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पटना। बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) का काउंटडाउन शुरू है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने संभावित मंत्रियों के नाम तय कर लिए हैं। केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने कोटे के संभावित नामों की सूची को अंतिम रूप देना है। चर्चा है कि बीजेपी ने भी अपने संभावित मंत्रियों के नाम तय तो कर लिए हैं, लेकिन इस पर दिल्ली की अंतिम मुहर का पार्टी को इंतजार है। इसके लिए बीजेपी के कई दिग्गज नेता सुशील मोदी (Sushil Modi), नित्यानंद राय (Nityanand Rai) और राधामोहन सिंह (Radha Mohan Singh) जैसे नेता दिल्ली में जमे हुए हैं। मंत्रिमंडल विस्‍तार को लेकर कई नामों की चर्चा है। इनमें शामिल बीजेपी के शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) की एंट्री तय मानी जा रही है।

बीजेपी का फोकस सामाजिक-क्षेत्रीय समीकरण पर:-बीजेपी सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) में जीत से उत्साहित पार्टी का सारा फोकस इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने पर है। यही वजह है कि संभावित मंत्रियों के नाम को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। जानकारी के मुताबिक जिस जाति के विधायकों की संख्या अधिक होगी, उसको मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिए जाने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।

 

अभी कैबिनेट में हैं मुख्यमंत्री को लेकर 14 मंत्री;-फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के अलावा 13 मंत्री हैं। बीजेपी के कोटे से तारकिशोर प्रसाद (Tar Kishore Prasad) और रेणु देवी (Renu Devi) मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री (Dy.CM) हैं। इन दो के अलावा मंगल पांडेय (Mangal Pandey), अमरेंद्र प्रताप सिंह (Amrendra Pratap Singh), जीवेश मिश्रा (Jeevesh Mishra), रामसूरत राय (Ram Surat Rai), रामप्रीत पासवान (Ram Preet Paswan) मंत्री हैं। यानी 13 में से सात मंत्री बीजेपी के हैं। बीजेपी की सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) भी सरकार में मंत्री हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने कोटे से अब तक विजय चौधरी (Vijay Chaudhary), विजेंद्र प्रसाद यादव (Vijendra Prasad Yadav), अशोक चौधरी (Ashok Chaudhary) और शीला मंडल (Shila Mandal) को मंत्री बनाया है। इन चार के अलावा जेडीयू की सहयोगी हिंदुस्‍तानी आवाम मोर्चा (HAM) से संतोष कुमार सुमन (Santosh Kumar Suman) भी मंत्री हैं।

22 नए चेहरों को मिल सकती है नीतीश कैबिनेट में जगह:-नियमों के मुताबिक प्रदेश कैबिनेट में एक मुख्यमंत्री के अलावा 35 मंत्रियों का कोटा है। इस लिहाज से 22 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। हालांकि, अब तक यह तय नहीं हुआ है कि नए मंत्रियों में कितने बीजेपी कोटे के होंगे और कितने जेडीयू के। सूत्रों की माने तो नए मंत्रिमंडल में 11-11 या फिर 10-12 के फॉर्मूले पर नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

शाहनवाज व संजीव चौरसिया के नाम सूची में शामिल:-बीजेपी की ओर से जिन नए चेहरों में मंत्रिमंडल में शामिल करने के लेकर माथापच्ची चल रही है उनमें वैश्य समाज से आने वाले संजय सरावगी, पिछड़ी जाति से आने वाले सम्राट चौधरी, महादलित बिरादरी से आने वाली भागीरथी देवी, कृष्ण कुमार ऋषि, केंद्र की राजनीति करने वाले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन, नीतीश मिश्रा, संजीव चौरसिया, पहली बार लालगंज से चुनाव जीतने वाले संजय सिंह, रामप्रवेश राय, राणा रणधीर के अलावा दीघा विधान सभा सीट से जीतने वाले संजीव चौरसिया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

