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नई दिल्ली। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के जरिए 17 करोड़ से ज्यादा पॉलिसीधारक एलआईसी की ई-सेवाओं का उपयोग करके ऑनलाइन एलआईसी पॉलिसी, ऑनलाइन प्रीमियम भुगतान, पॉलिसी स्टेटस, बोनस स्टेटस, लोन स्टेटस, रिवाइवल कोटेशन इत्यादि सेवाओं का ऑनलाइन लाभ ले सकते हैं। एक बार पॉलिसीधारक जब ई-सेवाओं का रजिस्ट्रेशन करा लेता है, तो वह अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन कई सुविधाओं का लाभ ले सकता है।
एलआईसी की ई-सेवाओं के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें
-एलआईसी की आधिकारिक वेबसाइट www.licindia.in पर जाएं और "न्यू यूजर" टैब पर क्लिक करें। अपना खुद का यूजर-आईडी और पासवर्ड सेलेक्ट करें और सभी आवश्यक जानकारी सबमिट करें।
-अब आप पोर्टल पर एक रजिस्टर्ड यूजर हैं। ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए, "ई-सर्विसेज" टैब पर क्लिक करें और यूजर-आईडी और पासवर्ड के साथ लॉगिन करें और दिए गए फॉर्म भरकर ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी पॉलिसी रजिस्टर करें।
-फॉर्म भरने के बाद, फॉर्म प्रिंट करें, इसे साइन करें और फॉर्म की स्कैन की गई फोटो अपलोड करें।
-वेरिफिकेशन के लिए पैन कार्ड या आधार कार्ड या पासपोर्ट की स्कैन की गई फोटो अपलोड करें।
-एलआईसी ऑफिस से वेरिफिकेशन के बाद, एक रिसीव ई-मेल और एसएमएस आपको भेजा जाएगा। अब आप एलआईसी की ई-सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
हालांकि बिना ई-सेवाओं के रजिस्ट्रेशन के बिना आप अपने एलआईसी पॉलिसी प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। जानिए कैसे...
-एलआईसी की वेबसाइट www.licindia.in पर जाएं। ऑनलाइन सेवाओं के मेनू के तहत "भुगतान प्रीमियम ऑनलाइन" टैब पर क्लिक करें।
-अब "पे डायरेक्ट (लॉगिन के बिना)" पर क्लिक करें। एक नई विंडो खुल जाएगी और आपको अपना पसंदीदा ब्राउज़र चुनने के लिए कहा जाएगा। अब आप उपयोग किए जाने वाले ब्राउज़र पर क्लिक करें।
-ड्रॉप-डाउन मेनू से "रिन्यूअल प्रीमियम" विकल्प का चयन करें।
-एक नई विंडो खुलेगी। अपनी पॉलिसी नंबर, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, किश्त प्रीमियम, ई-मेल आईडी और स्क्रीन पर दिए गए कैप्चा जैसे डिटेल दर्ज करें। नियम और शर्तों को स्वीकार करें और फिर जमा करें।
-पेमेंट पेज खुल जाएगा, जहां आप अपनी एलआईसी पॉलिसी के लिए नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, बीएचआईएम या यूपीआई के माध्यम से प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं।

नई दिल्ली। पिछले कुछ समय के दौरान कई राज्यों में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा किसान कर्ज माफी का किया गया वादा एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने इस उभरते ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है। सिंह ने शनिवार को कहा कि इससे न केवल उन राज्यों का राजकोषीय घाटा काबू से बाहर चला जाएगा, बल्कि वृहत अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी देश को बड़ी अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा। इससे भारत में निवेश के माहौल पर भी बुरा असर पड़ेगा।सिंह ने कहा कि कई राज्य अपनी प्राथमिकताओं के निर्धारण में राजकोषीय अनुशासन की अवहेलना करते दिख रहे हैं। यह उन राज्यों की वित्तीय स्थिति के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा नहीं होता था और सरकारें अपनी राजकोषीय हालत के हिसाब से कदम उठाती थीं। सिंह का बयान ऐसे वक्त में आया है, जब मध्य प्रदेश और राजस्थान में पिछले दिनों सत्ता परिवर्तन के साथ ही कृषि कर्ज माफी की घोषणा कर दी गई है।स्कॉच समिट को संबोधित करते हुए सिंह ने संवैधानिक तंत्रों के माध्यम से केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूती देने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि सरकार को उत्पादन के तीन महत्वपूर्ण कारकों श्रम, भूमि और पूंजी को ध्यान में रखते हुए ही सुधारवादी कदमों को गति देने के बारे में सोचना चाहिए।हालांकि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबोरॉय ने कहा कि देश के विकास को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के ढांचे को फिर से जांचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की प्रति व्यक्ति आय सालाना 2,000 डॉलर (लगभग 1.40 लाख रुपये) पर पहुंचने वाली है और आने वाले समय में यह और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर हमने विकास को गति देने के उपायों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो देश अपेक्षाकृत गरीब का गरीब रह जाएगा।

