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बजट के दिन मेरी परीक्षा: मोदी

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि कल आम बजट के दिन उनकी परीक्षा है और सवा 100 करोड़ देशवासी उनकी परीक्षा लेने वाले हैंं। मोदी ने रेडियो पर अपने मासिक संबोधन ‘मन की बात’ में 01 मार्च से शुरू हो रही बोर्ड की परीक्षाओं पर चर्चा की। इस दौरान स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ‘‘दोस्तो, आपकी परीक्षा शुरू हो रही है। मुझे भी कल परीक्षा देनी है। सवा 100 करोड़ देशवासी मेरी परीक्षा लेने वाले हैं। पता है न/न, कल बजट है।’’  मोदी सरकार का यह दूसरा पूर्ण बजट है। इससे पहले पिछले साल जब वित्त वर्ष 2015-16 का आम बजट पेश किया गया था उस समय सरकार के सामने चुनौतियां इतनी ज्यादा नहीं थी। शेयर बाजार आसमान छू रहा था। बजट के कुछ दिन बाद ही 04 मार्च 2015 को सैंसेक्स पहली बार 30 हजार अंक का आंकड़ा छूने में सफल रहा। विदेशी संस्थागत निवेशक जमकर पूंजी बाजार में पैसा लगा रहे थे। रुपया मजबूत बना हुआ था और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमतों में गिरावट के कारण चालू खाता घाटा, वित्तीय घाटा तथा खुदरा महंगाई सरकार के लक्ष्य के दायरे में बनी हुई थी लेकिन इस साल शेयर बाजार और रुपए के लुढ़कने तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं दिखने के कारण सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।  सरकार के सामने चुनौती यह है कि ऐसे समय में जब कॅमोडिटी की कीमतें गिरने तथा कंपनियों के खराब परिणाम आने से निजी निवेश नहीं बढ़ पा रहा है उसे जरूरी निवेश भी बनाए रखना है और वित्तीय अनुशासन भी। यही इस बजट की सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि सरकार निवेश बढ़ाने के उपायों और वित्तीय अनुशासन में संतुलन बना पाती है तथा साथ ही आयकर छूट की सीमा बढ़ाने जैसी आम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतर पाती है तो यह उसकी सफलता होगी। संसद में शुक्रवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2015-16 में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में वित्तीय घाटा 3.9 प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य हासिल करना तो संभव दिख रहा है लेकिन अगले वित्त वर्ष में इसे 3.5 प्रतिशत के भीतर रखना मुश्किल हो सकता है। इन चुनौतियों के बीच मोदी ने कहा कि वह पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं कि सोमवार को जनता उन्हें पास कर देगी। उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा होगा; मुझे सुनते ही लगा होगा, मैं कितना स्वस्थ हूं, कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ हूं। बस, कल मेरी परीक्षा हो जाए। हम सब सफल हों, तो देश भी सफल होगा।’’

