नई दिल्‍ली। कुछ दिन पहले चिनूक और अब अपाचे। भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल इन दोनों लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने दुर्गम स्थानों पर भी इसकी मारक क्षमता में कई गुना वृद्धि की है। तमाम खूबियों वाला अपाचे दुनिया की कई ताकतवर सेनाओं के जखीरे में शामिल है। अपाचे हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है और यह पर्वतीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमता प्रदान करेगा। अपाचे को अमेरिकी कंपनी बोइंग ने इस तरह डिजाइन किया है कि यह दुश्मन की किलेबंदी को भेद कर उस पर सटीक हमला करने में सक्षम है।
क्या खास है अपाचे में
-550 किलोमीटर है फ्लाइंग रेंज।
-16 एंटी टैंक मिसाइलें छोड़ने की क्षमता है 16अत्यंत तेज गति वाले अपाचे में
-16 फ़ुट ऊंचे और 18 फ़ुट चौड़े अपाचे हेलीकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है।
-30 एमएम की 1,200 गोलियां एक बार में भरी जा सकती हैं, हेलीकॉप्टर के नीचे लगी बंदूकों में।
-इस हेलीकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए दो इंजन होते हैं। इस वजह से इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है।
-इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है।
-ये एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ान भर सकता है।
-अपाचे हेलीकॉप्टर की डिजिटल कनेक्टिविटी व संयुक्त सामरिक सूचना वितरण प्रणाली में सुधार किया गया है। साथ ही अधिक शक्ति को समायोजित करने के लिए इंजनों को उन्नत किया गया है। यह मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) को नियंत्रित करने की क्षमता से लैस है। बेहतर लैंडिंग गियर, बढ़ी हुई क्रूज गति, चढ़ाई दर और पेलोड क्षमता में वृद्धि इसकी कुछ अन्य विशेषताएं हैं।
-इस हेलीकॉप्टर में युद्ध के मैदान की तस्वीर को प्रसारित करने और प्राप्त करने की क्षमता है।
अचूक निशाना;-इसका निशाना बहुत सटीक है। जिसका सबसे बड़ा फायदा युद्ध क्षेत्र में होता है, जहां दुश्मन पर निशाना लगाते वक्त आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता है
कंपनी ने दो हजार से ज्यादा हेलीकॉप्टर बेचे:-जनवरी, 1984 में बोइंग कंपनी ने अमेरिकी फौज को पहला अपाचे हेलीकॉप्टर सौंपा था। तब इस मॉडल का नाम था एच-64ए। तब से लेकर अब तक बोइंग 2,200 से ज्यादा अपाचे हेलीकॉप्टर बेच चुकी है। भारत से पहले इस कंपनी ने अमेरिकी फौज के जरिये मिस्न, ग्रीस, इंडोनेशिया, इजरायल, जापान, क़ुवैत, नीदरलैंड, कतर, सऊदी अरब और सिंगापुर को अपाचे हेलीकॉप्टर बेचे हैं।
पायलट को चाहिए विशेष ट्रेनिंग:-पांच साल तक अफगानिस्तान के संवेदनशील इलाकों में अपाचे हेलीकॉप्टर उड़ा चुके ब्रिटेन की वायु सेना में पायलट एड मैकी के मुताबिक, किसी नए पायलट को इस हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए कड़ी और एक लंबी ट्रेनिंग लेनी होती है, जिसमें काफी खर्च आता है। सेना को एक पायलट की ट्रेनिंग के लिए 30 लाख डॉलर तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं। बतौर मैकी इसे कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल है। दो पायलट मिलकर इसे उड़ाते हैं। मुख्य पायलट पीछे बैठता है। उसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है। वह हेलीकॉप्टर को कंट्रोल करता है। आगे बैठा दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फायर करता है। इस पर अपना हाथ साधने के लिए पायलट एड मैकी को 18 महीने तक ट्रेनिंग करनी पड़ी थी।

 

 

 

 

 

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें