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नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वाराणसी में टीका लगवा चुके लाभार्थियों और इस अभियान में शामिल कर्मचारियों के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बातचीत में लाभार्थी टीकाकरण के अपने अनुभवों को साझा करेंगे। पीएमओ ने कहा है कि पीएम मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की ओर से वैज्ञानिकों, राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ किया जा रहा निरंतर संवाद दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करने के लिए है।मालूम हो कि वारणसी प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का लोकसभा क्षेत्र भी है। पीएम मोदी ने बीते 16 जनवरी को कोरोना के खिलाफ राष्‍ट्रव्‍यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। दुनिया के इस सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के पहले चरण में तीन करोड़ स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर को टीका लगाया जाना है।प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ट्वीट कर कहा कि देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान जारी है। देश भर में हमारे अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी टीका लगवा रहे हैं। 22 जनवरी को अपराह्न 1:15 बजे मैं वाराणसी में कोविड-19 टीकाकरण के लाभार्थियों और टीका लगाने वाले कर्मियों से संवाद करूंगा।प्रधानमंत्री (Prime Minister Narendra Modi) शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे तेजपुर विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ट्वीट कर कहा कि मैं तेजपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करने के लिए उत्सुक हूं। असम और पूर्वोत्तर के युवाओं के साथ बातचीत करने का यह एक शानदार मौका है। उल्‍लेखनीय है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई के दूसरे चरण में पीएम मोदी (PM Narendra Modi) भी कोविड वैक्‍सीन लगवाएंगे। पीएम मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के अलावा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी यह टीका लेंगे। इसका उद्देश्य आम लोगों में कोरोना की वैक्‍सीन के प्रति भरोसा कायम करना बताया जा रहा है। मालूम हो कि दूसरे चरण में 50 साल से अधिक उम्र वालों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 27 करोड़ लोगों के टीकाकरण की योजना है। भारत में ऑक्‍सफोर्ड एस्‍ट्राजेनेका की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन टीके को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। 

लखनऊ। इंडियन कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव तथा उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के नये तरीके से ब्रांडिंग कर रही है। कांग्रेस नये वर्ष में अब अपनी पार्टी की शीर्ष स्तर की नेता प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश के हर गांव के साथ शहर के घरों में भी पहुंचा रही है।कांग्रेस ने नये वर्ष 2021 में एक कैलेंडर तैयार किया है। जिसमें प्रियंका गांधी के संघर्ष को 12 पेज पर दिखाया गया है। अब इस कैलेंडर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी हर गांव और हर शहर तक पहुंचा रही है। इस कैलेंडर में जिसमें प्रियंका गांधी के सोनभद्र तक जाने से लेकर हाथरस में पीड़िता के परिवार से मिलने तक की तस्वीर लगाई गई है। प्रियंका गांधी की तस्वीर वाले इस 12 पेज के कैलेंडर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नेताओं ने घर-घर तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। अब इस 12 पेज के कैलेंडर की मदद से कांग्रेस ने अपना संदेश देने के साथ सियासी समीकरण साधने की कवायद की है। कांग्रेस नए साल में उत्तर प्रदेश में हर गांव और शहर तक महासचिव प्रियंका गांधी के भेजे कैलेंडर पहुंचा रही है। यूपी में कांग्रेस पार्टी फिलहाल अपने संगठन सृजन अभियान में व्यस्त है। प्रदेश में न्याय पंचायत के अध्यक्षों और ब्लाक कांग्रेस कमेटी के गठन का काम बहुत तेजी से चल रहा है। कांग्रेस के पदाधिकारी तीन जनवरी से अपने प्रभार वाले जिलों में प्रवास पर हैं।

10 लाख कैलेंडर लेकर हर गांव- हर शहर जाएगी यूपी कांग्रेस:-अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी ने दस लाख कैलेंडर यूपी में भेजा है। नव वर्ष के कैलेंडर को हर गांव और शहरों के हर वार्ड तक वितरित करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया गया है। हर जिले और शहर कमेटी के लिए उसके आबादी के लिहाज से कैलेंडर दिए जा रहे हैं।