नई दिल्ली:-पिछली तारीख से कराधान विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि सोमवार को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2016-17 में विरासत के मुद्दों को सुलझाने के उपाय किए जा सकते हैं।मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि मौजूदा सरकार ने निवेशकों का भरोसा कायम करने के लिए विरासत में मिले कर मुददों को हल करने के लिए पुख्ता कदम उठाए हैं।उन्होंने कहा, 'धीरे-धीरे सरकार विरासत के मुद्दे को हल कर रही है। मुझे उम्मीद है कि आगे चलकर भी वे इसे जारी रखेंगे और बजट में इस पर कुछ होगा। यह एक लंबा एजेंडा है। हमें कर प्रणाली को साफ सुथरा करना है।'पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने पिछली तारीख से कानून का सहारा लेते हुए अरबों डॉलर की कर मांग की थी। विदेशी निवेशक इसको लेकर चिंतित हैं। उन्हें उम्मीद है कि भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार तेजी से इस मुद्दे को हल करेगी।  इसी महीने कर विभाग ने एक असामान्य कदम उठाते हुए ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन को 14,200 करोड़ रुपये का कर अदा करने के लिए रिमाइंडर नोटिस भेजा है। यह मुद्दा अभी मध्यस्थता में है। तीन सदस्यीय पंच निर्णय समिति में पीठासीन जज की नियुक्ति न होने की वजह से वोडाफोन मामले में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।हालांकि, ब्रिटेन की केयर्न इंडिया से संबंधित 10,247 करोड़ रुपये के कर विवाद में पूर्ण समिति का गठन हो चुका है। हालांकि, इसके लिए प्रक्रिया वोडाफोन के काफी बाद शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान में केयर्न का मामला लाया गया था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली बार-बार कह चुके हैं कि पिछली तारीख से कानून के जरिये कोई कर देनदारी नहीं बनाई जाएगी।कुछ लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में एपी शाह समिति का इस्तेमाल करेगी। शाह समिति ने ही एफपीआई और एफआईआई के पूंजीगत लाभ पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) का मुद्दा सुलझाया है।एक विदेशी कंपनी के शीर्ष कार्यकारी का मानना है कि इन मुद्दों का हल करने का आसान तरीका यह होगा कि लंबित मामलों को शाह समिति को भेज दिया जाए। मैट मामले में उन्होंने ऐसा ही किया था और इसकी सिफारिशों का क्रियान्वयन किया है।

नई दिल्ली:-आपको जानकर आश्चर्य होगा कि साल 1999 तक आम बजट शाम 5 बजे ही सदन में पेश होता था। परंतु जब अटल बिहारी वाजपेई की सरकार आई तो उन्होंने इस परंपरा को बदली और दोपहर 11 बजे संसद में बजट पेश किया जाने लगा।1999 तक बजट फरवरी माह के अंतिम कार्यदिवस पर पेश किया जाता था। इस प्रथा को हमारे यहां की सरकारों ने अंग्रेजों के शासनकाल से अपने देश में लागू किया था। क्योंकि ब्रिटिश पार्लियामेंट में बजट दोपहर में पास होता था, इस कारण उसके बाद भारत में यह शाम तक पेश किया जाता था। अटल जी की सरकार में यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री थे। उन्होंने इस प्रथा को 2001 के बजट से तोड़ा और तब से दोपहर 11 बजे ही बजट पेश किया जाने लगा।

संविधान की धारा 112 के तहत पेश किया जाता है बजट:-हर साल भारतीय संसद में वित्त मंत्री आगामी वित्त वर्ष के लिए अनुमानित बजट पेश करते हैं। यह प्रावधान भारतीय संविधान की धारा 112 के तहत निहित है। इसके तहत बजट सत्र संसद का बुलाया जाता है। इसकी शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है। इसके अलावा भारतीय बजट की खास विशेषता ये है कि इसमें अनुमानित खर्च के साथ पिछली आय और आगामी आय का स्रोत आदि भी गणना करके बताया जाता है। अगर अनुमानित खर्च आय स्रोत से अधिक है तो उसमें उसकी भरपाई और अतिरिक्त वित्तीय संसाधन का जिक्र भी किया जाता है।

नई दिल्ली:-वित्त मंत्री अरूण जेटली सोमवार को अपना तीसरा चुनौतीपूर्ण बजट पेश करेंगे। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री के समक्ष कृषि क्षेत्र और उद्योग जगत की जरूरतों के बीच संतुलन बैठाने की कड़ी चुनौती होगी। उनके समक्ष इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच सार्वजनिक खर्च के लिए संसाधन जुटाने का भी लक्ष्य होगा।

