नई दिल्ली - बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में मुस्लिम प्रोफेसर द्वारा संस्कृत पढ़ाए जाने के विरोध का मामला पूरे देश में छाया हुआ है। इसको लेकर तमाम लोग हैरानी जता रहे हैं कि धर्म और भाषा को कैसे जोड़ा जा सकता है। वेटरन एक्टर और बीजेपी के पूर्व सांसद परेश रावल ने ट्वीट करके इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तर्क से तो मोहम्मद रफ़ी को भजन ही नहीं गाने चाहिए थे।
कुछ दिन पहले बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में फ़िरोज़ ख़ान नाम के एक शिक्षक की नियुक्ति हुई थी। मगर, वहां के छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। इस पर परेश रावल ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- प्रोफेसर फ़िरोज़ ख़ान के ख़िलाफ़ विरोध देखकर हैरान हूं। किसी धर्म और भाषा का क्या लेना-देना। प्रोफेसर फ़िरोज़ ने अपना पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी संस्कृत में की है। भगवान के लिए इस बेवकूफ़ी को बंद कीजिए।
अगले ट्वीट में परेश ने लिखा- इस तर्क से तो महान गायक स्वर्गीय श्री मोहम्मद रफ़ी जी को भजन नहीं गाने चाहिए थे और नौशाद साहब को उनका संगीत नहीं बनाना चाहिए था।
परेश रावल के इस ट्वीट पर तमाम फॉलोअर्स प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ पक्ष में हैं तो कुछ विरोध में लिख रहे हैं। बता दें कि परेश रावल सक्रिय राजनीति से दूर होकर एक बार फिर अपने फ़िल्मी करियर पर फोकस कर रहे हैं। इसी साल रिलीज़ हुईं उरी- द सर्जीकल स्ट्राइक और मेड इन चाइना में वो नज़र आए थे। उरी में उनका किरदार देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित था। इसके बाद परेश तूफ़ान और कुली नंबर 1 में नज़र आएंगे।

 

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