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नई दिल्‍ली। उदारीकरण के बाद से हमारा बीमा उद्योग लगातार 12-15 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है और 2025 तक इसके एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है (आईबीईएफ इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार)। टेक्‍नोलॉजी के असर से नए इंश्‍योरेंस प्रोडक्‍ट्स और बिजनेस मॉडल बाजार में आ रहे हैं। इससे न सिर्फ उद्योग बढ़ रहा है, बल्कि रोज़गार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। सरकार की पहल भी बीमा क्षेत्र में बेहतर रोजगार के अवसर पैदा कर रही है। इरडा (IRDAI) द्वारा प्रायोजित पीओएसपी कार्यक्रम, केन्द्र सरकार की आयुष्‍मान भारत योजना और इंश्योरटेक का विकास ऐसे तीन मुख्य कारण हैं, जिनकी सहायता से बीमा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।लगातार वृद्धि और विकास के बावजूद भारत में बीमा क्षेत्र की पहुंच ज्यादा नहीं बढ़ पा रही है। आज भी भारत में 90 करोड़ लोग बीमा कवरेज से बाहर हैं। वैसे तो इसके कई कारण हैं, लेकिन बीमा के फायदों के जानकारी न होना और आय कम होना इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं।इसी माहौल के बीच इरडा (IRDAI) (भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण) भारत के बीमा क्षेत्र और बीमा उद्योग की गवर्निंग बॉडी के रूप में काम कर रहा है। इरडा ने एक नया वितरण मॉडल विकसित किया है जिसे प्‍वाइंट ऑफ सेल पर्सन या पीओएसपी के नाम से जाना जाता है।

नई दिल्ली। इंडिया पोस्ट अपने ग्राहकों को कमर्शियल बैंकों की तरह बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट, मंथली इनकम स्कीम, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी), किसान विकास पत्र, सुकन्या समृद्धि खाता, आदि की सुविधा देता है।कोई भी व्यक्ति सिर्फ 20 रुपये के भुगतान पर इंडिया पोस्ट में बचत खाता खोल सकता है। साथ में उसे एटीएम की सुविधा भी मिलेगी। इस बचत खाते के साथ आपको खाते में मंथली बैलेंस रखने की जरूरत नहीं है, इस खाते में मुफ्त तिमाही खाता डिटेल, एसएमएस के माध्यम से मिनी स्टेटमेंट, क्यूआर कार्ड के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं, आईएमपीएस के माध्यम से तुरंत पैसे भेजने की सुविधा भी मिलती है।अगर आप बचत खाता खोलना चाहते हैं, तो आपको इंडिया पोस्ट की आधिकारिक वेबसाइट indiapost.gov.in पर जाना होगा। हम आपको India Post ATM कार्ड के बारे में बता रहे हैं...
1. मौजूदा समय में इंडिया पोस्ट बचत खाते में जमा राशि पर 4 फीसद प्रति वर्ष का ब्याज देता है। यदि ग्राहक नि: शुल्क लेनदेन की निर्धारित संख्या से अधिक लेनदेन करते हैं तो उन्हें इसके लिए शुल्क देना होगा।
2. इंडिया पोस्ट एटीएम कार्ड के जरिये प्रति दिन 25,000 रुपये तक की नकद निकासी की जा सकती है। एक बार में 10,000 रुपये की नकद निकासी की जा सकती है। एक खाताधारक प्रति दिन पांच लेनदेन कर सकता है।
3. महानगरों में अन्य बैंकों के एटीएम में लेनदेन करने के लिए इंडिया पोस्ट एटीएम कार्ड का उपयोग करने वाले लोगों को प्रति माह कुल तीन लेनदेन की अनुमति है।
4. इंडिया पोस्ट एटीएम कार्डधारकों को महानगरों के अलावा अन्य शहरों के बैंकों के एटीएम में पांच लेनदेन मुफ्त में करने की अनुमति है।
5. इंडिया पोस्ट में केवल नकदी द्वारा बचत खाता खोला जा सकता है। चेक सुविधा का लाभ लेने के लिए खाता खोलने के समय 500 रुपये का भुगतान करना होगा।

