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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने पिछले साल अपनी वेबसाइट को अपग्रेड किया। जिसके बाद से ऑनलाइन टिकट करना अब पहले से आसान हो गया है। इसके साथ ही रेलवे ने इसमें कई और खास फीचर जोड़े हैं। अपग्रेड के बाद से बिना अकाउंट लॉग इन किए आप ट्रेन के बारे में इन्क्वायरी कर सकते हैं। इसके अलावा वेटिंग लिस्ट के टिकट की कन्फर्म होने की संभावना कितनी रहती है ये भी पता चल जाता है। हम इस खबर में आपको IRCTC की वेबसाइट से जुड़ी पांच जरूरी बातें बता रहे हैं।
DISHA चैटबोट;-रेल यात्रियों के सवालों का जवाब देने के लिए IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर एक आर्टिफीसियल इंटीलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट (DISHA- डिजिटल इंटरैक्शन टू सीक हेल्प एनीटाइम) पेश किया गया है। इस सिस्टम के साथ रेल यात्रा से संबंधित कोई भी प्रश्न जैसे कि टिकट रद्द करने, टिकट बुकिंग, खानपान आदि से संबंधित सवालों का जवाब दिया जाएगा।
बुक नाउ पे लेटर ऑप्शन;-IRCTC ने “बुक नाउ पे लेटर” के तहत एक नया “पोस्ट पेड” पेमेंट ऑप्शन पेश किया है। यह विकल्प यूजर्स या यात्रियों को आईआरसीटीसी वेबसाइट पर बुक किए गए टिकटों के लिए बाद में पेमेंट करने की सुविधा देता है। 'EPaylater' और 'Pay-on-Delivery' की सुविधा आरक्षित और तत्काल टिकट दोनों के लिए उपलब्ध है। यह सुविधा यात्रियों को टिकट बुक करने के 15 दिनों के भीतर या 24 घंटे के भीतर बुक किए जाने वाले टिकट पर उपलब्ध है।
आधार सत्यापन के माध्यम से टिकट बुकिंग:-प्रति यूजर 6 ट्रेन टिकटों की मंथली सीमा बढ़ाने के लिए लगातार यूजर्स से मिले फीडबैक के बाद केवाईसी प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, इसमें आधार सत्यापन की आवश्यकता है। जो लोग आधार से सत्यापित हैं वे एक महीने में 12 टिकट तक बुक कर सकते हैं।
काउंटर से बुक टिकट को रद्द करने के लिए ऑनलाइन सुविधा:-काउंटर के जरिए बुक किए गए टिकट को ऑनलाइन रद्द करने की सुविधा भी है। ज्यादा से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करके अपने टिकट को बुक करने या रद्द करने के लिए आईआरसीटीसी वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। रेलवे के इस कदम से यात्रियों को अब टिकट रद्द करने के लिए संबंधित रेलवे काउंटर पर नहीं जाना होगा।
डेबिट कार्ड लेनदेन:-रेल यात्रियों के ई-टिकटिंग पर आईआरसीटीसी की ओर से डेबिट कार्ड लेनदेन शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। 1 लाख रुपये तक की लेनदेन राशि मुफ्त है। डेबिट कार्ड के अलावा यात्रियों के पास ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए अन्य पेमेंट विकल्प भी हैं जैसे नेट बैंकिंग, आईआरसीटीसी ई-वॉलेट, क्रेडिट कार्ड, कैश कार्ड आदि।

नई दिल्ली। अगर आपके पास गाड़ी है तो उसका बीमा कराना बहुत जरूरी है। भारत में थर्ड पार्टी कार इंश्योरेंस होना अनिवार्य है, लेकिन आम तौर पर लोग एक व्यापक बीमा पॉलिसी खरीदते हैं। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि कब और किन हालात में आपका मोटर बीमा रिजेक्ट हो सकता है।बीमाधारक को अपनी कार के दुर्घटनाग्रस्त होने के 48 घंटे से 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को बता देना चाहिए। इस बहाने भी आपके दावे को अस्वीकार किया जा सकता है।यदि आप अपने निजी वाहन को कमर्शियल वाहन के रूप में उपयोग करते हैं तो बीमा दावा अस्वीकृत हो जाएगा।आपको हमेशा ड्राइविंग लाइसेंस रखना चाहिए। नहीं तो बीमित वाहन चालक को कोई दावा नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा, अगर आप लाइसेंस नहीं ले रहे हैं, तो आप कानूनी फेरे में पड़ सकते हैं।