिस्तान की बात करें तो सन 1990 के दशक में प्रकाशित पहली कक्षा की किताबों से महिलाएं गायब थीं। साल 2001 के बाद से उनकी मौजूदगी दिखी लेकिन माताओं और देखभाल करने वाली बेटियों बहनों के तौर पर...रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में 90 फीसद प्राथमिक एवं माध्यमिक अनिवार्य शिक्षा पाठ्यपुस्तकों में महिलाओं की केवल 37 फीसद मौजूदगी देखी गई। इनमें से आधी में महिलाओं को परिवार एवं शिक्षा से जुड़ा दिखाया गया। महिलाओं की कार्यालय में मौजूदगी की छवियां सात फीसद से भी कम थीं। यही नहीं फारसी की किताबों में 60 फीसद, विज्ञान में 63 और सामाजिक विज्ञान की किताबों में 74 फीसद महिलाओं की छवियां देखी गई। रिपोर्ट की मानें तो मलेशिया और इंडोनेशिया में स्‍कूली किताबों में महिलाओं की मौजूदगी 44 फीसद जबकि बांग्‍लादेश में 37 फीसद देखी गई। पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत में चल रही स्‍कूली किताबों में मात्र 24 फीसद मौजूदगी दर्ज की गई।

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