जीतना होगा विदेशी निवेशकों का भरोसा:-

आयकर के मोर्चे पर बजट में संभवत: कर स्लैब में यथास्थिति कायम रखी जाएगी, जबकि इसमें कर छूट में बदलाव हो सकता है। एक के बाद एक सूखे की वजह से ग्रामीण क्षेत्र दबाव में है। इसकी वजह से वित्त मंत्री पर सामाजिक योजनाओं में अधिक खर्च करने का दबाव है। इसके अलावा उनको विदेशी निवेशकों का भरोसा भी जीतना होगा जो तेज सुधारों की मांग कर रहे हैं।सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन से सरकार पर 1.02 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस वजह से भी वित्त मंत्री के लिए दिक्कतें बढ़ी हैं। अगले साल के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 प्रतिशत पर रखने के पूर्व में घोषित लक्ष्य से समझौता किए बिना वे इसे कैसे करते हैं यह देखने वाली बात होगी।माना जा रहा है कि जेटली कॉरपोरेट कर की दरों को चार साल में 30 से 25 प्रतिशत करने के अपने पिछले साल के वादे को पूरा करने के लिए भी कुछ कदम उठाएंगे। समझा जाता है कि वह बजट में इस प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे, जिसमें कर छूट को वापस लिया जाना शामिल होगा जिससे इस प्रक्रिया को राजस्व तटस्थ रखा जा सके।बढ़े खर्च को पूरा करने के लिए राजस्व बढ़ाने को वित्त मंत्री को अप्रत्यक्ष कर बढ़ाने होंगे या नए कर पेश करने होंगे। सेवा कर दर को पिछले साल बढ़ाकर 14.5 प्रतिशत किया गया है। जीएसटी में इसके लिए 18 प्रतिशत की दर को जो प्रस्ताव है उसके मद्देनजर सेवा कर में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।इसी तरह चर्चा है कि पिछले साल लगाए गए स्वच्छ भारत उपकर की तरह स्टार्ट अप इंडिया या डिजिटल इंडिया पहल के लिए धन जुटाने को लेकर नया उपकर लगाया जा सकता है। वित्त मंत्री के एजेंडा पर निवेश चक्र में सुधार भी शामिल होगा।

जेब ढीली करेंगे या मजबूती की राह पर चलेंगे जेटली:-2015-16 में पूंजीगत खर्च इससे पिछले वित्त वर्ष से 25.5 प्रतिशत बढ़ा है। लेकिन जीडीपी के प्रतिशत के हिसाब से यह भी 1.7 प्रतिशत पर अटका हुआ है जिसे 2 प्रतिशत करने की जरूरत है।उनके सामने बुनियादी ढांचा क्षेत्र में खर्च बढ़ाने की चुनौती होगी। इसके अलावा निजी निवेश वांछित रफ्तार से नहीं बढ़ने की वजह से सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की भी चुनौती होगी।यह देखने वाली बात होगी कि जेटली अपनी जेब ढीली करते हैं या फिर मजबूती की राह पर ही कायम रहते हैं। यदि सरकार खर्च बढ़ाने का फैसला करती है, तो यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि वह कैसे धन को पूंजीगत निवेश में ला पाती है।मूडीज इन्वेस्टर सर्विस के विश्लेषकों ने कहा कि यदि बजटीय मजबूती को जारी रखा जाता है, तो भारत का राजकोषीय ढांचा निकट भविष्य में अन्य रेटिंग समकक्षों की तुलना में कमजोर रहेगा।विदेशी निवेशकों ने इस साल अभी तक 2.4 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं। यह चीन के बाद एशिया में दूसरी सबसे बड़ी निकासी है।

बढ़ेगी आयकर छूट सीमा?:-वहीं म्यूचुअल फंड उद्योग का मानना है कि बजट में आयकर छूट सीमा 50,000 रुपये बढ़ाकर तीन लाख रुपये की जा सकती है।उद्योग का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो इससे ग्राहकों के पास निवेश के लिये अतिरिक्त राशि बचेगी।बजट में जिंस आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी और उनके लिए संरक्षण के उपाय करने होंगे। वैश्विक मांग में कमी और अत्यधिक आपूर्ति की वजह से ये क्षेत्र दबाव में हैं।पिछले दो बजट में जेटली ने खर्च का हिस्सा सब्सिडी से दूर बुनियादी ढांचे की ओर स्थानांतरित किया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के अलावा उनके समक्ष बैंकों के पुन: पूंजीकरण भी चुनौती होगी।