कैलेंडर में प्रियंका के जनसंपर्क और संघर्षों की तस्वीरें:-कैलेंडर में यूपी की प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के जनसंपर्कों और संघर्षों की तस्वीरें हैं। 12 पेज के कैलेंडर में पहले पेज पर सोनभद्र के उभ्भा जनसंहार के बाद अपनी संवेदना व्यक्त करने सोनभद्र पहुंची प्रियंका गांधी की तस्वीर आदिवासी महिलाओं के साथ छपी है। इस कैलेंडर में हाथरस में पीडि़ता के मां से गले लगते महासचिव प्रियंका गांधी की तस्वीर छपी है। हाथरस जाते हुए रास्ते में पुलिसिया लाठीचार्ज से कार्यकर्ताओं को बचाते हुए भी महासचिव की तस्वीर इस कैलेंडर में है। इसमें सीएए-एनआरसी के खिलाफ लगातार सड़कों पर संघर्ष करती रही प्रियंका की एक तस्वीर आजमगढ़ जिले की भी है। जिसमें वह पीडि़त परिवार की एक बच्ची के आंसू पोछ रही हैं। इस कैलेंडर में प्रियंका गांधी के अमेठी व रायबरेली के साथ हरियाणा व झारखंड जन संपर्कों की तस्वीरें बहुत करीने से छापी गई हैं। 

मेरठ। ढाई लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर बदन सिंह बद्दो की कोठी को तोड़ने के लिए गुरुवार को पंजाबी पुराने बुल्‍डोजर और लेबर पहुंच गई। बुल्‍डोजर कोठी तक ले जाने के लिए मुख्य गेट का कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया है। कोठी को जमींदोज करते हुए देखने के लिए पंजाबी पुराने आसपास के लोगों की भीड़ अपनी छतों पर मौजूद है। बड़ी संख्या में कॉलोनी के लोग ने कहा कि कोठी के धराशाई होने से उन्हें कोई एतराज नहीं है लेकिन उनकी सुरक्षा के मद्देनजर पंजाबी पूरा कॉलोनी में प्रवेश के लिए एक दीवार को छोड़ दिया जाए। स बीच कोठी तक पहुंचने के लिए बुल्‍डोजर से पड़ोसी की दीवार गिरा दी। एमडीए के अफसरों ने बद्दो के पड़ोसी विश्व बंधु को दोबारा दीवार बना कर देने का भरोसा दिलाया। उसके बाद ही दीवार गिराई गई। दीवार गिराने के बाद जल्दी ही बद्दो कोठी जमींदोज करने की कार्रवाई शुरू होगी। 

भारी संख्‍या में पुलिस बल मौजूद:-ढाई लाख के इनामी बदन सिंह बद्दो की फरारी के बाद पुलिस ने पहले कुर्की की कार्रवाई थी उसके बाद कोठी को जमींदोज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दो बुल्‍डोजर और लेबर मौके पर पहुंच चुकी है। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और एमडीए की टीम भी मौके पर पहुंच गई है। मुख्य गेट का कुछ हिस्सा तोड़कर बुलडोजर अंदर प्रवेश कर गए। जल्द ही बद्दो की कोठी तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। कोठी को जमींदोज होते देखने के लिए आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा है। मेरठ के प्रशासनिक अफसरों ने इसके लिए पहले से ही तैयारियां कर ली है। सुबह नौ बजे से ही पुलिस बल और अफसर बद्दो की कोठी को जमींदोज करने के लिए पहुंच गए थे। शहर के पंजाबीपुरा स्थित कोठी पर बुल्डोजर चला दिया गया। उसके लिए मेरठ विकास प्राधिकरण की ने डीएम और एसएसपी को पत्र जारी कर फोर्स मांगी गई थी। ब्रह्मपुरी सर्किल के तीनों थानों के अलावा पीएसी और आरएएफ को भी लगा दिया गया था।