नई दिल्ली। दुनिया के कौन से देश आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर कितने समृद्ध हैं इसे लेकर गुरुवार को ‘प्रॉस्पेरिटी एंड इन्क्लूजन सिटी सील एंड अवार्ड्स’ (PICSA) ने इंडेक्स जारी किया। दुनिया के टॉप के कुल 113 शहरों को इसमें शामिल किया गया जिसमें बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई का नाम भी शामिल है। इस इंडेक्स में स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख टॉप पर रहा। इंडेक्स में किसी शहर के आर्थिक विकास के अलावा विकास की गुणवत्ता और जनसंख्या के बीच वितरण को भी बताया गया है। इस लिस्ट में भारत का बेंगलुरु शहर 83वें स्थान पर रहा। जबकि दिल्ली 101वां और मुंबई का 107वां स्थान रहा। पहली बार यह इंडेक्स जारी किया गया है। मेजबानी कर रहे शहर बिल्बाओ 20वें स्थान पर रहा।टॉप के तीन शहर: इस लिस्ट में ज्यूरिख पहले, आस्ट्रिया की राजधानी विएना दूसरे और डेनमार्क का कोपेनहोगन तीसरे स्थान पर रहा। लक्समबर्ग और हेलसिंकी चौथे एवं पांचवें स्थान पर रहे। लिस्ट में टॉप के पोजीशन पर यूरोप के शहर रहे। ताइपे देश छठे स्थान पर रहा। ताइपे एकमात्र ऐसा एशियाई शहर है जो शीर्ष 20 में जगह बनाने में कामयाब रहा।बिस्के के निदेशक असियर एलिया कास्टानोस ने इंडेक्स के बारे में कहा कि पहला नॉन कमर्शियल रैंकिंग इंडेक्स PICSA के जरिये आर्थिक उत्पादकता के नए उपाय पता चलते हैं जो जीडीपी से अलग बात करते हैं, इससे यह पता चलता है अर्थव्यवस्था में लोगों की स्थिति कैसी है। उन्होंने कहा कि समृद्धि का पता लगाते समय नौकरियों, दक्षता और आय के साथ स्वास्थ्य, आवासीय सामर्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।यह पहली बार है जब दुनिया के प्रमुख शहरों को न केवल उनके आकार या अर्थव्यवस्था के बेहतरी के तौर शामिल किया गया है, बल्कि इंडेक्स में चिन्हित करने के पीछे उनके सभी नागरिकों के लिए समावेशी और समृद्ध वातावरण बनाने की कोशिश है।

नई दिल्‍ली। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को राज्‍यसभा में कहा कि सरकार रेलवे का निजीकरण नहीं कर रही है। उन्‍होंने कहा कि पैसेंजर्स को बेहतर सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए सिर्फ कुछ कमर्शियल और ऑन बोर्ड सर्विसेज की आउटसोर्सिंग की जा रही है। प्रश्‍नकाल के दौरान पूछे गए कई प्रश्‍नों के जवाब में गोयल ने कहा कि सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि रेलवे के परिचालन के लिए अगले 12 साल में अनुमानित 50 लाख करोड़ रुपये के फंड व्‍यवस्‍था की जा सके। इसलिए, यह कदम उठाया गया है।राज्‍यसभा में गोयल ने कहा कि हमारा उद्देश्‍य बेहतर सेवाएं और लाभ देने कहा है न कि भारतीय रेल के निजीकरण का। भारतीय रेल हमेशा से भारत और यहां के लोगों की संपत्ति रही है और बनी रहेगी।सरकार के आकलन के अनुसार, भारतीय रेल को अगले 12 साल में लगभग 50 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। गोयल ने कहा कि हर दिन सदस्‍य लाइन और बेहतर सेवाओं की एक नई मांग करते हैं। भारत सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि वह अगले 12 साल में 50 लाख करोड़ रुपये भारतीय रेल को दे। यह हम सब जानते हैं। उन्‍होंने कहा कि कुछ बजटीय सीमाएं और अन्‍य वास्‍तविक मुद्दे भी हैं।पैसेंजर्स की भीड़ के मद्देनजर नई सुविधाएं/ रेक्‍स उपलब्‍ध कराने के लिए नई ट्रेनें और ज्‍यादा निवेश की जरूरतों का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि अगर कोई प्राइवेट प्‍लेयर निवेश करना चाहता है और वर्तमान प्रणाली को भारतीय रेल के स्‍वामित्‍व में चलाना चाहता है तो उपभोक्‍ताओं और पैसेंजर्स को इससे लाभ होगा।रेल राज्‍यमंत्री सुरेश अंगदी ने कहा कि भारतीय रेल के मौजूदा कर्मचारी इससे प्रभावित नहीं होंगे। प्राइवेट प्‍लेयर्स अच्‍छी सेवाएं उपलब्‍ध कराएंगे साथ ही नौकरी के नए अवसरों का सृजन भी करेंगे।