खुल सकते हैं विदेशी निवेश के लिए दरवाजे:-सूखे और फसल के निचले मूल्य से कृषि क्षेत्र प्रभावित है। ऐसे में सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर खर्च को जारी रखेगी, फसल बीमा का विस्तार करेगी और सिंचाई परिव्यय बढ़ाएगी।माना जा रहा है कि सुधारों के मोर्चे पर वित्त मंत्री कुछ अन्य क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोलेंगे और रम आधारित क्षेत्रों मसलन चमड़ा और आभूषण को कुछ कर राहत देंगे।कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अगले एक साल में इनमें बढ़ोतरी की कम संभावना के मद्देनजर सरकार आयातित कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल पर सीमा शुल्क को फिर लागू कर सकती है। 2011 में इसे हटा दिया गया था। उस समय कच्चे तेल के दाम बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे।पिछले साल के दौरान सोने का आयात बढ़ा है ऐसे में सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है।

लखनऊः उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने केंद्रीय बजट में अपेक्षित सहूलियत नहीं मिलने पर आगामी 30 मार्च को यहां राजभवन घेरने की घोषणा की है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष और उप्र लघु उद्योग निगम के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) संदीप बंसल ने आज यहां कहा कि व्यापारी चाहते हैं कि केंद्रीय बजट में ऑनलाइन व्यापार पर टैक्स,तिहरे जीएसटी में बदलाव तथा दो लाख रुपए की खरीद बेच पर पैन कार्ड की अनिवार्यता समाप्त हो।

नई दिल्ली:-अच्छे दिन आएंगे कि उम्मीद लेकर आई एनडीए सरकार के तीसरे बजट में आम आदमी की आस घर के बजट को बिगाड़ने वाली खाद्य एवं खुदरा महंगाई पर काबू रखे जाने पर टिकी है। साथ ही सबको आवास मुहैया कराने की योजना को गति देने और छोटे घरों के लिए बड़ा होम लोन लेने वाले शहरी लोगों की उम्मीद छूट के दायरे में इजाफे की है।

आयात-भंडारण की व्यवस्था बेहतर होगी:-शहर से गांव तक हर कोई यही चाहता है कि उसके घर में पकने वाली रोटी-दाल के दाम  काबू में रहें। ऐसा न हो कि खुदरा महंगाई के आंकड़े कुछ कहें और हकीकत में घर में दो जून की रोटी के लिए रेस्टोरेंट के दाम चुकाने पड़ें। गत वर्ष दाल के दामों में लगी आग दोबारा नहीं भड़के और अन्य सभी खाद्य सामग्रियों, सब्जियों के दाम काबू में रहें।वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बजट में खुदरा क्षेत्र में नीतिगत सुधार किए जाएंगे। इनमें कमी से पूर्व खाद्य सामग्रियों के आयात से जुड़े कई सुधार शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी भंडारण की व्यवस्था में बेहतरी जैसे उपाय भी हैं।

संतुलन के लिए कदम उठाएंगे:-खुदरा महंगाई के तहत आने वाले कपड़े और जूतों समेत अन्य वस्तुओं के लिए भी सरकार बजट में कई उपाय करने वाली है। चमड़ा, जूट और कपास समेत अन्य निर्यात-आयात में संतुलन के कदम उठाए जाएंगे।इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार की ओर से घोषणाएं की जाएंगी। साथ ही वैश्विक मंदी के दौर में डब्ल्यूटीओ के तहत कम कीमतों के दौर में निर्यात को बवा देने के लिए छूट का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