यह है मामला:-टीपीनगर के पंजाबीपुरा निवासी ढाई लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर बदन सिंह बद्दो ब्रह्मपुरी थाने के मुकुट महल स्थित होटल से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बद्दो के सहयोगियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बदन सिंह और उसके साथी डिपीन सूरी, पपीत बढ़ला पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की जा चुकी है, जिसके तहत 14ए में पुलिस ने बदन सिंह बद्दो की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की। उसके बाद बदन सिंह की अवैध कमाई से बनाई गई पंजाबीपुरा मकान नंबर आठ और नौ के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। नौ दिसंबर 2020 को कोठी के मालिकाना हक का दावा करने वाली बदन सिंह बद्दो की भाभी कुलदीप कौर भी कोई कागजात प्रस्तुत नहीं कर पाई, जिसके चलते विकास प्राधिकरण ने बदन सिंह की कोठी को जमींदोज कराने के आदेश नौ दिसंबर को ही जारी कर दिए थे। बाकायदा कुलदीप कौर को नोटिस भेजकर उसका पक्ष रखने को कहा गया था। कुलदीप कौर ने कमिश्नर कोर्ट में अपील दायर कर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की सुनवाई के दौरान सोमवार को कमिश्नर कोर्ट से कुलदीप कौर की याचिका को निरस्त कर दिया था। 

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुíवज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि क्लोरोक्विन (सीक्यूएन) का नेजल ड्रॉप (नाक के जरिये दी जाने वाली दवा) कोरोना की रोकथाम में मददगार है। हालांकि इसका ज्यादा प्रभाव तब देखने को मिलता है जब इसका इस्तेमाल संक्रमण की चपेट में आने से पहले हो। अध्ययन का उद्देश्य वायरल लोड को कम करने और प्रारंभिक कोविड-19 संक्रमण में इसकी उपयोगिता का पता लगाना था।

नाक से दी जाने वाली सीक्यूएन प्रभावी;-एम्स के ऑर्टोहिनोलैरिंगोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आलोक ठाकर ने बताया कि मौजूदा अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम में नाक से दी जाने वाली सीक्यूएन की बूंदें प्रभावी हैं। अगर कोई व्यक्ति कोरोना से हल्का या गंभीर रूप से संक्रमित है तो इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। क्लीनिकल और वायरोलॉजी संबंधी जांच में भी यह बात सामने आई है।सी.आर.एम क्या है? इसका प्रयोग क्यों करें? सेल्सफोर्स सी.आर.एम् के प्रयोग से कंपनियों की बिक्री में 38% वृद्धि हुई है। जानें कैसे।

अध्ययन को मिली मंजूरी;-इस अध्ययन के जरिये यह भी पता करना था कि सीक्यूएन के नेजल ड्रॉप का हल्के रूप से कोरोना संक्रमण से प्रभावित मरीजों या फिर जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन पर क्या असर पड़ता है। अध्ययन को संस्थागत जैव-सुरक्षा संबंधी मंजूरी मिल चुकी है और इसे भारत के क्लीनिकल परीक्षण रजिस्ट्री ने भी पंजीकृत किया है।

ऐसे हुआ अध्ययन:-अध्ययन एम्स में कोविड-19 के लिए नामित एक विशेष स्थान (एनसीआइ-झज्जर कैंपस) में किया गया। अध्ययन के लिए 60 प्रतिभागियों का चयन 23 अप्रैल से छह मई, 2020 के बीच किया गया और सभी प्रतिभागियों से लिखित लिखित सहमति प्राप्त की गई थी।