श्रवण, लेसी, महेश्वर और कृष्णनंदन भी बन सकते हैं मंत्री:-दूसरी ओर जेडीयू ने अपने कोटे से जिन लोगों को मंत्री पद सौंपने की तैयारी की है उन चेहरों में श्रवण कुमार, लेसी सिंह, सुधांशु शेखर, सुमित सिंह, शालिनी मिश्रा, नीरज कुमार, महेश्वर हजारी, मदन सहानी, बीमा भारती के अलावा कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा का नाम प्रमुख से लिया जा रहा है। संभावना है कि दो-चार रोज के अंदर दोनों दलों के प्रमुख आपस में बैठकर नामों सहमति बनाएंगे और इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार का आधिकारिक एलान कर दिया जाएगा।

रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) 20 मार्च को अपने नए सरकार्यवाह का चुनाव करेगा। संघ में प्रत्येक तीन वर्ष पर प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव किया जाता है, उसके बाद संघ की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की जाती है। इस बार 19 एवं 20 मार्च को बेंगलुरु में प्रतिनिधि सभा की बैठक होगी। वर्तमान में भय्याजी जोशी सरकार्यवाह हैं। वे 2009 से इस दायित्व को संभाल रहे हैं। यदि फिर से भय्याजी जोशी ही चुने जाते हैं तो उनका यह पांचवां कार्यकाल होगा।प्रतिवर्ष होने वाली संघ की तीन महत्वपूर्ण बैठकों में से एक प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस बार कोरोना वायरस संक्रमण के कारण प्रतिनिधियों की संख्या एक तिहाई से भी कम कर दी गई है। वहीं तीन दिनों के बदले दो दिनों की ही बैठक रखी गई है। साथ ही चुनावी वर्ष में पहली बार नागपुर से बाहर प्रतिनिधि सभा की बैठक रखी गई है। अब तक नागपुर में ही सरकार्यवाह का चुनाव होता आया है।

बैठक में 1500 के बदले 400 के आसपास ही प्रतिनिधि होंगे शामिल:-आरएसएस की प्रतिनिधि सभा प्रत्येक वर्ष मार्च में होती है। इस बैठक में सरसंघचालक, सरकार्यवाह सहित केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र कार्यकारिणी, प्रांत कार्यकारिणी, विभाग प्रचारक, स्वयंसेवकों की ओर से चुने गए प्रतिनिधि और सभी विविध संगठन के अध्यक्ष व महासचिव भाग लेते हैं। कुल संख्या 1500 के आसपास रहती है। इस बार कोरोना वायरस के कारण बैठक में पूरी अखिल भारतीय टोली के साथ-साथ क्षेत्र व प्रांत के संघचालक, कार्यवाह व प्रचारक व सीमित संख्या में चुने हुए प्रतिनिधि ही भाग लेंगे।इस तरह कुल संख्या 400 के आसपास रहने वाली है। क्षेत्र व प्रांत के बचे हुए सभी पदाधिकारी, विभाग प्रचारक व विविध संगठन के पदाधिकारी राज्यों के प्रांत कार्यालय में उपस्थित रहकर कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ेंगे। पहली बार प्रतिनिधि सभा की बैठक में शामिल होने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी की गई है।'कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए इस बार प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रतिनिधियों की संख्या काफी कम कर दी गई है। साथ ही बैठक भी तीन दिनों के बदले दो दिनों की रखी गई है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के कारण पिछली बार बैठक स्थगित कर दी गई थी।' -नरेंद्र ठाकुर, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख, आरएसएस।

नई दिल्ली। यह सच है कि कठिन समय में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ने देश को खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बनाया। चुनी हुई फसल की उत्पादकता बढ़ाने में इसकी भूमिका रही है। लेकिन यह भी उतना ही कड़वा सच है कि एमएसपी ने भ्रष्टाचार की फसल को भी सींच दिया। अनाज खरीद के लिए बने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के जरिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस चलाने के लिए जो खरीद होती है उसकी गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है।

