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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनियों में शुमार सऊदी अरामको के क्रूड ऑयल फैसिलिटी सेंटर्स पर ड्रोन हमले के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज गई है। इसका सीधा इम्पैक्ट भारत में देखने को मिला है और इसकी शुरुआत स्थानीय मुद्रा में गिरावट से हुई है। तेल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी से सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 68 पैसे टूटकर 71.60 रुपये प्रति डॉलर हो गया।इसके साथ ही पहले से आर्थिक सुस्ती से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर ऑयल इंपोर्ट बिल का बोझ और बढ़ जाने की उम्मीद है।
अचानक क्यों बढ़ गए हैं क्रूड ऑयल के दाम:-दरअसल, अरामको के दो फैसिलिटी सेंटरों में शनिवार की सुबह आग लग गई। सऊदी अरब के गृह मंत्री ने ड्रोन हमले के कारण अरामको के फैसिलिटी सेंटर्स पर आग लगने की पुष्टि की थी। इस हमले की जिम्मेदारी हूती विद्रोही संगठन ने ली है। इस हमले के बाद अरामको ने अपने उत्पादन में कमी की है। इस ड्रोन हमले के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इस हमले के बाद तेल की वैश्विक आपूर्ति में प्रतिदिन 57 लाख बैरल की कमी आई है। यह मात्रा वैश्विक आपूर्ति की करीब छह फीसद है।
क्या पड़ा है असर;-इस ड्रोन हमले के कारण सोमवार सुबह क्रूड ऑयल WTI और ब्रेंट क्रूड ऑयल दोनों के भाव में भारी तेजी देखने को मिली। भारतीय समयानुसार सुबह 10:39 बजे ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 6.09 फीसद की तेजी के साथ 66.31 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। वहीं क्रूड ऑयल WTI का फ्यूचर भाव 8.93 फीसद की बढ़ोतरी के साथ 59.75 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था और ब्रेंट ऑयल का फ्यूचर भाव 10.06 फीसद की भारी तेजी के साथ 66.28 डॉ़लर प्रति बैरल पर चल रहा था।हालांकि, अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिर नसीर ने वैश्विक बाजार को आश्वस्त करते हुए कहा है कि वे जल्द ही आपूर्ति को पुराने स्तर पर ले आएंगे। अरामको ने बताया है कि वह अगले करीब दो दिन और अपने उत्पादन को कम रखेगी। कंपनी ने कहा कि ऐसा वह ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचे तेल कुओं की रिपेयरिंग के लिये कर रही है।
भारतीय इकोनॉमी पर क्या हो सकते हैं प्रभाव:-आनन्द राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड के कमोडिटीज एंड करेंसीज के डायरेक्टर नवीन माथुर के मुताबिक इस ड्रोन हमले का प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के इन डेवलपमेंट्स पर नजर रखनी होगी क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा।माथुर ने कहा कि भारत अपनी ईंधन संबंधी जरूरतों का 70-75 फीसद तक आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तेल के दाम में तेजी का असर रुपया पर बहुत अधिक पड़ेगा। रुपये के कमजोर पड़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बहुत अधिक बढ़ जाएगा। इससे कही-ना-कहीं भारत के खजाने पर बोझ बढ़ जाएगा।उल्लेखनीय है कि भारत ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ऑयल इंपोर्ट पर 111.9 अरब डॉलर खर्च किया था।माथुर के मुताबिक इन घटनाक्रमों से देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में तेजी देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक अगर ऐसा होता है तो अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।
सोना होगा और महंगा:-माथुर के मुताबिक मिडिल ईस्ट का ये संकट जल्द दूर होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे समय में अगर ईरान ने कोई प्रतिक्रियावादी कदम उठाया तो बात और बिगड़ सकती है। माथुर के मुताबिक ऐसी स्थिति में निवेशक सोने में अधिक निवेश करना सुरक्षित समझेंगे एवं बहुमूल्य पीली धातु की कीमतें और आसमान छू सकती हैं।

