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नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018-19 बीत जाने के बाद अब एसेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए आईटीआर फाइलिंग की तारीख भी नजदीक आती जा रही है। आयकर विभाग की ओर से इस वित्त वर्ष के लिए आईटीआर फॉर्म्स को भी नोटिफाई किया जा चुका है। कुछ फॉर्म में बदलाव भी किए गए हैं। ऐसे में अगर आप भी खुद या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए आईटीआर फॉर्म्स (आकलन वर्ष (2019-20) भरवाने की योजना बना रहे हैं तो आपको यह बात मालूम होनी चाहिए कि इसके लिए किन किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है।
फॉर्म-16: अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आप इसके बारे में जरूर जानते होंगे। वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद कंपनियों की ओर से उनके कर्मचारियों को यह फॉर्म जरूर दिया जाता है। यह एक तरह का टीडीएस सर्टिफिकेट होता है, जो आईटीआर फाइलिंग के दौरान सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है। नियोक्ता की ओर से अपने कर्मचारियों को इसे जारी करना अनिवार्य होता है। यह फॉर्म दो भागों में होता है जिसमें एक वित्त वर्ष के दौरान आपके नियोक्ता की ओर सैलरी में टैक्स कटौती का जिक्र होता है।
बैंक और पोस्ट ऑफिस के इंटरेस्ट सर्टिफिकेट: इस बार के आईटीआर फॉर्म्स में करदाताओं से इंटरेस्ट इनकम के सोर्स की भी जानकारी मांगी जाएगी जैसे कि सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज या फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज या फिर अन्य इनकम पर होने वाला ब्याज। आमतौर पर अर्जित ब्याज आय टैक्सेबल होती है, लेकिन अगर ब्याज आय एक वर्ष के दौरान 10,000 रुपये तक है तो आप आयकर की धारा 80TTA के अंतर्गत इस पर क्लेम कर सकते हैं।
फॉर्म-16A/ फॉर्म-16B/ फॉर्म-16C: अगर आपकी सैलरी के अलावा आपको किए गए अन्य भुगतान पर कटौती की जाती है, जैसे कि एफडी और रेकरिंग डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज तो मौजूदा टैक्स नियमों के हिसाब से निर्धारित कानूनी सीमाओं के ऊपर होने की स्थिति में आपका बैंक ऑपको फॉर्म-16A जारी करेगा। वहीं दूसरी ओर अगर आपने किसी संपत्ति की बिक्री की है तो आपका खरीदार आपको फॉर्म-16B जारी करेगा जिसमें आपको किए गए भुगतान पर टीडीएस कटौती का जिक्र होगा। अगर आप अपने मकान को किराए पर उठाते हैं तो आपको अपने किराएदार से फॉर्म 16C देने को कहना चाहिए।
फॉर्म 26AS: फॉर्म 26AS में आपके समेकित करों का वर्णन होता है। ये आपकी टैक्स पासबुक होती है। इसमें आपके पैन पर की गईं सभी टैक्स कटौतियों की जानकारी होती है। इसमें
ये जानकारियां शामिल होती हैं:
-आपके नियोक्ता की ओर से की गई टीडीएस कटौती
-आपके बैंक की ओर से की गई टीडीएस कटौती
-किसी और संस्थान की ओर से आपको किए गए भुगतान पर कटौती
-आपकी ओर से वर्ष 2018-19 के लिए किए गए एडवांस टैक्स के भुगतान की जानकारी
-आपकी ओर से किए गए सेल्फ एसेसमेंट टैक्स भुगतान की जानकारी
टैक्स बचाने वाले निवेश की जानकारी (प्रूफ): वित्त वर्ष 2018-19 में आपकी ओर से किए गए सभी टैक्स बचत निवेश और आपकी ओर से किए गए खर्चे धारा 80C, 80CCC और 80CCD के तहत कटौती के लिए पात्र होते हैं। इन तीनों सेक्शन के अंतर्गत आप एक वित्त वर्ष के दौरान सिर्फ 1.50 लाख रुपये की टैक्स बचत के लिए ही क्लेम कर सकते हैं।
आपको इन निवेश सबूतों को अपने साथ रखना होगा।
-एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ)
-पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
-इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में निवेश
-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम (एलआईसी)
-नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस)
80D से 80U तक किए गए निवेश से जुड़े दस्तावेज: आयकर की धारा 80सी के अंतर्गत टैक्स सेविंग और खर्चों के लिए किए गए निवेश दस्तावेजों के अलावा अन्य खर्चे भी होते हैं जिन पर आप टैक्स की बचत कर सकते हैं जैसे कि हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम। आपको 80D से 80U तक किए गए निवेश से जुड़े दस्तावेज अपने साथ रखने चाहिए।
कैपिटल गेन से जुड़े दस्तावेज: अगर आपको प्रॉपर्टी, म्युचुअल फंड और इक्विटी शेयर की बिक्री के जरिए कैपटल गेन प्राप्त हुआ है तो आपको इसके दस्तावेज भी अपने साथ रखने चाहिए। आईटीआर फाइलिंग के दौरान आपको इसका उल्लेख करना होगा।
आधार कार्ड: आधार कार्ड की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी आईटीआर फाइलिंग के लिए पैन और आधार की लिंकिंग को अनिवार्य रखा है। ऐसा न होने की सूरत में आपका आईटीआर प्रोसेस नहीं होगा। यानी अगर आपने कोई डिडक्शन क्लेम किया है तो आपको नुकसान हो सकता है। आयकर अधिनियम के सेक्शन 139AA के मुताबिक आयकर फाइलिंग के दौरान आधार का उल्लेख करना जरूरी है।
सभी बैंकों की डिटेल: अगर आपके काफी सारे बैंकों में खाते खुले हुए हैं तो आपको सभी बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी। ऐसा न करने की सूरत में आप मुश्किलों में भी आ सकते हैं। इसलिए आईटीआर फाइलिंग के दौरान इसकी जानकारी देना न भूलें।
सैलरी स्लिप: इस बार के आईटीआर फॉर्म्स में आपको अपनी सैलरी स्लिप भी उपलब्ध करवानी होगी जिसमें आपकी सैलरी ब्रेकअप का जिक्र होगा। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, डियरनेस अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस जैसी तमाम जानकारियां होंगी।

नई दिल्ली। हर किसी का सपना होता है कि उसके पास अपनी खुद की कार हो। आसानी से उपलब्ध होने वाले लोन के दौर में बेशक यह काम आसान हो गया है, लेकिन इसका इंश्योरेंस प्रीमियम कभी-कभी बोझिल सा जान पड़ने लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कार का महंगा प्रीमियम अक्सर हमारे मासिक बजट को बिगाड़ देता है। सड़क पर चलने वाली गाड़ियों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य है। हालांकि, कुछ टिप्स को अपनाकर आप अपनी कार के इंश्योरेंस प्रीमियम पर कुछ राहत पा सकते हैं।
अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम की करें तुलना: अपनी कार का बीमा करवाने से पहले अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसियों की आपको तुलना करनी चाहिए। कई बीमा कंपनियां ऐसी हैं जो सिर्फ मोटर इंश्योोरेंस ही ऑफर कर रही है। प्रीमियम की तुलना करने के लिए आप विभिन्न वेबसाइट का सहारा ले सकते हैं। ऐसा कर आप आसानी से तय कर पाएंगे कि किस बीमा कंपनी की पॉलिसी आपकी कार के लिए मुफीद होगी और आपकी जेब पर कम बोझ डालेगी।
नो क्लेम बोनस का फायदा सोच समझकर लें: विशेषज्ञों का मानना है कि जब आपकी गाड़ी डैमेज हो तो आपको रिपेयर का एक इस्टीमेट जरूर लेना चाहिए। अगर आपकी ओर से भुगतान की जाने वाली राशि क्लेम करने वाली राशि से कम है तो उस सूरत में आप क्लेम को छोड़ सकते हैं। अगर आप छोटे क्लेम को नजरअंदाज कर देते हैं और छोटे रिपेयर्स का खुद भुगतान करते हैं तो रिन्युअल के समय आपको प्रीमियम भी कम देना होगा। जानकारी के लिए बता दें कि नो क्लेम बोनस वह डिस्काउंट होता है जो कि व्यक्ति को उसके मोटर इंश्योरेंस के रिन्यूअल के दौरान प्रीमियम पर दिया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर इंश्योरेंस लेने वाला व्यक्ति साल भर कोई भी इंश्योरेंस क्लेम न करे तो कंपनी उसे नो क्लेम बोनस का फायदा देती है।
