कारोबार

कारोबार (1816)

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण देश के कई हिस्सों में लगाए जा रहे आंशिक व सप्ताहांत लॉकडाउन एवं रात्रि कर्फ्यू से सेवा क्षेत्र से जुड़े पर्यटन, होटल, रेस्त्रां व रिटेल सेक्टर के कारोबार में 20 फीसद तक की गिरावट की आशंका जाहिर की जा रही है। आंशिक लॉकडाउन व रात्रि कर्फ्यू से श्रमिकों की आवाजाही भी प्रभावित होगी, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ेगा।महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, पंजाब, बिहार जैसे कई राज्यों में सप्ताहांत या आंशिक लॉकडाउन के साथ रात्रि कर्फ्यू की घोषणा हो चुकी है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस प्रकार के लॉकडाउन के कारण हवाई यात्रा में भी गिरावट की आशंका जाहिर की हैफेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक कोरोना की पहली लहर के बाद 20 फीसद होटल अब तक नहीं खुल पाए हैं। अधिकतर होटल कोरोना पूर्व काल के मुकाबले 50 फीसद क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और अब महाराष्ट्र में लॉकडाउन जैसी स्थिति व अन्य राज्यों में रात्रि कर्फ्यू से उनका कारोबार और कम हो जाएगा। शादी-समारोह को सीमित कर दिया गया है और देर रात तक भीड़ की इजाजत नहीं होने से लोग पार्टी करने से परहेज करने लगे हैं।रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सीईओ कुमार राजगोपालन कहते हैं, 'महाराष्ट्र में जिस प्रकार के लॉकडाउन की घोषणा की गई है उससे वहां के रिटेल कारोबार में 40 फीसद तक तो सप्ताहांत के लॉकडाउन व रात्रि कर्फ्यू से रिटेल कारोबार में 15 से 20 फीसद तक की गिरावट आएगी।उन्होंने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसे फैसलों की वजह से अप्रैल में 35,000 करोड़ रुपये के रिटेल कारोबार के नुकसान की आशंका है। वी-मार्ट के सीएमडी ललित अग्रवाल कहते हैं कि उनकी बिक्री पर कम से कम 20 फीसद तक का असर हो सकता है। रात्रि कर्फ्यू और आंशिक लॉकडाउन ग्राहक को खरीदारी के लिए हतोत्साहित करते हैं।आंशिक लॉकडाउन के साथ-साथ पर्यटन के लिए कई राज्यों में कोरोना जांच को अनिवार्य किए जाने की वजह से पर्यटन पर भी दुष्प्रभाव दिखने लगा है। टिहरी स्थित गंगा-भागीरथी बोट संचालन समिति के अध्यक्ष लखबीर सिंह चौहान ने बताया कि फरवरी में बोटिंग के लिए रोजाना 1500 पर्यटक आ रहे थे, जो अब घटकर बामुश्किल 15-20 रह गए हैं।औद्योगिक संगठनों के मुताबिक, कोरोना की दूसरी लहर की वजह से जो हालात बन रहे हैं, उसे देखते हुए श्रमिकों की आवाजाही पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ऐसा होने पर उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कोरोना की पहली लहर में अपने गांव-घर गए श्रमिकों की वापसी से औद्योगिक उत्पादन पटरी पर लौटना शुरू ही हुआ था कि गुजरात व महाराष्ट्र में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए फिर पलायन की स्थिति बनने लगी है। बड़ी संख्या में श्रमिक एक बार फिर अपने मूल राज्य लौटने लगे हैं। ऐसे में फिर श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उद्योगों के सामने मुश्किल स्थिति बनेगी।

