नई दिल्ली। ग्रामीण आय में कमी और शहरी क्षेत्र की सुस्त डिमांड की वजह से दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की ग्रोथ रेट कमजोर हो सकती है।रॉयटर्स के पोल के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही के 7.1 फीसद के मुकाबले अक्टूबर-दिसंबर में जीडीपी 6.9 फीसद रह सकती है। रॉयटर्स का यह पोल 19-25 फरवरी के बीच हुआ, जिसमें 55 अर्थशास्त्रियों को शामिल किया गया।कॉन्टीनम इकॉनमिक्स के इकॉनमिस्ट चारू चना के मुताबिक, 'खपत को लेकर स्थिति साधारण बनी हुई है क्योंकि अधिकांश तिमाही में नकदी की समस्या बनी हुई है। वहीं कृषि समस्या से ग्रामीण खपत कमजोर बना हुआ है।'28 फरवरी को जीडीपी के आंकड़े आने हैं और इसके 6.3 फीसद से 7.9 फीसद के बीच रहने की संभावना है, पिछले दो सालों की अधिकतम सीमा से नीचे है। 2018 में अप्रैल-जून के बीच जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.2 फीसद रही थी।गौरतलब है कि जीडीपी में होने वाली संभावित गिरावट को भांपते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दरों में कटौती कर दी थी। इसके साथ ही आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को ''सख्त'' से बदलकर ''सामान्य'' कर दिया था। आरबीआई की नीति में हुआ यह बदलाव महंगाई दर में आई लगातार कमी की वजह से था।हालांकि आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा समिति ने माना था कि व्यापार युद्ध को लेकर जारी वैश्विक अनिश्चितता, ब्रेक्जिट और तेल की कीमतें आने वाले दिनों में ग्रोथ रेट के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।

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