नई दिल्‍ली। ताजा अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी वृद्धि दर पांच प्रतिशत रह गई है। विकास दर का यह स्तर छह साल में न्यूनतम है। ज्ञात हो कि जीडीपी विकास दर पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 5.8 फीसद थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिर्माण की वृद्धि दर मात्र 0.6 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल समान तिमाही में यह 12.1 प्रतिशत थी। जीडीपी की विकास दर घटने से लोगों की आमदनी, खपत और निवेश, सब पर असर पड़ रहा है। जिन सेक्टरों पर इस मंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है, वहां पर नौकरियां घटाने के ऐलान हो रहे हैं।एक दौर में प्रभावशाली निजी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज आज बंद हो चुकी है। एयर इंडिया काफी घाटे में चल रही है। बीएसएनएल आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स ने हाल में बाजार से एक हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेकर कर्मचारियों को वेतन दिया। भारतीय डाक सेवा का वार्षिक घाटा 15 हजार करोड़ हो चुका है। देश की सबसे बड़ी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कंपनी ओएनजीसी का अतिरिक्त कैश रिजर्व घट रहा है। सरकार द्वारा गैर जरूरी अधिग्रहण के चलते आज यह कंपनी एक बड़े कर्ज के दबाव में आ गई है।
खपत में गिरावट : विकास दर घटने से लोगों की आमदनी पर बुरा असर पड़ रहा है। बाजार की एक बड़ी शोधकर्ता कंपनी की रिपोर्ट कहती है कि तेजी से खपत वाले सामान एफएमसीजी यानी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स की बिक्री की विकास दर इस साल जनवरी से मार्च के बीच 9.9 प्रतिशत थी, लेकिन इसी साल अप्रैल से जून की तिमाही में ये घटकर 6.2 फीसदी रह गई। एफएमसीजी के उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि लोग अब अनिवार्य आवश्यकताओं में भी कटौती कर रहे हैं।ग्राहकों की खरीदारी के उत्साह में कमी का बड़ा असर ऑटो उद्योग पर पड़ा है। इस सेक्टर में बिक्री घटी है और नौकरियों में बड़े पैमाने पर कटौती हो रही है। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी की जुलाई में पिछले साल के मुकाबले कारों की बिक्री में 36 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस कारण टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों को गाड़ियों के निर्माण में कटौती करनी पड़ी है। नतीजन कल-पुर्जे और दूसरे तरीके से ऑटो सेक्टर से जुड़े हुए लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। उदाहरण के लिए जमशेदपुर का टाटा मोटर्स का प्लांट दो माह से 30 दिनों में केवल 15 दिन ही चलाया जा रहा है। इससे जमशेदपुर और आस-पास के इलाकों में 1,100 से ज्यादा कंपनियां बंदी के कगार पर खड़ी हैं, जो टाटा मोटर्स को कई चीजों की सप्लाई कर रही थीं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि विनिर्माण में इसकी हिस्सेदारी करीब 50 फीसद है।
निर्यात में लगातार गिरावट : आमतौर पर जब घरेलू बाजार में खपत कम हो जाती है तो भारतीय उद्योगपति अपना सामान निर्यात करते हैं और विदेश में बाजार तलाशते हैं। अभी स्थिति यह है कि विदेशी बाजार में भी भारतीय सामान के खरीदार का विकल्प बहुत सीमित है। पिछले दो सालों से जीडीपी विकास दर में निर्यात का योगदान घट रहा है। मई माह में निर्यात की विकास दर 3.9 प्रतिशत थी, लेकिन इस साल जून में निर्यात में 9.