आपके वाहन का दुर्घटना के बाद मिलने वाले नुकसान की भरपाई भी बीमा कंपनी द्वारा कवर नहीं किया जाता है। इसलिए, यदि आप उसी का उल्लेख करते हैं, तो भी दावा निश्चित रूप से खारिज हो जाएगा।दुर्घटना के बाद खुद के पैसे के बदौलत अपनी कार की मरम्मत न करें। इसके बारे में बीमा कंपनी को सूचित करें। यदि आप पहले ही इस मैटर को बीमा कंपनी के साथ नहीं सुलझाते हैं तो उस स्थिति में आपके दावे खारिज हो सकते हैं। बीमा एजेंट को नुकसान का निरीक्षण करने दें, नुकसान की लागत का अनुमान लगाएं और अपने नुकसान की मरम्मत के लिए दावा मिलने में मदद करें।अपने वाहन को बेचने के समय बीमा पॉलिसी को नए मालिक को ट्रांसफर कर दें। इसके अलावा गाड़ी चलाते वक़्त आप शराब के नशे में न रहें।ग्राहक पॉलिसी खरीदते समय CNG/LPG किट को कवर नहीं करने की गलती करते हैं। ऐसे में आपके दावे को अस्वीकार किए जाने की अधिक संभावना रहती है।

नई दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपने ग्राहकों को कई तरह की सेविंग स्कीम ऑफर करती है जहां आप अपना पैसा निवेश कर अच्छा ब्याज पा सकते हैं। हम इस खबर में आपको एसबीआई फ्लेक्सी डिपॉजिट के बारे में बता रहे हैं। दरअसल, SBI फ्लेक्सी डिपॉजिट भी आरडी (रेकरिंग डिपॉजिट) की तरह होता है। लेकिन इसमे आपको जमा करने की छूट मिलती है, मतलब की आप एक साथ कई महीनो की इंस्टालमेंट पे कर सकते हैं। आप चाहें तो एक साथ कई महीनो की किस्त इस खाते में जमा कर सकते हैं। लेकिन इसकी जमा लिमिट भी है।SBI फ्लेक्सी डिपॉजिट खाता खोलने के बाद आप 5000, 10000 हर महीने जमा किया जा सकता है, हर साल आप 50,000 तक जमा कर सकते हैं। इसमें महीने में आप कभी भी पैसा जमा कर सकते हैं। डिपॉजिट इसमें मिनिमम टेन्योर 5 साल और मैक्सिमम 7 साल है। इसपर मिलने वाला ब्याज फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज के बराबर है। आप अपनी आय को ध्यान में रखकर 5000 से 50,000 के बीच मे कोई भी रकम इस खाते में जमा कर सकते हैं। समय से पहले अगर आप अपनी इस खाते को बंद करते हैं तो उसमे आपको कुछ जुर्माना भरना पड़ सकता है।
कैसे खोलें खाता:-इसमें निवेश करने के लिए आपको बैंक मे जाने की जरूरत नहीं है। अगर आप नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो आप ऑनलाइन ही इसे खोल सकते हैं, साथ ही किस्त का जमा आप ऑनलाइन सीधे अपने बचत खाते से ऑनलाइन भर सकते हैं।एसबीआई नेट बैंकिंग के जरिए फ्लेक्सी खाता खोलने के लिए आपको सबसे पहले लॉगिन करना है। लॉगिन करने के बाद आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर जाना है जहां आपको e-RD/e-Flexi Deposit पर क्लिक करना है, उसके बाद फ्लेक्सी डिपॉजिट को चुनना है।इस खाते में आप नॉमिनी भी रख सकते हैं। नॉमिनी रजिस्टर करने के लिए आपको बैंक नहीं जाना है, आप खाता खोलते समय ही नॉमिनी रजिस्टर कर सकते हैं।अगर आपको किसी कारण से अपना इस खाते को समय अवधि से पहले बंद करना है तो आप बस एक क्लिक मे ऑनलाइन इसे बंद कर सकते हैं। इसके लिए कुछ सामान्य सा जुर्माना देना पड़ सकता है।
इसके फायदे
-हर महीने RD की तरह किस्त नहीं भरना पड़ता
-आप अपनी आय से जो भी बचत करते हो वो आप सीधे फ्लेक्सी खाते में जमा कर सकते हैं।

अगर आपने पिछले दस साल के दौरान औसत प्रदर्शन करने वाले इक्विटी म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआइपी) में 10,000 रुपये प्रति माह जमा किए हैं तो आपकी बचत और निवेश की वैल्यू करीब 22 लाख रुपये हो चुकी होगी। अभी तक बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट और पीपीएफ में निवेश कर रहे लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन इक्विटी फंडों में लंबे अरसे तक निवेश के सामान्य रिटर्न पर नजर डालें तो यह कोई असाधारण नहीं है। सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले म्यूचुअल फंडों के मामले में यह रिटर्न 27 लाख से 35 लाख रुपये के बीच होना चाहिए। लेकिन इस समय हमें सिर्फ औसत निवेश पर ही ध्यान देना चाहिए क्योंकि यहां हम एक अन्य अहम बिंदु पर चर्चा कर रहे हैं।