एफसीआइ पहुंचने वाले अनाज में कचरा, नमी, डैमेज्ड आदि का अंश चौथाई से ज्यादा:-अनाज में कचरा, डैमेज, वेस्टेज, लीकेज, नमी को नजरअंदाज कर देश को दशकों से हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाया जाता रहा है। खरीद की क्वालिटी में छूट का फायदा आढ़तिए, बड़े और प्रभुत्व वाले किसान उठाते हैं। छोटे किसानों से नमी और कचरा के नाम पर कटौती होती है। पिछले कुछ दशकों में एमएसपी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मसला हो गया है और कोई सरकार इसे छूने का साहस नहीं दिखा पा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वक्त आ गया है जब पीडीएस में भी अच्छी गुणवत्ता वाले अनाज वितरण के लिए धीरे-धीरे बाजार का रुख करना चाहिए और किसानों के लिए ग्रीन सब्सिडी बढ़ानी चाहिए।

सरकार को करोड़ों रुपये का लगाया जा रहा चूना :-किसानों को उचित मूल्य दिलाने और गरीबों को रियायती दर पर राशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गठित एफसीआइ में सुधार को लेकर शांता कुमार कमेटी ने अपनी सिफारिश में तीखी टिप्पणी की है। सरकारी खरीद प्रणाली की खामियों के चलते सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि खरीदे जाने वाले अनाज में खराब अनाज की मात्रा 14.5 फीसद तक पहुंच जाती है। नमी की मात्रा गेहूं में 14 फीसद तो धान में 17 फीसद तक पहुंच जाती है। इसमें समग्र बदलाव की जरूरत है जिस पर कोई चर्चा करने को राजी नहीं है। इसके मुकाबले प्राइवेट जिंस कारोबार में क्वालिटी मानक के तहत अधिकतम 10 फीसद तक कचरा, डैमेज और वेस्टेज निर्धारित है। वहीं, प्राइवेट जिंस कारोबार में 11 फीसद से अधिक नमी वाला अनाज कोई नहीं खरीदता है। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) जैसे एक्सचेंजों में भी इसी मानक पर कारोबार होता है। लेकिन सरकारी खरीद में यह 28.5 फीसद तक पहुंच जाता है। एफसीआइ के पास फिलहाल पौने चार लाख करोड़ रूपये का अनाज पड़ा हुआ है। यानी इसमें से लगभग एक लाख करोड़ का अनाज इस लायक नहीं है कि उसका वितरण किया जाए, लेकिन गरीबों में वह बांट दिया जाता है। एमएसपी खरीद और चु¨नदा किसानों को लाभ के नाम पर हो रहा यह भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इसे छूने का साहस कोई नहीं जुटा पाता है।

एमएसपी की जगह बाजार का रुख करना होगा:-सिर्फ क्वालिटी मानक को दुरुस्त करके इसे बचाया जा सकता है। लेकिन उसके लिए एमएसपी की जगह बाजार का रुख करना होगा। यह सारी कहानी एफसीआइ की सालाना बैलेंस शीट बताती है। इस पर कई बार नियंत्रक एक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने तीखी टिप्पणी की है। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि एफसीआई के अनाज की न तो क्वालिटी रह गई है और न खुले बाजार में कोई उसका उचित दाम दे सकता है।

सरकारी खरीद में एफसीआइ की हिस्सेदारी लगातार घटते हुए पांच फीसद पर सिमटी:-एमएसपी के बूते खरीद करने और पीडीएस में वितरण करने वाली संस्था एफसीआइ में अधिकारियों व कर्मचारियों के 42,000 से अधिक पद सृजित हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी खरीद में एफसीआइ की हिस्सेदारी लगातार घटते हुए पांच फीसद पर सिमट गई है। बाकी खरीदारी राज्यों की एजेंसियां करती हैं। शांता कुमार कमेटी ने इस पर भी सवाल खड़े किए हैं। जिस पंजाब से गेहूं की सर्वाधिक खरीद होती रही है, वहां इसकी प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेशक नहीं आते हैं। राज्य में रोलर फ्लोर मिलर्स नहीं के बराबर हैं। पंजाब में दूसरे राज्यों से तैयार आटा, सूजी और मैदा बिकते हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि राज्य में न तो उचित गुणवत्ता का गेहूं मिलता है और न ही धान। एमएसपी पर बेचने के लिए सारा ध्यान अधिकतम पैदावार वाली प्रजाति की खेती पर होता है, क्वालिटी कंट्रोल की जरूरत ही नहीं है।

