नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को बताया कि जेनेरिक दवाओं से आम जनता को 2,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि ब्रांडेड और जेनेरिक सभी शेड्यूल्ड दवा निर्माताओं को अपना उत्पाद राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) द्वारा तय की गई सीमा के अंदर बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दवाओं पर स्थानीय टैक्स भी लागू होंगे। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान, मंडाविया ने कहा कि जेनेरिक दवाओं ने आम जनता के करीब 2,000 करोड़ रुपये बचाने में मदद की है। मंडाविया ने लोकसभा में इस बाबत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से 1,000 से अधिक दवाओं का बिक्री मूल्य तय किया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने हृदय रोगियों के लिए चिकित्सा लागत को भी कम किया है। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधी योजना (PMBJP) के तहत जेनेरिक दवाएं बेची जा रही हैं, जो संबंधित दवाओं के शीर्ष तीन ब्रांडों की औसत कीमत से करीब 50 से 90 फीसदी सस्ती है।” राज्य मंत्री ने लोकसभा में बताया कि पिछले 5 सालों में करीब 5,028 पीएमबीजेपी केंद्र खोले गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में, पीएमबीजेपी के तहत 900 दवाएं और 154 सर्जिकल व उपभोज्य वस्तुएं शामिल की गई हैं। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में, इनमें से 714 दवाएं और 53 सर्जिकल वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

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