हिसार। बेटियां, सहृदया होती हैं। सौम्य होती हैं। ...लेकिन यह अर्द्धसत्य है। वे साहस में भी पीछे नहीं हैं। शौर्य हैं। एवरेस्ट फतेह कर रही हैं। सेवन समिट फतेह कर रही हैं। लंबी फेहरिस्त है, संतोष यादव से लेकर शिवांगी पाठक तक। पहाड़ पर चढ़ने, खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन के साथ ही वे तीनों सेनाओं में बड़ी संख्या में भागीदारी भी कर रही हैं। अर्द्धसैनिक बलों में तो प्रभावी भूमिका में हैं। हरियाणा के सोनीपत जिले के सेक्टर 12 निवासी सौम्या इसकी बेमिसाल मिसाल हैं।सौम्या को बीएसएफ में हरियाणा की पहली और देश की तीसरी महिला असिस्टेंट कमांडेंट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। बचपन से ही फौज में जाने की आकांक्षी सौम्या ने वर्ष 2016 में मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बीटेक और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी। वह पहले ही प्रयास में यह सफल हुईं और ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में प्रशिक्षण के लिए गईं। बीते बुधवार को आयोजित दीक्षा समारोह में सौम्या को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से भी सम्मानित किया गया।शुक्रवार को दीक्षा समारोह के बाद घर पर लौटीं सौम्या ने बताया कि उन्हें जल्द ही देश की सीमा पर लड़ाकू (कांबैट) अधिकारी के तौर पर नियुक्ति मिलेगी। सौम्या के परिवार के अधिकतर लोग सेना में हैं और उन्हें भी सेना में जाने की प्रेरणा घर से ही मिली। सौम्या के पिता कुलदीप सिंह गांव भिगान स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रिंसिपल हैं। वे भी उत्कृष्ट शिक्षक के तौर पर राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं। मां मंजू चौहान सोनीपत के एक निजी स्कूल में अध्यापिका हैं। उनके ताऊ रिटायर्ड कैप्टन प्रेम सिंह चौहान को भी राष्ट्रपति द्वारा वीर चक्र प्रदान किया जा चुका है।सौम्या ने बताया कि बीएसएफ की वर्दी पहनते ही ऐसा लगता है कि भारत माता की रक्षा का जिम्मा मेरे कंधों पर आ गया है और मुझे इसे जी-जान लगाकर पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि वह ट्रेनिंग के दौरान पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एक सैनिक के रूप में तमाम बारीकियां सीख रही हैं। सौम्या के पिता कुलदीप चौहान गांव भिगान स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रिंसिपल हैं और मां मंजू चौहान एक निजी स्कूल में अध्यापिका हैं। उनके पिता कुलदीप ने कहा कि सौम्या में बचपन से ही देशसेवा की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है।
अन्य लड़कियों के लिए भी की मिसाल कायम:-सौम्या ने प्रदेश की पहली महिला असिस्टेंट कमांडेंट बनने के बाद न केवल अपना सपना पूरा किया बल्कि जिले व प्रदेश की लड़कियों के लिए भी एक मिसाल कायम कर दी है। जिले व प्रदेश की लड़कियां पढ़ाई से लेकर खेलों में तो परचम लहरा ही रही हैं, अब देशसेवा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी हैं। सौम्या के अधिकारी बनने पर उनकी रिश्तेदारों व आस-पड़ोस से लेकर साथ पढ़ने वाली लड़कियों को भी प्रेरणा मिली है और अब उनमें भी देशसेवा का जज्बा पैदा हुआ है।

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