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये 41 महीनों में सबसे कम निर्यात दर है। चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर का विस्तार भारत के साथ भी हो रहा है। ऐसे में निर्यात वृद्धि के लिए विशिष्ट रणनीति की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए चीन में अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ने से एक रिक्तता पैदा हुई है, ऐसे में भारत लगभग 57 प्रकार के उत्पादों को चीन में बेच सकता है, जो चीन के साथ हमारे एकपक्षीय व्यापार में संतुलन बना सकता है। हम लोग देख सकते हैं कि किस तरह ट्रेड वॉर के संकट को वियतनाम और बांग्लादेश ने अपने लिए अवसर में बदला। जब चीन ने टेक्सटाइल सेक्टर को छोड़कर अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर जोर दिया तो उस जगह को भरने के लिए बांग्लादेश और वियतनाम तेजी से आए, वहीं भारतीय टेक्सटाइल इसका लाभ नहीं उठा सका। इसी तरह वियतनाम ने ट्रेड वॉर का लाभ ‘मोबाइल निर्माण’ क्षेत्र में भी लिया। दुनिया भर में स्मार्टफोन का कारोबार 300 बिलियन डॉलर का है। इसका 60 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास है। ट्रेड वॉर के बाद चीन के मोबाइल निर्माता कम जोखिम वाले क्षेत्र की तलाश में थे। वियतनाम ने इसके लिए पूर्व तैयारी की थी। अंतत: अब स्मार्टफोन के ग्लोबल निर्यात में वियतनाम की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत हो गई है, जबकि भारत की हिस्सेदारी नगण्य है।
बचत में गिरावट : अर्थव्यवस्था का विकास धीमा होने का रियल इस्टेट सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ा है। एक आकलन के अनुसार इस वक्त देश के 30 बड़े शहरों में 12.76 लाख मकान बिकने को पड़े हुए हैं। कोच्चि में मकानों की उपलब्धता 80 महीनों के उच्चतम स्तर पर है, जयपुर में 59 महीनों, लखनऊ में 55 महीनों और चेन्नई में ये 75 महीनों के अधिकतम स्तर पर है। इसका ये मतलब है कि इन शहरों में जो मकान बिकने को तैयार हैं, उनके बिकने में पांच-छह वर्ष लग रहे हैं। आमदनी बढ़ नहीं रही है और बचत की रकम बिना बिके मकानों में फसी हुई है। वित्त वर्ष 2011-12 में घरेलू बचत, जीडीपी का 34.6 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह बचत दर जीडीपी के अनुपात में घटकर 30 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले 20 वर्षो में सबसे कम है। घरेलू बचत की जो रकम बैंकों के पास जमा होती है, उसे ही बैंक कारोबारियों को कर्ज के तौर पर देते हैं। जब भी बचत में गिरावट आती है, बैंकों के कर्ज देने में भी कमी आती है। जबकि कंपनियों के विकास और नए रोजगार के लिए कर्ज का अहम रोल है। बैंकों के कर्ज देने की विकास दर भी घट गई है। इस वर्ष अप्रैल में कर्ज देने की विकास दर 13 प्रतिशत थी, जो मई में गिरकर 12.5 फीसद ही रह गई।
विदेशी निवेश प्रभावित : अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल हों, तो इसका असर विदेशी निवेश पर भी पड़ता है। अप्रैल 2019 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 7.3 अरब डॉलर था, लेकिन मई माह में यह घटकर 5.1 अरब डॉलर ही रह गया। रिजर्व बैंक ने जो अंतरिम आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक देश में आ रहा कुल विदेशी निवेश, जो शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में निवेश किया जाता है, वह अप्रैल में तीन अरब डॉलर था। लेकिन मई में यह घटकर 2.8 अरब डॉलर ही रह गया था।हालांकि, विगत माह भारत में सऊदी अरब की कंपनी ‘अरैमको’ ने 15 अरब डॉलर के निवेश समझौता पर हस्ताक्षर किया। यह कंपनी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड की ऑइल-टू-केमिकल का 20 प्रतिशत शेयर खरीदेगी। इसे भारत में अब तक का सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इससे पहले एस्सार की तेल व गैस कंपनी में रूस की रॉसनेफ्ट कंपनी ने 12 अरब डॉलर का निवेश किया था। एक तरह से इस डील को प्रमुख तेल उत्पादक सऊदी अरब और प्रमुख तेल उपभोक्ता भारत के विशिष्ट डील के रूप में देखा जा रहा है। यह मंदी के बीच एक खुशखबरी है।