अपनी गाड़ी की टूट-फूट नेटवर्क गैरेज पर ही ठीक कराएं: अगर आपकी गाड़ी में कोई टूटफूट होती है तो बेहतर यही रहेगा कि आप उसे रिपेयरिंग के लिए नेटवर्क गैरेज पर ले जाएं। अगर आप ऐसा करते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी आसानी से क्लेम का आंकलन कर सकती है। साथ ही यह सस्ता भी पड़ता है।
उठाएं लॉन्ग टर्म पॉलिसी का फायदा: लॉन्ग टर्म पॉलिसी का चुनाव करना हमेशा आपके लिए फायदेमंद होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह दो से तीन साल तक की कवरेज के साथ साथ 24X7 की रोड असिस्टेंस भी उपलब्ध करवाता है। अगर आप इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव करेंगे तो आप मोटर प्रीमियम पर सिंगल ईयर पॉलिसी की तुलना में खर्चे पर भी बचत कर पाएंगे।
अपनी कार में लगवाइए सेफ्टी डिवाइस: बीमा कंपनियां ऐसी कंपनियों को ज्यादा तरजीह देती हैं जिनमें सेफ्टी डिवाइस लगे होते हैं जैसे कि एंटी थेफ्ट डिवाइस, स्टेयरिंग व्हील लॉक, गियर लॉक या एंटी थेफ्ट अलार्म। ऐसी गाड़ियों के प्रीमियम पर आप 5 फीसद तक की छूट पा सकते हैं।

 

नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक अपने ग्राहकों को सेविंग प्लस अकाउंट की भी पेशकश करता है। यह एक सेविंग बैंक अकाउंट है जो मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट स्कीम (MODS) से जुड़ा हुआ है। इसमें सेविंग बैंक अकाउंट से सीमा से अधिक सरप्लस फंड 1,000 रुपये के गुणकों में खोले गए सावधि जमाओं में ऑटोमैटिकली ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसी के साथ मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट पर लोन भी लिया जा सकता है।
जानिए इस खाते के एमएबी, ब्याज दरें, पात्रता और अन्य नियमों के बारे में:
मासिक औसत शेष (MAB): मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में अकाउंट होल्डर्स के लिए न्यूनतम एमएबी 3,000 रुपये है। अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,000 रुपये और 1,000 रुपये है। जुर्माने से बचने के लिए ग्राहकों को न्यूनतम एमएबी बरकरार रखने की जरूरत होती है।
अकाउंट का संचालन: एसबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, इस अकाउंट का संचालन सिंगल या ज्वाइट के तौर पर किया जा सकता है।
ब्याज दर: एसबीआई सेविंग अकाउंट के लिए निर्धारित ब्याज दर एसबीआई के सेविंग प्लस अकाउंट पर भी लागू होती है। 1 करोड़ रुपये तक की शेष राशि पर मौजूद ब्याज दर 3.5 फीसद है। जबकि 1 करोड़ रुपये से अधिक की रशि पर ब्याज दर 4 फीसद है।एमओडी में न्यूनतम अमाउंट 1,000 रुपये तक 1,000 रुपये के गुणंको में जमा किए जा सकते हैं। अधिकतम सीमा 35,000 रुपये है। एसबीआई के अनुसार, अकाउंट में जमा की अवधि 1 से 5 साल तक है।
अकाउंट की सुविधाएं: सेविंग अकाउंट होल्डर्स को एटीएम कार्ड, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एसएमएस अलर्ट जैसी सभी सर्विस इस अकाउंट के साथ मिलती हैं।

नई दिल्ली। जरा कल्पना कीजिए आपके पास कमाई के सीमित साधन हैं और आपको तत्काल पैसों की जरूरत है, तो आप क्या कीजिएगा। जाहिर तौर पर आप लोन लेने की जुगत भिड़ाएंगे। लेकिन आज के समय में लोन लेना भी आसान काम नहीं रह गया है। बैंक आपको लोन देने के पहले आपके क्रेडिट स्कोर यानी आपके लोन चुकाने की क्षमता को कई बार चेक करता है। उसके बाद जाकर तमाम फॉर्मेलिटीज को पूरा कर वह आपको लोन देने को तैयार होता है। ऐसे में अगर आपके पास खुद का बड़ा सा मकान है तो आपका काम काफी आसान हो सकता है। हम अपनी इस खबर में आपको इसी की पूरी जानकारी दे रहे हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं किराए पर मिलने वाले लोन के बारे में। हमने इस विषय पर टैक्स एक्सपर्ट और इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बलवंत जैन से विस्तार से बात की है।
कौन उठा सकता है किराए के एवज में मिलने वाले लोन का फायदा?
