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लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लॉकडाउन के बावजूद कई इलाकों में कोरोना मरीजों की बढ़ी संख्या को देखते हुए सरकार ने अब सख्त कदम उठाया है। प्रदेश के पंद्रह जिलों में उन 104 क्षेत्रों को हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया है, जहां छह या उससे अधिक संक्रमित मरीज हैं।इन हॉट स्पॉट को फिलहाल 14 अप्रैल तक के लिए सील कर दिया है। प्रदेश के 15 जिलों में 104 हॉटस्पॉट हैं। इस दौरान यहां कर्फ्यू जैसा प्रतिबंध रहेगा। घर के बाहर कदम रखने पर पाबंदी होगी। हर आवश्यक वस्तु की होम डिलीवरी की जाएगी।अब उत्तर प्रदेश में कोई भी 30 अप्रैल तक बिना मास्क के बाहर नहीं निकल सकेगा। 31 मई तक कोई बैंक किसी किसान को नोटिस नहीं जारी करेगा।कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन चल रहा है, जो कि 15 अप्रैल को खोला जाना था। मगर, तब्लीगी जमातियों की वजह से अचानक संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने से स्थिति खराब हो गई। उत्त्तर प्रदेश सरकार भी इस बात को लेकर समीक्षा कर रही है कि लॉकडाउन 15 अप्रैल को खोल दिया जाए या आगे बढ़ाया जाए। इसी बीच बुधवार को सरकार ने अहम निर्णय लिया कि जहां छह या छह से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए हैं, उन्हें हॉट स्पॉट मानते हुए पूरी तरह सील कर दिया जाए। फिलहाल यह प्रतिबंध 14 अप्रैल तक के लिए लगाया गया है।
यूपी में घर से बाहर निकलने पर मास्क नही पहना तो अब होगी कानूनी कार्रवाई:-इस दौरान किसी भी वाहन को जिलों में बिना पास के प्रवेश नहीं मिलेगा। यह आदेश 13 अप्रैल की रात 12 बजे तक लागू रहेगा। यानी लगातार चार दिन। 15 जिलों लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद जैसे बड़े जिले भी शामिल हैं। इसी के साथ यह भी आदेश दिया गया है कि 30 अप्रैल तक कोई भी बिना मास्क लगाए अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकेगा।उन क्षेत्रों में किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं रहेगी जहां पर संक्रमण अधिक है। सभी जगह पर कर्फ्यू जैसे हालात रहेंगे। कोई भी घर बाहर नहीं निकल सकेगा। घर पर ही आवश्यक वस्तुएं और दवाइयां पहुंचाई जाएंगी। इसके साथ ही राज्य में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। मास्क नहीं पहनने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।मुख्य सचिव आरके तिवारी ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें कहा गया है कि इन जिलों में लॉकडाउन का पालन मजबूती से कराते हुए प्रभावित क्षेत्रों (हॉट स्पॉट) को पूरी तरह सील कर दिया जाए। इन क्षेत्रों में जारी पास की फिर से समीक्षा कर गैर जरूरी पास निरस्त कर दिए जाएंगे। दुकानें या सब्जी मंडी भी नहीं खुलेंगी। आवश्यक वस्तुओं की शत-प्रतिशत होम डिलीवरी की जाएगी। मुख्य सचिव ने कहा है कि आवश्युक वस्तुओं से संबंधित फैक्ट्री या प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मियों को पूल कर वाहनों से लाने-ले जाने की व्यवस्था की जाए। चिकित्सा या अन्य आवश्यक सेवा से जुड़े व्यक्तियों के अलावा किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। पुलिस इसके लिए सघन पेट्रोलिंग करेगी।
लॉकडाउन का सख्ती से पालन पूरे जिले में कराया जाएगा:-लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि यह पाबंदी सिर्फ हॉट स्पॉट के लिए है। लॉकडाउन का सख्ती से पालन पूरे जिले में कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंद्रह जिलों में सील की व्यवस्था बुधवार रात 12 बजे के बाद से प्रभावी हो जाएगी। अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि 100 प्रतिशत लॉकडाउन उन्हीं जगहों पर किया जाएगा जो हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित हुए हैं। बाकी जगहों पर उसी तरह का लॉकडउन रहेगा जैसा पहले से है। लोग किसी तरह के पैनिक में न आएं। अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने आगे बताया कि इन इलाकों में बैंक भी बंद रहेंगे। यहां तक कि मीडिया भी प्रतिबंधित रहेगा। अवस्थी ने साफ तौर कहा कि पूरे जिले को सील नहीं किया जा रहा है।
एक-एक घर होगा सेनिटाइज;-जिन क्षेत्रों को सील किया जा रहा है, वहां एक-एक घर की जांच की जाएगी। इन सभी घरों के साथ ही पूरे क्षेत्र को सेनिटाइज कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने बताया कि अभी 14 अप्रैल तक यह व्यवस्था चलेगी। प्रतिदिन समीक्षा होती रहेगी। उसके बाद जब संपूर्ण लॉकडाउन पर 14 अप्रैल को निर्णय होगा, तब इस पर भी विचार होगा हॉट स्पॉट को कब तक सील रखा जाए।
आइसोलेट होंगे मोहल्ले:-सील के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में पूरी तरह कर्फ्यू जैसी स्थिति होगी। पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी ने बताया कि लोग घरों से नहीं निकल सकेंगे। इसके अलावा एक मोहल्ले का कनेक्शन एक तरह से दूसरे मोहल्ले से काट दिया जाएगा। पूरी सख्त निगरानी सीलिंग के दौरान रहेगी। इस दौरान किसी भी वाहन को जिलों में बिना पास के प्रवेश नहीं मिलेगा। यह आदेश 13 अप्रैल की रात 12 बजे तक लागू रहेगा। यानी लगातार चार दिन। 15 जिलों लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद जैसे बड़े जिले भी शामिल हैं। इसी के साथ यह भी आदेश दिया गया है कि 30 अप्रैल तक कोई भी बिना मास्क लगाए अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकेगा।उन क्षेत्रों में किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं रहेगी जहां पर संक्रमण अधिक है। सभी जगह पर कर्फ्यू जैसे हालात रहेंगे। कोई भी घर बाहर नहीं निकल सकेगा। घर पर ही आवश्यक वस्तुएं और दवाइयां पहुंचाई जाएंगी। इसके साथ ही राज्य में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। मास्क नहीं पहनने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
पूरी तरह सील नहीं किया जाएगा;-मुख्य सचिव आरके तिवारी का कहना है कि 15 जिलों को पूरी तरह सील नहीं किया जाएगा। जहां संक्रमित मरीज ज्यादा हैं, उन्हें हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित कर उन्हें सील किया जाएगा। हर दिन समीक्षा होगी। 14 अप्रैल को सम्पूर्ण लॉकडाउन पर फैसला होने के बाद तय होगा कि सील की अवधि बढ़ेगी या नहीं। सरकार कोई भी अवसर लेना नहीं चाहती। हमने संक्रमितों की संख्या देखने के बाद एहतियातन यह सोचा है। लॉक डाउन में लापरवाही बरतने की रिपोर्ट के बाद ये फैसला लिया गया है। इसी को देखते हुए सरकार ने पास रद किये थे। लोग खाना बांटने के नाम पर सड़कों पर निकल रहे थे। कल रात नोएडा के स्लम एरिया में संदिग्ध पकड़े जाने के बाद सरकार को यह लगा कि मामला बिगड़ने लगा है। हाट स्पाट वाले क्षेत्र के निवासियों को जरूरी सामान होम डिलीवरी से दिया जाएगा।
15 जिलों में केवल हॉटस्पॉट ही पूरी तरह से होंगे सील:-अपर मुख्य सचिव गृह तथा सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि 15 जिलों में केवल हॉटस्पॉट ही पूरी तरह से सील होंगे। वह छह जिले जिनमें ज्यादा केस है उन जिलों के हॉटस्पॉट को 15 अप्रैल तक सील किया जाएगा। इन सभी जिलों में आज शाम पांच बजे तक हॉटस्पॉट फाइनल कर लिया जाएगा। जिलाधिकारी अपने काम में लगे हैं।
यह 15 जिले सील हैं:-सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, कानपुर, वाराणसी, शामली, मेरठ, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, महाराजगंज, सीतापुर, सहारनपुर और बस्ती में इस लॉकडाउन के दौरान हो रहे उल्लंघन से संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। अब जिलों में केवल उन्हीं वाहनों की एंट्री होगी जिनके पास वैध पास होंगे। इसके अलावा लोगों को राहत देने के लिए आदेश दिया गया है कि लोन आदि के मामले में 31 मई तक कोई बैंक किसी किसान को नोटिस जारी नहीं करेगा।
किसी को भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं : मुख्य सचिव:-मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि इन 15 जिलों में कोविड-19 संक्रमण का लोड ज्यादा है। इन जिलों के प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तरह से लॉकडाउन किया जाएगा। इस दौरान किसी को भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। सभी लोगों को उनके घर पर ही जरूरी चीजें मुहैया करवाई जाएंगी। सभी प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। अगर कोई ऑफिस या फैक्ट्री जा रहा है तो निजी वाहन की जगह गाड़ी पूल करके जाएं। उन्होंने बताया कि कम्युनिटी स्प्रेड न हो इसलिए यह लॉक डाउन किया जा रहा है।
टीम 11 की बैठक में सीएम ने दिए जरूरी निर्देश;-सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपनी टीम 11 (11 समितयां) की बैठक में कई अहम आदेश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पुलिसकर्मियों का ध्यान रखा जाए। सीएम ने इस दौरान पूरे यूपी को सैनिटाइज करने पर भी जोर दिया। उन्होने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर लाक डाउन का सख्ती से पालन कराया जाए। गरीबों को समय से राशन वितरित करने और इसकी मॉनीटरिंग करने का निर्देश सीएम ने दिया। इस दौरान सीएम ने प्रदेश के साथ ही जिले की टीम 11 की रिपोर्ट पर भी अपडेट लिया। सीएम ने इस दौरान तबलीगी जमात से जुड़े लोगों पर कार्रवाई का सिलसिला जारी रखने का निर्देश दिया।मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि ऐसे में सामानों की घर-घर सप्लाई होगी। इन जिलों में जारी हुए पासों की समीक्षा होगी। बहुत सारे पासों को निरस्त किया जाएगा।अब सिर्फ स्वस्थ्य, पुलिस व अन्य बहुत अति आवश्यक कार्यों में लगे लोगों का ही पास नया बनेगा। उन्होंने कहा कि हमने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कम से कम पास जारी करें। अब इन जिलों के हर चौराहे, नुक्कड़ सील कर पुलिस तैनात किये जायेंगे। जरूरत की सामग्री ऑन लाइन मिलेगा, आवश्यक सामग्री की घर-घर आपूर्ति होगी।

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सर्वदलीय बैठक की। बैठक में पीएम मोदी ने देश में लॉकडाउन बढ़ाने के संकेत दिए। पीएम ने इस दौरान कहा कि वह 11 अप्रैल को फिर से सभी राज्यों के सीएम से बात करेंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा जा रहा है कि सांसदों के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि देश में स्थिति 'सामाजिक आपातकाल' के समान है इसके लिए कड़े फैसलों की जरूरत है और हमें सतर्क रहना चाहिए। राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।वहीं लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बैठक में उन्होंने अपने शब्दों में कहा कि जितनी जानकारी और जितने सुझाव उनके पास आ रहे हैं, वो अभी इस तरफ दर्शा रहे हैं कि देशहित में अभी लॉकडाउन को आगे जारी रखना चाहिए। सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से ही कहीं न कहीं हम लोग इस बीमारी को इतने बड़े देश में सीमित रख पाए हैं। उनकी बातों से कहीं न कहीं ये आभास हुआ है कि शायद इस लॉकडाउन को आगे जारी रखने का फैसला सरकार ले सकती है।बीजेडी के पिनाकी मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बीजेडी सांसद पिनाकी मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये साफ किया है कि 14 अप्रैल के बाद एक साथ लॉकडाउन नहीं हटाया जाएगा। मिश्रा के मुताबिक प्रधानमंत्री का कहना है कि प्री-कोरोना और पोस्ट-कोरोना की जिंदगी एक समान नहीं होने वाली।
80 फीसद से अधिक राजनीतिक दल चाहते है लॉकडाउन आगे बढ़े;-सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद ने कहा कि 80 फीसद से अधिक राजनीतिक दलों ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें लोगों से जानकारी मिल रही है कि वे लॉकडाउन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सीएम और अन्य लोगों के साथ बैठक के बाद लिया जाएगा।कोविड-19 के कारण अब तक देश में 149 लोगों की मौत हो चुकी है। पीएम की बैठक में कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया। पीएम ने इस बैठक में सरकार द्वारा कोरोना संकट से निपटने के कार्यों की जानकारी दी और नेताओं से राय मांगी।
कई राज्यों ने की थी लॉकडाउन बढ़ाने की अपील:-यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लॉकडाउन बढ़ाने का आग्रह किया था । माना जा रहा है कि अब पीएम मोदी देश के सीएम के साथ एक अन्य बैठक के बाद के बाद लॉकडाउन पर कोई फैसला ले सकते हैं।
यूपी के 15 जिले सील;-लॉकडाउन के बीच एक बड़ी खबर यूपी से भी आ रही है। यूपी सरकार राज्य के 15 जिलों को सील करेगी। इस दौरान इन जिलों में सिर्फ होम डिलीवरी और मेडिकल टीमों को ही आवाजाही की अनुमति मिलेगी। राज्य के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि यूपी सरकार की तरफ से ये फैसला कम्यूनिटी स्प्रेड को रोकने के लिए लिया गया है।जिन जिलों के लिए ये फैसला लिया गया है, वो हैं- लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी,शामली, मेरठ, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, महाराजगंज, सीतापुर, सहारनपुर. इन शहरों में कोरोना के ज्यादा पॉजिटिव केस आए हैं। जिसमें ज्यादा मामले नोएडा से हैं।

