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नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए प्रमुख कारक वैश्विक मैक्रो स्थिति है, यह बात इंडस्ट्रियल बॉडी एसोचैम ने कही है। हालांकि उसने आशा व्यक्त की है कर का बोझ काफी हद तक कम किया जाएगा।एसोचैम के महासचिव उदय कुमार वर्मा ने बताया, "हमारा पक्ष यह रहा है कि पेट्रोल एवं डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत लाया जाए। हालांकि यह इस समय संभव नहीं हो सकता है।" उन्होंने बताया कि अगर प्रमुख कारकों की बात की जाए तो इस समय पेट्रोल एवं डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए मैक्रो स्थिति जिम्मेदार है, प्रभावित होते उभरते बाजारों में भारत कोई अपवाद नहीं है।अमेरिकी डॉलर के संबंध में वर्मा ने कहा कि यह दुनियाभर की अन्य मुद्राओं के सापेक्ष मजबूत हो रहा है तो रुपये की कमजोरी को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए। जैसा कि भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक देश है लिहाजा मुद्रा मूल्यह्रास उधार कीमतों पर असर डालता है। उन्होंने कहा, " एसोचैम के भीतर हम आश्वस्त हैं कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने (आरबीआई) इस मामले की पहचान कर ली है और कुछ हद तक कर के बोझ को कम करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।"
सोमवार को पेट्रोल-डीजल का भाव: सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.73 रुपये और डीजल की कीमत 72.83 रुपये रही। आज दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 23 पैसे और डीजल में 22 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया। वहीं, मुबंई में पेट्रोल 88.12 रुपये और डीजल 77.32 रुपये प्रति लीटर के भाव के बिक रहा है।

नई दिल्ली। ऑनलाइन मनी ट्रांसफर करने के लिए आज कई प्लेटफार्म उपलब्ध हैं। ऑनलाइन मनी ट्रांसफर या ई-ट्रांसफर में बैंक कर्मचारियों के बिना किसी प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के एक बैंक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजा जा सकता है। फिलहल देश में अधिकांश बैंक एनईएफटी भुगतान की सुविधा देते हैं। इसके जरिए महज आधे घंटे में मनी ट्रांसफर किया जा सकता है। हम आपको एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक की ओर से एनईएफटी पर लिए जाने वाले चार्ज के बारे में बता रहे हैं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए एसबीआई प्रति एनईएफटी 1 रुपये (जीएसटी भी) शुल्क वसूलता है और इसमें 10,000 रुपये तक भेजे जा सकते हैं। वहीं 10,000 से 1 लाख रुपये तक की रकम पर एसबीआई 2 रुपये (जीएसटी भी) और 1 से 2 लाख रुपये तक की रकम भेजने पर वह 3 रुपये (जीएसटी भी) वसूलता है। इसके अलावा अगर आप इस माध्यम से 2 लाख रुपये से ज्यादा की रकम भेजना चाहते हैं को एसबीआई आपसे 5 रुपये (जीएसटी भी) का शुल्क वसूलेगा।
पंजाब नेशनल बैंक: 10,000 रुपए तक की रकम एनईएफटी से भेजने के लिए 2.5 रुपए (जीएसटी अलग) शुल्क देना होगा। वहीं 10,001 से 1 लाख रुपए तक ट्रांसफर करने पर 5 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन देने होते हैं। इसके अलावा 1 लाख से 2 लाख रुपए तक के लिए 15 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन और दो लाख से अधिक के ट्रांसफर पर 25 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन देने होते हैं।
आईसीआईसीआई बैंक: 10,000 रुपए तक की रकम एनईएफटी से भेजने के लिए 2.5 रुपए (जीएसटी अलग) शुल्क देना होगा। वहीं 10,001 से 1 लाख रुपए तक ट्रांसफर करने पर 5 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन देने होते हैं। इसके अलावा 1 लाख से 2 लाख रुपए तक के लिए 15 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन और दो लाख से 10 लाख रुपए तक ट्रांसफर करने के लिए 25 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन देने होते हैं।वहीं, आरटीजीएस के जरिए 2 से 5 लाख रुपए तक ट्रांसफर करने के लिए बैंक 25 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन लेता है। पांच लाख से 10 लाख रुपए तक की रकम ट्रांसफर करने के लिए 50 रुपए (जीएसटी अलग) प्रति ट्रांजेक्शन देने होंगे।
