कारोबार

कारोबार (1884)

नई दिल्ली।लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें सितंबर महीने से बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्‍ते (Dearness Allowance, DA) पर लगी रोक को हटाने का फैसला लिया है। साथ ही सरकार पेंशनरों के लिए महंगाई राहत (Dearness relief) पर लगी रोक को हटाने के लिए भी तैयार हो गई है। National council (Staff side) ने पत्र जारी कर यह जानकारी साझा की है।नेशनल काउंसिल/जेसीएम के कर्मचारी पक्ष के सचिव शिव गोपाल मिश्र ने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का भुगतान सितंबर माह में एरियर के साथ होगा। मिश्र ने बताया कि कैबिनेट सचिव DA और DR को जारी करने को तैयार हो गए हैं। इसका मतलब है कि अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों का जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 का देय महंगाई भत्‍ता और महंगाई राहत की तीनों किस्‍तों को जुलाई 2021 में आने वाले महंगाई भत्‍ते के आंकड़े के साथ जोड़कर दिया जाएगा। इसके साथ ही जुलाई और अगस्‍त 2021 का एरियर भी प्राप्त होगा।सरकार के इस कदम से सितंबर महीने से केद्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी प्राप्त होगी। आपको बता दें केंद्रीय कर्मचारियों को अभी 17 फीसद डीए मिल रहा है। जनवरी 2019 में यह बढ़कर 21 फीसद हो गया था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण बढ़ोतरी को जून 2021 तक फ्रीज कर दिया गया।अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के हिसाब से देखें, तो जून 2020 में डीए की रकम 24 फीसद, दिसंबर 2020 में 28 फीसद और जुलाई 2021 में 31 फीसद तक चली जाएगी। इस हिसाब से सितंबर महीने से केंद्रीय कर्मचारियों को 31 फीसद डीए मिलेगा। आइए अब जानते हैं कि एक 18,000 रुपये बेसिक सैलरी पाने वाले केंद्रीय कर्मचारी को डीए में बढ़ोत्तरी से कितना फायदा होगा।

Level 1 Basic pay = 18000 रुपए

31% DA = 5580 रुपए महीना

Yearly DA = 66,960 रुपए

इस गणना के अनुसार, अब 18,000 रुपये बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी को महंगाई भत्ते के रूप में महीने के 5580 रुपये और साल के 66,960 रुपये मिलेंगे। अभी 17 फीसद डीए के हिसाब से इस कर्मचारी को 3060 रुपये महीने महंगाई भत्ते मिलता है, जो साल भर का 36,720 रुपये है। इस हिसाब से DA Hike के कारण इस कर्मचारी को महीने के 2520 रुपये और साल के हिसाब से 30,240 रुपये अधिक प्राप्त होंगे।

नई दिल्ली। अगर आप देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहक हैं, तो यह खबर आपके काम की है। State Bank of India ने बेसिक सेविंग बैंक डिपोजिट (BSBD) अकाउंट के लिए कई तरह के शुल्क में बदलाव किया है। बैंक BSBD अकाउंट होल्डर्स से एक महीने में चार बार से ज्यादा कैश निकालने पर एक शुल्क वसूलेगा। इसके साथ ही बैंक 10 चेक से ज्यादा के चेकबुक के लिए भी शुल्क लेगा। बैंक इन सेवाओं के लिए 15 रुपये से 75 रुपये का शुल्क 'एडिशनल वैल्यू एडेड सर्विस' फीस के रूप में लेगा। ये नए चार्ज एक जुलाई, 2021 से प्रभावी होंगे।BSBD अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्रांच, एटीएम और सीडीएम (कैश डिस्पेंसिंग मशीन) के जरिए नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और ट्रांसफर ट्रांजैक्शन बिल्कुल निशुल्क होगा।भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कहा है कि वह महीने में चार बार निशुल्क नकदी निकासी के बाद बैंक की शाखाओं, एसबीआई एटीएम या किसी अन्य बैंक के एटीएम से पैसे निकालने पर हर ट्रांजैक्शन पर 15 रुपये + जीएसटी शुल्क के रूप में लेगा।चेकबुक सर्विस की बात की जाए तो एक वित्तीय वर्ष में 10 cheque leaves वाला चेकबुक बिल्कुल निशुल्क मिलेगा। उसके बाद 10 cheque leaves वाले चेकबुक के लिए आपको 40 रुपये + जीएसटी देना होगा। इसी तरह 25 cheque leaves के लिए आपको 75 रुपये + जीएसटी देना होगा। 10 cheque leaves के इमरजेंसी चेकबुक के लिए आपको 50 रुपये + जीएसटी का भुगतान करना होगा।पब्लिक सेक्टर बैंक ने कहा, ''वरिष्ठ नागरिकों को (चेकबुक सेवाओं) पर छूट मिली हुई है।''