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस के संकट से लड़ने के लिए पीएम मोदी को सुझाए गए सोनिया गांधी के विकल्प पर भारतीय समाचार पत्र सोसाइटी ने नाराजगी जाहिर की है और मजबूत लोकतंत्र के लिए अपने सुझाव पर पुनर्विचार करने को कहा है। दरअसल, सोनिया ने पत्र लिखकर पीएम मोदी को सुझाव दिए थे। इनमें दो साल तक मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों पर रोक की बात कही गई थी। भारतीय समाचार पत्र सोसाइटी (आईएनएस) के अध्यक्ष शैलेश गुप्ता ने आईएनएस सदस्यों की ओर से इस प्रस्‍ताव पर अविश्वास व्यक्त किया और कांग्रेस अध्यक्ष के सुझाव की निंदा की है।
वित्तीय सेंसरशिप के लिए समान है प्रस्‍ताव;-उन्‍होंने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव वित्तीय सेंसरशिप के समान है। जहां तक सरकार के खर्च का सवाल है, यह बहुत कम राशि है, लेकिन यह समाचार पत्र उद्योग के लिए एक बड़ी राशि है जो किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। यह एकमात्र ऐसा उद्योग है जहां बाजार की ताकतें वेतन का फैसला नहीं करती हैं। ऐसे में सरकार की इस उद्योग के प्रति एक जिम्मेदारी भी है।
फेक न्‍यूज के युग में प्रिंट मीडिया की बड़ी भूमिका:-इसके अलावा, सरकार ओर विपक्ष के लिए फर्जी खबरों के युग में प्रिंट मीडिया देश और दुनिया के हर कोने में लोगों के लिए समाचार और विचार प्राप्त करने का सबसे अच्छा मंच है। मंदी और डिजिटल के हमले के कारण विज्ञापन और प्रसार राजस्व में पहले से ही गिरावट है। आगे इस समस्या को जोड़ने के लिए हमें उद्योगों और व्यापार के पूर्ण लॉकडाउन के कारण गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।ऐसे समय में जब मीडिया कर्मी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं और महामारी की स्थिति पर समाचार ला रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का पूरे मीडिया के लिए मीडिया विज्ञापनों पर दो साल का प्रतिबंध लगाने का सुझाव पूरी तरह से निराशाजनक है। ऐसे में आईएनएस कांग्रेस अध्यक्ष से अपील करता है कि वह एक जीवंत और मुक्त प्रेस के हित में मीडिया विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध के बारे में प्रधानमंत्री को दिए गए सुझाव पर पुनर्विचार करें और उसे वापस लें।
एनबीए ने की सोनिया गांधी के सुझाव की निंदा:-उधर, न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने इस प्रस्‍ताव की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मीडिया कर्मियों के लिए इस तरह का सुझाव मनोबल गिराने वाला है। उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी ने सरकारी खर्चों में कटौती करने के नाम पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि अगले दो साल तक सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को मीडिया में विज्ञापन नहीं देने चाहिए।एनबीए के अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा कि हम कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे समय में जब मीडिया कर्मी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही समाचार पहुंचाने का काम कर रहे हैं, तब कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का सुझाव आना हताशाजनक है।

नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ छिड़े देशव्यापी युद्ध में केंद्रीय कर्मचारियों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए भारतीय रेल अपने 2500 डाक्टरों, नसरें तथा 35 हजार पैरामेडिकल कर्मचारियों को मैदान में उतारेगी। इससे रेलवे की सभी स्वास्थ्य सेवाएं अब कोरोना से संक्त्रमित सभी केंद्रीय कर्मचारियों को पहचानपत्र दिखाने पर उपलब्ध होंगी।
रेलवे द्वारा 25 हजार से ज्यादा डॉक्टरों की जा चुकी है व्यवस्था;-कोरोना के विरुद्ध प्रयासों को तेज करते हुए रेलवे ने अपने मौजूदा अस्पतालों को और सुसज्जित करने के साथ-साथ वहां अतिरिक्त डाक्टरों और सहायक चिकित्सा कर्मियों की नियुक्ति शुरू कर दी है। अब तक 2546 डॉक्टर तथा 35153 नर्सें और सहायक मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की जा चुकी है। रेलवे के पास फिलहाल देश भर में फैली 586 हेल्थ यूनिटों के अलावा 45 उप मंडलीय अस्पताल, 56 मंडलीय अस्पताल, 8 उत्पादन इकाइयों के अस्पताल तथा 16 जोनल अस्पताल हैं। इनका एक बड़ा हिस्सा अब कोरोना महामारी के इलाज के लिए सभी केंद्रीय कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
48 हजार क्वारंटाइन बेड किए जा चुके हैं तैयार:-इससे पहले रेलवे की ओर से कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने तथा बचाव के लिए 5000 यात्री डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड में बदलने तथा उनमें 80 हजार क्वारंटाइन बेड तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है। अब तक 3000 कोच में 48 हजार क्वारंटाइन बेड तैयार हो चुके हैं। इनमें से 11 हजार क्वारंटाइन बेड कोरोना संक्त्रमित लोगों के लिए उपलब्ध कराए जा चुके हैं।बता दें कि भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता ही जा रहै है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार भारत में कोरोना वायरस (COVID19) मामलों की कुल संख्या बढ़कर 5274 हो गई है। जिनमें पॉजिटिव सक्रिय मामलों की संख्या 4714 है। कोरोना के 411 मामले ठीक करके अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वहीं, अब तक कोरोना वायरस से 149 लोगों की मौत हो गई है।

