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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत सर्टिफिकेट लेने वाले युवाओं को स्किल इंडिया मिशन ने दो तोहफे देने की घोषणा की है। जिनमें पहला दो लाख रुपए का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और दूसरा डिजिटल लॉकर की सुविधा। बीमा तीन साल के लिए होगा। जबकि ट्रेनिंग पूरी करने के बाद युवाओं को स्किल सर्टिफिकेट डिजिटल लॉकर में ही दिया जाएगा।कौशल बीमा मुहैया कराने के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से गठजोड़ किया गया है। इसके तहत ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं की दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता का बीमा कवर दिया जाएगा। यह बीमा स्किल सर्टिफिकेट की तारीख से तीन साल के लिए प्रभावी होगा। बीमा का प्रीमियम एनसीडीसी भरेगा। बीमाकर्ता की शिकायतों को दूर करने के लिए एनआईए की ओर से एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा।बता दें कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत युवाओं को उद्योगों से जुड़ी ट्रेनिंग मिलती है ताकि उन्हें आसानी से रोजगार मिल सके। इसमें ट्रेनिंग की फीस सरकार भरती है। मालूम हो कि स्किल इंडिया के तहत ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को डिजिटल लॉकर के जरिए सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसे एप या वेब पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।
डिजिटल लॉकर क्या है?:-डिजिटल लॉकर में दस्तावेज और सर्टिफिकेट डिजिटल रूप में जारी किए जा सकते हैं और इनका ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकता है। इस सुविधा से आपको अपने साथ कोई दस्तावेज या सर्टिफिकेट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होती।

नई दिल्ली। पैन कार्ड आयकर विभाग में आपकी नुमाइंदगी भर नहीं करता बल्कि यह आपकी पहचान का एक अहम प्रमाणपत्र भी होता है। इसकी अहमियत दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसके बिना आपके काफी सारे वित्तीय कामकाज रुक भी सकते हैं, जैसे कि टैक्स फाइलिंग, ऑफिस में सैलरी और बैंक में खाता खुलवाना इत्यादि। इसलिए आपको अपने पैन कार्ड को लेकर गंभीर रहना चाहिए ताकि इसका दुरुपयोग न हो पाए।पैन कार्ड का सबसे ज्यादा दुरुपयोग उच्च दाम के टिकटों को खरीदने या बेनामी संपत्ति लेनदेन के लिए किया जाता है। किसी लेनदेन में आपके पैन कार्ड की एक कॉपी या उपसर दिए नंबर की डिटेल को इस्तेमाल में लाया जा सकता है और आपको इसकी भनक भी नहीं लगेगी।
कैसे करें पैन कार्ड की सुरक्षा?
-पैन कार्ड का मिसयूज होने पर छह महीने के बाद आपको इसकी जानकारी होती है। ऐसा होने पर आप फॉर्म 26 एएस के माध्यम से यह पता लगा सकते हैं कि कहीं बेनामी लेनदेन तो नहीं हुआ है।
-लेकिन अगर आप टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं तो आप इस फॉर्म को चेक नहीं कर पाएंगे। जैसा कि आयकर विभाग को यह साबित करने के लिए लेनदेन उनके द्वारा नहीं किया गया था, पैन कार्ड की आवश्यकता होती है।
खुद की पहचान छुपाएं:
-आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके जन्म और जन्म स्थान की जानकारी आपके परिवार के सिवा किसी और के पास न हो। यह तय कर लें कि आप कहां और क्यों अपनी डिटेल दे रहे हैं और दस्तावेजों पर हमेशा तारीख जरूर लिखें।
