नई दिल्ली। यूनिट यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP) एस ऐसा निवेश विकल्प है, जिसके साथ इंश्योरेंस कवर भी जुड़ा हुआ होता है। इसे निवेशक अधिक पसंद करते हैं, क्योंकि मैच्योरिटी के वक्त मिलने वाला अमाउंट पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। यूलिप प्लान 5 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ आते हैं। इस लॉक इन पीरियड के दौरान पॉलिसी होल्डर बीच में पैसा नहीं निकाल सकते हैं। यूलिप से निकासी की अनुमति लॉक-इन पीरियड के खत्म होन के बाद ही दी जाती है। मैच्योरिटी पीरियड के अंत में मैच्योरिटी वैल्‍यू मिलती है।अगर पॉलिसी होल्डर प्रीमियम का भुगतान करना बंद कर देता है, जिससे मैच्योरिटी डेट से पहले यूलिप को बंद कर दिया जाता है। यूलिप प्लान बीच में रुक जाने पर अलग-अलग तरीकों से ट्रीट किया जाता है, पहला लॉक-इन पीरियड के खत्म होने से पहले, दूसरा लॉक-इन पीरियड के बाद। ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 सितंबर 2010 के बाद जारी किए गए यूलिप प्लान शुरू होने की तारीख से 5 साल की लॉक-इन पीरियड के होते हैं।अगर पॉलिसी होल्डर 5 साल के लॉक-इन पीरियड से पहले अपने यूलिप को बंद कर देता है तो इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसी होल्डर को दो ऑप्शन देती हैं- पॉलिसी का फिर से चालू करना और इंश्योरेंस कवर के बिना यूलिप से पैसों की निकासी। ऐसे स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी को फिर से चालू करने के लिए पॉलिसी के ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद 15 दिनों के अंदर एक नोटिस भेजती है। अगर पॉलिसी होल्डर नोटिस मिलने के 30 दिनों के अंदर इंश्योरेंस कंपनी को क्या करना चाहिए इसके बारे में नहीं बताता है तो इंश्योरेंस कंपनी लॉक-इन पीरियड के आखिर में पॉलिसी होल्डर को बंद यूलिप का पैसा दे देगी।वहीं अगर पॉलिसी होल्डर पॉलिसी को फिर से चालू करने का ऑप्शन चुनता है तो उसे 2 साल के अंगर अनपेड प्रीमियम और पेनल्टी चार्ज की पेमेंट करने का मौका मिलता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने से पहले यूलिप को फिर से चालू किया जाना चाहिए।

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