नई दिल्ली। गैस आधारित इकॉनोमी बनाने की कोशिश के तहत देश के राष्ट्रीय राजमार्गो और एक्सप्रेस हाईवे के आस पास अगले तीन वर्षो में 1000 एलएनजी स्टेशन लगाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। पहले चरण में गुरुवार को पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने एक साथ 50 एलएनजी स्टेशनों का उदघाटन किया। ये स्टेशन गोल्डेन क्वाड्रिलेटरल और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित हैं।प्रधान ने इस अवसर पर बताया कि तीन वर्षो में एक हजार एलएनजी स्टेशन लगाने पर 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के आदेश के मुताबिक देश की इकोनॉमी में गैस की हिस्सेदारी बढ़ा कर 10 फीसद करने की दिशा में यह बहुत ही महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।प्रधान ने बताया कि, ''लंबी दूरी तक जाने वाले ट्रकों व वाहनों को एलएनजी में तब्दील करना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन इसके बहुत फायदे होंगे। यह पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित होने के साथ ही ढुलाई की लागत भी काफी कम करेंगे।'' देश में पर्सनल वाहनों व छोटे वाणिज्यिक वाहनों को तो सीएनजी आधारित बनाने में काफी सफलता मिली है लेकिन एलएनजी (लिक्विफायड नेचुरल गैस) से वाहनों को चलाने की तकनीकी की शुरुआत अब जाकर हो रही है।एलएनजी की प्रकृति ज्यादा ठंडी होती है इसलिए यह लंबे समय तक चलने वाले वाहनों के लिए ज्यादा मुफीद मानी जा रही है। यह डीजल से 30-40 फीसद सस्ती भी है और एक बार टैंक भरवाने के बाद ट्रक या भारी वाहन 600-700 किलोमीटर जा सकते हैं। प्रधान ने कहा कि, ''देश में एक करोड़ ट्रक हैं। अगर इनका 10 फीसद भी एलएनजी से चलने लगा तो इससे होने वाली बचत का अनुमान लगाया जा सकता है।'' उन्होंनंें बताया कि सरकार की योजना राजमार्गो पर हर 200-300 किलोमीटर पर एक एलएनजी स्टेशन स्थापित करने की है।एलएनजी पर निर्भरता बढ़ने का एक फायदा यह भी होगा कि तेल आयात की लागत कम होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमत कच्चे तेल के मुकाबले कम होती है। देश में इसकी भारी मांग को देखते हुए भारत कई नए एलएनजी टर्मिनल भी लगा रहा है।नए स्थापित होने वाले 50 एलएनजी स्टेशनों में से 20 आईओसी, 11-11 स्टेशन एचपीसीएल व बीपीसीएल, 06 गेल और 02 पेट्रोनेट एलएनजी ने स्थापित किया है। इनके नेटवर्क की शुरुआत के साथ ही अब वाहन निर्माता कंपनियां भी एलएनजी चालित वाहनों का निर्माण बढ़ाएंगी।

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