-इसके अलावा भविष्य के संदर्भ के लिए जो तारीख आप दस्तावेजों पर लिख रहे हैं उसकी एक फोटो भी अपने पास क्लिक कर रख लें।
-अपने दस्तावेजों और आईडी कार्ड को हमेशा जांचते रहें। ट्रैक करें कि आपने जिस क्रम में उसे रखता था वो उसी क्रम में हैं या नहीं।
-यदि कोई दस्तावेज गुम हो जाता है, तो तुरंत एफ आई आर दर्ज कराएं। अगर आपने मोबाइल पर बैंक डिटेल, पासवर्ड इत्यादि सेव कर रखा है, तो फोन बदलते समय उन्हें डिलीट कर दें।
-कई बार छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने से हमें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए अपने दस्तावेजों को लेकर हमेशा सतर्क रहें।

नई दिल्ली। जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैसा कमाने के साथ-साथ निवेश करना भी बहुत जरूरी होता है। भले ही हर रोज आपको कई जरूरी काम क्यों ही न रहते हो, लेकिन निवेश करना आपकी आदत में शामिल होना चाहिए। एक और बात जो ध्यान रखने योग्य है वह ये है कि निवेश हमेशा सोच-समझ कर करना चाहिए। सरकार, बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां, कई तरह की सेविंग स्कीम ऑफर का करती हैं, जिससे लोग अपने निवेश की गई राशि पर अच्छा रिटर्न पाते हैं। अगर आप सोच-समझकर, सही तरीके से कम समय के लिए निवेश करते हैं तो इसका आपको काफी फायदा मिलेगा। हम आपको निवेश से जुड़ी 4 ऐसी स्कीम्स के बारे में बता रहे हैं, जिससे आप भविष्य में पैसों की जरूरत को पूरा कर सकते हैं।
फिक्स डिपॉजिट (एफडी): यह निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका है। फिक्स डिपॉजिट में आपको एक निश्चित समय के लिए पैसे जमा करना होता है और आपको उन पैसों पर एक निश्चित दर से ब्याज मिलता है। अगर आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो निजी क्षेत्र के बैंकों और कंपनियों में निवेश के बारे में सोच सकते हैं। हालांकि, अधिकतर बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां एफडी पर 7 फीसद की शुरुआती दर से ब्याज देती हैं। इसमें निवेश करने का फायदा यह है कि बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां एफडी में 7 दिन से लेकर 10 साल तक के निवेश की सुविधा देती हैं। अगर कभी आपको पैसों की बहुत अधिक जरूरत है तो आपको कुछ राशि पेनाल्टी के तौर पर देनी होगी, फिर आप अपना पैसा निकाल सकते हैं।
आवर्ती जमा (आरडी): आवर्ती जमा में निवेश से ब्याज भी अधिक मिलता है और जब आपको पैसे की जरूरत होती है, तो एक मुश्‍त रकम भी मिल जाती है। इस योजना के तहत आप बैंक और पोस्ट ऑफिस में हर महीने एक निश्चित अमाउंट जमा करवा सकते हैं। जिसके बाद बैंक आपको एक निश्चित दर पर ब्याज देता है। यदि आप नौकरी पेशा हैं तो आप अपने सैलरी अकाउंट के साथ आरडी खाता खोल सकते हैं। सेविंग अकाउंट के साथ आरडी खोलने पर आपको हर महीने पैसा जमा करने की जरूरत नहीं होती। आपके अकाउंट से ऑटोमैटिक पैसा कट जाता है। कम समय के लिए निवेश में आवर्ती जमा भी अच्छा विकल्प है।
लिक्विड फंड्स: छोटी अवधि में बेहतरीन रिटर्न के लिए लिक्विड फंड आपके लिए बेहतरीन निवेश विकल्प है। लिक्विड फंड में निवेश जोखिम रहित होता है। साथ ही कोई लॉक इन पीरियड भी नहीं होता है। लिक्विड फंड में रिटर्न की दर घटती-बढ़ती रहती है। लिक्विड फंड में कोई भी व्यक्ति 1 हफ्ते से 1 साल तक किसी भी अवधि के लिए निवेश कर सकता है। हर महीने अपनी सैलरी का बचा हिस्सा भी आप लिक्विड फंड में निवेश कर अच्छा रिटर्न पा सकते हैं। सेविंग्स एकाउंट में आपकी सैलरी पर 4 फीसद की दर से रिटर्न मिलता है वहीं दूसरी ओर लिक्विड फंड में 8 फीसदी तक का रिटर्न मिल जाता है।
शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड्स: यह निवेश योजना छोटी अवधि यानी कि एक वर्ष से तीन वर्ष के लिए होता है। यदि निवेशक एक वर्ष से कम समय के लिए निवेश करना चाहता है, तो शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड्स निवेश करना चाहिए। हालांकि इस निवेश योजना में ब्याज दर और जोखिम दोनों निवेशकों को वहन करना पड़ता है।

नई दिल्ली। भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित डिजिटल वॉलेट की बात करें तो वो बेशक पेटीएम ही है। इसकी शुुरुआत विजय शेखर शर्मा ने अगस्त 2010 में की थी। तब इसे डिजिटल वॉलेट-आधारित भुगतान प्रणाली के रूप में शुरू किया गया। इस वॉलेट का उपयोग करते हुए स्कैनिंग क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट किया जाता है।हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि पेटीएम के आने से डिजिटल पेमेंट और आसान हो गया। लेकिन इसके अलावा भी पेटीएम कई और सुविधाएं ऑफर करता है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। हम इस खबर में आपको पेटीएम की ओर से दी जाने वाली पांच अन्य सेवाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
पेटीएम मॉल: पेटीएम मॉल को लॉन्च करने का उद्देश्य अन्य ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन और फ्लिपकार्ट को टक्कर देना था। पेटीएम मॉल पर उत्पादों को खरीदने पर कैशबैक और छूट मिलती है। जिसे बाद की खरीद पर रिडीम किया जा सकता है।
पेटीएम पेमेंट बैंक: पेटीएम पेमेंट्स बैंक का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें खाता खुलवाने के लिए कोई चार्ज नहीं देना होता है, साथ ही इसमें मिनिमम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं है।इसके अलावा पेटीएम पेमेंट बैंक 4% मासिक इंटरेस्ट देता है। पेटीएम पेमेंट बैंक जमा और रूपे कार्ड पर कैशबैक भी देता है। इसके रूपे कार्ड के जरिए कई जाने माने ब्रांड्स, जैसे- पेपरफ्राई, फर्न्स एन पेटल्स, फैबएली, मेड लाइफ, और बुक माई शो पर ऑफर मिलता है।
पेटीएम गोल्ड: पेटीएम से गोल्ड यानी सोना भी खरीद जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि आप 1 रूपए से लेकर लाख तक का सोना खरीद सकते है। इसके लिए कोई मेकिंग चार्ज या डिलीवरी शुल्क भी नहीं देना होता है। पेटीएम ने गोल्ड स्कीम को सफल बनाने के लिए देशी व विदेशी कंपनी के साथ पार्टनरशिप की है। जिसमें एमएमटीसी (Metal and Minerals Trading Corporation of India) और पीएएमपी (Produits Artistiques Meteux Precieux) कंपनियां प्रमुखता से शामिल हैं।
पेटीएम विदेशी मुद्रा: जाहिर है जब आपको विदेश यात्रा करनी हो तो विदेशी मुद्रा की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए पीटीएम वैश्विक स्तर पर स्वीकृत वीजा/विदेशी मुद्रा मास्टरकार्ड का ऑफर देता है। इसके आलवा आपको मौजूदा दरों पर कैश भी मिलता है।पेटीएम यूजर्स 2% की दर से अग्रिम भुगतान कर सकते हैं और बाकी बची रकम को बाद में एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से पेमेंट कर सकते हैं। विदेशी मुद्रा नकद की सीमा $3,000 या इसके समकक्ष है।
