नई दिल्ली। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट (Budget 2019) पेश कर दिया है। स्वास्थ्य बजट को लेकर लोगों को काफी उम्मीद थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार स्वास्थय बजट को लेकर काफी सारी घोषणाएं की है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 2018-19 में जहां इस क्षेत्र के लिए बजट आवंटित किया गया था। वहीं इस बार 60,908.22 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 6,400 करोड़ रुपये आवंटित किए है।राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (National Urban Health Mission) के तहत आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की स्थापना के लिए 249.96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि समुदाय के लिए व्यापक प्राथमिक देखभाल प्रदान करने के लिए, 1,349.97 करोड़ रुपये राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य के तहत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित करने के लिए रखे गए हैं। कार्यक्रम के तहत, लगभग 1.5 लाख उप-केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 2022 तक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के रूप में बदल दिया जाएगा। ये केंद्र रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर और बुढ़ापे से संबंधित बीमारी जैसे रोगों के लिए उपचार प्रदान करेंगे।2019-20 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए आवंटन 32,995 करोड़ रुपये के दिए गए है। जबकि पिछले बजट में यह राशी 30,129.61 करोड़ थी । राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY)जो NHM के अंतर्गत आती है, में 156 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। एम्स के लिए बजटीय आवंटन 2018-2019 में 3,018 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,599.65 करोड़ रुपये हो गया है। tertiary care programmes के लिए कुल बजटीय आवंटन में 200 करोड़ रुपये की गिरावट देखी गई, 2018-19 में 750 करोड़ रुपये से इस वित्त वर्ष में 550 करोड़ रुपये तक।नर्सिंग सेवाओं के बढ़ाने और उन्हें मजबूत करने के लिए 64 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। फार्मेसी स्कूलों और कॉलेजों को अपग्रेड करने के लिए 5 करोड़ रुपये, जिला अस्पतालों और राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों (स्नातकोत्तर सीटों) को अपग्रेड करने के लिए 800 करोड़ रुपये। सरकार ने जिला अस्पतालों को नए मेडिकल कॉलेजों में परिवर्तित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये और सरकारी मेडिकल कॉलेजों (स्नातक) और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के लिए और राज्यों में पैरामेडिकल साइंसेज के राज्य संस्थानों को स्थापित करने के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

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