बलवंत जैन ने बताया कि अगर आपके पास कर्मशियल या रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी है तो आप इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसमें प्रॉपर्टी का मालिक एक व्यक्ति या वह संयुक्त ओनर हो सकता है। ज्वाइंट ओनरशिप के मामले में सभी ओनर्स को लोन के लिए आवेदन देना होगा। यह लोन सुविधा ऐसी परिसंपत्तियों के लिए उपलब्ध है जिसे किराए पर दिया जा चुका है और जिसके लिए करार भी किया जा चुका है।
किराए के एवज में लोन लेने का मकसद?
बलवंत जैन बताते हैं कि किराए के एवज में लिए जाने वाले लोन का उद्देश्य भविष्य में किसी भी जरूरत के लिए किया जा सकता है। जैसे कि घर खरीदने के लिए, बिजनेस बढ़ाने के लिए या फिर अपने बच्चों की पढ़ाई या उनकी शादी के लिए। इसके साथ ही इसका इस्तेमाल घर की मरम्मत या प्रॉपर्टी के रेनोवेशन के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही बैंक आपको यह अनुमति भी देता है कि आप इन पैसों का इस्तेमाल अपने मौजूदा लोन के भुगतान के लिए भी करें।
किस तरह की प्रॉपर्टी के किराए पर मिलता है लोन?
आप इस तरह के लोन की सुविधा एक कमर्शियल प्रॉपर्टी पर उठा सकते हैं जिसे या तो किराए पर दिया गया है या फिर किसी पट्टेदार को पट्टे पर दिया गया हो जैसे कि किसी गवर्मेंट अंडरटेकिंग को, किसी बैंक को, इंश्योरेंस कंपनी को या फिर किसी बड़े खुदरा कारोबारी को। आप इस तरह की लोन की सुविधा रेजिडेंशियस प्रॉपर्टी पर भी पा सकते हैं।
किन दस्तावेजों की होती है जरूरत?