10 दिनों तक दी गई दवा;-इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस में प्रकाशित अध्ययन में यह भी बताया गया है कि प्रतिभागियों में कुछ हल्के रूप से संक्रमित थे या फिर उनमें संक्रमण का कोई लक्षण नहीं दिख रहा था। इसकी पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण का भी सहारा लिया गया। इन सभी मरीजों को 10 दिनों तक छह बार 0.5 मिलीमीटर प्रति खुराक के हिसाब से नाक के जरिये क्लोरोक्वीन की बूंदें दी गई।

क्या कहा गया है निष्कर्ष में:-नाक के जरिये क्लोरोक्वीन देने के तरीके को सुरक्षित पाया गया है। हल्के या बिना लक्षण वाले मरीजों में भी इसे उपयोगी पाया गया। लेकिन सैंपल साइज काफी कम होने की वजह से इसमें ज्यादा लोगों को शामिल करने की बात कही गई है। 

मनीला। फिलीपींस में गुरुवार को तेज भूकंप आया। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 मापी गई। यह भूकंप फिलीपींस में गुरुवार दोपहर 12:23 बजे आया। भूकंप का केंद्र फिलीपींस से 210 किमी दूर पोंगडूइटान में रहा। इस भूकंप के बाद अफरातफरी मच गई। लोग अपने घरों से निकलकर बाहर भागे। स्थानीय समाचार आउटलेट इंक्वायरर के अनुसार, एक प्रमुख फिलीपीन वाणिज्यिक केंद्र दावो के निवासियों ने भी झटके महसूस किए। अब तक किसी के हताहत और नुकसान की सूचना नहीं है।यूरोपीय भूमध्य भूकंपीय केंद्र (EMSC) ने कहा कि भूकंप 122 किमी की गहराई पर समुद्र में आया। इसने शुरुआत में 7.2 की तीव्रता बताई थी। यह क्षेत्र भूकंप प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। यहां सुनामी आने का भी खतरा रहता है। 

इंडोनेशिया में भूकंप से 91 की मौत:-पिछले दिनों इंडोनेशिया के पश्चिम सुलावेसी प्रांत में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 91 हो गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 14 जनवरी को प्राकृतिक आपदा के कारण कम से कम 1,172 लोगों को घायल हुए। एजेंसी के प्रवक्ता रेडिटी जाति ने कहा कि भूकंप के कारण 9,910 लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए। पश्चिम सुलावेसी में 15 जनवरी से 14 दिनों के लिए एक आपातकालीन आपातकालीन स्थिति घोषित की गई है।