नई दिल्ली। छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का कहना है कि दर बाजार के हिसाब से होनी चाहिए। ऐसा कहने वालों पर इन योजनाओं से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। असल में वरिष्ठ नागरिकों को बाजार आधारित दरों से छूट मिलनी चाहिए। इस वर्ग के पास कमाई का अन्य साधन नहीं होता। इन्हें मिलने वाले रिटर्न को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की तरह सामाजिक खर्च मानना चाहिए।31 मार्च को वित्त मंत्रालय ने विभिन्न स्माल सेविंग स्कीम के लिए तिमाही ब्याज दरें घोषित कीं। कुछ घंटों बाद ही नई दरें वापस ले ली गई और पुरानी दरें बहाल कर दी गई। घोषित की गई दरों में पहले की तुलना में काफी ज्यादा कटौती की गई थी।उदाहरण के लिए सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम (एससीएसएस) में ब्याज दर 7.5 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दी गई थी। पीपीएफ में ब्याज दर 7.1 फीसद से घटाकर 6.5 फीसद कर दी गई थी। इनकम में कमी के लिहाज से देखें तो एससीएसएस के लिए यह 14.7 फीसद और पीपीएफ के लिए यह 10 फीसद थाकुछ लोगों का कहना है कि दरों में कटौती का फैसला विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। वहीं प्रोफेशनल्स का कहना है कि ब्याज दरों को बाजार से जोड़ना और गिल्ट रेट के हिसाब से तय करना एक सामान्य बात है और ऐसा करना सही है।मैं पहले भी कह चुका हूं कि हमें इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि स्माल सेविंग है क्या और किस स्कीम का इस्तेमाल किस लिए किया जाना चाहिए। अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें कम हो रहीं है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती उन स्कीमों के लिए सही कही जा सकती है, जिनका इस्तेमाल रकम जमा करने के लिए किया जा रहा है। लेकिन सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम के लिए छूट जरूर मिलनी चाहिए।एससीएसएस का इस्तेमाल बचत करने वालों की वह पीढ़ी कर रही है जो कमाने और रकम जमा करने के दौर को काफी पहले पीछे छोड़ चुकी है। एससीएसएस का इस्तेमाल कंपाउंडिंग रिटर्न हासिल करने और रकम बनाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसका इस्तेमाल इनकम के स्त्रोत के तौर पर किया जा रहा है। स्कीम के तहत रकम जमा करने के लिए 60 साल की उम्र होनी चाहिए और अधिकतम 15 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। हालांकि, इस स्कीम के तहत ब्याज के तौर पर होने वाली इनकम पूरी तरह से टैक्स के दायरे में है।मेरा मानना है कि न सिर्फ सीनियर सिटीजंस स्कीम पर अधिक ब्याज मिलना चाहिए, बल्कि इस स्कीम के तहत निवेश की सीमा को भी बढ़ाया जाना चाहिए। उनको मिलने वाले रिटर्न को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के तहत सामाजिक खर्च के तौर पर लेना चाहिए। एससीएसएस के लिए सीमा बढ़ाकर 50 लाख होनी चाहिए और ब्याज दरों को ऑटोमेटिक रीसेटिंग से अलग करना चाहिए।यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ब्याज दरों को बाजार से जोड़ने की वकालत करने वाले ऐसे क्लास से आते हैं, जो ऐसी डिपॉजिट पर निर्भर नहीं हैं और इसे लागू करने वाले लोग ऐसे क्लास से हैं, जिनकी गारंटीड पेंशन महंगाई के साथ जीवनभर बढ़ती रहती है। अगर फैसला चुनाव के कारण वापस लिया गया है, तब भी अच्छी बात है। चुनाव ऐसे क्लास को खारिज करते हैं, जिनका कुछ भी दांव पर नहीं लगा है और राजनीतिक जमात को जरूरी मुद्दों पर गौर करने के लिए मजबूर करते हैं। सही मायने में चुनाव इसीलिए होते हैं।

लुधियाना। कोरोना के चलते कच्चे माल की कीमतों में लगातार उछाल, आयात में दिक्कत और समुद्री माल भाड़े में बेतहाशा वृद्धि के कारण कागज महंगा हो रहा है। पैकेजिंग के लिए उपयोग होने वाले क्राफ्ट पेपर की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं। उद्योगों के लिए भी पैकेजिंग की लागत 30 से 35 फीसद तक बढ़ गई है।कीमतों पर नियंत्रण के लिए उद्यमियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले क्राफ्ट पेपर में 90 फीसद योगदान रद्दी कागज का होता है। इसका आयात यूरोप, अमेरिका, पश्चिम एशिया समेत कई देशों से किया जाता है।इंडियन एग्रो पेपर इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल कुमार ने कहा कि वैश्विक बाजार में रद्दी कागज की किल्लत के अलावा समुद्री माल भाड़ा भी चार गुना तक बढ़ गया है। इससे आयात करना महंगा पड़ रहा है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मास्टर प्रिंटर्स के अध्यक्ष प्रो कमल चोपड़ा ने कहा कि चीन ने प्रदूषण समस्याओं के चलते रद्दी के आयात पर रोक लगा दी है। वहां पर पैकेजिंग के लिए क्राफ्ट पेपर की मांग है।ऐसे में दुनियाभर के कई छोटे-छोटे निर्माताओं ने सस्ता क्राफ्ट पेपर बना कर चीन को बेचना शुरू कर दिया। इससे भी रद्दी की बाजार में किल्लत आ गई। लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के प्रधान एससी रल्हन ने कहा कि उद्योगों के लिए पैकेजिंग अहम है। पैकेजिंग पर खर्च ही 35 से 40 फीसद तक बढ़ गया है। इसे मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। सरकार को बढ़ रही इनपुट लागत को कम करने के लिए उपाय करने की जरूरत है।