आजकल बड़ी संख्या में निवेशक एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। लेकिन ऐसे निवेशकों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होगी जो दशक भर से एसआइपी में लगातार निवेश कर रहे हैं क्योंकि एसआइपी के जरिये निवेश के प्रति लोगों में जागरूकता और संस्कृति पिछले सात-आठ साल में ही बढ़ी है। वैसे तो एसआइपी के जरिये निवेश करने पर शानदार रिटर्न मिलता है। लेकिन शानदार रिटर्न और वैल्यू उस समय नहीं मिल सकती है जब निवेशक होम्योपैथिक डोज के अंदाज में बहुत कम रकम हर महीने निवेश करते हों।इस बिंदु को एक उदाहरण के जरिये समझते है। मैं पिछले सप्ताह एक व्यक्ति से मिला जिसकी मासिक आय पांच अंकों में यानी एक लाख रुपये से ज्यादा थी। यह एक ऐसा प्रमुख उदाहरण है जो बहुत से निवेशक करते हैं। ये निवेशक पूरी ईमानदारी से लंबे अरसे तक एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। लेकिन उनके निवेश की रकम इतनी कम होती है कि वे उसके सहारे बड़ा निवेश खड़ा नहीं कर सकते हैं। इससे उनकी वित्तीय स्थिति को भी कोई मजबूती नहीं मिलती है। अपनी मासिक आय की महज तीन फीसद राशि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से प्राप्त होने वाली वैल्यू आपके मन बहलाने के लिए ही पर्याप्त हो सकती है।आपके द्वारा किए गए निवेश की तुलना में प्राप्त रिटर्न आपको बहुत अच्छा प्रतीत हो सकता है लेकिन इससे आपके जीवन में कोई खास वित्तीय बेहतरी नहीं मिल पाएगी। कुछ महीनों पहले, हमारे एक पूर्व पड़ोसी अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आए। वे हमसे अपने निवेश के बारे में चर्चा करना चाहते थे।

नई दिल्ली। पीपीएफ और ELSS दोनों ही एक अच्छे निवेश विकल्प हैं। दोनों की अपनी खूबियां हैं तो कुछ कमियां भी हैं। निवेश के लिहाज से भी पीपीएफ को एक बेहतर विकल्प माना जाता है। पीपीएफ आपको टैक्स छूट का फायदा दिलाने के साथ ही कई अन्य फायदे भी देता है। वहीं, शेयर बाजार में निवेश करने का सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प म्युचुअल फंड माना जाता है। टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड्स को इंक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस) भी कहा जाता हैं। ये एक तरह से डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स होते हैं। इनमें लगाया गया पैसा शेयर्स में निवेश किया जाता है। इसपर मिलने वाला रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहता है।
पीपीएफ:-आप किसी बैंक या पोस्ट ऑफिस में पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं। आप पीपीएफ खाता अपने या फिर किसी नाबालिग के नाम पर खुलवा सकते हैं। लेकिन नियमों के मुताबिक, एक हिंदू अविभाजित परिवार(HUF) के नाम पर एक पीपीएफ खाता खोला नहीं जा सकता है। पीपीएफ में अकाउंट खोलने के लिए आपको केवल पासपोर्ट साइज के 2 फोटोग्राफ और आइडी प्रूफ (पैन कार्ड, वोटर आईडी या आधार कार्ड) की जरूरत होती है। आजकल कुछ निजी बैंकों में भी पीपीएफ की सुविधा उपलब्ध है। जिस बैंक में पहले से ही आपका सेविंग अकाउंट हो, वहीं पीपीएफ खोलना ज्यादा सुविधाजनक होगा।आप न्यूनतम 100 रुपये का निवेश कर अपना पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं। हालांकि इस खाते में एक वित्त वर्ष के दौरान आपको 500 रुपये जमा कराने होते हैं। वहीं इस खाते में अधिकतम निवेश की सीमा 150,000 रुपये प्रति वर्ष तय की गई है। एक पीपीएफ खाते का मैच्योरिटी पीरियड 15 वर्ष का होता है, हालांकि इसके मैच्योर होने के एक वर्ष पहले इसे बढ़वाया जा सकता है। आप अगर चाहें तो आप अपने पीपीएफ खाते को एक बैंक से दूसरे बैंक या एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस में ट्रांसफर भी करा सकते हैं। आप अपना PPF अकाउंट खोलने के बाद सातवें वर्ष में उससे कुछ रकम की निकासी कर सकते हैं।