कृषि विकास दर की चुनौती : पिछले पांच वर्षो में औसत कृषि विकास दर 2.7 प्रतिशत रही। प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। इसके लिए नीति आयोग के तत्वावधान में अशोक दलवाई समिति का गठन किया गया, जिसने कृषि आय दर को दोगुना करने के लिए कृषि विकास दर को 12 प्रतिशत तक पहुंचाने की सिफारिश की। परंतु कृषि विकास दर 12 प्रतिशत के स्थान पर ताजा तिमाही आंकड़ों में केवल दो प्रतिशत है। मालूम हो कि कृषि क्षेत्र देश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है। ऐसे में घरेलू मांग पैदा करने के लिए इस सेक्टर का विकास अहम है।

नई दिल्ली। आज के समय में घर, गाड़ी या जरूरत के अन्य सामानों के लिए लोन लेना आम बात हो गयी है। लेकिन कई बार लाइफ में ऐसी अनएक्सपेक्टेड चीजें हो जाती हैं जब आप लोन के ईएमआई का पेमेंट समय पर नहीं कर पाते हैं। ऐसे में आपको काफी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि रिजर्व बैंक ने ईएमआई पेमेंट में चूक करने वालों के खिलाफ ज्यादा सख्ती दिखाने का संकेत दिया है।आरबीआई ने कॉमर्शियल बैंकों को लोगों की ईएमआई रिपेमेंट पर कड़ी नजर रखने को कहा है। इसका लक्ष्य एनपीए में कमी लाना और जानबूझकर लोन रिपेमेंट में चूक करने वालों की पहचान करना है। रिजर्व बैंक के कड़े रुख के बाद यह जरूरी हो गया है कि आप अपने होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और किसी भी तरह लोन एवं क्रेडिट कार्ड बिल के रिपेमेंट की तारीख को याद रखें एवं अपने लोन को अच्छे तरीके से मैनेज करें।
ईएमआई पेमेंट मिस होने पर लिए जा सकते हैं ये एक्शन:-कई बार इनकम की कमी से तो कई बार टेक्निकल दिक्कतों से ना चाहते हुए भी ईएमआई का पेमेंट मिस हो जाता है। बार-बार ऐसा होने पर लोन देने वाले कॉमर्शियल बैंक एवं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां आपके खिलाफ कई तरह के एक्शन ले सकती हैं। शुरुआत में लोन देने वालों आपको एसएमएस, ईमेल के जरिए ऐसा नहीं करने की चेतावनी देती है। इसके साथ ही वे आपकी ईएमआई पर लेट फाइन भी लगा देती हैं।
चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं होने पर क्रेडिट प्रोफाइल हो जाता है डाउनग्रेड:-लोन देने वाले बैंक आपको अलग-अलग माध्यमों से रिमाइंडर भेजते हैं। अगर आप फिर भी रिपेमेंट नहीं कर पाते हैं तो वे आपके क्रेडिट प्रोफाइल को डाउनग्रेड कर देते हैं। इससे आपको फ्यूचर में किसी भी तरह का लोन लेने में काफी दिक्कत पेश आती है। कोई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति नहीं चाहेगा क्योंकि किसी ने कहा है कि रुपया भगवान नहीं है लेकिन उससे कम भी नहीं है। ऐसे में कई बार आप ऐसी स्थिति में फंस सकते हैं, जहां आपका काम लोन लेने से निकल जाएगा लेकिन ऐसी स्थिति में आपको यह मदद भी नहीं मिल पाएगी। इसलिए अपनी क्रेडिट रेटिंग को किसी भी स्थिति में डाउनग्रेड नहीं होने देना चाहिए।
90 दिन तक रिपेमेंट नहीं होने पर एनपीए हो सकता है आपका अकाउंट:-अगर आप लगातार 90 दिन तक ईएमआई का रिपेमेंट नहीं करते हैं तो आपके अकाउंट को लेंडर नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट्स में डाल देते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि इसके बाद आपको किसी भी तरह का लोन नहीं मिलेगा। बैंक चाहें तो आपके क्रेडिट कार्ड लिमिट को भी फ्रीज कर सकते हैं।
लीगल एक्शन भी है संभव:-बैंक की ओर से कई बार चेतावनी दिये जाने के बावजूद लोन का रिपेमेंट नहीं करने पर अधिकारी चाहें तो लीगल एक्शन भी ले सकते हैं। ऐसे मामलों में वे मामले को लीगल डिपार्टमेंट को भेज देते हैं जो कारण-बताओ नोटिस जारी कर सकता है। इसके अलावा लोन की रिकवरी के लिए लोन लेने वाली की संपत्ति को अटैच भी किया जा सकता है।