नई दिल्ली। गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगी है। योजना शुरू होने के तीन महीने के भीतर छह लाख से अधिक गरीबों का मुफ्त और कैशलेस इलाज किया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि आंकड़े स्पष्ट तौर पर बताते हैं कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ सुदूरवर्ती इलाकों में भी गरीब लोगों को मिल रहा है।स्वास्थ्य मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे गरीब परिवारों को इस योजना की जानकारी मिल रही है, इसका लाभ उठाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां तीन महीने में लगभग 31 लाख ई-कार्ड लाभार्थियों को दिए गए थे, वहीं पिछले 24 घंटे में 1.21 लाख ई-कार्ड जारी किए गए हैं। इस दौरान लगभग 10 हजार गरीब इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती हुए हैं।इस योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सभी गरीब परिवारों को पत्र भेजा जा रहा है। अभी तक 6.45 परिवारों को यह पत्र भेजा जा चुका है। मोदी खुद समय-समय पर इस योजना की निगरानी कर रहे हैं। उनका स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी गरीब पैसे की कमी के कारण इलाज से वंचित नहीं रह पाए।इस योजना के तहत गरीबों के इलाज पर आने वाले खर्च के भुगतान के लिए अस्पतालों को लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ रहा है। इसके तहत अस्पतालों को 15 दिन के भीतर पूरा भुगतान किया जा रहा है। अभी तक गरीबों के इलाज पर कुल 817 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इनमें 472 करोड़ रुपये अस्पतालों को दिए जा चुके हैं। जेपी नड्डा के अनुसार, आयुष्मान भारत के तहत शुरू की गई प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पहले दिन से ही उन गरीबों के लिए एक विश्वास बनकर उभरी है, जिनका परिवार इलाज के बोझ से टूट जाता था या फिर वे इलाज से ही वंचित रह जाते थे।राष्ट्रपति ने की आयुष्मान भारत योजना की तारीफ: करीमनगर (तेलंगाना), प्रेट्र : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आयुष्मान भारत योजना की सराहना करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक संसाधनों की कमी से कोई भी इलाज से वंचित नहीं रहे। कोविंद ने बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए सार्वजनिक, नगर निगम, परमार्थ अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और वेलनेस क्लीनिकों को मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली। 2019 आने वाला है और ऐसे वक़्त में आप अपने वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक रिव्यू कर सकते हैं कि आपको 2018 में अपने वित्त को पूरा करने में कितनी सफलता मिली है। एक जर्नल या मनी मैनेजमेंट एप के जरिए अपने खर्चों को ट्रैक करें। इस दिसंबर में अपने वार्षिक खर्च और निवेश की सावधानीपूर्वक निगरानी करके आप नए साल में बेहतर स्थिति में खुद को स्थानांतरित कर सकते हैं। हम इस खबर में बता रहे हैं कि आपको नए साल में वित्त को पूरा करने के लिए क्या करना चाहिए।अपने खर्चों को मजबूत करें: आप देखें कि आपने कहां ज्यादा खर्च किया है और आपको कहां कटौती करने की जरूरत है। इसका मतलब यह नहीं की आप मुश्किल में जिएं बल्कि यह सुनिश्चित करना कि आप जरूरत से ज्यादा खर्च तो नहीं कर रहे। आप जो पैसे बचाएंगे वो आपके निवेश पोर्टफोलियो में जुड़ सकता है या आपके आपातकालीन खजाने को बढ़ा सकता है। अपने नेटवर्थ के बारे में एक स्पष्ट लक्ष्य तय करें कि आने वाले वर्ष में आपको कैसे आगे बढ़ना है।
अपने निवेश पोर्टफोलियो का मूल्यांकन करें: सुनिश्चित करें कि आप निवेश के रूप में अल्पकालिक या दीर्घकालिक पूंजी लाभ प्राप्त करने के लिए निवेश कर रहे हैं। बाजार के रुझानों पर ध्यान दें और अपने स्टॉक, बॉन्ड या वैकल्पिक निवेश को बेचने के बारे में निर्णय लें। सुनिश्चित करें कि आपकी संपत्ति योजना और वर्तमान पोर्टफोलियो भी एक साथ हैं।उदाहरण के लिए, यदि आप 2019 में शादी करने की सोच रहे हैं, तो विवाह म्युचुअल फंड जैसे 1 साल के निवेश विकल्प में निवेश करें, इसके अलावा शादी के खर्चों को बचाने पर विचार करें।
वित्तीय सलाहकार से बात करें: अपने वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। वित्तीय सलाहकार आपके लाभ को ज्यादा करने के लिए बेहतर पोर्टफोलियो समायोजन करने में आपकी सहायता कर सकता है। इसके अलावा, आप मौजूदा निवेश बेच सकते हैं या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ योजनाओं में निवेश कर सकते हैं जो टैक्स पर लाभ प्रदान करते हैं और आपकी बचत बढ़ाते हैं।
2019 के लिए मूल्यांकन: एक नई वित्तीय योजना बनाने से पहले अपनी वर्तमान स्थिति का आकलन करें और देखें कि आपके लिए नए साल में क्या बेहतर रहेगा। आप जब अपने वित्त की समीक्षा करेंगे तो आने वाले साल में नई चुनौतियों से लड़ने में मदद मिलेगी।