नई दिल्‍ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों को सचेत करते हुए ट्वीट कर कहा कि मेरे ध्यान में लाया गया है कि कुछ लोग यह मुहिम चला रहे हैं कि 5 मिनट खड़े रहकर मोदी को सम्मानित किया जाए। पहली नजर में तो यह मोदी को विवादों में घसीटने की कोई खुराफात लगती है।उन्‍होंने ट्वीट कर आगे कहा कि हो सकता है कि यह किसी की सदिच्छा हो, तो भी मेरा आग्रह है कि यदि सचमुच में आपके मन में इतना प्यार है और मोदी को सम्मानित ही करना है तो एक गरीब परिवार की जिम्मेदारी कम से कम तब तक उठाइए, जब तक कोरोना वायरस का संकट है। मेरे लिए इससे बड़ा सम्मान कोई हो ही नहीं सकता।गौरतलब है कि लॉकडाउन में लोगों को भ्रमित करने के लिए फेक न्‍यूज के जरिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इसमें एक अफवाह यह भी है, जिसके तहत लोगों को पीएम मोदी के सम्‍मान में पांच मिनट खड़ा होने के लिए कहा जा रहा है। इस अफवाह का दुरुपयोग भी किया जा सकता है।
पीएम मोदी की भूमिका की प्रशंसा;-पीएम मोदी की कोरेाना वायरस को निपटने और लॉकडाउन लागू करने को लेकर स्‍थानीय स्‍तर से लेकर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की भूमिका लेकर प्रशंसा की जा रही है। वह कोरोना को लेकर रोजाना दो से अधिक लोगों से बात करते हैं।आज ही ब्राजील के राष्‍ट्रपति बोल्‍सानारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उनकी तुलना भगवान हनुमान से की और भेजी गई दवा हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन को संजीवनी बूटी बताया। वहीं अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी भारत की तरफ से भेजी गई मलेरिया की दवा हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन मिलने के बाद प्रधानमंत्री को 'महान' कहा है।पीएम मोदी की इस भूमिका से देश के कई लोग अति उत्‍साहित हो जाते हैं। देश में जिस तरह कोरोना वायरस का विस्‍तार हो रहा है और पूरे देश में लॉकडाउन लागू है, ऐसे समय में यह कार्य करना कोरोना वायरस को लेकर लिए गए फैसलों में बाधा डाल सकता है। ऐसे समय में घर में रहना, हाथ साफ करना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और किसी गरीब को भोजन कराना ही राष्‍ट्र सेवा हो सकता है।

