नई दिल्ली। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सरकार जीडीपी के 3.3 फीसद के बजटीय लक्ष्य के भीतर राजकोषीय घाटे को बनाए रखने के लिए दृढ़संकल्प है क्योंकि देश में दोहरे घाटे की समस्या पैदा नहीं हो सकती। अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की तेजी से बढ़ती कीमतें और उच्च आयात बिल जाहिर तौर पर देश के चालू खाते घाटे को दबाव में ला देगा और इस मोर्चे पर कोई भी वित्तीय घाटा दोहरे नुकसान की स्थिति में खड़ा कर देगा।पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में किसी भी प्रकार की कटौती को खारिज करते हुए अधिकारी ने कहा कि कर राजस्व के स्रोत के रूप में तेल पर निर्भरता को कम किया जाना चाहिए और यह तब हो सकता है जब सकल घरेलू उत्पाद में नॉन- ऑयल टैक्स का हिस्सा बढ़ाया जाए।अधिकारी ने बताया, "भारत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रखेगा क्योंकि हम उपभोग संचालित अर्थव्यवस्था हैं और कर राजस्व भी बढ़ रहा है। हम ऐसा करने को लेकर दृढ़ संकल्प हैं। हम व्यय में कटौती नहीं करेंगे क्योंकि इससे विकास पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।"उन्होंने कहा कि खर्चों मे कटौती करना राजकोषीय घाटे को कम करने का सबसे आसान तरीका है। अधिकारी ने कहा, "अगर हम एक लाख करोड़ रुपये के खर्च में कमी करते हैं तो यह राजकोषीय घाटे में 2.9 फीसद तक की कमी ला देगा। लेकिन तब ग्रोथ जरूरत प्रभावित होगी।"

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