नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी को और अधिक अधिकार देने वाला एनआइए संशोधन विधेयक 15 जुलाई को लोकसभा से और 17 जुलाई को राज्यसभा से पारित हो गया है। इस नये कानून के तहत एनआइए को साइबर अपराधों और मानव तस्करी के मामलों की जांच का अधिकार और विदेशों में किसी भारतीय या भारतीय हितों पर हमलों की जांच का अधिकार भी मिल गया है।
विदेश में भी कर सकेगी जांच;-इस नये कानून के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआइए को भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी जांच करने का अधिकार मिल गया है। वह अब आतंकवाद से जुड़े मामलों के अलावा दूसरे तमाम तरह के अपराधों की जांच भी कर सकेगी।
विशेष अदालतें होंगी गठित;-इस नये कानून में केंद्र सरकार को विशेष अदालतें गठित करने का भी अधिकार मिला है ताकि अनुसूचित अपराधों के मामलों पर केस चलाया जा सके। केंद्र सरकार विशेष अदालत बनाने से पहले उस राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सलाह करेगी।
बढ़ा जांच का दायरा:-एनआइए एक्ट 2008 में संशोधन किया गया है ताकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सूचीबद्ध अपराधों की जांच करने और केस चलाने के अधिकार मिल सके। नये कानून के तहत एनआइए को मानव तस्करी, नकली नोट चलाने, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण और बिक्री, एक्सप्लोसिव्स सब्सटेंसेज एक्ट, 1908 के तहत अपराधों और साइबर आतंकवाद से जुड़े विषयों की जांच करने का अधिकार दिया गया है। यहीं नहीं एनआइए एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 जैसे कानूनों के तहत अपराधों की जांच भी कर सकेगी।
मुंबई हमले के बाद हुई स्थापना:-26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद एनआइए एक्ट 2008 के तहत 31 दिसंबर 2008 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की स्थापना हुई। इसकी स्थापना का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली आतंकी गतिविधियों जैसे गंभीर आपराधिक मामलों की जांच करना है।
इन राज्यों में है शाखाएं:-एनआइए की देश के कई राज्यों में शाखाएं हैं। इनमें लखनऊ, हैदराबाद, कोच्चि, गुवाहाटी, मुंबई, कोलकाता, रायपुर और जम्मू राज्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़, श्रीनगर, चेन्नई, बेंगलुरु, विशाखापट्टनम, अहमदाबाद, भरूच, जगदलपुर, पटना, सिलीगुड़ी, मालदा, रांची, विजयवाड़ा और इंफाल में इसके कैंप ऑफिस हैं। नई दिल्ली में इसका मुख्यालय है।
एनआइए की बढ़ेगी ताकत:-यह विधेयक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को असीमित अधिकार देता है। पुराने विधेयक के मुताबिक जांच अधिकारी को आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में संपत्ति सीज करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन अब यह कानून इस बात की अनुमति देता है कि अगर आतंकवाद से जुड़े किसी मामले की जांच एनआइए का कोई अफसर करता है तो उसे इसके लिए सिर्फ एनआइए के महानिदेशक से अनुमति लेनी होगी। प्रस्तावित संशोधन के बाद अब एनआइए के महानिदेशक को ऐसी संपत्तियों को कब्जे में लेने और उनकी कुर्की करने का अधिकार मिल जाएगा, जिनका आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।

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