 

नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग स्पेक्ट्रम की खरीद-फरोख्त के नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रहा है। टेलीकॉम सेक्टर में वित्तीय संकट दूर करने के लिए एक समूह द्वारा सुझाए गए उपायों में से एक यह भी है।टेलीकॉम सेक्टर की वित्तीय समस्याओं पर विचार करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह (आइएमजी) बनाया गया था। आइएमजी ने दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया कि इसके बारे में वह समुचित स्पष्टीकरण दे सकता है कि स्पेक्ट्रम के व्यापार से मिलने वाले लाभ को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) की गणना के लिए कंपनी के राजस्व में जोड़ा जाएगा।सिन्हा ने राज्यसभा में बताया कि दूरसंचार आयोग ने विभाग को निर्देश दिया था कि वह गाइडलाइन में संशोधन के बारे में विधिक राय ले सकता है। इसके बाद विधिक राय ली गई और कानून के मुताबिक ट्राई से सिफारिशें ली गईं। फिर यह मामला वित्त मंत्रालय को भेज दिया गया। उससे टिप्पणी मिल गई है। इस समय दूरसंचार विभाग इस पर गौर कर रहा है।आइएमजी की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के भुगतान के लिए किस्तें 10 से बढ़ाकर 16 करने का विकल्प कंपनियों को दे दिया है। इससे उन्हें भुगतान करने में आसानी होगी। दूरसंचार विभाग आइएमजी की उस सिफारिश पर काम कर रहा है जिसमें टेलीकॉम कंपनियों को वायरलेस इक्विपमेंट लाइसेंसधारकों को किसी भी सर्किल में ट्रांसफर करने के लिए सिर्फ सूचना देनी होगी।
नई तकनीक से मिली 500 एमबी की डाउनलोड स्पीड: भारती एयरटेल और स्वीडन की कंपनी एरिक्सन ने दावा किया है कि एक नई तकनीक के लाइव ट्रायल के दौरान स्मार्टफोन पर 500 एमबीपीएस की ब्रॉडबैंड डाउनलोन स्पीड मिली है। दोनों कंपनियों ने संयुक्त बयान में कहा कि बेस स्टेशन से 180 मीटर की दूरी पर इनडोर माहौल में यह स्पीड हासिल की गई। दोनों कंपनियों ने 4जी नेटवर्क पर लाइसेंस्ड एसिस्टेड एक्सेस (एलएए) तकनीक का देश में पहला ट्रायल संयुक्त रूप से किया।

