नई दिल्ली। जेट एयरवेज को आने वाले दिनों में और अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। किराए पर विमान मुहैया कराने वाली कंपनी ने जेट के साथ कॉन्ट्रैक्ट को खत्म करने की चेतावनी दी है।एफएलवाई लीजिंग लिमिटेड ने कंपनी को किराए पर दिए गए तीन और विमानों को संचालन से हटाते हुए चेतावनी दी है कि अगर इस महीने तक जेट एयरवेज समाधान योजना पर अंतिम मंजूरी नहीं लेती है, तो वह इन विमानों को किसी अन्य कंपनी को किराए पर दे देगी।जेट एयरवेज ने गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज को इस बात की जानकारी देते हुए बताया था कि किराए का भुगतान नहीं करने की वजह से उसके तीन और विमान संचालन से बाहर हो गए हैं। इस तरह से कंपनी के अब तक 28 विमान खड़े किए जा चुके हैं।हालांकि, जेट एरयवेज में इस जानकारी में किराए पर देने वाली कंपनियों के नाम की जानकारी नहीं दी थी।जेट के बेड़े में शामिल कुल विमानों का करीब एक तिहाई संचालन से बाहर हो चुका है और इस वजह से कंपनी को कई फ्लाट्स रद्द करने पड़े हैं।किराए पर विमान देने वाली कई कंपनियों मसलन एयरकैप होल्डिंग्स एनवी और बीओसी एविएशन का जेट पर बकाया है। कंपनी लोन के भुगतान में डिफॉल्ट कर चुकी है और उसने पायलटों के साथ किराए पर विमान देने वाली कंपनियों और अन्य सप्लायर्स को भुगतान नहीं किया है।एफएलआई के सीईओ कोल बैरिंगटन ने बताया, 'हमने अपने विमानों को संचालन से हटा लिया है। हालांकि, अभी हमने कॉन्ट्रैक्ट रद्द नहीं किया है। हम एसबीआई के समाधान योजना पर कंपनी की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।'उन्होंने कहा, 'अगर यह महीने के अंत तक हो जाता है, तो ठीक है, वरना हम अपने विमानों को वापस लेकर उसे कहीं और लगा देंगे।'जेट एयरवेज ने जिस योजना का खाका तैयार किया है, उसके तहत नियंत्रण हिस्सेदारी की बिक्री की जाएगी और कंपनी के कर्ज को बैंक इक्विटी में बदल देंगे। इसके बाद इक्विटी के जरिए फंड जुटाई जाएगी और फिर कर्ज पुनर्गठन योजना के जरिए 1.2 अरब डॉलर की फंडिंग को पूरा किया जाएगा। लेकिन इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए एतिहाद समेत अन्य स्टेकहोल्डर्स की मंजूरी की जरूरत होगी।शुक्रवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में कंपनी का शेयर मामूली मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा है।

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