पीडीएस में दी जाने वाली सब्सिडी के तरीके में भी बदलाव जरूरी:-योजना आयोग के पूर्व सचिव व खाद्य प्रबंधन मामलों के विशेषज्ञ एनसी सक्सेना का कहना है एफसीआइ का होना बहुत जरूरी है। नौ करोड़ टन अनाज की खरीद करना और देश के सुदूर क्षेत्रों तक अनाज पहुंचाना एक मैराथन कार्य है, जिसे एफसीआइ जैसी कोई संस्था ही कर सकती है। लेकिन इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार से निपटना भी जरूरी है। वे कहते हैं, 'पीडीएस में दी जाने वाली सब्सिडी के तरीके में भी बदलाव की तत्काल आवश्यकता है। उपभोक्ताओं को क्वालिटी अनाज देने के लिए निर्धारित दुकानों से एफसीआइ के लागत मूल्य पर अऩाज दिए जाएं। दुकान से अनाज उठाते ही सब्सिडी का भुगतान संबंधित उपभोक्ता के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से तुरंत जमा होना चाहिए। रियायती दुकानों के साथ निजी दुकानदारों को भी इसकी सुविधा मुहैया कराई जा सकती है। उपभोक्ताओं अपनी मर्जी से अच्छी क्वालिटी का अनाज उठाने की छूट मिलनी चाहिए।' सरकारी खरीद और पीडीएस से अनाज वितरण में खाद्य सब्सिडी बढ़कर डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसका उचित फायदा न तो देश के सभी किसानों को मिल पा रहा है और न ही उपभोक्ताओं को अच्छी क्वालिटी का अनाज हासिल हो रहा है।

मैड्रिड (स्पेन)। मैड्रिड में एक गैस विस्फोट का मामला सामने आया है। स्पेनिश टीवी चैनल ला कास्टा ने बुधवार को एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, सेंट्रल मैड्रिड में एक विस्फोट में एक इमारत ढह गई और इमारत से धुआं निकलने लगा। इसके बाद बचावकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को बिल्डिंग से बाहर निकाला और उन्हें नर्सिंग होम ले गए। खबर है कि इस हादसे में छह लोग घायल हो गए हैं और दो लोगों की मौत हो गई है।टीवी चैनल के अनुसार, 'एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इस हादसे में कम से कम छह लोग घायल हो गए हैं।' वहीं, मैड्रिड के मेयर ने कहा कि इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई है। पुलिस सूत्रों ने चैनल को बताया कि पुएर्ता डी टोलेडो के पड़ोस में विस्फोट से चार मंजिल प्रभावित हो गई हैं। घटनास्थल पर अग्निशमन, पुलिस और आपातकालीन कर्मी काम कर रहे हैं।

लंदन। किसी भी हालात का मनोवैज्ञानिक प्रभाव महिला हो या पुरुष, दोनों पर ही समान रूप से पड़ता है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर का महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर ज्यादा मनोवैज्ञानिक प्रभाव देखने को मिला। डेनमार्क में हुए एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है। जर्नल एक्टा न्यूरोसाइकियाट्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन की घोषणा के बाद पुरुषों और महिलाओं की मानसिक स्थिति काफी प्रभावित हुई। इस दौरान महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुईं, लेकिन दूसरी लहर के दौरान यह स्थिति बिल्कुल पलट गई। इस बार पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए। आरहस विश्वविद्यालय के शोधकर्ता सोरेन दिनेसेन ओस्टेगार्ड ने कहा कि अध्ययन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय पांच कल्याण सूचकांकों का इस्तेमाल स्क्रीनिंग टूल के तौर पर किया। इसे डब्ल्यूएचओ-5 के नाम से जाना जाता है। यह कुछ वैसे ही काम करता है जैसे कि डॉक्टर बीमारी का इलाज करते वक्त यह आकलन करता है कि आगे इलाज की जरूरत है या नहीं।पांच कल्याण सूचकांकों का कुल स्कोर 100 होता है। इनमें से ज्यादा स्कोर पाने वालों के खुश रहने की उम्मीद है। यदि स्कोर 50 से नीचे है, तो अवसाद की संभावना बनी रहती है। शोधकर्ता ने बताया कि नवंबर-दिसंबर के सर्वेक्षण में डब्ल्यूएचओ-5 का स्कोर पुरुषों के लिए सिर्फ 4 अंक और महिलाओं के लिए 2.5 अंक कम हो गया था। वहीं, अप्रैल, 2020 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान महिलाओं में इस सूचकांक में 1.5 अंक की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन पुरुषों में यह कम होकर 2.5 अंक ही रह गया।

