नई दिल्ली। संकटग्रस्त समूह आइएलएंडएफएस ने गुरुवार को कहा कि पिछले 10 साल में समूह की कंपनियों के लिए काम कर रही क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के फॉरेंसिक ऑडिट का पहला चरण पूरा हो गया है। फॉरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी आइएलएंडएफएस के बोर्ड ने ग्रांट थॉर्न्टन को सौंपी थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। एक बयान में कहा गया है कि फॉरेंसिक ऑडिट में समूह की डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के लिए विभिन्न डेट उपकरणों की रेटिंग करने और पूंजी बाजार से अत्यधिक कर्ज जुटाने में रेटिंग एजेंसियों की भूमिका का मूल्यांकन किया गया।फॉरेंसिक ऑडिट के तहत दी गई जिम्मेदारियों में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की भूमिका का मूल्यांकन करना और 2008 से 2018 तक की अवधि में रेटिंग एजेंसियों द्वारा किए गए संभावित गलत कार्यो का पता लगाना शामिल हैं।बयान के मुताबिक निर्धारित अवधि में केयर, इकरा, इंडिया रेटिंग्स और ब्रिकवर्क समूह की कंपनियों आइटीएनएल, आइएफआइएन और आइएलएंडएफएस की प्रमुख रेटिंग एजेंसियां थीं। 2016 से आइटीएनएल और आइएफआइएन में क्रिसिल की जगह ब्रिकवर्क ने ले ली थी। अंतरिम रिपोर्ट प्रासंगिक पक्षकार, सेक्टर विशेषज्ञों और कानूनी टीम के साथ साझा की गई है।

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