पेटीएम फूड वॉलेट: पेटीएम फूड वॉलेट के जरिए हजारों नियोक्ताओं की ओर से उनके कर्मचारियों को टैक्स फ्री भत्ता दिया जाता है। इस फूड वॉलेट का उपयोग कैफेटेरिया, फूड स्टॉल, किराने की दुकान, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते समय किया जा सकता है। इसके चलते आपको अपने साथ वाउचर या कार्ड ले जाने की जरूरत नहीं होती है। पहली बार साइन अप करने पर आपको फिल्म और फ्लाइट की टिकट पर छूट मिलती है।

नई दिल्ली। "देश में जियो नहीं होता तो शायद घर पर बात करना भी मुश्किल होता।" एक प्राइवेट बस में कानपुर से दिल्ली का सफर कर रहे मुकेश कुमार की यह टिप्पणी चौंकाती है। देश का भूगोल टेलीकॉम कंपनियों के समीकरण को भी बदलता है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में एक भी कंपनी ऐसी नहीं है जो सही नेटवर्क और उम्दा इंटरनेट स्पीड की गारंटी देती हो। लेकिन फिर भी आंकड़ों की बाजीगरी में कुछ कंपनियां अव्वल तो कुछ फिसड्डी नजर आती हैं। लुकाछिपी के इस खेल के बीच देश में 5G लाने की तैयारी चल रही हैं। देश की टेलीकॉम कंपनियां जिनका एक पांव कर्ज के दलदल में फसा है वो कैसे 5G के लिए सामर्थ्य जुटा पाएंगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल 2 साल के अंतराल में 4G से 5G में शिफ्ट होना टेलिकॉम कंपनियों की मजबूरी भी है।
देश में 5जी को लेकर हड़बड़ाहट: भारत में 5जी मोबाइल तकनीक का रोडमैप तैयार करने के लिए गठित स्टियरिंग कमेटी ने अगली पीढ़ी की वायरलेस सेवाओं को जल्द रफ्तार देने के लिए दिसंबर तक 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू करने का सुझाव दिया है। सरकार 5जी सेवाओं की लॉन्चिंग की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा माना जा रहा है कि 5जी को 2020 के आसपास व्यापारिक तौर पर लांच किया जाएगा।
टेलीकॉम सेक्टर की वर्तमान स्थिति: देश का टेलीकॉम सेक्टर चारों तरफ से मुश्किल से घिरा है और वह फिलहाल देश के सबसे तनावग्रस्त सेक्टर्स में से एक है। टेलीकॉम सेक्टर की वर्तमान स्थिति को आप इन चार बातों से समझ सकते हैं।
जियो ने खत्म की प्रतिस्पर्धा: 5 सितंबर 2016 को जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री की थी। दो साल के भीतर जियो ने सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लगभग खत्म कर दिया। सस्ते इंटरनेट डेटा की होड़ में जियो ने मुफ्त में इंटरनेट देकर सभी को पटखनी दे दी।
-टेलीकॉम सेक्टर का बैंकों को कर्ज बना रहा है NPA: देश की सरकार ने कंपनियों को महंगे 4G स्पेक्ट्रम बेचे और कंपनियों ने इन्हें कर्ज लेकर खरीदा जिसे वो अब तक नहीं चुका पाई हैं और इनका NPA बनना शुरू हो गया है। एक डेटा के मुताबिक टेलीकॉमसेक्टर पर विभिन्न वित्तीय संस्थाओं और बैंकों का करीब 4.6 लाख करोड़ रुपए बकाया है।
-टेलीकॉम सेक्टर में मोनोपॉली की संभावना तेज: भारतीय टेलीकॉम में जियो जिस तेजी से पांव पसार रहा है उसे देखकर लगता है कि इस बाजार में जल्द ही मोनोपॉली की स्थिति देखने को मिल सकती है। जियो के डर से वोडा और आइडिया एक होने को तैयार हैं, रिलायंस कम्युनिकेशन्स अपना मोबाइल कारोबार बेच चुका है और एयरसेल भी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुकी है। अगर जियो का विस्तार जारी रहा तो जल्द ही आपको देश में सिर्फ एक या दो ही टेलीकॉम कंपनियां सर्विस देती नजर आ सकती हैं।