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट ऐप्स में धोखाधड़ी की खबरों की पिछले कुछ दिनों से बाढ़ सी आई हुई है। कभी केवाईसी के नाम पर, कभी पैसा रिफंड पाने के नाम पर तो कभी फिशिंग ई-मेल या एसएमएस के झांसे में आकर ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा गवां दे रहे हैं। ज्यादातर मामलों में UPI या पेमेंट गेटवे कंपनी द्वारा सही रेस्पोंस नहीं मिलने और जानकारी के अभाव में पीड़ित कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के इस समय में ये घटनाएं लोगों का मनोबल तोड़ रही हैं।हालांकि, थोड़ी सी जागरूकता के साथ अगर ग्राहक कुछ बातों का ध्यान रखें, तो वे डिजिटल पेमेंट ऐप्स के जरिए होने वाली इस; धोखाधड़ी से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कि पेमेंट ऐप्स के जरिए धोखाधड़ी किस तरह हो रही है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
फिशिंग से बचें:-इस प्रकार के फ्रॉड में हैकर ग्राहक को बोगस ई-मेल या एसएमएस लिंक भेजते हैं। ये लिंक बैंकों के लॉग-इन पेज और मोबाइल ऐप्स के लिंक की तरह होते हैं। ग्राहकों को इन लिंक्स पर क्लिक करने के लिए कैशबेक या रिफंड का लालच दिया जाता है। साइबर एक्सपर्ट प्रिया सांखला बताती हैं कि ग्राहक जब इस पर क्लिक करके अपनी जानकारी डालता है, तो वह हैकर के पास चली जाती है। इसके बाद हैकर आपको करेक्ट वेबसाइट पर इनवेलिड मैसेज के साथ रिडायरेक्ट कर देते हैं। वहीं, मोबाइल ऐप में सर्वर इश्यू या इंटरनेट कनेक्शन का एरर दिखाया जाता है।वहीं जब हैकर ग्राहक से ऐप इंस्टॉल करवाते हैं, तब हैकर द्वारा मोबाइल की लाइट, एसएमएस, कॉल और कॉन्टेक्ट आदि की अनुमति देने के लिए कहा जाता है। अनुमति मिलते ही आपके एसएमएस, कॉन्टेक्ट और कॉल रिलेटेड डेटा सहित बहुत सी आपकी निजी जानकारी हैकर के पास चली जाती है।
विशिंग के ना हों शिकार:-इस टाइप के फ्रॉड में धोखेबाज फोन पर आपसे आपकी निजी जानकारी पूछता है। धोखेबाज बैक, यूपीआई या पेमेंट गेटवे साइट का प्रतिनिधि बनकर केवाईसी अपडेट या अन्य किसी व्यवहारिक कारण के लिए ग्राहक को कॉल करता है। इसमें वे ग्राहक से निजी जानकारी लेते हैं, जिससे पिन या पासवर्ड मालूम किया जा सके।
पेटीएम पर केवाईसी के नाम से हो रही धोखाधड़ी;-इस समय Paytm में केवाईसी के नाम पर धोखाधड़ी के मामले सबसे अधिक देखने को मिल रहे हैं। इसमे धोखेबाज खुद को पेटीएम कस्टमर केयर टीम का बताकर ग्राहक को कॉल करता है। वह ग्राहक से पेटीएम सर्विस को जारी रखने के लिए केवाईसी कंप्लीट करने के लिए कहता है। इसके लिए वह ग्राहक से ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कहता है। इसी ऐप के जरिए हैकर ग्राहक की जानकारी चुराकर उसका पेटीएम अकाउंट खाली कर देता है। ऐसी घटनाओं में ग्राहक के मोबाइल पर पेटीएम के नाम से पहले एक एसएमएस भी भेजा जाता है, जिसमें कहा जाता है कि हम कुछ समय बाद आपका पेटीएम अकाउंट होल्ड कर देंगे, अपने पेटीएम केवाईसी को पूरा करें। ग्राहक को इस तरह के किसी भी झांसे से सावधान रहने की जरूरत है। पेटीएम ने स्वयं इस संबंध में चेतावनी जारी की है।यहां आपको बता दें कि पेटीएम में केवाईसी अधिकृत केवाईसी प्वाइंट पर जाकर ही की जाती है या फिर पेटीएम का प्रतिनिधि स्वयं ग्राहक के घर आकर केवाईसी करता है। पेटीएम कभी भी एसएमएस या कॉल के जरिए केवाईसी नहीं करता है।