 

कौन खुलवा सकता है BSBD Account:-अगर आपके पास वैध केवाईसी डॉक्यूमेंट है तो आप BSBD Account खुलवा सकते हैं। इस तरह के अकाउंट का लक्ष्य समाज के गरीब एवं वंचित तबकों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है।आईआईटी बंबई के इस साल अप्रैल के एक स्टडी के मुताबिक एसबीआई को 2015-20 के दौरान 12 करोड़ BSBD अकाउंटहोल्डर्स से सर्विस चार्ज के रूप में 300 करोड़ रुपये की आमदनी हुई।

नई दिल्‍ली। भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडाणी (Gautam Adani net worth) एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति होने का प्रतिष्ठित टैग खो चुके हैं। इस हफ्ते शेयर बाजारों में गिरावट का सामना कर रहे अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी मई में ही दूसरे सबसे अमीर अरबपति बने थे। FPI के स्वामित्व को लेकर चिंता के कारण अडानी को महज 4 दिनों में 12 अरब डॉलर से ज्‍यादा का नुकसान हुआ है।Forbes रियल टाइम बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस सप्ताह की शुरूआत में अडाणी की कुल संपत्ति 74.9 बिलियन डॉलर से घटकर 62.7 बिलियन डॉलर हो गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के बाद चीन के फार्मास्युटिकल मैग्नेट झोंग शानशान ने एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति का अपना स्थान फिर से हासिल कर लिया है।अमीरों की सूची में झोंग शानशान की संपत्ति 68.9 अरब डॉलर है जबकि अंबानी की 85.6 अरब डॉलर है। अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पावर, अडाणी टोटल गैस, अडाणी ट्रांसमिशन, अडाणी पोर्ट्स और अडाणी ग्रीन एनर्जी के शेयर एफपीआई के स्वामित्व की रिपोर्ट के बाद सोमवार को गिरने लगे।फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के मुताबिक अडाणी को 4 दिनों में लगभग 12 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर नजर रखता है। सप्ताह की शुरुआत में अडाणी की कुल संपत्ति 77 अरब डॉलर से कुछ ही ऊपर थी।मई में ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स ने बताया था कि संपत्ति के मामले में चीन को झोंग शानशान (Zhong Shanshan) को पछाड़कर अडाणी ने यह स्थान हासिल किया था। अडाणी समूह के कंपनियों के शेयरों में बीते कुछ माह में जबरदस्त तेजी की बदौलत गौतम अडाणी की पोजिशन लगातार सुधरी। वह ब्लूमबर्ग की लिस्ट में 14वें स्थान पर पहुंच गए थे और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी 13वें स्थान पर थे। इस तरह अडाणी ब्लूमबर्ग लिस्ट में अंबानी से एक पायदान ही पीछे रह गए थे।Bloomberg Billionaire Index के मुताबिक मई में अडाणी का कुल नेट वर्थ 66.5 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया था। इस साल अडाणी की संपत्ति में 32.7 डॉलर का इजाफा हुआ। वहीं, अंबानी की कुल संपत्ति 76.5 बिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं, शानशान के कुल नेट वर्थ का मूल्यांकन 63.6 बिलियन डॉलर किया गया था।