इस तरह के लोन के लिए आपको बेसिक केवाईसी डॉक्यूमेंट्स जमा कराने होंगे जैसे कि एड्रेस प्रूफ, आइडेंटिटी प्रूफ आदि। ये आपको एप्लीकेशन फॉर्म के साथ जमा कराने होंगे। बैंक आपके भुगतान की क्षमता का प्रमाणपत्र भी मांग सकता है। अगर आपके पास आईटीआर उपलब्ध नहीं है तो नौकरीपेशा लोगों के लिए फॉर्म 16 ही काफी होगा।

नई दिल्ली। सरकार महिलाओं के लिए खासतौर पर कई बचत योजनाओं की पेशकश करती है। ऐसी योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। गर्ल चाइल्ड से महिला बनने तक के सफर में हायर एजुकेशन की फीस, मेडिकल एक्सपेंस, होम लोन आदि जैसे कई सारे खर्च शामिल होते हैं। बैंक और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियां महिला उद्यमियों को कई प्रकार के बेनिफिट और स्कीम्स उपलब्ध करवाती हैं।
यहां हम उन वित्तीय फायदों के बारे में बात कर रहे हैं जो सरकार की तरफ से महिलाओं को दिए जाते हैं:
कम ब्याज दर पर लोन: महिलाओं को होम लोन, व्हीकल लोन, पर्सनल लोन आदि लोन पर कम ब्याज दर की पेशकश की जाती है। सामान्य दरों और महिलाओं को दी जाने वाली दरों के बीच ब्याज दर में अंतर 5 आधार अंकों से 10 आधार अंकों तक होता है। कई शेड्यूल कमर्शियल बैंक भी वर्किंग वुमेन के लिए स्पेशल सेविंग बैंक अकाउंट और क्रेडिट कार्ड ऑप्शन की पेशकश करते हैं।
कम स्टाम्प शुल्क: प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए महिलाओं के नाम पर खरीदने पर राज्यों की तरफ से स्टांप शुल्क कम है। अगर महिला के नाम पर मकान का रजिस्ट्रेशन होता है तो स्टांप शुल्क सामान्य दरों के मुकाबले 2 से 2.5 फीसद कम हो सकता है।
सुकन्या समृद्धि खाता: भारत सरकार की तरफ से महिलाओं के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया सुकन्या समृद्धि अकाउंट एक लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है। इसमें लाइफ के कई खर्च जैसे 18 वर्ष या उसके बाद हायर एजुकेशन फीस और शादी का खर्च आदि शामिल है। लड़की के माता-पिता या कानूनी अभिभावक 10 साल या उससे कम उम्र में बेटी के नाम पर सुकन्या समृद्धि अकाउंट खोल सकते हैं।अधिकतम दो गर्ल चाइल्ड के लिए यह अकाउंट खोला जा सकता है, जबकि एक साथ जुड़वां लड़कियों ने जन्म लिया है तो अधिकतम 3 सुकन्या समृद्धि अकाउंट भी खोले जा सकते हैं। इस पर 8.6 फीसद की ब्याज दर मिलती है। एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 1,000 रुपये से लेकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। अकाउंट खोलने से 21 साल तक लॉक-इन पीरियड है, अगर अकाउंट होल्डर की शादी 21 साल से पहले ही हो जाती है तो अकाउंट बंद भी किया जा सकता है। माता-पिता या गर्ल चाइल्ड 18 साल की उम्र के बाद हायर एजुकेशन और शादी के लिए बीच में पैसा निकालने के लिए अप्लाई कर सकते हैं

नई दिल्ली। बाजार में बहुत सी ऐसी स्कीम्स मौजूद हैं, जिनमें निवेश करके आप बढ़िया रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। छोटी से लेकर बड़ी स्कीम में निवेश करने वाला निवेशक हमेशा यह जानने को उत्सुक रहता है कि आखिर कितने दिन में उसका पैसा डबल हो जाएगा। कुछ नियमों से जरिए यह भी आसानी से पता किया जा सकता है। यह काम रूल ऑफ 72 के जरिए आसानी से किया जा सकता है। आज हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको इसकी जानकारी दे रहे हैं।
क्या है रूल ऑफ 72?
