नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए कई दिशा-निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार से इन मरीजों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने को दिव्यांगता सर्टीफिकेट देने को कहा है। साथ ही उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने शुक्रवार को केंद्र और सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वह कुष्ठ रोग के खात्मे के काम करें और इससे पीड़ित मरीजों के पुनर्वास की व्यवस्था करें।खंडपीठ ने कहा कि निजी और सरकारी अस्पतालों में सुनिश्चित करें कि मेडिकल स्टाफ इन रोगियों से कोई भेदभाव न करे। इसके अलावा, जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए ताकि कुष्ठ रोग के मरीज अलग-थलग न पड़ें। साथ ही उन्हें सामान्य वैवाहिक जीवन जीने की भी अनुमति हो। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से सरकारी और निजी स्कूलों के लिए भी नियम बनाने को कहा ताकि वहां कुष्ठ रोगी के परिवार के बच्चों के साथ कोई भेदभाव न हो।उल्लेखनीय है कि विगत पांच जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि इलाज योग्य बीमारी से लोग प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसलिए कुष्ठ रोग को देश से पूरी तरह से खत्म करने की एक समग्र कार्ययोजना पेश करें। खंडपीठ अधिवक्ता पंकज सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही है। सिन्हा ने आरोप लगाया है कि सरकार कुष्ठ रोग को जड़ से खत्म करने के पर्याप्त उपाय नहीं कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालीसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने वाली याचिका के विरुद्ध नहीं है।

 

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