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा रखे गए कथित काले धन पर हाल ही में प्रकाशित समाचार मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है। मंत्रालय ने शनिवार को ट्वीट कर यह बात कही। मंत्रालय ने कहा कि स्विस बैंकों में जमा राशि में वृद्धि या कमी को सत्यापित करने के लिए स्विस अधिकारियों से सूचना मांगी गई है।मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि शुक्रवार को मीडिया में कई ऐसी रिपोर्ट्स प्रकाशित हुईं, जिनमें कहा गया कि स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का पैसा साल साल 2020 के अंत तक बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये हो गया है, जो साल 2019 के अंत तक 6,625 करोड़ रुपये था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि दो साल से गिरावट के ट्रेंड के उलट इस दौरान स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में बढ़ोत्तरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि यह पिछले 13 साल में जमा का सबसे बड़ा आंकड़ा हैमंत्रालय ने आगे कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स इस तथ्य की ओर इशारा करती हैं कि रिपोर्ट किए गए आंकड़े बैंकों द्वारा स्विस नेशनल बैंक (SNB) को बताए गए आधिकारिक आंकड़े हैं और वे स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा रखे गए कथित काले धन की मात्रा का संकेत नहीं देते हैं। इसके अलावा, इन आंकड़ों में वह पैसा शामिल नहीं है, जो भारतीयों, एनआरआई या अन्य लोगों के पास स्विस बैंकों में तीसरे देश की संस्थाओं के नाम पर हो सकता है।मंत्रालय ने आगे कहा, 'हालांकि, ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि वास्तव में साल 2019 के आखिर से घटी है। प्रत्ययी संस्थाओं के माध्यम से रखा गया धन भी 2019 के आखिर से आधे से अधिक रह गया है। सबसे बड़ी वृद्धि "ग्राहकों से बकाया अन्य राशि" में है। ये बांड, प्रतिभूतियों और विभिन्न अन्य वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में हैं।'मंत्रालय ने विज्ञप्ति में आगे बताया, 'बता दें कि भारत और स्विटजरलैंड कर मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर बहुपक्षीय सम्मेलन (MAAC) के हस्ताक्षरकर्ता हैं और दोनों देशों ने बहुपक्षीय सक्षम प्राधिकरण समझौते (MCAA) पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार दोनों देशों के बीच कैलेंडर वर्ष 2018 से ही सालाना वित्तीय खाते की जानकारी साझा करने के लिए सूचना का स्वत: आदान-प्रदान ( AEOI) हो रहा है।'मंत्रालय ने कहा, 'दोनों देशों के निवासियों के संबंध में वित्तीय खाते की जानकारी का आदान-प्रदान साल 2019 और 2020 में भी हुआ है। वित्तीय खातों की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को देखने पर (जिसका विदेशों में अघोषित संपत्ति के जरिए कर चोरी पर महत्वपूर्ण निवारक प्रभाव है) स्विस बैंकों में जमा में वृद्धि की कोई महत्वपूर्ण संभावना नहीं दिखती है।'गौरतलब है कि कांग्रेस ने शुक्रवार को स्विस बैंकों में भारतीयों की ज राशि बढ़ने की रिपोर्ट्स पर सरकार को घेरा था। पार्टी ने शुक्रवार को कहा था कि सरकार श्वेत पत्र लाकर देशवासियों को बताए कि यह पैसा किनका है और विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर अजीत मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया है, जिसका काम सरकार को न्यूनतम मजदूरी और नेशनल फ्लोर वेज के निर्धारण पर तकनीकी जानकारी और सिफारिशें प्रदान करना है। इस विशेषज्ञ समूह का कार्यकाल तीन वर्ष है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने शनिवार को एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी।मंत्रालय ने आगे कहा, 'यह ध्यान में आया है कि प्रेस के कुछ वर्गों और कुछ हितधारकों ने इसे सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी और नेशनल फ्लोर वेज के निर्धारण में देरी के प्रयास के रूप में माना है।'मंत्रालय ने विज्ञप्ति में कहा, 'यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है और विशेषज्ञ समूह जल्द से जल्द सरकार को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।'मंत्रालय ने कहा कि विशेषज्ञ समूह का कार्यकाल तीन वर्ष इसलिए रखा गया है, ताकि न्यूनतम मजदूरी और नेशनल फ्लोर वेज के निर्धारण के बाद भी सरकार आवश्यकता पड़ने पर न्यूनतम मजदूरी और नेशनल फ्लोर वेज से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ समूह से तकनीकी इनपुट अथवा सलाह ले सके। इस समूह की पहली बैठक 14 जून, 2021 को हुई और दूसरी बैठक 29 जून, 2021 को निर्धारित है।यहां बताते चलें कि आने वाले कुछ महीनों में चारों श्रम संहिताएं (Labour codes) लागू हो जाने की संभावना है। केंद्र सरकार इन लेबर कोड्स को अमली जामा पहनाने की तैयारी कर रही है। इन संहिताओं के लागू होने से कर्मचारियों का इन-हैंड वेतन घट जाएगा। साथ ही कंपनियों को कर्मचारियों के पीएफ फंड में अधिक योगदान करना पड़ेगा। इन कानूनों के लागू होने से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्तों और पीएफ योगदान की गणना में बड़ा बदलाव आएगा।इन 4 लेबर कोड्स में वेतन/मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर संहिता और सामाजिक व व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं।

