नई दिल्ली/लंदन। कोरोना के बढ़ते कहर के बीच एक राहत की खबर है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने हालिया अध्ययन में पाया है कि होम क्वारंटाइन और लॉकडाउन जैसे कदम कोरोना के प्रसार को रोकने की दिशा में बहुत कारगर कदम हैं। अगर सतर्कता के साथ निर्देशों का पालन किया जाए तो 22 दिन में इसके कहर को थामना संभव है। हालांकि अगर लापरवाही हुई तो इससे निपटने में कई महीने भी लग सकते हैं। फरवरी के आखिर तक सामने आए मामलों का गणितीय मॉडलिंग के जरिये विश्लेषण करते हुए आइसीएमआर ने यह निष्कर्ष निकाला है।
एक व्यक्ति एक दिन में कई को फैला सकता है बीमारी:-आइसीएमआर ने कोरोना के प्रसार को लेकर कुछ अन्य निष्कर्ष भी दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कोरोना से ग्रसित एक व्यक्ति एक दिन में चार लोगों तक इसे फैला सकता है। इसलिए इसे थामने में सबसे अहम बात यही है कि हम संक्रमित लोगों को अन्य स्वस्थ लोगों से कितना दूर रख सकते हैं। आइएमसीआर के डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर के अनुसार गणितीय मॉडलिंग में एक चीज पर ध्यान दिया है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कौन सा तरीका सबसे बेहतर होगा।
थर्मल स्क्रीनिंग से पूरी तरह नहीं रोकी जा सकती है महामारी:-अध्‍ययन में पाया गया है कि एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग से कोरोना के कहर को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है और इसे केवल तीन दिन से तीन हफ्ते तक ही टाल सकता है। यानी इसके बाद कोरोना का महामारी के रूप में फैलना निश्चित है। गणितीय मॉडलिंग में यह भी बताया गया है कि इसे रोकने का सबसे कारगर तरीका लोगों को दूर-दूर रखना यानी सोशल डिस्टेंसिंग है। इससे इसमें 62 फीसद तक की कमी आ सकती है।
लॉकडाउन ही कारगर उपाय;-डॉ. गंगाखेड़कर के अनुसार पूरे देश में लॉकडाउन लोगों को दूर-दूर रखने के लिए ही है। लॉकडाउन से लोग घरों से बाहर नहीं निकलेंगे और एक-दूसरे से दूर रहेंगे। आइसीएमआर के अनुसार यदि लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन किया गया तो इससे ग्रसित नए मरीजों की संख्या को एक दिन में 1000 की जगह 110 तक लाया जा सकता है।
अभी और आकलन की जरूरत:-गणितीय मॉडलिंग में कमियों को स्वीकार करते हुए आइसीएमआर ने खुद कहा है कि फरवरी तक कोरोना संक्रमितों की संख्या बहुत कम होने के कारण उसका अनुमान दूसरे देशों में कोरोना के फैलाव और भारत में संचारी रोगों के फैलने के पुराने अनुभवों पर आधारित है। यही नहीं, गणितीय आंकलन में केवल चार महानगरों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु को शामिल किया गया है, जो भारत की कुल आबादी का महज सात फीसद है। आइसीएमआर के अनुसार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद वह और अधिक आबादी के आंकड़ों को शामिल कर बेहतर अनुमान लगाने की कोशिश करेगा। आइसीएमआर का अनुमान है कि सबसे खराब स्थिति में भारत में कोरोना का एक मरीज हर दिन औसतन चार मरीजों को वायरस से ग्रसित कर सकता है। वहीं बेहतर स्थिति में भी वह औसतन डेढ़ व्यक्ति को तो ग्रसित करेगा।
एक साथ उठाएं कई कदम:-समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक, विज्ञान पत्रिका लैंसेट इन्फेक्शियस में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि संक्रमण को रोकने के लिए एक साथ कई स्तर पर प्रयास की जरूरत है। इसके तहत जहां कोरोना प्रभावित लोगों और उनके परिजनों को क्वारंटाइन करना जरूरी है, वहीं स्कूलों को बंद रखना, भीड़भाड़ नहीं करना, कार्यस्थल पर कर्मचारियों के बीच उचित दूरी रखना और सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े अन्य निर्देशों का पालन करना भी अहम है। शोधकर्ता एलेक्स आर. कुक ने कहा कि अध्ययन के नतीजे सरकारों को इस महामारी से निपटने की दिशा में कदम उठाने में मददगार होंगे।

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