नई दिल्ली। खरीफ सीजन में उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सरकार का जोर है। सरकार ने शनिवार को कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता तथा कीमतों की निगरानी की जा रही है। इस संबंध में मैन्यूफैक्चरर्स और आयातकों से इस साल खरीफ (गर्मी की फसल) बोआई के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रबी (सर्दियों की फसल) 2020-21 के दौरान देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक रही है। कोविड-19 की वजह से पैदा हुई तमाम चुनौतियों के बावजूद उर्वरकों का उत्पादन, आयात और आवाजाही समय पर और पर्याप्त रही। बयान में कहा गया है कि किसानों के हित में सरकार की उर्वरक की उपलब्धता और कीमतों पर नजदीकी निगाह है।कृषि मंत्रालय ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श में विभिन्न उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया है और इसकी जानकारी उर्वरक विभाग को दे दी है। इसके अनुरूप उर्वरक मंत्रालय ने मैन्यूफैक्चरर्स के साथ विचार-विमर्श में घरेलू उत्पादन का लक्ष्य तय किया है और इसकी निगरानी की जा रही है।यूरिया के मामले में आवश्यकता तथा घरेलू उत्पादन के बीच अंतर को पूरा करने के लिए समय पर आयात की योजना बनाई गई है। फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) का आयात मुक्त और सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत आता है। इसमें उर्वरक कंपनियों को मात्रा/कच्चे माल की जरूरत के हिसाब से आयात करने की आजादी होती है। खरीफ, 2021 के सत्र की तैयारियों के सिलसिले में रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने 15 मार्च को विभिन्न उर्वरक कंपनियों के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के साथ बैठक की थी।

नई दिल्ली। किशोर बियानी की अगुवाई वाले फ्यूचर ग्रुप के रिटेल चेन बिग बाजार (Big Bazaar) ने तत्काल होम डिलिवरी सर्विस में एंट्री की गुरुवार को घोषणा की। कंपनी ऑनलाइन मिलने वाले ऑर्डर को दो घंटे के भीतर डिलिवर करेगी। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अगर आप बिग बाजार के मोबाइल ऐप या पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर प्लेस करते हैं तो नजदीकी स्टोर से दो घंटे के भीतर सामानों की डिलिवरी की जाएगी। इस सर्विस के जरिए आप इस रिटेल चेन से कपड़े, खाने-पीने की वस्तुएं, एफएमसीजी उत्पाद और घरेलू जरूरत के सामान ऑर्डर कर सकते हैं।फ्यूचर ग्रुप के प्रेसिडेंट (फूड और एफएमसीजी) कमलदीप सिंह ने कहा कि कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु में दो घंटे में डिलिवरी की सेवा शरू की है। कंपनी की योजना आने वाले समय में इस सेवा का विस्तार अन्य शहरों में करने की है।सिंह ने कहा, ''हम अगले दो-तीन माह तक हर दिन करीब एक लाख ऑर्डर डिलिवर करने की उम्मीद कर रहे हैं।''Big Bazaar दूसरे चरण में अगले 45 दिन में 21 शहरों में दो घंटे की डिलिवरी सर्विस का विस्तार करेगी। अगले पांच-छह माह में बिग बाजार के प्रत्येक स्टोर द्वारा यह सेवा उपलब्ध करायी जाएगी। 

डिलिवरी चार्ज:-इस सर्विस के तहत कम-से-कम 500 रुपये का सामान बिग बाजार से मंगाना होगा। इस नई सेवा के तहत बिग बाजार 1,000 रुपये से कम के ऑर्डर पर 49 रुपये का डिलिवरी चार्ज लेगा। हालांकि, ऑर्डर का मूल्य 1,000 रुपये से ज्यादा होने पर आपको किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा।Big Bazaar फ्यूचर रिटेल का फ्लैगशिप रिटेल स्टोर है। देश के 150 शहरों में बिग बाजार के 280 से ज्यादा स्टोर हैं।