एचडीएफसी बैंक: एचडीएफसी बैंक फिलहाल ऑनलाइन एनईएफटी और आरटीजीएस लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है। वहीं बैंक शाखा के माध्यम से किए लेनदेन पर 10,000 रुपये पर 2.50 रुपया प्रति लेनदेन, 10,000 से 1 लाख तक प्रति लेनदेन 5 रुपये, 1 लाख से 2 लाख रुपये प्रति लेनदेन पर 15 रुपये और 2 लाख से ज्यादा पर 25 रुपये चार्ज वसूलता है।
एक्सिस बैंक: एक्सिस बैंक एनईएफटी लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लेता है। वहीं बैंक शाखाओं के माध्यम से किए गए लेनदेन पर बैंक चार्ज वसूलता है। 10,000 रुपये के लेनदेन पर 2.5 रुपये प्रति लेनदेन। 10,000 से 1 लाख तक प्रति लेनदेन 5 रुपये, 1 लाख से 2 लाख रुपये प्रति लेनदेन पर 15 रुपये और 2 लाख से ज्यादा पर 25 रुपये चार्ज वसूलता है।

नई दिल्ली। अगर आप विदेश जा रहे हैं और वहां क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के बारे में सोच रहे हैं तो जरा संभल जाइए। क्योंकि देश में लेनदेन पर क्रेडिट का जो चार्ज आप देते हैं वह विदेश में जाकर बढ़ जाता है। हालांकि यह सही है कि विदेश में यात्रा करते समय क्रेडिट कार्ड एक वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि वह आपको कम से कम कैश के साथ यात्रा करने की सुविधा देता है। लेकिन फिर भी इसके इस्तेमाल को लेकर आपको सचेत रहना होगा।वैसे तो भारत में जारी किए गए अधिकांश क्रेडिट कार्ड दुनिया के कई देशों में स्वीकार किए जाते हैं, इसके बावजूद ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से प्रत्येक विदेशी लेनदेन करने पर कुछ नेटवर्क और करंसी आधारित फीस ली जाती है। दरअसल, विदेश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल पर उस देश की करंसी में पेमेंट करने पर एक कन्वर्जन फीस लगती है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के दौरान, संबंधित नेटवर्क फॉरेन करंसी एक्सचेंज पर 1 से 2 फीसद का फीस लेता है।चूंकि, लेनदेन पर उधारदाता एक फॉरेन ट्रांजैक्शन चार्ज लेते हैं जो कुल लेनदेन का 1.5 से 3.5% के आसपास हो सकता है। हालांकि छोटे-छोटे लेनदेनों पर इसका असर मालूम नहीं चलता लेकिन बड़े लेनदेनों के लिए इस फीस का परिमाण हजारों रुपयों में हो सकता है।इसके अलावा यदि आप विदेश में अपने क्रेडिट कार्ड से कैश निकालते हैं तो इस स्थिति में आपको क्रेडिट कार्ड के स्टैण्डर्ड कैश निकासी रेट से 1 से 4 फीसदी अधिक फीस देना पड़ सकता है। इसलिए कार्ड पर लगने वाले इस तरह के चार्ज से बचने के लिए कैश या ट्रेवल कार्ड लेकर चलें।मान लीजिए अगर आपको विदेश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना ही है तो ऐसा कार्ड ढूंढें जो विदेशी लेनदेन पर बहुत ज्यादा रिवार्ड देता हो ताकि उन रिवार्डों को रिडीम करके लेनदेन शुल्क को निष्प्रभावित किया जा सके। वहीं ऑनलाइन लेनदेन के लिए एयरलाइनों और होटल एग्रीगेटरों की ग्लोबल ट्रेवल कंपनियों का चयन करने की कोशिश करें।

नई दिल्ली। होम लोन पर घर लेने के बाद उसके ईएमआई का भुगतान करने पर आपको बहुत अच्छा फील होता होगा। क्योंकि वैसे भी कर्ज हर किसी के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द होता है। हालांकि, एक बार होम लोन का भुगतान करने के बाद आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि, भविष्य में फिर कभी आप इसके चक्कर में न फंसे।
एनओसी/एनडीसी लेना न भूलें: अगर, एक बार आपने होम लोन का भुगतान कर दिया है, तो लोन देने वाले से आपत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) या बकाया प्रमाणपत्र (एनडीसी) लेना न भूलें। यह प्रमाण पत्र ऋणदाता की ओर से जारी किया जाता है, और इससे यह प्रमाणित होता है कि आपने पूरी तरह से लोन चुका दिया है और अब आपके नाम कोई बकाया नहीं है। इस प्रमाणपत्र को लेते समय यह सुनिश्चित करें कि इसमें लोन से जुड़े सभी डिटेल दिए गए हों। आम तौर पर इसमें उधारकर्ता, लोन खाता संख्या, संपत्ति का ब्योरा, जिसके एवज में लोन लिया गया था, लोन बंद करने की तारीख का जिक्र होता है।