मुंबई।महाराष्ट्र के पुणे में वीरवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआइआइ) के मंजरी प्लांट में भीषण आग लग गई। आग लगने से पांच लोगों की मौत हो गई। पुणे के मेयर मुरलीधर मोहोल के मुताबिक, इमारत से काफी लोगों को निकाला गया लेकिन जब आग पर काबू पाया गया तो पांच शव मिले।  कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। अभी तक आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। आग लगने की जानकाकी मिलते ही फायर ब्रिगेड की दस गाड़ियां मौके पर पहुंची। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के गेट नंबर एक पर लगी आग धीरे-धीरे आग बिल्डिंग की दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवीं मंजिल तक आग पहुंच गई। आग से हुए नुकसान के बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिल पाई है।आग की वजह से चारों ओर धुएं का गुबार फैल गया। सीरम इंस्टीट्यूट ने ही कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड को बनाया है। इस बीच, एसआइआइ के मंजरी प्लांट में आग लगने की घटना पर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि आग से दुर्भाग्य से कुछ जानमाल का नुकसान हुआ है। उन्होंने दिवंगत लोगों के परिवार के सदस्यों के लिए संवेदनाएं व्यक्त की हैं। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि आग नियंत्रण में है। पुणे नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रशांत रानसेप ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की इमारत में आग नियंत्रण में है। आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। सूत्रों के मुताबिक, सीरम इंस्टीट्यूट में आग लगने की घटना मंजरी प्लांट में हुई। वैक्सीन और वैक्सीन निर्माण संयंत्र सुरक्षित हैं। यह वैक्सीन के उत्पादन को प्रभावित नहीं करेगा। इस बीच, एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की एक टीम पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पहुंची है। वहीं, पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता के मुताबिक, हमें 2:45 बजे सीरम इंस्टीट्यूट की एक इमारत में आग लगने की सूचना मिली। पुलिस और फायर ब्रिगेड तुरंत मौके पर पहुंची। काफी लोगों को निकाल लिया गया है। इस इमारत में वैक्सीन का प्लांट या भंडारण नहीं किया जा रहा था। हम हर पहलू की जांच करेंगे। इस इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था।जिस साइट में आग लगी, वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे में एक निर्माणाधीन इमारत है। वैक्सीन और वैक्सीन निर्माण संयंत्र सुरक्षित हैं। इससे पहले मुंबई के साकी नाका इलाके में मंगलवार को एक दुकान में आग लगने से तीन लोग घायल हो गए थे। साकी नाका इलाके की एक दुकान में मंगलवार सुबह लगभग 10.35 बजे धमाका हुआ, जिसके बाद आग लग गई। इस दुकान में कटाई के काम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गैस सिलेंडर और विभिन्न स्क्रैप आइटम रखे हुए थे।आग लगते ही दमकल विभाग को सूचित किया गया। दमकलकर्मियों ने इसे लेवल-2 की आग बताया। इस हादसे में तीन लोगों के चोटें आई हैं, जिन्‍हें इलाज के लिए रजवाड़ी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। आग को काबू करने के लिए 10 दमकल वाहन और पानी के टैंकर मौके पर मौजूद थे। गौरतलब है कि 17 नवंबर 2020 को भी मुंबई के साकीनाका इलाके में सुबह 90 फीट रोड पर अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई थी। यह आग तीन नंबर खाड़ी के पास स्थित साकीनाका की झुग्गियों में लगी थी। झुग्गियों में आग लगने से गरीब मजदूर और अन्य कामगार लोग प्रभावित हुए थे। आग की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दमकल वाहनों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया था नहीं तो आग फैलकर जानमाल को नुकसान पहुंचा सकती थी। दरअसल ये इलाका बेहद तंग गली वाला था जहां घनी आबादी निवास करती है। आग बुझाने में जरा सी भी देरी मुश्किलें और ज्‍यादा बढ़ा सकती थी।

नई दिल्ली।भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), नई दिल्ली में जूनियर एग्जीक्यूटिव एवं मैनेजर पदों के लिए आवेदन करने से वंचित रह गये उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन पदों की कुल 368 रिक्तियों के लिए हाल ही में समाप्त हुई आवेदन की आखिरी तारीख को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। प्राधिकरण की ऑफिशियल वेबसाइट, aai.aero पर जारी अपडेट के मुताबिक आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार जूनियर एग्जीक्यूटिव एवं मैनेजर पदों के लिए अब 29 जनवरी 2021 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रखी गयी है और उम्मीदवार नई अंतिम तिथि की रात 11.59 बजे तक अप्लीकेशन ऑनलाइन सबमिट कर पाएंगे।

कौन कर सकता है आवेदन?:-एयरपोर्ट अथॉरिटी में जूनियर एग्जीक्यूटिव पदों के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन या बीई/बीटेक डिग्री उत्तीर्ण होना चाहिए। इन पदों के लिए आयु सीमा अधिकतम 27 वर्ष है। इसी प्रकार मैनेजर पदों के लिए सम्बन्धित ट्रेड में बीई या बीटेक डिग्री उत्तीर्ण होना चाहिए और सम्बन्धित कार्य का 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इन पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी भर्ती: रिक्तियों के विवरण