जासं। कोरोना को लेकर अभी भी लोगों में जागरुकता की कमी है। लोग लॉकडाउन का पालन भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में बुधवार को गुमला में एक व्‍यक्ति की जान चली गई। गुमला जिले के सिसई में पहली बार दो समुदायों के बीच कोरोना और लाॅकडाउन के कारण हुए मारपीट में एक समुदाय के बोलबा उरांव की मौत हो गई। इस घटना में पांच लोग घायल हुए हैं। उनमें से दो लोगों का इलाज रिम्स में चल रहा है। रिम्स में इलाज करवा रहे दोनों लोग खतरे से बाहर बताए गए हैं। आइजी नवीन कुमार सिंह और डीआइजी एबी हाेमकर के साथ गुमला के एसपी अंजनी कुमार झा इलाके में मंगलवार की देर रात से लगातार कैंप किए हुए हैं।
ऐसे हुई घटना की शुरुआत:-पिछले दो-तीन दिनों से कोरोना वायरस को लेकर गुमला जिले में अफवाहों का बाजार गर्म था। प्रशासन की अपील पर अफवाह फैलाने वाले बाज नहीं आ रहे थे। मंगलवार की शाम बसिया रोड का अनिश आलम नामक युवक चेकनाका के समीप कुदरा गांव में चला गया था। वह दिव्यांग है। लोगों ने उससे मुहल्ले में आने का कारण पूछा और उसे कोरोना वायरस तथा लाॅकडाउन के कारण घर के बाहर घूमने से मना किया। उसने लोगों की बात नहीं मानी। इसी बात पर बहस हो गई।उसके बाद अनिश आलम की कुछ लोगों ने पिटाई कर दी। इससे वह घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसे सिसई रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया। उसे चिकित्सक ने बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया। इस घटना की जानकारी जंगल में आग की तरह फैल गई। सिसई बस्ती के कुछ लोग भाग कर सिसई खास बस्ती में आए और अपने समुदाय के लोगों को बताया कि सकरौली, भदौली, नगर आदि से काफी संख्‍या में लोग उन लोगों को मारने आ रहे हैं।अचानक मोबाइल की लाइट बड़ी संख्या में जलता हुआ दिखाई देने लगा। सिसई खास बस्ती के लोग भी जमा हो गए और अपने हाथों में हरवे-हथियार लेकर सिसई बस्ती की ओर निकल पड़े। निकलने वाले लोगों ने साजिशन चोर-चोर का शोर मचाना आरंभ कर दिया। चोर-चोर की आवाज सुनकर दूसरे समुदाय के बोलबा उरांव, सोमरा उरांव, विवेक उरांव, भुवनेश्वर उरांव, जतरु उरांव आदि भी पहुंच गए। उन लोगों के घटनास्थल के समीप पहुंचने पर सिसई खास बस्ती के लोगों ने घातक हथियार से उन पर हमला बोल दिया।हमले के क्रम में विवेक उरांव, भुवनेश्वर उरांव और जतरु उरांव अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकले। लेकिन बोलबा उरांव और सोमरा उरांव हमलावरों की चपेट में आ गए। सोमरा उरांव भी घायलावस्था में बड़ा तालाब की ओर भागा। जबकि बोलवा उरांव पर भीड़ ने लाठी, बरछा, तलवार आदि से वार कर दिया। फिर भी वह घिसटता हुआ अपने घर के पास आया और बोला कि उसे अस्पताल ले चलो, नहीं तो बच नहीं पाएंगे।घटना की सूचना पाकर जिप अध्यक्ष किरण माला बाड़ा पहुंची और घायल बोलबा उरांव को सिसई रेफरल अस्पताल पहुंचाया। इलाज के क्रम में ही बोलबा ने दम तोड़ दिया। जबकि घायल सोमरा को इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया गया। घटना की नजाकत को समझते हुए पुलिस ने पूरे सिसई को अपने कब्जे में ले लिया है। सभी थानों की पुलिस को बुलाया गया है और सिसई पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। पुलिस ने पूछताछ और शक के आधार पर फिलहाल एक दर्जन लोगों को अपने कब्जे में लिया है। इलाके में स्थिति तनावपूर्ण किंतु नियंत्रण में है

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोरोना संकट के बावजूद अपने दायित्वों की राह प्रशस्त कर रहा है। इसी क्रम में जहां गत गुरुवार को तीर्थ क्षेत्र ने अपना बैंक खाता सार्वजनिक किया, वहीं मंगलवार को ट्रस्ट का लोगो सामने आया। किसी अन्य संगठन-संस्था के लोगो की तरह यह लोगो भी तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मूल्यों और आदर्शों का परिचायक है।लोगो के केंद्र में जहां भगवान राम का सौम्य छवि से युक्त चित्र श्रद्धालुओं को अभय प्रदान करने वाला है, वहीं वलयाकार ऊपरी परिधि पर अंकित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र लोगो की पहचान पूरी करता है। लोगो में अंकित तीर्थ क्षेत्र के नाम से पूर्व और नाम के समापन पर श्रद्धावनत हनुमान जी का चित्र संयोजित है, जो यह बताता है कि तीर्थ क्षेत्र नख से शिख तक हनुमान जी के आदर्श के अनुरूप और उन्हें ही अपना मार्गदर्शक मानते हुए अपनी भूमिका को अंजाम देगा।आधार पीठ के रूप में भगवान राम की महत्ता से संबंधित वाल्मीकीय रामायण की यह प्रतिनिधि अर्धावली अंकित है, रामो विग्रहवान धर्म:। भगवान राम और उनकी कथा के गंभीर अध्येता एवं किसान महाविद्यालय-बभनान गोंडा के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महाराजदीन पांडेय के अनुसार इस पंक्ति से भगवान राम के अप्रतिम वैशिष्ट्य का मर्म परिलक्षित है और वाल्मीकीय रामायण के अरण्य कांड का यह पूरा श्लोक इस प्रकार है, रामो विग्रहवान धर्म:/ साधु: सत्य पराक्रम:/ राजा सर्वस्य लोकस्य/ देवानामिव वासव:।डॉ. महाराजदीन पांडेय बताते हैं कि यह श्लोक तब का है, जब रावण राम को दोषी ठहराते हुए मारीच से सीता के अपहरण में सहायता चाहता है। सहायता देने से पूर्व मारीच रावण को भला-बुरा कहता है और इस श्लोक में मारीच राम का वैशिष्टय बयां करता है।यह सच्चाई श्लोक की शाब्दिक व्याख्या से स्वत: परिभाषित है। इसके अनुसार श्री राम धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं। वे साधु और सत्य पराक्रमी हैं। जैसे इंद्र समस्त देवताओं के अधिपति हैं, उसी तरह श्री राम भी संपूर्ण जगत के राजा हैं।

