नई दिल्ली। 11 अक्टूबर का दिन खास है। महानायक अमिताभ बच्चन के जन्म के अलावा भी यह दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। खास तौर पर भारतीय सेना के लिए यह दिन बहुत खास है। यही वो दिन है जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन पवन चलाया था। बता दें कि यह ऑपरेशन न तो पाकिस्तान के खिलाफ था, न चीन के खिलाफ और न ही यह नगा विद्रोहियों या नक्सलियों के खिलाफ था। भारतीय सेना ने यह ऑपरेशन था श्रीलंका में साल 1987 में चलाया था।दरअसल 11 अक्टूबर, 1987 को भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था। इसकी पृष्ठभूमि में भारत और श्रीलंका के बीच 29 जुलाई 1987 को हुआ वह शांति समझौता था, जिसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति जे.आर. जयवद्धने ने हस्ताक्षर किया था। समझौते के अनुसार, श्रीलंका में जारी गृहयुद्ध को खत्म करना था, इसके लिए श्रीलंका सरकार तमिल बहुत क्षेत्रों से सेना को बैरकों में बुलाने और नागरिक सत्ता को बहाल करने पर राजी हो गई थी। वहीं, दूसरी ओर तमिल विद्रोहियों के आत्मसमर्पण की बात हुई, लेकिन इस समझौते की बैठक में तमिल व्रिदोहियों को शामिल नहीं किया गया था।श्रीलंका में शांति भंग की समस्या की जड़ में वहां के निवासी सिंघली तथा तमिलों के बीच का द्वंद्व था। तमिल लोग वहां पर अल्पसंख्यकों के रूप में बसे हैं। आंकड़े बताते हैं कि श्रीलंका की कुल आबादी का केवल 18 फीसद हिस्सा ही तमिल हैं और श्रीलंका की सिंघली बहुल सरकार की ओर से तमिलों के हितों की अनदेखी होती रही है। इससे तमिलों में असंतोष की भावना इतनी भरती गई कि उसने विद्रोह का रूप ले लिया और वह स्वतंत्र राज्य तमिल ईलम की मांग के साथ उग्र हो गए।श्रीलंका सरकार ने तमिल ईलम की इस मांग को न सिर्फ नजरअंदाज किया, बल्कि तमिलों के असंतोष को सेना के दम पर दबाने का प्रयास करने लगी। इस दमन चक्र का परिणाम यह हुआ कि श्रीलंका से तमिल नागरिक बतौर शरणार्थी भारत के तमिलनाडु में भागकर आने लगे। यह स्थिति भारत के लिए अनुकूल नहीं थी।

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