-रूल ऑफ 72 के मुताबिक यदि आपने एक निश्चित राशि निवेश की है और उस पर आपको सालाना एक तय दर से ब्याज मिलता है तो आप वह ब्याज की दर को 72 से भाग करके यह पता लगा सकते हैं कि कितने दिन में आपका पैसा डबल हो जाएगा।
-उदाहरण के तौर पर आपने बैंक में 50,000 रुपए की एफडी करा रखी है, जिस पर आपको 8 फीसद की दर से सलाना ब्याज मिलता है। तो नियम के मुताबिक (72/8 = 9) नौ वर्षों में आपका पैसा डबल होकर 1,00,000 हो जाएगा।
-इसी तरह अगर आपने सेविंग अकाउंट में 10,000 रुपए जमा कर रखें हैं जिसपर आपको तय 4 फीसद की दर से ब्याज मिलता है तो आपका पैसा डबल होने में 72/4= 18 वर्ष लग जाएंगे।
-नियम 72 के अनुसार, पैसे को डबल करने के लिए आवश्यक समय को 72 से रिटर्न की दर से विभाजित करके निकाला जाता है। मान लीजिए आपने 10 फीसद की ब्याज दर वाली स्कीम में निवेश किया है तो आपका पैसा (72 में 10 को भाग करने पर = 7.2 मिला) यानि 7 साल दो माह में डबल हो जाएगा।
-अगर आपने 1 लाख रुपये को 10 फीसद ब्याज दर के हिसाब से निवेश किया है तो सिर्फ 7.2 साल में पैसा 2 लाख हो जाएगा। इस का उपयोग तभी किया जा सकता है जब पैसे पर तय वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से जैसे (एफडी, किसान विकास पत्र, बांड आदि) पर रिटर्न मिलता है। 72 को 1, 2, 3, 4, 6, 8, 9 और 12 से विभाजित किया जा सकता है।
इन जगहों पर निवेश करके पैसे को ग्रोथ दी जा सकती है:
-शेयर बाजार में निवेश से पैसे को अच्छी ग्रोथ मिलने की अधिक संभावना रहती है। 5 साल से अधिक समय के लिए निवेश करना है तो लार्ज कैप फंड का चयन बेहतर साबित हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश से पहले इसके बारे में ठीक से जानना जरूरी है कि यह कैसे काम करता है।
-पैसे को ग्रोथ देने के लिए किसान विकास पत्र में भी निवेश किया जा सकता है। इसकी ब्याज दरों में वित्त मंत्रालय की तरफ से समय-समय पर बदलाव होता रहता है।
-फिक्स्ड डिपॉजिट में गारंटीड रिटर्न मिलता है। एफडी के कार्यकाल और बैंक के अनुसार ब्याज दर बदलती रहती है। एफडी की अवधि 7 दिनों से लेकर 10 साल तक की होती है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सी के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

 

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारतीय विमानन कंपनियों को अपने यहां ग्राउंड हैंडलिंग गतिविधियों से रोकने की चेतावनी दी है। भारत में अमेरिकी एयरलाइन कंपनियों को ग्राउंड हैंडलिंग की छूट नहीं मिलने के जवाब में अमेरिका ने यह चेतावनी जारी की है। अमेरिका का कहना है कि यदि भारत ने पहली जुलाई तक अमेरिकी विमानन कंपनियों को ग्राउंड हैंडलिंग ऑपरेशंस की अनुमति नहीं दी, तो वह भारतीय कंपनियों को भी अपने…
नई दिल्ली। बहुत से लोग कार खरीदने के सपने को सेकंड हैंड कार खरीद कर पूरा करते हैं, अगर आपका भी बजट कम है तो सेकंड हैंड कार खरीद सकते हैं। सेकंड हैंड कार की कीमत काफी कम होती है और अगर इन्हें लोन पर लिया जाता है तो पैसा चुकाने में ज्यादा आसानी हो जाती है। भारत में कई बैंक जैसे भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक आदि…
नई दिल्ली। शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 6 पैसा इजाफे के साथ 73.13 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 73.07 रुपये प्रति लीटर रही थी। वहीं दिल्ली में एक लीटर डीजल की कीमत 66.71 रुपये प्रति लीटर हो गई। बीते दिन इसके दाम 66.66 रुपये प्रति…
नई दिल्ली। देश के जाने माने बैंकों के सेविंग अकाउंट में न्यूनतम मासिक बैलेंस रखने की आवश्यकता होती है। अगर सेविंग अकाउंट में न्यूनतम मासिक बैलेंस नहीं रखा जाता है तो बैंक पेनल्टी चार्ज लगाते हैं। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक से लेकर निजी सेक्टर के बैंक जैसे आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक अपने अलग-अलग नियमों के अनुसार मासिक बैलेंस न होने पर पेनल्टी चार्ज लगाते हैं।हम…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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