 

नई दिल्ली। कोरोना के खतरे से लोगों को बचाने की कोशिशों के बीच भारतीय वैज्ञानिक अब एक ऐसा लोशन तैयार करने में जुटे है जो कोरोना वायरस को नाक के रास्ते शरीर के अंदर के दाखिल होने से रोकेगा। इसे नाक के अंदर लगाना होगा। ऐसे में इस लोशन को डाक्टरों सहित अस्पतालों में काम करने वाले कर्मियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है, जो कोरोना के खतरे के बीच काम रहे है।
जैल लोशन के जरिए वायरस को शरीर की कोशिकाओं से जुड़ने से रोकना;-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर आइआइटी बाम्बे का जैव विज्ञान और जैव इंजीनियरिंग विभाग तेजी से काम कर रहा है। इसे शुरूआती चरण में काफी सफलता भी मिली है। फिलहाल यह काम दो चरणों में काम किया जा रह है। इनमें पहला इस जैल लोशन के जरिए वायरस को शरीर की कोशिकाओं से जुड़ने से रोकना है।
वायरस को निष्क्रिय करने की जरूरत;-हालांकि इसके बाद भी यह वायरस सक्रिय बना रहेगा। ऐसे में इसे निष्क्रिय करने की जरूरत होगी। वहीं दूसरे चरण में इनमें ऐसे जैविक अणु शामिल करने की योजना है, जिससे डिटर्जेट की तरह वायरसों को फंसाकर निष्क्रिय किया जाएगा। दोनों ही चरणों पर तेजी से काम किया जा रहा है।
नाक के रास्ते से वायरस प्रवेश करता है, मास्क लगाने के बाद भी खतरा बना रहता है:-केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के मुताबिक कोरोना से संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा मौजूदा समय में नाक के रास्ते वायरस के प्रवेश से है। क्योंकि इसके जरिए वह सीधे गले और बाद में फेफड़े तक पहुंच जाता है। मास्क लगाने के बाद भी यह वायरस इतना सूक्ष्म होता है, कि इससे खतरा बना रहता है।
कोरोना से निपटने सीआईएसआर ने तैयार किया कोर ग्रुप, सौंपा जिम्मा:-कोरोना संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने एक कोर ग्रुप का गठन किया है। जिसमें प्रमुख प्रयोगशालाओं से जुड़े आठ निदेशकों को शामिल किया है। इस दौरान सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही हर दिन प्रत्येक निदेशक से प्रगति की भी जानकारी ली जा रही है।
सीएसआईआर की 38 प्रयोगशालाओं में कोरोना से लड़ने के लिए काम चल रहा है:-वैसे तो देश भर में सीएसआईआर की कुल 38 प्रयोगशालाएं हैं। जहां कोरोना से लड़ने के लिए बडे स्तर पर काम चल रहा है। लेकिन इन कामों को पांच कैटेगरी में शामिल करने इस पर पैनी निगरानी भी की जा रही है। ताकि जल्द रिजल्ट मिल सकें। फिलहाल जिन आठ निदेशकों को इस कोर ग्रुप में रखा गया है, उनमें डिजिटल तथा आण्विक निगरानी का जिम्मा आइजीआइबी के निदेशक डा अनुराग अग्रवाल को, टेस्टिंग किट तैयार से जुड़े काम का जिम्मा सीसीएमबी के निदेशक डा राकेश मिश्रा को, दवाओं के विकास का जिम्मा आइआइसीटी के निदेशक डॉ एस चंद्रशेखर को सौंपा गया है। इसी तरह अस्पतालों के लिए सहायक उपकरण तैयार करने का जिम्मा नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी के निदेशक डॉ जितेंद्र जे जाधव को और निजी सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति का जिम्मा इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम के निदेशक डॉ अंजन रे को सौंपा गया है। वहीं इस पूरे ग्रुप का समन्वयक आइआइआइएम के निदेशक डॉ राम ए विश्वकर्मा को बनाया गया है।