जानकारी के लिए बता दें कि PPF का निवेश EEE यानी एक्सजेम्प्ट-एक्सजेम्प्ट-एक्सजेम्प्ट कैटेगरी में टैक्स फ्री होता है। एक पीपीएफ अकाउंट होल्डर खाता खोले जाने वाले वित्त वर्ष के बाद के तीसरे वित्त वर्ष के दौरान लोन सुविधा का फायदा उठा सकता है। बैंक के सेविंग अकाउंट की तुलना में पीपीएफ खाते पर मिलने वाला ब्याज बेहतर होता है। आप अपने पीपीएफ खातों को मैच्योरिटी से पहले भी बंद करवा सकते हैं।
ईएलएसएस;-पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 साल और यूलिप की पांच साल होती है, लेकिन ईएलएसएस में यह महज तीन वर्ष होती है। यह इनकम टैक्स की धारा 80सी से जुड़े निवेश विकल्पों में सबसे कम है। जोखिम लेने वालों के लिए ईएलएसएस अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें लिक्विडिटी और पारदर्शिता होती है। निवेशक को इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत सालाना 1,50,000 रुपए तक की कर कटौती का फायदा मिलता है।अगर आप सिस्टीमेटिक तरीके से निवेश करते हैं तो आपके लिए यहां एसआईपी (सिस्टेसमेटिक इंवेस्टेमेंट प्लान) का भी विकल्पल है। इसमें आप महज 500 रुपये महीने की राशि से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। साथ ही इसपर मिलने वाला रिटर्न कर छूट के दायरे में आता है।एसेट एलोकेशन के मुताबिक ईएलएसएस म्युचुअल फंड का वर्गीकरण इक्विटी फंड के अंतर्गत किया गया है। एक वर्ष के बाद इनपर मिलने वाला रिटर्न टैक्स फ्री होता है। इसलिए रिटर्न, डिविडेंड और इनपर मिलने वाला कैपिटल गेन भी टैक्स फ्री होता है। ये फंड्स लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहतर होते हैं। इसपर मिलने वाला रिटर्न महंगाई को मात देने की क्षमता रखता है। जिसकी मदद से आप घर की खरीदारी,शादी की योजना या बच्चे की पढ़ाई के खर्चों की प्लानिंग कर सकते हैं।ईएलएसएस में फंड मैनेजमेंट फीस या एक्सपेंस रेशियो के रूप में शुल्क लगाया जाता है। यह अधिकतम 2.5 फीसद हो सकता है। इसमें निवेश करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। आप जितना चाहे इसमें निवेश कर सकते हैं। इसमें इंडिविजुअल्स और हिंदु अनडिवाइडेड फैमली (एचयूएफ) भी निवेश कर सकते हैं। इसमें मैच्योरिटी से पहले निकासी संभव नहीं है इसमें निवेश के समय और जिस वर्ष निकासी की जाती है उस दौरान टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।

नई दिल्ली। कई बार हम कितना कमाते हैं यह मायने नहीं रखता, न ही इससे कोई मतलब रहता है कि हम कितना बचत कर रहे हैं। आप चाहे जितना भी बचत करने की कोशिश करें, जब तक आपके अगले महीने का वेतन आपके खाते में नहीं आ जाता, तब तक आपके पिछले वेतन में से कुछ भी नहीं बचा होता है। लेकिन जब आप इस बारे में सोचते हैं कि आप न तो बचत कर रहे हैं और न ही अपने पैसे का निवेश कर रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है।जब तक आप नौकरी में रहते हैं तब तक आपके पास एक खास तारीख को वेतन आने की संभावना रहती है। लेकिन अगर आप रिटायर हो गए और आपके पास उस वक्त कुछ भी पैसा नहीं बचा है तो यह आपको सोचने पर मजबूर करती है। निवेश का मतलब होता है कि आपको भविष्य में इसका फायदा मिलेगा। हम इस खबर में आपको ज्यादा खर्च से बचने के कुछ तरीके बता रहे हैं।
मैप तैयार करें:-सबसे पहले तो आपको अपने पैसे खर्च करने के बारे में सोचना होगा। बचत के बाद जो बचा है उसे खर्च करने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह थोड़ा बेतुका लग सकता है क्योंकि आप पहले से कैसे बचा सकते हैं। आपको बस अपने मासिक खर्चों को ट्रैक करना है और फिर अगले महीने के हिसाब से अपने खर्चों की योजना बनानी है। एक बार जब आपको अपने जरूरी खर्चों का अंदाजा हो जाता है, फिर जब भी आपकी सैलरी आती है, तो आप पहले से ही बाकी बचत कर सकते हैं।