नई दिल्ली। खाने-पीने के सामानों की कीमतों में बढ़ोत्तरी के बावजूद थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) अगस्त में 1.08 फीसद पर बनी रही। इस साल जुलाई में भी डब्ल्यूपीआई 1.08 फीसद पर ही थी। वहीं, पिछले साल अगस्त में यह आंकड़ा 4.62 फीसद था। हालांकि, इस साल अगस्त में सब्जियों एवं प्रोटीन की उपलब्धता वाले सामानों के दाम में वृद्धि के कारण खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 7.67 फीसद हो गई, जो जुलाई में 6.15 फीसद थी।वहीं, सब्जियों की बात करें तो पिछले महीने इनकी थोक कीमतों में 13.07 फीसद का इजाफा दर्ज किया गया। जुलाई में सब्जियों की डब्ल्यूपीआई 10.67 फीसद थी। अंडा, मांस और मछली जैसे प्रोटीन की प्रचूर उपलब्धता वाले खाने-पीने के सामानों की कीमतों में 6.60 फीसद की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। यह आंकड़ा जुलाई में 3.16 फीसद पर था।हालांकि, फ्यूल और पावर सेक्टर के सामान की कीमतों में गिरावट और अधिक बढ़कर चार फीसद हो गयी, जो जुलाई में 3.64 फीसद थी।

नई दिल्ली। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के तेल कुंओं पर ड्रोन हमले का असर सोने की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत में सोमवार को एक फीसद की बढ़ोतरी देखने को मिली है। सेफ हैवन के रूप में और मजबूत होने के कारण मांग बढ़ने से सोने की कीमत में यह बढ़ोतरी देखी गई है। वैश्विक स्तर पर 04:10 GMT पर सोने की कीमत एक फीसद की उछाल के साथ 1,503.52 डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई थी।सोने के साथ ही वैश्विक स्तर पर चांदी में भी उछाल आया है। चांदी की कीमत करीब 3 फीसद की तेजी के साथ 18 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लेटिनम में 0.6 फीसद के तेजी आई, जिससे इसका भाव 953.78 डॉलर प्रति औंस हो गया है।पिछले सप्ताह की बात करें, तो यूएस-चाइना ट्रेड वॉर के खत्म होने की उम्मीदों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने में 1.2 फीसद की गिरावट देखी गई थी। इसके बाद शनिवार सुबह आरामको के तेल कुंओं पर ड्रोन हमले ने वैश्विक सर्राफा मार्केट का रुख बदल दिया। इस हमले से एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जोखिम बढ़ा है और सोना निवेशकों के लिए सैफ हैवन बनकर उभरा है।
ये हैं भारत में गोल्ड फ्यूचर के भाव:-भारत में गोल्ड फ्यूचर की कीमतों में बढ़त देखने को मिली है। एमसीएक्स एक्सचेंज के अनुसार, 4 अक्टूबर 2019 की गोल्ड फ्यूचर कीमत 1.31 फीसद अर्थात 493 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 38,017 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। वहीं, 5 दिसंबर 2019 की सिल्वर फ्यूचर कीमत 2.31 फीसद यानी 1,058 रुपये की तेजी के साथ 46,819 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।आपको बता दें कि शनिवार सुबह अबकैक और खुराइस स्थित सऊदी अरामको के तेल कुओं पर ड्रोन अटैक हुआ था। इस अटैक की जिम्मेदारी हूथी विद्रोही संगठन ने ली है। इस अटैक के बाद सऊदी अरामको ने अपने उत्पादन को करीब आधा कर दिया है, जिससे क्रूड ऑयल का वैश्विक आपूर्ति संकट पैदा हो गया है

नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई निवेश के जरिए अच्छा रिटर्न चाहता है। SIP म्युचुअल फंड में निवेश का एक बेहतर ऑपशन बनकर सामने आया है लेकिन क्या आपको मालूम है कि बिना किसी पेपरवर्क के अच्छा रिटर्न प्राप्त करने के लिए अपने कंप्यूटर पर महज कुछ क्लिक करने होंगे। यह मुमकिन है i-SIP के जरिए। यह इंटरनेट के जरिए किसी भी म्युचुअल फंड स्कीम में सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान इंवेस्टमेंट का तरीका है।