अपने सभी डाक्यूमेंट्स वापस लें: लोन को बंद करने के समय ऋणदाता से अपने सभी दस्तावेजों को वापस ले लें। दरअसल, लोन देते वक्त ऋणदाता आपसे दस्तावेजों की मूल प्रति मांगता है। इसलिए जब आपने लोन चुका दिया है तो ऋणदाता से सभी दस्तावेज वापस ले लीजिये। इनमें बैंक खाता विवरण, आय प्रमाण पत्र, संपत्ति पत्र, बिक्री का कार्य, कब्जा पत्र शामिल होता है।इसके अलावा, कुछ ऋणदाता को यह लगता है कि उधारकर्ता अगर भविष्य में ईएमआई नहीं चुका पाया तो वह लोन देते समय चेक ले लेते हैं। इसलिए होम लोन का भुगतान करने के बाद जब आप मूल दस्तावेजों को लें तो साथ में उन चेक को भी वापस ले लें।
क्रेडिट ब्यूरो के डेटाबेस में अपडेट कराएं: जब भी आप लोन को चुकता कर दें तो, तो आपकी यह कोशिश होनी चाहिए कि यह क्रेडिट ब्यूरो में जल्द से जल्द अपडेट हो जाए। कई बार ऐसा होता है कि ऋणदाता से संबंधित ब्यूरो को बताने में भूल हो जाती है। इसलिए जब एक बार आपने लोन खाता बंद करा दिया है तो, ऋणदाता से कहें कि वह जल्द से जल्द क्रेडिट ब्यूरो को इस संबंध में सूचित करें।
ऋणभार प्रमाण पत्र: प्रमाण पत्र एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें होम लोन के लिए बंधक संपत्ति से संबंधित सभी वित्तीय लेनदेन का विस्तृत रिकॉर्ड शामिल रहता है। एक बार जब आप लोन बंद कर देते हैं, तो इस प्रमाणपत्र से पता चलता है कि आपने सभी रिपेमेंट कर दिया है। इस दस्तावेज से प्रमाणित होता है कि आपकी संपत्ति किसी भी कानूनी या मौद्रिक देनदारियों से मुक्त है, इसलिए होम लोन को बंद करने के बाद उधारकर्ता संपत्ति को बेचना चाहता है, तो ऐसे में ऋणदाता उसपर कोई भी दावा नहीं कर सकता।

नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की सेवाएं अब हिंदी में भी मिलेगी। र्इ-काॅमर्स कंपनी ने 10 करोड़ ग्राहकों को आॅनलाइन ले आने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अमेजन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट कैटेगरी मैनेजमेंट मनीष तिवारी ने पत्रकारों से एक बातचीत में बताया कि कंपनी भारत में कस्टमर्स की आसानी आैर सुविधा के लिए हिंदी में प्लेटफाॅर्म लांच कर रही है। ग्राहक उत्पादों की जानकारी, छूट, स्थान आैर भुगतान संबंधी सभी जानकारियां अपनी भाषा में पढ़ कर समझ सकेंगे।अमेजन इंडिया के उपाध्यक्ष, मनीष तिवारी ने कहा कि हिंदी में लॉन्च का उद्देश्य यह है कि इससे भारतीय खरीददार ज्यादा से ज्यादा हमारे प्लेटफार्म पर आएं और उन्हें हिंदी में शॉपिंग करने में आसानी हो। उन्होंने कहा कि हिंदी में कस्टमर आसानी से प्रोडक्ट की डिटेल, डील, डिस्काउंट, आर्डर सहित अन्य चीजों की जानकारी हासिल कर सकते हैं।अमेजन इंडिया के उपाध्यक्ष ने कहा कि हिंदी में लॉन्चिंग के बाद 100 मिलियन कस्टमर ऑनलाइन शॉपिंग कर पाएंगे। उन्होंने कहा भारतीय भाषा में लॉन्च होने के बाद लोग अपनी पसंदीदा भाषा में खरीदारी कर सकते हैं। अमेजन को हिंदी में लॉन्च करने के बाद कस्टमर फेस्टिव सीजन में एंड्रॉइड मोबाइल और इसके एप से एक्सेस कर सकते हैं।

नई दिल्ली। अक्सर यह सिखाया जाता है कि आप जब भी कमाई शुरू करें तो साथ में निवेश भी शुरू करें। क्योंकि आपको भी नहीं पता कि कब आपकी ओर से जमा पैसा आपके काम आ जाएगा। फाइनेंशियल तौर पर मजबूत रहने के लिए आप कोई प्लानिंग तो कर सकते हैं, कड़ी मेहनत कर सकते हैं। लेकिन ऐसे समय में क्या होगा जब आपके पास पैसे को लेकर कोई इमरजेंसी आ जाए।ऐसी ही इमरजेंसी के लिए वित्तीय सुरक्षा की बात की जाती है। इसके लिए 6-12 महीने के खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड की जरूरत पड़ती है। इमरजेंसी फंड शार्ट टर्म की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। मान लीजिए कभी नौकरी चली जाए, कारोबार में नुकसान हो जाए, बीमारी की हालत में दवाओं की खर्चें हों, फिर आपको इसी फंड का सहारा लेना पड़ता है। हम चार ऐसे वित्तीय संकटों का जिक्र कर रहे हैं जब आपको इमरजेंसी फंड की जरूरत पड़ेगी।