सबको आवास के लिए गति लाए:-सबको आवास मुहैया कराने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को साकार रूप देने के लिए बजट में कदम उठाए जाने की उम्मीद है। लोग भी चाहते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो महज धन आवंटन की घोषणा से यह कारगर नहीं होगा। केंद्र राज्य सरकारों को भी इस मामले में उचित जिम्मेदारी के साथ शामिल करे। साथ ही निजी क्षेत्र को भी शामिल कर तेजी लाएं, ताकि 2022 तक सबको घर मिले।

होमलोन की छूट के दायरे में बढ़ोतरी हो:-शहरों में छोटा घर खरीदने के लिए बड़ा ऋण लेने वालों को राहत देने के लिए होमलोन की छूट के दायरे में बढ़ोतरी बजट में हो सकती है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वेतन का बड़े हिस्से से लोन की किश्त चुकाने वाले नौकरीपेशा लोगों को  छूट के दायरे में बढ़ोतरी से सीधी राहत मिलेगी।

आयकर दाताओं को सीमा में बढ़त की आस:-आयकर दाताओं को बजट 2016-17 में केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद है। विशेषज्ञों की मानें तो न्यूनतम आयकर सीमा में इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से बढ़ोतरी जरूर की जाएगी, क्योंकि गत वर्ष आयकर सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। मौजूदा समय में यह सीमा 2.5 लाख रुपये है, जिसे कम से कम पचास हजार तक बढ़ाए जाने की उम्मीद है।मौजूदा समय में ढाई लाख से ज्यादा और पांच लाख तक कमाने वाले को आय का दस प्रतिशत टैक्स देना होता है, जबकि पांच से दस लाख तक आय वाले व्यक्ति को 20 प्रतिशत और दस लाख से ज्यादा आय होने पर 30 प्रतिशत कर देना होता है।

निवेश को बढ़ावा देने के लिए छूट बढ़ाने की उम्मीद:-आम जनता को आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत छूट के दावे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए ढांचागत बॉन्ड में निवेश करने पर 50 हजार रुपये छूट का नया रास्ता खोल सकती है। इसके अलावा बचत योजनाओं जैसे जीवन बीमा, पीपीएफ, यूलिप, सावधि जमा और शिक्षा शुल्क समेत पेंशन योजना के दायरे को बढ़ाए जाने की उम्मीद है।

मुंबई: भारतीय कंपनियों को उम्मीद है कि कल पेश हो रहे आम बजट में कारोबार में सुगमता में सुधार तथा कारोबार लागत में कमी के उपाय होंगे। साथ ही इसमें कर कानूनों के सरलीकरण तथा अनुपालन बढ़ाने के प्रस्ताव होंगे। टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन ने कहा, ‘‘जिस तरह सरकार ने कारोबार में सुगमता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है, हमें उम्मीद है कि कारोबार की लागत…
नई दिल्ली : आर्थिक समीक्षा 2015-16 की रिपोर्ट में इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ने जा रही है और इसकी एक बड़ी वजह है ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत का खस्ता होना। सरकार निवेश बढ़ाती है तो राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा होगा। वहीं वृद्धि के लिए बड़ा पैसा चाहिए, वह कहां से आएगा। महंगाई, रोजगार और टैक्स जैसे बड़े मुद्दे भी सरकार…
नयी दिल्ली: आभूषण विक्रेताओं की घटती हाजिर मांग के बीच कमजोर होते वैश्विक रुख के अनुरूप राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में आज सोना 40 रुपये की गिरावट के साथ 29,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की कमजोर उठान के कारण चांदी भी 600 रुपये लुढ़ककर 36,600 रुपये प्रति किग्रा पर आ गयी।बाजार सूत्रों ने कहा कि डॉलर के मजबूत होने और यूरोपीय…
नयी दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों द्वारा सोमवार को हड़ताल पर जाने की चेतावनी के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि उसके कर्मचारियों का एक वर्ग 29 फरवरी की हड़ताल में शामिल हो सकता है। इसी दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली आम बजट पेश करेंगे।बंबई शेयर बाजार को भेजी सूचना में एसबीआई ने कहा कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन इस हड़ताल में शामिल…

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