टेलीकॉम कंपनियों के आरपू में गिरावट: जियो की एंट्री के बाद से ही अन्य टेलीकॉम कंपनियों के एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। यह सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।हमने देश के टेलिकॉम सेक्टर में 5G को लेकर केपीएमजी के पार्टनर जॉयदीप घोष के साथ विस्तार से बात की है। समझिए कैसे हैं देश के टेलीकॉम सेक्टर के हालात।
भारत में 5G के लिए प्रमुख चुनौती?:-भारत की टेलिकॉम कंपनियों के लिए 5G को लेकर सबसे बड़ी चुनौती स्पेक्ट्रम के रिजर्व प्राइज को लेकर है। यह रकम काफी ज्यादा है। 5G के स्पेक्ट्रम की नीलामी दिसंबर से शुरू करने की तैयारी है और इसके लिए सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व प्राइज आरक्षित किया है। शुरुआती तौर पर 5G के लिए 3,500 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी है। अगर कोई पूरे देश में इस बैंड के लिए स्पेक्ट्रम चाहता है तो उसे 1 लाख 47,600 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनियों को 5जी की खरीद काफी महंगी पड़ेगी।
5G के लिए कितना तैयार है भारत?:-घोष ने बताया बेशक भारत में 5G के लिए तैयारियां तेज हैं, लेकिन अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देखें तो अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। देश में इसके लिए कंपीटेबल फाइबर केबल बिछानी होंगी, 5जी को सपोर्ट करने वाली डिवाइस लॉन्च करनी होंगी। साथ ही मोबाइल एप्लीकेशन्स को 5जी के लिहाज से सपोर्टिव बनाना होगा।
कौन सी टेलीकॉम कंपनी 5G को खरीदने में फिलहाल सक्षम?:-बीते दिन तक देश की नंबर एक टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल को पिछले 15 सालों में पहली बार घाटे का सामना करना पड़ा है। वहीं एयरसेल की स्थिति किसी के छिपी नहीं है। वोडा और आइडिया का हाल ही में मर्जर हुआ है लेकिन उन पर भी बैंकों का बड़ा कर्ज है। इस बीच सिर्फ जियो की एकलौती कंपनी है जो कि 5G के भारी भरकम और महंगे स्पेक्ट्रम को खरीदने की स्थिति में दिखाई दे रही है।बैंक बरतेंगे सावधानी: इससे पहले सरकार ने महंगे 4G स्पेक्ट्रम खरीदे थे, जिसे टेलीकॉम कंपनियों ने कर्ज लेकर खरीदा। अब टेलीकॉम कंपनियों का यही कर्ज एनपीए की शक्ल लेता जा रहा है। इसे देखते हुए अब बैंक टेलीकॉम कंपनियों को 5G के लिए कर्ज लेने में थोड़ा सावधानी बरत सकते हैं।घोष ने यह भी कहा कि अगर मौजूदा परिदृश्य को देखें तो महंगे स्पेक्ट्रम और बनियादी ढांचे की कमी के कारण शायद ही टेलीकॉम कंपनियां शुरुआती तौर पर 5G के लिए दिलचस्पी दिखाएंगी।

नई दिल्ली। आर्थिक विकास के मोर्चे पर एक अच्छी खबर आई है। चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.2 फीसद रही है। जीडीपी का यह बीती तिमाही से भी बेहतर प्रदर्शन है। अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले जीडीपी के ये नतीजे सरकार को बल देने का काम करेंगे। साथ ही ये नतीजे 3 से 5 अक्टूबर को होनी वाली अगली मॉनीटरी पॉलिसी बैठक के लिए काफी अहम होंगे।
अनुमान से बेहतर रहे नतीजे: जीडीपी के ये आंकड़े अर्थशास्त्रियों की ओर से लगाए जा रहे अनुमानों से भी बेहतर हैं जिनमें से अधिकांश ने जीडीपी के 7.4 से 7.6 फीसद तक रहने का अनुमान जताया था। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने पहली तिमाही में जीडीपी के 7.4 फीसद रहने का अनुमान लगाया था।