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अभी तक दो करोड़ से ज्यादा निर्माण श्रमिकों को तीन हजार करोड़ रुपये वितरित किए हैं। नियमित प्रेस ब्रीफिंग में गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया, 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया है और इसके तहत निर्माण श्रमिकों का भी हिस्सा है। करीब 3.5 करोड़ ऐसे श्रमिक पंजीकृत हैं और राज्य सरकारों को बताया गया था कि इस मद में करीब 31 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।'पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि राज्य सरकारों ने इस पर अमल शुरू कर दिया है और 31 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने एक हजार से छह हजार रुपये (निर्माण श्रमिकों के लिए) तक के नकद लाभ की घोषणा की है। दो करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को करीब तीन हजार करोड़ की राशि दी गई है। करीब 29 लाख ऐसे श्रमिकों को खाद्य सहायता भी प्रदान की गई है। संयुक्त सचिव ने बताया कि राज्य सरकारों ने देश में 25 मार्च से जारी लॉकडाउन को लागू करने में ज्यादा सख्ती शुरू कर दी है और पुलिस सघन निगरानी कर रही है।पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए प्रशासन सामुदायिक नेताओं की मदद भी ले रहा है। पुण्य सलिला ने बताया कि राज्य सरकारों के अधिकारी बाजारों और बैंकों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर मार्किग करके या बैरीकेड लगाकर शारीरिक दूरी बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही संतोषजनक है।आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी की आशंका के मद्देनजर गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू करने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। पुण्य सलिला ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारें स्टॉक सीमा तय करने, मूल्य निर्धारित करने, डीलरों के अकाउंट का निरीक्षण करने जैसे कदम उठा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि इन कदमों से लॉकडाउन को प्रभावशाली तरीके से लागू किया जाएगा।'

नई दिल्ली। कोरोना काल में मलेरिया की जिस दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन को लेकर जिसे संजीवनी बूटी माना जा रहा है और पूरे विश्व में रुचि बनी हुई है, उसका उपयोग दरअसल बहुत सावधानी से किए जाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों में इस दवा को आम जनता के लिए खुले इस्तेमाल करने की छूट देने को लेकर सशंकित हैं। और इसीलिए पिछले कुछ दिनों से तेजी से बढ़ रही कोरोना संक्रमितों की संख्या के बावजूद यह दवा केवल मरीजों के इलाज में जुटे स्वास्थ्यकर्मी को ही दिया जा रहा है। दूसरों के लिए यह वर्जित है क्योंकि स्वास्थ्यकर्मी की स्वास्थ्य की जांच लगातार हो रही है।आइसीएमआर के डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर के अनुसार इस दवा के कुछ साइड-इफेक्ट भी हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी दूसरी बीमारी से ग्रसित है, तो यह खतरनाक भी साबित हो सकता है। इसी तरह इसकी अधिक मात्रा भी सेहत को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। इसीलिए इस दवा की खुली बिक्री को प्रतिबंधित करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आइसीएमआर कोरोना वायरस के खिलाफ हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन के प्रभावी होने का अध्यनन कर रहा है और नतीजे सही आने पर आम जनता को भी इसके इस्तेमाल की अनुमति दे दी जाएगी।
सार्स कोरोना वायरस पर हो चुका है परीक्षण;-नए कोरोना वायरस फैलने के बाद इसके इलाज के लिए हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन की तरफ दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान यूं नहींगया। दरअसल 2002 में सार्स कोरोना वायरस के फैलने के बाद प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान हाइड्रोक्सी-क्लोक्वीन को इस वायरस को रोकने में सफल पाया गया था। शोध में सामने आया था कि हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन मानव शरीर की कोशिकाओं में कुछ ऐसा रसायनिक परिवर्तन कर देता है कि सार्स कोरोना का वायरस मानव कोशिका से जुड़कर अपनी संख्या बढ़ाने में असमर्थ हो जाता है। जबकि वायरस के पनपने और अपनी संख्या बढ़ाने के लिए इसका मानव कोशिका से जुड़ना जरूरी है। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है और धीरे-धीरे स्वत: समाप्त हो जाता है। प्रयोगशाला में यह प्रयोग तो सही पाया गया, लेकिन उसके बाद मानव शरीर के भीतर इसका परीक्षण नहीं हो सका। कोरोना वायरस भी सार्स की तरह कोरोना फैमली का एक वायरस है।
हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर आइसीएमआर की गाइडलाइंस:-नए कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आइसीएमआर की ओर से पहले दिन 400 एमजी की हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन की दो गोली लेने और बाद में सात हफ्ते तक हर हफ्ते एक-एक गोली लेने की सलाह दी गई है। लेकिन कोरोना के मरीजों के करीब रहने वालों के लिए तीन हफ्ते तक इसका इस्तेमाल करने को कहा है। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल करने की इजाजत इसीलिए दी गई है वे लगातार किसी न किसी कोरोना मरीज के संपर्क में रहते हैं और उससे ग्रसित होने का खतरा बना रहता है। जबकि मरीज के करीबी उसके ठीक होने के बाद इस खतरे से मुक्त हो जाते हैं।
एक जैसा है क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन:-हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन में कोई खास अंतर नहीं है और दोनों ही समान रूप से प्रभावी हैं। दरअसल हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन क्लोरोक्वीन का ही परिमार्जित रूप है। जिसमें क्लोरोक्लीन के कुछ दुष्प्रभावों को हटा दिया गया है।

 

 

 

 

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