कौन कर सकता है i-SIP के जरिए निवेशःकोई भी व्यक्ति जो एक अवधि तक निवेश के बाद अच्छा रिटर्न प्राप्त करने का इच्छुक है, इस योजना में निवेश कर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि पहले से SIP के जरिए निवेश करने वाले इस सुविधा के जरिए इंवेस्टमेंट कर सकते हैं या नहीं। तो इसका जवाब है- हां। नये या पुराने किसी भी तरह के निवेशक i-SIP के जरिए म्युचुअल फंड निवेश कर सकते हैं।
निवेश से पहले जानें, क्या आपके पास है ये सारी चीजें:-सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी केवाईसी पूरी है या नहीं। आपके पास एक बैंक खाता एवं नेटबैंकिंग होनी चाहिए। साथ ही पैन कार्ड का होना भी जरूरी है। आपको एसआईपी स्कीम का नाम मालूम होना चाहिए। बेहतर रिटर्न प्राप्त करने के लिए एसआईपी स्कीम चुनते समय काफी रिटर्न किया जाना चाहिए। साथ ही रिस्क फैक्टर को भी ध्यान में रखना चाहिए।
निवेश के लिए क्या होगी प्रक्रियाःपुरानी व्यवस्था की तरह आपको निवेश के लिए एसेट मैनेजमेंट कंपनी के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी। ना ही आपको किसी तरह के कागजी झंझट में पड़ने की जरूरत है। निवेशक म्युचुअल फंड की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइ फॉर्म भरकर i-SIP के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। आपको बस एसआईपी सेटअप करने के बाद नेटबैंकिंग के जरिए एएमसी को बिलर के तौर पर जोड़ना होगा। इसके साथ ही आपको स्कीम, राशि चुननी होगी और यह तय करना होगा कि आप कितने अंतराल पर निवेश करना चाहते हैं। मिसाल के तौर पर कई लोग मासिक या साप्ताहिक या पखवाड़े के आधार पर निवेश कर सकते हैं। एएमसी तय समय पर निर्धारित राशि आपके खाते से काट लेगा।
क्या है यूआरएनःसभी तरह की जानकारी ऑनलाइन भरने के बाद एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर जेनरेट होता है। यह स्क्रीन पर डिस्प्ले होता है और आगे के रेफरेंस के लिए इसे नोट करना जरूरी है। इस यूआरएन को निवेशक के ईमेल आईडी पर भी भेजा जाता है।

नई दिल्ली। एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में लगभग 4,600 करोड़ रुपये का घाटा परिचालन से हुआ है, इसका मुख्य कारण तेल के दाम में तेजी और विदेशी विनिमय दर में बदलाव से नुकसान है। हालांकि, कर्ज के बोझ से दबी एयरलाइन को 2019-20 में परिचालन से लाभ की उम्मीद है। एयरलाइन के वरिष्ठ अधिकारीयों ने इसकी जानकारी दी है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन को 2018-19 में…
नई दिल्ली। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ने सितंबर के पहले पखवाड़े में पूंजी बाजारों में 1,841 करोड़ रुपये की पूंजी डाली। इससे पहले लगातार दो महीने पीएफआई शुद्ध बिकवाल रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध में नरमी और अनुकूल वृहत आर्थिक आंकड़े के साथ ये निवेश हुए हैं।डिपोजिटरी के ताजा आंकड़े के अनुसार एफपीआई ने 3 से 14 सितंबर के बीच शेयर बाजारों से…
नई दिल्ली। मौजूदा दौर में लोन लेकर घर खरीदना आम बात है। होम लोन न सिर्फ हमें अपने घर खरीदने के फैसले को टालने से रोकता है बल्कि यह हमें टैक्स बचाने में भी मदद करता है। कई मर्तबा होम लोन लेने के बाद इसके ईएमआई को चुकाना एक सिरदर्द होता है। लेकिन, इससे जल्दी छुटकारा कैसे मिले यह बड़ा सवाल है। होम लोन लेने वाले अपने होम लोन ईएमआई…
नई दिल्ली। आज के समय में हर किसी के पास एक से अधिक बैंक अकाउंट होना सामान्य बात है। वेतनभोगी लोग जब भी जॉब बदलते हैं या किसी दूसरे शहर में शिफ्ट होते हैं, तो उन्हें अपना बैंक अकाउंट बदलना पड़ ही जाता है। सामान्यतया कुछ बैंक ग्राहकों के जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट में कुछ महीनों तक सैलरी क्रेडिट नहीं होने पर उसे बचत खाते में बदल देते हैं। अब…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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