नई दिल्ली। शुक्रवार रात 1.55 बजे भारत का चंद्रयान-2 मिशन मुश्किल में फंस गया और भारत की मुठ्ठी से चांद फिसलता दिखा। सतह से 2.1 किमी की दूरी पर लैंडर विक्रम से इसरो के मिशन कंट्रोल का संपर्क टूट गया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों में तनाव व निराशा का माहौल बन गया। विक्रम से संपर्क के प्रयास जारी हैं।पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। संपर्क टूटने से निराशा दिखी, लेकिन आपकी मेहनत पर देश का गर्व है। फिर से संपर्क बहाल होने की उम्मीद है। भारत के चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई को चांद के लिए अपने सफर की शुरुआत की थी। तब से ही पड़ाव-दर-पड़ाव यह इतिहास रचने की ओर बढ़ रहा था।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यान के लैंडर विक्रम को चांद की सतह पर उतारने के लिए शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच का समय तय किया था। इस क्षण की ऐतिहासिकता का अनुमान इस बात से भी लगता है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक भी इसके पल-पल के घटनाक्रम पर निगाह बनाए हुए थे। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी भी स्कूली बच्चों के साथ इस क्षण का साक्षी बनने इसरो के बेंगलुर स्थित मुख्यालय पहुंचे थे।
कब हुआ था लॉन्च?;-चंद्रयान-2 को 45 दिन पहले आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 ने इसे लेकर उ़़डान भरी थी। पहले इसकी लॉन्चिंग 15 जुलाई को प्रस्तावित थी लेकिन तकनीकी कारणों से अंतिम क्षणों में इसे टाल दिया गया था।
23 दिन रहा धरती के इर्द-गिर्द;-लांचिंग के बाद चंद्रयान-2 ने तीन हफ्ते तक धरती की परिक्रमा की। इस दौरान इसकी कक्षा में पांच बार बदलाव किया गया। सफर के 24वें दिन 14 अगस्त को छठे बदलाव के जरिए यान को लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी (एलटीटी) पर पहुंचा दिया गया। इस पथ पर हफ्तेभर के सफर के बाद 20 अगस्त को यान ने चांद की कक्षा में प्रवेश किया था। एक सितंबर को इसे चांद की निकटतम कक्षा में पहुंचाया गया था।
चंद्रयान-2 : प्रक्षेपण से अब तक
22 जुलाई 2019- दोपहर 2:43 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण।
22 जुलाई- प्रक्षेपण के 17 मिनट बाद ही यान धरती से 6 हजार किलोमीटर दूर पृथ्वी की कक्षा में पंहुच गया।
24 जुलाई- दोपहर 2.52 बजे पहली बार यान की कक्षा सफलतापूर्वक बदली गई।
26 जुलाई-देर रात 1.08 बजे चंद्रयान-2 की कक्षा बदली। पृथ्वी से 54 हजार 829 किमी ऊपर स्थित कक्षा में पहुंचाया।
29 जुलाई- दोपहर 3.12 बजे चंद्रयान--2 ने तीसरी बार पृथ्वी की कक्षा बदली।
2 अगस्त- दोपहर 3.27 बजे चंद्रयान-2 ने चौथी बार पृथ्वी की कक्षा बदली।
4 अगस्त- इसरो ने चंद्रयान-2 से खींची गई पृथ्वी की कुछ फोटो जारी कीं।
6 अगस्त- दोपहर 3.04 बजे पर सफलतापूर्वक पांचवीं बार पृथ्वी की कक्षा बदल ली।
14 अगस्त- रात 2 बजकर 21 मिनट पर यान ने पृथ्वी की कक्षा को छोड़ लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी सिस्टम में प्रवेश कर लिया।
20 अगस्त- सुबह 9.02 बजे चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया।
21 अगस्त- चंद्रयान -2 ने दोपहर 12.50 बजे दूसरी बार चंद्रमा पर अपनी कक्षा बदली।
28 अगस्त- सुबह 9.04 बजे चंद्रयान -2 ने तीसरी बार चांद की कक्षा बदली।
30 अगस्त -शाम 6.18 बजे चंद्रयान- 2 ने चौथी बार चांद की कक्षा सफलतापूर्वक बदल ली।
01 सितंबर- शाम 6.21 बजे चंद्रयान -2 ने पांचवी और आखिरी बार सफलतापूर्वक चांद की कक्षा को बदल लिया।
02 सितंबर -दोपहर 1:15 बजे चंद्रयान- 2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम सफलतापूर्वक अलग हो गया।
03 सितंबर 2019 -सुबह 8.50 बजे चंद्रयान-2 को निचली कक्षा में ले जाने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया।
04 सितंबर 2019- रात को 3.42 बजे लैंडर की कक्षा में अंतिम बार बदलाव हुआ और सफलतापूर्वक उसकी कक्षा बदलकर उसे नीचे लाया गया

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