प्रायोरिटी तय करें:-कई लोग यह कह सकते हैं कि वह पैसा तो बचाना चाहते हैं लेकिन खर्च इतना अधिक है कि बचत नहीं हो पाती। इसके लिए आपको पहले अपनी प्राथमिकताओं को तय करना होगा। अपने लोन का पेमेंट, मकान का किराया आदि को एक लिस्ट बनाकर सबसे ऊपर रखना चाहिए। हर महीने अपनी प्रायोरिटी लिस्ट के टॉप पर आई चीजों के बारे में सोचें।
ज्यादा कमाई;-कुछ लोग बस इतना ही कमा पाते हैं जिससे कि वह अपना खर्चा चला सकें। इससे बचने के दो तरीके हैं आप अपनी आय बढ़ाएं या आप ओवरटाइम कर सकते हैं, और हर महीने थोड़ा अतिरिक्त कमाकर बचत खाते में उस अतिरिक्त पैसे को बचा सकते हैं। जिससे आपको थोड़ा बहुत ब्याज भी मिल जाता है। एक बार जब आपके पास उस बचत खाते में पर्याप्त राशि हो जाती है, तो आप कम से कम जोखिम वाले निवेश के बारे में पता कर उसमें निवेश कर सकते हैं।
क्रेडिट और लोन:-क्रेडिट कार्ड बहुत जरूरी चीज है, इसके जरिए बस आपको कार्ड स्वाइप कर पैसा खर्च करना है। लेकिन क्रेडिट कार्ड से कई बार आप ज्यादा पैसा खर्च कर जाते हैं। अगर आप नकद में भुगतान कर रहे हैं तो आपके पास खर्च करने की एक लिमिट होती है। अपने खर्चों में कटौती करने के लिए, क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना बंद कर दें। आपको लुभाने के लिए क्रेडिट कार्ड पर रोमांचक छूट और कैशबैक ऑफर दिए जाते हैं, लेकिन उस जाल में न पड़ें।

नई दिल्ली। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक अपने ग्राहकों को मुफ्त इंट्रा-बैंक फंड ट्रांसफर सेवा देने के अलावा करेंट मनी ट्रांसफर की सुविधा भी देता है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक NEFT, RTGS, IMPS के जरिए अपने ग्राहकों से तुरंत मनी ट्रांसफर के लिए 2.5 से 50 रुपये तक शुल्क वसूलता है। NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर), RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और IMPS (इमिडिएट पेमेंट सर्विस) ऐसे भुगतान प्लेटफॉर्म हैं जो…
नई दिल्ली। ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए सरकार के नए विदेशी निवेश प्रतिबंध, जिसमें अमेजन डॉट कॉम इंक और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट भी शामिल है की बिक्री वर्ष 2022 तक 46 बिलियन डॉलर तक कम हो सकती है। वैश्विक सलाहकार PwC से एक मसौदा विश्लेषण के अनुसार यह जानकारी सामने आई है।इस परिवर्तन के मुताबिक देश की ई-कॉमर्स कंपनियां एक फरवरी से अपने प्लेटफॉर्म्स पर उन कंपनियों के प्रोडक्ट्स…
नई दिल्ली। जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को जानकारी दी है कि वो एयरलाइन्स में 700 करोड़ रुपये का निवेश करने को तैयार हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने यह शर्त रखी है कि उनका स्टेक 25 फीसद से नीचे नहीं होना चाहिए।गोयल ने जेट में निवेश करने पेशकश वैसे समय में की है जब एतिहाद ने संकट से जूझ रही कंपनी में निवेश…
नई दिल्ली। आयकर रिटर्न भरने वालों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने नेक्स्ट जेनरेशन इनकम टैक्स फाइलिंग सिस्टम को विकसित किए जाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टैक्स रिटर्न प्रोसेसिंग में महज एक दिन का समय लगेाग और लोगों को उनका रिफंड भी जल्द ही मिलेगा। फिलहाल इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का प्रोसेसिंग टाइम 63 दिनों का है।केंद्र सरकार के लिए यह सिस्टम आईटी…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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