कृषि और मैन्युफैक्चरिंग में हुआ इजाफा: तिमाही दर तिमाही आधार पर पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 4.5 फीसद से बढ़कर 5.3 फीसद रही है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9.1 फीसदी बढ़कर 13.5 फीसद हो गई। इसके अलावा तिमाही आधार पर जून तिमाही में जीवीए ग्रोथ 5.6 फीसद से बढ़कर 8 फीसद रही है।
कंस्ट्रक्शन और इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ में आई गिरावट: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंस्ट्रक्शन ग्रोथ 11.5 फीसद से घटकर 8.7 फीसद रही है। वहीं इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ 7.7 फीसद से घटकर 7.3 फीसद, माइनिंग ग्रोथ 2.7 फीसद से घटकर 0.1 फीसद और ट्रेड ट्रांसपोर्ट ग्रोथ 6.8 फीसद से घटकर 6.7 फीसद रही है।
जीडीपी की बीती तिमाहियों का हाल: वित्त वर्ष 2017-18 की आखिरी तिमाही (जनवरी से मार्च) में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7 फीसद, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 फीसद, दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 6.3 फीसद और पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी रही थी।
चीन से फिर आगे निकला भारत: जीडीपी के मामले में भारत एक बार फिर से चीन से आगे निकल गया है। जून तिमाही के दौरान चीन की जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसद रही है जबकि पिछली तिमाही में यह 6.8 फीसद रही थी। 2.6 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाले भारत ने साल 2017 में जीडीपी के मामले में फ्रांस को पछाड़ दिया था।

नई दिल्ली। अगर आप नौकरीपेशा हैं और चाहते हैं कि नौकरी के अलावा भी आपको हर महीने 5 से 6 हजार रुपये तक की इनकम होने लगे तो पोस्ट ऑफिस की एक खास स्कीम आपकी इस इच्छा को पूरा कर सकती है। हालांकि आपको इस स्कीम में एकमुश्त निवेश करना होगा और इस स्कीम के तहत आपको अधिकतम 5500 रुपये हर महीने इनकम की गारंटी मिल जाएगी। पोस्ट ऑफिस की…
नई दिल्ली। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का राजकोषीय घाटा 3.3 फीसद के लक्ष्य को पार कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल की लगातार बढ़ रही कीमतें अल्प अवधि में वित्तीय दबाव उत्पन्न करेंगी।अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, चालू खाता घाटा (सीएडी) जो कि विदेशी करेंसी के इनफ्लो और आउटफ्लो के बीच का अंतर होता है, वो और चौड़ा…
नई दिल्ली। एनपीए (फंसे हुए कर्ज) की समस्या से जूझ रहे देश के बैंकिंग सिस्टम को मजबूती देने के इरादे से केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कहा है कि वो 21 सरकारी बैंकों में से ऐसे बैंकों की सूची तैयार करें जिनका मर्जर आसानी से किया जा सकता है। यह जानकारी इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े सूत्रों के जरिए सामने आई है।सूत्र ने नाम न…
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों में निवेश के प्रति दिलचस्पी कम ही होती है। वहीं जो लोग थोड़ा बहुत निवेश करते हैं उनमें से अधिकांश बस यही सोचते हैं कि कैसे जल्द से जल्द उनका पैसा दोगुना, तीन गुना और चार गुना हो जाए। हममे से हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर कितने दिनों में हमारा पैसा कई गुना बढ़ जाएगा।बैंक के सेविंग अकाउंट से लेकर म्युचुअल फंड तक…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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