मेलबर्न। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ने भारत की अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ टेस्ट सीरीज में हार के लिए ऑस्ट्रेलिया के नकारात्मक रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि मेजबान टीम को जीत के लिए आक्रामकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय लग रहा था कि उसे हार का डर सता रहा है। क्लार्क हालांकि इस घरेलू सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की हार का दोष कप्तान टिम पेन को नहीं देते। क्लार्क ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारा रवैया कुछ अवसरों पर नकारात्मक रहा, क्योंकि हमारे अंदर हार का डर था। इसके बजाय हमें सख्त रवैया अपनाकर मैच जीतने की कोशिश करनी चाहिए थी।'पेन की अगुआई में ऑस्ट्रेलिया ने 23 टेस्ट मैच खेले, जिनमें से उसे केवल 11 में ही जीत मिली। भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज में दो हार से उनका रिकॉर्ड और खराब हो गया है। पेन को 2018 में दक्षिण अफ्रीका में गेंद से छेड़छाड़ के मामले के बाद स्टीव स्मिथ की जगह कप्तान बनाया गया था। उनकी न सिर्फ अपनी कप्तानी, बल्कि खराब विकेटकीपिंग के कारण भी आलोचना हो रही है। लेकिन, क्लार्क का मानना है कि नकारात्मक मानसिकता के कारण ऑस्ट्रेलिया को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'आखिर में मैच में 20 ओवर रहते हुए हारना या अंतिम गेंद पर हारना मायने नहीं रखता। हमें ट्रॉफी हासिल करने के लिए यह मैच जीतना चाहिए था। मुझे लगता है कि हमें मैच की पहली गेंद से लेकर आखिरी गेंद तक इस तरह का रवैया दिखाना चाहिए था।'क्लार्क ने कहा कि एक समय था जबकि कप्तान के सिर पर हार का ठीकरा फोड़ा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, 'जब मैं क्रिकेट खेलता था, जब मैं अपने पिता को देखकर बड़ा हुआ तो मैं जिन टीमों में खेलता था उनमें कप्तान जवाबदेह होता था, लेकिन समय के साथ यह बदल गया। अब चयनसमिति का अध्यक्ष है, हाई परफॉर्मेस मैनेजर है, मुख्य कोच है जिनके पास अधिक जिम्मेदारियां हैं। इनमें से अब टीम का संचालन कौन कर रहा है? मेरे कहने का यह मतलब है।'पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने भी पेन का बचाव किया। ली ने कहा, 'मेरा मानना है कि जब से उन्होंने कप्तानी संभाली है तब से बहुत अच्छी नेतृत्वक्षमता दिखाई है। इसके अलावा टिम पेन की विकेटकीपिंग के बारे में भी काफी कुछ कहा जा रहा है। उन्होंने कुछ मौके गंवाए, लेकिन कौन नहीं गंवाता। आप विकेटकीपरों के इतिहास में झांककर देखिए। आपको कई ऐसे विकेटकीपर मिल जाएंगे, जो विकेट के पीछे खराब दौर से गुजरे। वह अच्छे कप्तान और बेहतरीन विकेटकीपर हैं।'

नई दिल्लीl 17 जनवरी को आलिया भट्ट निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के सेट पर बेहोश हो गईl इसके चलते उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गयाl खबरों के अनुसार आलिया भट्ट को हाइपर एसिडिटी और नौशिया हो गयाl आलिया भट्ट फिल्म में 'गंगूबाई' की भूमिका निभा रही है, जिन्हें बेहोश होने के बाद ठीक होनेपर उसी दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गयाl आलिया भट्ट अगले दिन सेट पर शूटिंग के लिए वापिस पहुंची थीl आलिया भट्ट के अलावा बॉलीवुड के कई कलाकार सेट पर बेहोश हो चुके हैंl उनके नाम आगे दिए गए हैl इनमें से कई अधिक तनाव के कारण बेहोश हो चुके हैंl 

