नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अर्थशास्त्रियों ने प्रभावित सेक्टर्स के लिए दूसरे दौर के आर्थिक पैकेज की जरूरत बताई है। बैंक के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि शेयर बाजारों में दिख रही तेजी को अर्थव्यवस्था में सुधार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सितंबर महीने के बाद जब किश्तों के भुगतान पर रोक की अवधि समाप्त हो जाएगी, तब बैंक बढ़े हुए एनपीए के आंकड़े जारी कर सकते हैं।जब देश में कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ था, उस समय शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई थी। उस समय शेयर बाजार 20 फीसद से ज्यादा गिर गये थे। इसके बाद धीरे-धीरे शेयर बाजारों में सुधार हुआ और बाजारों ने नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की। विडंबना यह है कि शेयर बाजारों में ऐसे समय में भी तेजी आ रही है, जब रेटिंग एजेंसियां जीडीपी के नकारात्मक रहने की बात कह रही हैं।एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने एक बयान में कहा, 'शेयर बाजारों में तेजी और आर्थिक स्थिति में सुधार के बीच रिश्ता बेहद कमजोर है। इस स्थिति को एक अतार्किक उत्साह कहा जा सकता है। बाजारों में अगर तेजी है, तो इसका मतलब अर्थव्यवस्था का भी बेहतर होना नहीं हो सकता।' उन्होंने कहा कि शेयर बाजारों में आ रही तेजी का कारण आरबीआई द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सरल नकदी भी हो सकती है।बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीडीपी ग्रोथ के लिए भारत सिर्फ कृषि क्षेत्र में वृद्धि पर निर्भर नहीं रह सकता। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगर कृषि क्षेत्र में साल 1951- 52 में प्राप्त हुआ 15.6 फीसद का सबसे अच्छा प्रदर्शन भी प्राप्त हो जाता है, तो उस स्थिति में भी जीडीपी में 2 फीसद अंक की ही वृद्धि होगी। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों की सहायता के लिए दूसरे दौर के आर्थिक पैकेज के बारे में विचार किया जाना चाहिए।

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