पैसे लेने के लिए कभी नहीं डालना होता यूपीआई पिन;-हमेशा ध्यान रखें कि जिस व्यक्ति ने रिक्वेस्ट का मैसेज भेजा है, वह आपसे पैसे मांगना चाहता है। आप अगर पे पर क्लिक करके यूपीआई पिन डाल दोगे, तो पैसे सामने वाले के अकाउंट में चले जाएंगे। दूसरी तरफ से देखें, तो अगर आपको किसी से पैसे चाहिए, तो आप उसे रिक्वेस्ट का मैसेज भेजें। यहां बता दें कि अगर कोई आपको पेमेंट ऐप के माध्यम से पैसे भेज रहा है, तो आपको कहीं भी यूपीआई पिन डालने या कहीं टैप करने की जरूरत नहीं है।
फ्रॉड से इस तरह बचें
1. अपने पास आने वाले किसी भी एसएमएस, ई-मेल या पॉप-अप को अच्छे से पढ़ें।
2. ओटीपी, सिक्योर कोड, आईडी और रिक्वेस्ट के अंतर का ध्यान रखें।
3. हमेशा ऐप इंस्टॉल करने के लिए प्ले स्टोर का यूज करें और कंपनी के लोगो और स्पेलिंग को चैक कर लें।
4. किसी भी ऐप को अनुमति जरूरत के अनुसार ही दें या फिर वन टाइम अलाउ ही करें।
5. कैशबेक या रिफंड वाली स्कीमों से दूर रहें।
फ्रॉड हो जाने पर उठाएं ये कदम
1. फ्रॉड हो जाने पर बैंक और यूपीआई को कॉल करें, ताकि पेमेंट को फ्रीज़ किया जा सके या रिफंड किया जा सके।
2. किसी साइबर एक्सपर्ट की मदद लें और मामले की एफआईआर दर्ज करवाएं।
ये भी उठें कदम
1. पेंमेंट ऐप्स में धोखाधड़ी को कम करने को लेकर प्रिया सांखला का सुझाव है कि सरकार और बैंकों को यूपीआई पर तुरंत निकासी की सुविधा को हटाना चाहिए, ताकी पीड़ित को रिकवरी का समय मिल सके।
2. पेटीएम, फोन-पे और भीम यूपीआई आदि पर भी साइबर सेल को एक्टिव रहकर पुलिस को कार्रवाई के लिए मदद करनी चाहिए। सांखला के अनुसार, 70 फीसद मामलों में यूपीआई ऐप या कंपनी समय पर मदद नहीं करती है।

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सरकारी बैंकों में 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया कि आरबीआइ ने इसी वर्ष एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच धोखाधड़ी के 5,743 मामले दर्ज किए, जिनमें कुल 95,760.49 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है। इस दौरान राज्यसभा को दिए गए लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि बैंकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके तहत निष्क्रिय कंपनियों के करीब 3.38 लाख खातों को सीज कर दिया गया है।वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी सीमा को बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिए जाने के बाद बैंक के 78 फीसद जमाकर्ता अपने खाते की पूरी राशि निकाल सकेंगे। बता दें कि पीएमसी बैंक के 23 सितंबर, 2019 को (आरबीआई निर्देश लागू होने के दिन), पीएमसी बैंक के कुल खाताधारकों की संख्या 9,15,775 थी।ठाकुर ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक में धोखाधड़ी के 374 मामले सामने आए, इसके बाद कोटक महिंद्रा बैंक (338), एचडीएफसी बैंक (273), एचएसबीसी में (178) धोखाधड़ी के मामले पता चले।
किस बैंक में कितने फ्रॉड और कितने का लगा चूना
SBI- 2939 मामले, 25,416.75 करोड़ का नुकसान
PNB- 225 मामले, 10.821, 77 करोड़ का चूना
Bank of Baroda- 180 मामले, 8,273. 43 करोड़
Allahabd Bank 724 मामले, 6,508.59 करोड़
Bank of India 127 मामले, 5,412.62
UCO Bank 57 मामले, 4,474. 05
Canara Bank 116 मामले, 4,400. 17
Indian Overseas Bank 97 मामले, 4,289.21 करोड़
Oriental Bank of Commerce 144 मामले, 3,908.03