प्रियंका चोपड़ा :-प्रियंका चोपड़ा फिल्म बाजीराव-मस्तानी के सेट पर बेहोश हो गई थीl इसका कारण यह है कि वह लगातार रिटेक कर रही थीl इसके चलते उन्हें तनाव हो गया थाl 

कटरीना कैफ ;-कटरीना कैफ फिल्म 'तीस मार खान' के सेट पर बेहोश हो गई थीl वह 'शीला की जवानी' गाने पर डांस कर रही थीl गर्मी के चलते वह बेहोश हो गई थीl 

दीपिका पादुकोण :-दीपिका पादुकोण अवॉर्ड शो में बेहोश हो गई थीl वह एक गाने पर डांस कर रही थीl डांस करते वक्त 2014 में आई फिल्म हैप्पी न्यू इयर की शूटिंग कर रही थी, उन्होंने लगातार 16 घंटे शूट किया थाl इसके बाद वह सेट पर गाने की रिहर्सल करने पहुंची थीl उन्हें आराम करने की सलाह दी गई क्योंकि उन्होंने लगातार 30 घंटे काम किया थाl

जैकलीन फर्नांडिस :-जैकलीन फर्नांडिस एक फिल्म के लिए एक्शन सीन शूट कर रही थी और इसके बाद वह डांस रिहर्सल करने लगीl इसके चलते उनकी तबियत बिगड़ी और वह बेहोश हो गईl

आलिया भट्ट ;-आलिया भट्ट एक बार फिर खबरों में हैl वह फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर के सेट पर भी इस गाने की शूटिंग के दौरान बेहोश हो गई थीl इसके अलावा वह फिल्म शानदार की शूटिंग के दौरान भी बेहोश हो चुकी हैंl

नई दिल्लीl मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को वेब सीरीज तांडव केलेखक, निर्देशक और निर्माता को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली हैl न्यायाधीश पीडी नाइक ने निर्देशक अली अब्बास जफर वेब सीरीज के लेखक गौरव सोलंकी, निर्माता हिमांशु मेहरा और अमेजन की कंटेंट हेड अपर्णा पुरोहित को ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल दी हैl इन्हें इसके अंतर्गत यह अवसर मिलता है कि वह संबंधित न्यायालय में गिरफ्तारी के पहले जमानत के लिए याचिका दायर कर सकेlदरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस मुंबई में वेब सीरीज तांडव को लेकर उठे विवाद के कारण हैl वेब सीरीज से जुड़े लोगों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है और एफ.आई.आर दर्ज हो चुकी हैl वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और वकील अनिकेत निगम ने जफर और पुरोहित की सुनवाई करते हुए कोर्ट में कहा कि दोनों को एफ.आई.आर के अंतर्गत गिरफ्तारी का डर है और वे न्यायालय से राहत की मांग करते हैंl उनके एप्लीकेशन में लिखा है कि दोनों निर्दोष है औरएफ.आई.आर. गलत हैlजफर, मेहरा और सोलंकी की याचिका में यह भी लिखा है कि वेब सीरीज काल्पनिक है और भारतीय हिंदी भाषा में बनी पॉलिटिकल ड्रामा है, जिसमें विभिन्न प्रकार के लोग एक साथ आते हैं और राजनीति करते हैंl इसमें यह भी कहा गया है कि इसमें किसी भी भगवान या देवी या किसी भी धर्म को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं किया गया है। गौरतलब है कि वेब सीरीज तांडव विवादों में हैl इसमें हिंदुओं की आस्था पर चोट करने का आरोप लगा हैl इसके चलते तांडव वेब सीरीज पर देश के कई राज्यों में एफ आई.आर.दर्ज कराई गई है।सीरीज तांडव पर आरोप है कि हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए इसे दुर्भावना से शूट किया गया हैl इसके अलावा इसमें देवी-देवताओं पर अनावश्यक और आपत्तिजनक टिप्पणी की हैl इस वेब सीरीज में सैफ अली खान, जीशान अयूब, गौहर खान जैसे कलाकारों की अहम भूमिका हैंl 