कोलकाता। बंगाल के मुस्लिमों के बीच बेहद खास प्रभाव रखने फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने बड़ा सियासी दांव खेला है। बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने वीरवार को अपनी नई पार्टी बना ली है। अब्बास सिद्दीकी ने अपने नए दल को नाम इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) रखा है। पीरजादा अब्बास सिद्दीकी लंबे अरसे से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं। हालांकि कुछ वक्त से सिद्दीकी ममता से नाराज चल रहे हैं और खुले रूप से तृणमूल कांग्रेस का विरोध करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) चीफ असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात की थी।मुलाकात के बाद ओवैसी ने साफ किया था कि वह बंगाल में अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी। इसके बाद अब्बास सिद्दीकी ने नई पार्टी बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी और गुरुवार को उन्होंने आइएसएफ नाम से पार्टी की घोषणा कर दी। पार्टी की घोषणा करते हुए सिद्दीकी ने दावा किया कि उनकी पार्टी भारत में पहला सच्चा धर्मनिरपेक्ष मोर्चा होगी और वंचित वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करने वाले बहुत सारे पक्ष अस्तित्व में आ गए हैं, लेकिन हमने देखा है कि एक वर्ग के अलावा ज्यादातर लोग वंचित रह गए हैं। मुस्लिम, दलित पीछे रह गए हैं। हमारा उद्देश्य वंचित वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाना है। इस पार्टी का अध्यक्ष अब्बास ने अपने भाई नौशाद सिद्दीकी को बनाया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों ने धर्मगुरु की पार्टी की घोषणा को बंगाली राजनीति में एक नया चलन बताया है।

हर जिले में पार्टी संगठन तैयार करेंगे:-गुरुवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अब्बास सिद्दीकी ने कहा कि हर जिले में हम पार्टी संगठन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिलों में सभा व बैठकें कर पार्टी का नाम और सफेद, हरा और नीला रंग वाले इस झंडे से आम जनता को परिचत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति व वक्त समझने के बाद ब्रिगेड परेड मैदान में एक सभा आयोजित की जाएगी। यहां बताना आवश्यक है कि फुरफुरा शरीफ के एक और पीरजादा और अब्बास के चाचा तोहा सिद्दीकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने ओवैसी के दौरे के बाद साफ कहा था कि यहां हम सभी लोग ममता बनर्जी के साथ हैं।

अब्बास सिद्दीकी की मुस्लिम वोटों पर है नजर:-अपनी नई पार्टी बनाने के साथ अब्बास सिद्दीकी की नजर बंगाल चुनाव में मुस्लिम वोटरों पर है। 30 फीसद वोट शेयर के साथ मुस्लिम वोटर यहां 'किंगमेकर' की भूमिका में रहते हैं। 2011 में ममता बनर्जी की धमाकेदार जीत के पीछे भी यही वोटबैंक था। राज्य की 294 सीटों में से 90 से ज्यादा सीटों पर इस वोटबैंक का सीधा प्रभाव है। सियासी जानकारों का मानना है कि फुरफुरा शरीफ दरगाह के चुनाव में उतरने से ममता के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगने की पूरी संभावना है और ऐसा हुआ तो ममता का तीसरी बार भी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का सपना अधूरा रह सकता है।

मुस्लिमों के बीच फुरफुरा शरीफ दरगाह का विशेष महत्व:-बंगाल के हुगली जिले में फुरफुरा शरीफ विख्यात दरगाह है। बंगाली मुस्लिमों में इस दरगाह का विशेष दखल है। वाममोर्चा सरकार के दौरान इसी दरगाह की मदद से ममता ने सिंगुर और नंदीग्राम जैसे दो बड़े आंदोलन किए थे। एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसी महीने की शुरुआत में फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि अब्बास सिद्दीकी का हमें समर्थन हासिल है और जो फैसला वह लेंगे, वही हमें मंजूर होगा।

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ममता बनर्जी के थे समर्थक:-38 वर्षीय अब्बास सिद्दीकी एक समय ममता बनर्जी के मुखर समर्थक थे। मगर बीते कुछ महीनों से उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। सिद्दीकी ने ममता सरकार पर मुस्लिमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। बंगाल की करीब 100 सीटों पर मुस्लिम वोट का प्रभाव है और फुरफुरा शरीफ दरगाह की खास भूमिका रह सकती है। ऐसे में चुनाव से पहले दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का खुद की पार्टी बना लेना ममता के लिए सियासी रूप से फायदे का सौदा नहीं साबित होने वाला है।

