नई दिल्ली। नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने कर्ज से लदी एस्सार स्टील के लिए पेश की गई वैश्विक दिग्गज स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल के समाधान योजना को सशर्त मंजूरी दे दी है। आर्सेलर मित्तल ने एस्सार स्टील के अधिग्रहण के लिए 42,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है।एनसीएलएटी ने कहा है कि उसकी यह मंजूरी पूर्व के आदेश पर एस्सार स्टील के प्रोमोटर्स की तरफ से दायर की गई अपील पर आने वाले निर्णय से तय होगी।जस्टिस एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि एस्सार स्टील की समाधान योजना पर कोई रोक नहीं है और मिलने वाले फंड को कंपनी को कर्ज देने वालों के बीच बांटा जाएगा।ट्रिब्यूनल ने कहा, 'समाधान योजना को तैयार करने वाल पेशेवर निगरानी कमेटी के चेयरमैन होंगे और वह कानून के मुताबिक काम करेंगे।'अपीली ट्रिब्यूनल ने कहा कि वह फाइनैंशियल क्रेडिटर्स और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के बीच होने वाले फंड के वितरण के मामले को भी देखेगा।पीठ ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) से दोनों तरह के कर्जदाताओं के बीच होने वाले फंड वितरण का अनुपात तय करने को कहा है।एस्सार स्टील के निदेशकों ने नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की अहमदाबाद बेंच के फैसले को चुनौती दे रखा है। एस्सार स्टील का कहना है कि उसकी 54,389 करोड़ रुपये की बोली आर्सेलर मित्तल की बोली से अधिक है क्योंकि इसमें फाइनैंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के 100 फीसदी बकाये के भुगतान का खाका पेश किया गया है।स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी एनसीएलएटी के खिलाफ याचिका दे रखी है। बैंक का कहना है कि एस्सार स्टील को दिए कर्ज का उसे मात्र 1.7 फीसद वापस मिल रहा है, जबकि अन्य फाइनैंशियल क्रेडिटर्स को उनके बकाया रकम का 85 फीसद से अधिक हिस्सा मिल रहा है।आर्सेलर मित्तल के प्रस्ताव में वित्तीय संस्थाओं को 41,987 करोड़ रुपये का बकाया चुकाए जाने का जिक्र है, जबकि कुल बकाया 49,395 करोड़ रुपये है। वहीं ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को कुल 4,976 करोड़ रुपये के बकाया के मुकाबले 214 करोड़ रुपये मिल रहे हैं। अगर आर्सेलर मित्तल की योजना को मंजूरी दी जाती है, तो स्टैंडर्ड चार्टर्ड को मात्र 60 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि उसने 3,187 करोड़ रुपये का दावा कर रखा है।

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