नई दिल्ली। देश के 72 फीसद लोग चाहते हैं कि आगामी बजट में सरकार का मुख्य थीम मांग सृजन पर केंद्रित हो। बजट की थीम के रूप में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च लोगों की पसंद के रूप में दूसरे नंबर पर है। प्रत्यक्ष कर से जुड़े मामले में पूछे जाने पर 40 फीसद लोग बजट में सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे हैं। यह जानकारी उद्योग संगठन फिक्की व ध्रुव के एक सर्वे के बाद साझा की गई है।सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ सेक्टर में मांग में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बढ़ोतरी का रुख जारी रखने की जरूरत है। वहीं, कई सेक्टर में मांग में बढ़ोतरी प्रक्रिया को जारी रखने के लिए सरकारी मदद की दरकार है। सर्वे में लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि बजट की प्राथमिकता मांग में मजबूती लाने की होनी चाहिए। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए टैक्स पॉलिसी के इस्तेमाल की भी जरूरत है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसद लोग टैक्स में राहत चाहते हैं तो 32 फीसद लोग टैक्स को लेकर निश्चितता का माहौल चाहते हैं।सर्वे के मुताबिक 18 फीसद लोग प्रत्यक्ष कर संहिता यानी डीटीसी को लागू करने के पक्ष में है तो पांच फीसद डिजिटल इकोनॉमी को टैक्स के दायरे में लाने के पक्ष में दिखे। वहीं, पांच फीसद लोग अन्य प्रकार के सुधार चाहते हैं। सर्वे में यह सामने आया कि 75 फीसद लोग बजट में रोजगार सृजन करने वालों को टैक्स में इंसेंटिव देने की घोषणा चाहते हैं। निर्यात और नवाचार करने वालों को भी टैक्स में इंसेंटिव देने पर लोगों ने सहमति जाहिर की।फिक्की के प्रेसिडेंट उदय शंकर के मुताबिक इस सर्वे की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के प्रयास जारी रखना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होना चाहिए। उद्योग जगत इस बात की भी उम्मीद करता है कि मांग में बढ़ोतरी के लिए बजट में प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा होगी। बजट में रोजगार सृजन और लोगों के हाथ में खर्च के लिए पैसे देने के उपायों पर फोकस करना चाहिए।

नई दिल्ली। देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बिजली मंत्रालय के सचिव एसएन सहाय ने बताया कि बुधवार को सुबह 9:35 बजे बिजली की मांग 185.22 गीगावाट (1,85,822 मेगावाट) रही। इससे पहले 30 दिसंबर, 2020 को बिजली की खपत 182.89 गीगावाट के उच्च स्तर पर पहुंची थी। बिजली की बढ़ती खपत को देश में आर्थिक गतिविधियों में हो रही बढ़ोतरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने खुद भी ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'आज सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर देश में बिजली की मांग 185820 मेगावॉट को पार कर गई, जो अब तक की सबसे अधिक मांग है। 19 जनवरी तक बिजली की मांग और आपूर्ति में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8 फीसदी की तेजी आई है। यह अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दर है। यह इस बात का संकेत है कि इकॉनमी पटरी पर लौट रही है। बिजली की बढ़ती मांग सौभाग्य योजना की सफलता का प्रतीक है। इस योजना के तहत गरीबों और उपेक्षितों सहित सभी घरों तक बिजली पहुंचाई गई है।'केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जनवरी में बिजली की मांग अधिकतम 170.97 गीगावाट के स्तर पर थी। इसके बाद मार्च से कोरोना संक्रमण से उपजे विषम परिस्थितियों के कारण मांग एकदम गिर गई। लॉकडाउन हटने पर सितंबर से इसमें बढ़ोतरी देखी जा रही है।सबसे अच्छी बात यह है कि मांग लगातार बढ़ रही है। सितंबर में बिजली की मांग में जहां 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी, वहीं अक्टूबर में यह 3.4 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। नवंबर में यह वृद्धि 3.5 प्रतिशत की रही। दिसंबर में इसमें 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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