Union Bank of India 157 मामले, 3,776.17
मौजूदा समय में बैंकों की हालत बेहद खराब होने से एनपीए का बोझ बढ़ गया है। कई बैंकों को नुकसान उठाना पड़ा है। इनमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को जुलाई-सितंबर तिमाही में करीब 1194 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। जबकि यूको बैंक को करीब 892 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
ढाई करोड़ रुपये जुर्माना: बैंकिंग क्षेत्र के नियामक आरबीआइ ने नियमों के उल्लंघन के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा पर 2.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा नियामक ने कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक ऑफ बड़ौदा पर बिहार के एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग लिमिटेड से जुड़े मामले में जुर्माना लगाया गया है। बिहार के इस बहुचर्चित एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चल रही है। इस घोटाले में सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड और सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के कुछ अधिकारियों समेत समिति पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर कर्ज संबंधी निर्देशों की अनदेखी के चलते जुर्माना लगाया गया है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनियों का रणनीतिक विनिवेश शुरू करने का फैसला किया है। विनिवेश के पहले चरण में पांच कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया गया है। इन पांच कंपनियों में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (बीपीसीएल), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआइ), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर्प), टेहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (टीएचडीसीआइ) और नार्थ ईस्टर्न इलेक्टिक पावर कॉरपोरेशन (नीपको) शामिल हैं। विनिवेश प्रक्रिया में…
नई दिल्ली। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 76.47 अंको की गिरावट के साथ 40,575.17 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 30.70 अंकों की कमी के साथ 11,968.40 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 शेयरों में से 14 हरे निशान और 36 लाल निशान पर बंद हुए। दिन भर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक वक्त 40,534.12 अंक के निचले…
नई दिल्ली - बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को कर्ज चूक पर लिस्टेड कंपनियों के लिए सख्त प्रावधान मानदंडों को मंजूरी दे दी। इसके अलावा पोर्टफोलियो प्रबंधकों के साथ-साथ शेयरों के अधिकार जारी करने के लिए अपने नियमों में भी बदलाव किए। सेबी ने मौजूदा समय में टॉप 1000 कंपनियों के लिए बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी रिपोर्ट (BRR) की आवश्यकता को भी 500 से बढ़ा दिया है। नियामक ने बोर्ड मीटिंग के…
न्यूयॉर्क - फॉर्चून की 2019 की 'बिजनस पर्सन ऑफ द इयर' लिस्‍ट में भारतीय मूल के 3 लोगों को जगह मिली है। भारत में जन्‍में माइक्रोसॉफ्ट के सत्‍या नडेला इस लिस्‍ट में टॉप पर हैं। वहीं मास्‍टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा आठवें और अरिस्‍टा की हेड जयश्री उल्‍लाल 18वें स्‍थान पर हैं। फॉर्चून की सालाना बिजनेस पर्सन ऑफ द इयर लिस्‍ट में कारोबार जगत के ऐेसे 20 दिग्‍गजों को शामिल…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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