नई दिल्ली। घोटालों से धवस्त हुए पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) के खाताधारकों के लिए लगभग एक साल नौ महीने के बाद अच्छी खबर सामने आई। आरबीआइ ने एक वित्तीय संस्थान सेंट्रम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (Centrum Financial Services Limited) की तरफ से पीएमसी बैंक के अधिग्रहण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सेंट्रम फाइनेंशियल ने पिछले वर्ष के अंत में आरबीआइ (RBI) के पास यह प्रस्ताव भेजा था। इस अधिग्रहण को अमली जामा पहनाने के लिए केंद्रीय बैंक ने सेंट्रम को स्मॉल फाइनेंस बैंक का दर्जा दे दिया गया है। बहरहाल, इस बैंक में फिक्स्ड जमा रखने वाले हजारों ग्राहकों को अब जल्द उनकी राशि मिल सकेगी।मार्च, 2020 में पीएमसी के पास ग्राहकों की 10,727 करोड़ रुपये की जमा राशि थी, जबकि इसने 4,453 करोड़ रुपये का लोन भी दिया हुआ है। इसकी बैंकिंग गतिविधियों पर आरबीआइ ने सितंबर, 2019 से रोक लगाई हुई है। बाद में पीएमसी में कई तरह की वित्तीय अनिमितताओं का भी पता चला, जिसकी जांच दूसरी एजेंसियां कर रही हैं।बैंक पर लंबे समय तक फंसे कर्जे (NPA) को छिपाने का भी आरोप है। पीएमसी के पूर्व सीईओ जॉय थॉमस ने यह स्वीकार किया था कि कुल वितरित लोन का 70 फीसद सिर्फ एचडीआइएल (HDIL) समूह को दिया गया था। लोन वितरण के लिए फर्जी खाते खोले गए थे।आरबीआइ ने पीएमसी बैंक के संचालन पर रोक लगाते हुए शुरू में इसके ग्राहकों को सिर्फ 1,000 रुपये निकालने की अनुमित दी थी जिसको लेकर काफी राजनीतिक विवाद भी हुआ था। बाद में ग्राहकों को ज्यादा राशि निकालने की छूट मिली थी। सूचना है कि सेंट्रम फाइनेंशियल भारत-पे नाम की एक प्रमुख पेमेंट पोर्टल के साथ मिल कर पीएमसी का संचालन करेगी।पीएमसी घोटाले के बाद केंद्र सरकार ने बैंकिंग नियमों में कई तरह के बदलाव वाले कदम उठाए थे। सबसे पहले शहरी सरकारी बैंकों पर नियमन को सख्त किया गया और इन्हें सीधे तौर पर आरबीआइ के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई। साथ ही बैंकों में जमा राशि की बीमा सुरक्षा एक लाख रुपये से बढ़ा कर पांच लाख रुपये करने का एलान भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से किया गया था।बहरहाल, आरबीआइ की सैद्धांतिक अनुमति मिलने के बाद भी अभी यह नहीं बताया गया है कि सेंट्रम फाइनेंशियल को पीएमसी के अधिग्रहण के लिए कितनी राशि देनी पड़ेगी और बैंक के किन-किन दायित्वों का बोझ उस पर डाला जाएगा। मोटे तौर पर पीएमसी की सारी संपत्तियां और दायित्व सेंट्रम को स्थातांतरित होंगी।

नई दिल्‍ली। पुरानी पेंशन योजना (Old Pension scheme) को लेकर अच्‍छी खबर है। Uttar Pradesh के करीब 5000 शिक्षकों ने पुरानी पेंशन की बड़ी लड़ाई जीत ली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार को जूनियर हाईस्‍कूल में तैनात शिक्षकों और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का फायदा देने का आदेश दिया है। इस आदेश से हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों में जबर्दस्‍त खुशी है। उनका कहना है कि…
नई दिल्‍ली। Mutual Fund में निवेश किया है तो आपकी रकम में जबर्दस्‍त बढ़ोतरी हुई है। खासकर Tax saver Mutual Fund वालों की तो बल्‍ले-बल्‍ले हो गई है। क्‍योंकि ज्‍यादातर Tax saver Fund हाउस ने 1 साल में 50 फीसद से ज्‍यादा रिटर्न दिया है। इनमें Invesco India Tax Dir, Axis Long Term, Kotak Tax Saver Dir, Canara Rebeco Equity Tax Saver Direct Fund, DSP Tax Saver Direct Fund, BOI…
नई दिल्ली। मई में कोविड-19 की दूसरी लहर से घरेलू हवाई यात्रा और विमानन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। मई में 21.15 लाख यात्रियों ने घरेलू मार्गो पर हवाई यात्रा की। यह संख्या अप्रैल में 57.25 लाख यात्रियों के मुकाबले 63 प्रतिशत कम है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार मार्च 2021 में 78.22 लाख लोगों ने देश के भीतर हवाई यात्रा की। किस एयरलाइन में कितने लोगों ने किया…
नई दिल्‍ली। Covid 19 के कारण बहुत से लोगों का काम-धंधा छूट गया है। इसलिए केंद्र सरकार ने प्रवासी नागरिकों को Ration मुहैया कराने के लिए 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (One Nation One Ration card) योजना शुरू की है। इसके तहत आर्थिक तंगी की मार झेल रहे या गरीब लोगों को सरकार बहुत ही कम कीमत में गेंहू, चावल जैसे जरूरी अनाज मुहैया कराती है। इस योजना का लाभ…
Page 2 of 135

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

pr checker

ताज़ा ख़बरें

data-ad-type="text_image" data-color-border="FFFFFF" data-color-bg="FFFFFF" data-color-link="0088CC" data-color-text="555555" data-color-url="AAAAAA">