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले डोनाल्ड ट्रंप अपने उत्तराधिकारी जो बाइडन के नाम एक पत्र लिख गए थे। शपथ ग्रहण के बाद नए राष्ट्रपति बाइडन ने बुधवार को यह पत्र पढ़ा और बताया कि यह उदारता से भरा है। अमेरिकी परंपरा के अनुसार, निवर्तमान राष्ट्रपति अपने उत्तराधिकारी के लिए एक पत्र व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में छोड़कर जाते हैं। ट्रंप भी इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए बाइडन के नाम पत्र छोड़ गए थे। हालांकि ट्रंप ने कई परंपराओं की अनदेखी भी की थी। 

बाइडन ने ट्रंप के पत्र को बताया उदारता भरा:-वह बाइडन के शपथ ग्रहण से पहले ही व्हाइट हाउस से चले गए थे। उनकी जगह पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने परंपराएं निभाई थीं। बाइडन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'राष्ट्रपति ने बेहद उदारता भरा पत्र लिखा है, क्योंकि यह निजी है। इसके बारे में मैं तब तक नहीं बताऊंगा, जब तक मैं उनसे (ट्रंप) बात नहीं कर लेता। लेकिन यह वास्तव में उदारता भरा है।' उन्होंने बताया कि वह ट्रंप से बात करने की योजना बना रहे हैं। बाइडन ने ओवल ऑफिस में कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले यह पत्र पढ़ा था। ट्रंप के सहयोगी ने बताया कि इस चिठ्ठी में देश और नए प्रशासन की सफलता की दुआ की गई है।साल 2017 में डोनाल्‍ड ट्रंप जब राष्ट्रपति बने थे तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी उनके लिए एक नोट छोड़ा था। ट्रंप इस चिठ्ठी को लेकर इस कदर उत्साहित हो गए कि उन्होंने तुरंत ओबामा से बात करने के लिए फोन लगा दिया था। हालांकि, उस वक्त ओबामा फ्लाइट में थे इसलिए वो कॉल रिसीव नहीं कर सके थे।

हैंस के नाम पर सीनेट की मुहर:-अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने बाइडन के पहले नामित पर अपनी मुहर लगा दी। बाइडन ने नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक पद के लिए एवरिल हैंस को नामित किया था। इस नामांकन को सीनेट से 10 के मुकाबले 84 मतों से मंजूरी मिल गई। बाइडन कैबिनेट में नियुक्ति पाने वाली हैंस पहली सदस्य बन गई।

शंघाई। ट्विटर ने अमेरिका स्थित चीनी दूतावास का ट्विटर अकाउंट बंद (लॉक) कर दिया है। दूतावास ने शिनजियांग के उइगर महिला के मामले में अपनी नीति का बचाव करने संबंधी ट्वीट किया था। सोशल मीडिया कंपनी ने इस ट्वीट को अमानवीय बताते हुए अकाउंट को बंद कर दिया है। दूतावास ने शिनजियांग प्रांत के यातना शिविर में रखी गई महिलाओं के संबंध में दावा किया था कि अब वह स्वतंत्र हैं और बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं रह गई हैं। ट्वीट सात जनवरी को किया गया और ट्विटर ने अकाउंट को नौ जनवरी को बंद कर दिया।ट्विटर के अधिकारी ने कहा कि किसी भी धर्म, जाति और नस्ल के बारे में अमानवीय टिप्पणी कंपनी की नीति के खिलाफ है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में कुछ भ्रम की स्थिति हुई है। यह दूतावास की जिम्मेदारी है कि वह गलत सूचना के बारे में सही स्थिति स्पष्ट करे और सच सामने लाए।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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