नई दिल्ली। चर्चित म्यूचुअल फंड कंपनी फ्रैंकलिन टेंपलटन ने कहा है कि वह भारत में अपना कारोबार नहीं समेटने जा रही है। कंपनी के प्रेसिडेंट संजय सप्रे ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि फंड हाउस बंद करने या इसे बेचने की खबरें अफवाह हैं। छह डेट म्यूचुअल फंड योजनाएं बंद करने के बाद नियामकीय जांच का सामना कर रही कंपनी का भारतीय कारोबार बंद होने की खबरें चल रही हैं।सप्रे ने ऐसी खबरों का खंडन करते हुए कहा कि भारत में कारोबार जारी रखने के प्रति फंड हाउस दृढ़ संकल्पित है। पिछले वर्ष बड़ी मात्रा में निवेशकों के फंड चुकाने व पूंजी तरलता की कमी के चलते कंपनी ने 23 अप्रैल को छह डेट योजनाएं बंद कर दी थीं। इस मामले में फंड हाउस को अदालती सुनवाई का सामना भी करना पड़ा है।फिलहाल मामले की जांच पूंजी बाजार नियामक सेबी कर रहा है। योजनाएं अचानक बंद करने के खिलाफ निवेशक अदालत पहुंचे थे। शीर्ष अदालत तक गए इस मामले में फंड हाउस को निवेशकों के पैसे लौटाने को कहा गया है। इस पर कंपनी ने कहा कि वह जल्द से जल्द इसका निपटान करने में जुटी हुई है।

बंद योजनाओं की कमाई 15,776 करोड़ रही:-फ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड ने शुक्रवार को बताया कि बंद की गई छह डेट योजनाओं की 31 मार्च, 2021 तक की कमाई 15,776 करोड़ रुपये रही। यह कमाई मैच्योरिटी, प्री-पेमेंट व कूपन पेमेंट के मद में जमा कुल राशि का जोड़ है। कंपनी ने यह भी बताया कि बंद हुई सभी छह डेट म्यूचुअल फंड योजनाएं अब कैश पॉजिटिव हो चुकी हैं। इस प्रकार, 31 मार्च, 2021 तक इन सभी योजनाओं की नेट असेट वैल्यू (एनएवी) 23 अप्रैल, 2020 की तुलना में अधिक हो चुकी है।

नई दिल्ली। रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) व फ्यूचर ग्रुप के बीच 24,713 करोड़ रुपये का सौदा पूरा करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 सितंबर, 2021 की गई है। फ्यूचर रिटेल (Future Retail) ने बताया कि आरआरवीएल ने नई तारीख को लेकर सहमति दे दी है। इससे पहले यह सौदा 31 मार्च, 2021 तक संपन्न हो जाना था। फिलहाल इस सौदे के खिलाफ अमेरिकी दिग्गज ई-कॉमर्स फर्म अमेजन की याचिका पर…
नई दिल्ली। डाक विभाग ने डाकघर योजनाओं (Post Office Schemes) से निकासी पर टीडीएस (TDS) की कटौती को लेकर नए नियम जारी किये हैं। अगर निवेशक द्वारा की गई सभी डाकघर योजनाओं से कुल निकासी 20 लाख रुपये से अधिक है, तो उस पर टीडीएस कटौती का नया नियम लागू होगा। इसमें पीपीएफ से निकासी भी शामिल है।आयकर अधिनियम 1961 की धारा 194एन के तहत नए प्रावधान के अनुसार, अगर…
नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की ओर से जारी 12-अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या को भारतीय निवासियों के लिए पहचान और पते के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में से एक माना जाता है। UIDAI में इस योजना के तहत भारत में रहने वाले सभी निवासी शामिल हैं, चाहे उनकी उम्र कितनी भी हो। नवजात बच्चों/बच्चों को आधार के लिए नामांकित किया जा सकता है। आधार कार्ड के लिए बच्चे…
नई दिल्ली। नजारा टेक्नोलॉजीज के शेयर मंगलवार को 1,101 रुपये के इशू प्राइस के मुकाबले करीब 81 फीसद प्रीमियम के साथ लिस्टेड हुए। कंपनी के शेयर बीएसई पर 79.01 फीसद की बढ़त के साथ 1,971 रुपये पर लिस्टेड हुए। बाद में शेयर 84 फीसद बढ़कर 2,026.90 रुपये पर पहुंच गए। एनएसई पर शेयर 80.74 फीसद की छलांग के साथ 1,990 रुपये पर सूचीबद्ध हुए।नजारा टेक्नोलॉजीज के आईपीओ को 175.46 गुना…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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