इकाई लगाने पर एपल से होगी वार्ता

नई दिल्ली। वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि वह अगले महीने दावोस में अमेरिका दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एपल के शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात करेंगे और भारत में निर्माण इकाई लगाने के बारे में विचार विमर्श करेंगे।उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ बातचीत जारी है। देश में उत्पादन इकाई लगाने के लिए एपल की मांगों पर सरकार विचार कर सकती है। उन्होने एक इंटरव्यू में बताया कि हम एपल के साथ वार्ता कर रहे हैं। अगर वह सहमत होंगे तो हम भारत में एपल की उत्पादन इकाई स्थापित करवाने को इच्छुक हैं। जनवरी में हम कंपनी के शीर्ष प्रबंधन से बात करेंगे।प्रभु ने कहा कि करीब दो-तीन साल पहले एपल ने प्रस्ताव दिया था। तब से आज हमारे लिए और उनके लिए स्थितियां बदल चुकी हैं। इस मसले पर विचार करके फैसला करने के लिए यह सही समय है। टैक्स व अन्य तरह की रियायतों की कंपनी की मांग के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि हम उन पर विचार कर सकते हैं। अगर एपल भारत आती है तो हमें उसका स्वागत करते हुए खुशी होगी।दुनिया भर में लोकप्रिय आइफोन और आइपैड की निर्माता कंपनी एपल इंक ने देश में उत्पादन इकाई लगाने के लिए कुछ रियायतों की मांग की थी। उसने स्मार्टफोन के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पुर्जे, उपकरण और अन्य वस्तुओं पर 15 साल के लिए शुल्क रियायत की मांग की थी। कंपनी ने 30 फीसद स्थानीय खरीद की शर्त में छूट के अलावा स्थानीय स्तर पर असेंबलिंग के लिए डिवाइस की कंपलीटली-नॉक्ड-डाउन और सेमी-नॉक्ड-डाउन यूनिट पर शुल्क घटाने की मांग की थी।एपल खुद डिवाइस नहीं बनाती है बल्कि वह अनुबंधित निर्माताओं से बनवाती है। वह चीन, जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में खुद के रिटेल स्टोर से बिक्री करती है। भारत वह खुद के स्टोर से डिवाइस नहीं बेच रही है बल्कि वह रेडिंगटन और इनग्राम माइक्रो के जरिये बिक्री कर रही है।वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि ई-कॉमर्स पॉलिसी के नए ड्राफ्ट में मूल्य व डिस्काउंट में पारदर्शिता को बढ़ावा, और रिटेलर व उपभोक्ता हितों के संरक्षण समेत कई मसलों पर फोकस होगा। औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग (डीआइपीपी) नए ड्राफ्ट पर काम कर रहा है और अगले दो-तीन सप्ताह में आम लोगों की राय जानने के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। प्रभु के अनुसार ई-कॉमर्स में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जाएगा। इस क्षेत्र का लाभ उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को मिलना चाहिए।

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आइडीबीआइ में एलआइसी द्वारा 51 फीसद हिस्सेदारी खरीदने संबंधी सौदे को चुनौती देने वाली एक याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। यह याचिका ऑल इंडिया आइडीबीआइ ऑफिसर्स एसोसिएशन की तरफ से दाखिल की गई थी। मुख्य न्यायधीश राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इससे पहले एकल सदस्यीय पीठ ने भी सभी पहलुओं पर विचार करने…
नई दिल्ली। कमाई के साथ लोग बचत भी करना चाहते हैं। इसके लिए लोगों के पसंदीदा निवेश विकल्प में से एक फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम भी है। दरअसल एफडी को लोग ज्यादा सुरक्षित और बेहतर मानते हैं। लेकिन इसमें निवेश के अपने खतरे भी हैं। हम इस खबर में आपको ऐसे ही कुछ खतरों से अवगत करा रहे हैं।लिक्विडिटी का खतरा: वैसे तो एफडी में फंड की उपलब्धता आसान रहती है।…

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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