नौकरी खोना: फर्ज कीजिए कंपनी नीति में बदलाव को लेकर, आर्थिक मंदी के चलते या किसी अप्रत्याशित कारण से आपकी नौकरी चली जाती है तो आप क्या करेंगे। यह कभी भी किसी भी समय किसी के भी साथ हो सकता है। जाहिर है नौकरी खोने के बाद आप एक दूसरी नौकरी की तलाश में लगेंगे। इसमें समय भी लग सकता है। इस बीच, आपको किसी बिल या किराए का भुगतान करना हो फिर आप क्या करेंगे। ऐसे वक्त में ही इमरजेंसी फंड की दरकार होती है। इसके लिए आप रेकरिंग डिपॉजिट या म्युचुअल फंड में जमा पैसा निकाल सकते हैं।
हेल्थ इमरजेंसी: हो सकता है आप युवा हों और आपको कोई बीमारी न हो। आप बिलकुल फिट हों। लेकिन इसके बावजूद आपको अचानक बीमारी हो सकती है। यदि आप इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं, तो फिर आपको बेहद मुश्किलात का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आप स्वास्थ्य बीमा कराकर रखें। यदि आपके पास पहले से ही एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है तो यह अच्छी बात है। बीमा पॉलिसी आपको कैंसर, स्ट्रोक या किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारी के निदान के वक्त काम आएगी। बीमा पॉलिसी की राशि बीमारियों के कारण आपके नुकसान को कवर करने में काम आएगी।
कमाई करने वाले सदस्य की मौत होने पर: अगर परिवार में किसी कमाने वाले की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे समय में वित्तीय चुनौतियों को टर्म पॉलिसी के साथ निपटाया जा सकता है। बीमा राशि उस व्यक्ति की आय की जगह पर काम आ सकता है जब वह अपने परिवार की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। बीमा पॉलिसी लोन रीपेमेंट, किराया, बच्चों की शिक्षा और अन्य मासिक खर्चों के आधार पर लेनी चाहिए।
प्राकृतिक आपदा: बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं आपके घर और सामान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके मरम्मत या नवीनीकरण के लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी होगी। अगर आपके घर का बीमा है तो आप इस खर्च से निपट सकते हैं। इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए घर का भी बीमा कराकर रखें।

नई दिल्ली। बच्चों की शिक्षा के लिए अमीर भारतीय माता-पिता लंदन में घर खरीद रहे हैं। ब्रिटेन के एक प्रमुख रियल स्टेट एजेंसी ने अपनी नए संपत्ति विश्लेषण रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन, रूस और अमेरिकी लोगों के बाद भारतीय लंदन में संपत्ति के विदेशी खरीददारों के चौथा सबसे बड़े समूह है।ब्रिटेन के नाइट फ्रैंक नोट्स नामक रिसर्च कंपनी की…
नई दिल्ली। इस दशक कई बैंकों के प्रमुख रिटायर होने वाले हैं। इस बीच एक संसदीय समिति ने सरकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की सेवानिवृत्ति उम्र को मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी बैंक पैनल के समक्ष निकट भविष्य में नेतृत्व संकट का मुद्दा उठा चुके हैं।वित्त पर बनी संसदीय समिति ने…
नई दिल्ली। कई बार लोग अपनी नौकरी छोड़ कुछ नया शुरू करना चाहते हैं। नौकरी छोड़ने के पीछे की वजह कुछ भी हो सकती है, मसलन नौकरी में असंतोष, ग्रोथ नहीं मिलना या बेहतर संभावनाओं की तलाश। कारण जो भी हो, नौकरी छोड़ने की प्लानिंग पहले ही कर लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हो सकता है कि आगे चलकर आपको वित्तीय संकट से जूझना पड़े।नौकरी छोड़ने…
नई दिल्ली। एयरलाइंस कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकटों पर डिस्काउंट ऑफर दे रही हैं। जिनमें जेट एयरवेज चुनिंदा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकटों पर 30 फीसद छूट दे रही है। डिस्काउंट प्रीमियर और इकोनॉमी क्लास में बेस किराये पर उपलब्ध है। वहीं इंडिगो की शुरुआती कीमत 999 रुपये है। गोएयर ने टिकट का शुरुआती किराया 1,099 रुपये रखा है। जबकि एयरएशिया इंडिया चुनिंदा रूट्स पर 999 रुपये में टिकट…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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