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गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन में रहने वाली महिला भाजपा नेता की अश्लील तस्वीर एक व्यक्ति ने फेसबुक पर डाल दी। महिला का आरोप है कि आरोपित ने तेजाब फेंक कर जलाने की भी धमकी दी है। महिला ने आरोपित पर कार और लैपटॉप हड़पने का भी आरोप लगाया है। लैपटॉप से तस्वीरें निकालकर आरोपित ने फेसबुक पर डाली हैं। मामले में इंदिरापुरम पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच कर रही है।पीड़ित भाजपा नेता की पृथ्वीराज सिंह नाम के एक व्यक्ति से कुछ वर्षों से दोस्ती थी। वर्तमान में दोनों एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं। आरोप है कि पृथ्वीराज सिंह ने महिला के कार और लैपटॉप भी हड़प लिए हैं। लैपटॉप से अश्लील फोटो निकालकर फेसबुक पर डाल दी। वॉट्सएप पर भी वायरल कर दिया।आरोप है कि विरोध करने पर 10 मई को आरोपित उनके घर के पास आया और तेजाब फेंककर जलाने की धमकी देकर गया। पीड़ित का आरोप है कि आरोपित पृथ्वीराज सिंह खुद को दिल्ली के मुख्यमंत्री का पीए बताकर रौब दिखाता है। आरोपित ने उनसे 20 लाख रुपये लिए हैं, जिन्हें वापस नहीं कर रहा है। उन्होंने पीएमओ, सीएम योगी आदित्यनाथ और पुलिस अधिकारियों से भी मामले की शिकायत की है।संदीप कुमार सिंह (एसएचओ इंदिरापुरम) का कहना है कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। इसके बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।

नई दिल्ली। चुनाव, मतलब लोकतंत्र का महापर्व। ऐसा महापर्व जिसमें शीर्ष आम और खास सबकी आहुति न सिर्फ जरूरी है, बल्कि ये उसका कर्तव्य भी है। ऐसे में जब इस लोकतंत्र के बड़े सारथी ही अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लें तो जनता का भी इस प्रक्रिया से विश्वास उठना लाजमी है। यहां हम बात कर रहे बिहार प्रमुख राजनीति दल आरजेडी नेता व लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की।तेजस्वी यादव, बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक, 10 वर्ष मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र की राजनीति में बड़ा चेहरा माने जाते हैं। 17वीं लोकसभा के लिए दिग्विजय सिंह, भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। यहां उनका मुकाबला भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से है। दिग्विजय सिंह शुरू से दावा करते रहे हैं कि वह अपनी सीट पर आसानी से जीत दर्ज करेंगे। इसके लिए उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काफी मेहनत भी की।बावजूद 12 मई को हुए छठे चरण के मतदान के दौरान उन्होंने मतदान नहीं किया। उन्हें वोट डालने के लिए राजगढ़ जाना था, लेकिन वह नहीं गए। पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह वोट डालने नहीं जा सके, इसका उन्हें दुख है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगली बार वह भोपाल में नाम दर्ज कराएंगे। उधर तेजस्वी यादव, अपनी पार्टी आरजे़डी के स्टार प्रचारक हैं और राज्य में नेता प्रतिपक्ष हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के बाद वह पटना से बाहर चले गए थे। उन्हें सातवें चरण में पटना में मतदान करना था।तेजस्वी की मां राबड़ी देवी, भाई तेज प्रताप और बहन मीसा भारती ने यहां अपना वोट दिया। दिन भर चर्चा रही कि तेजस्वी वोट डालने आ रहे हैं। उनके करीबियों ने ही पहले मीडिया को बताया कि वह सुबह नौ बजे परिवार के साथ मतदान करने जाएंगे, लेकिन वह अंतिम क्षण तक नहीं आए। इसके बाद बहाना बनाया गया कि उनके मतदाता पहचान पत्र में किसी और की तस्वीर लगी है। हालांकि, इसका पता चलते ही बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एचआर श्रीनिवासन ने साफ कर दिया था कि तेजस्वी अपना वोट डाल सकते हैं। साथ ही, उन्होंने तुरंत पहचान पत्र में गड़बड़ी की जांच के आदेश भी दे दिए।एक तरफ आपने दो बड़े नेताओं की लोकतंत्र पर आस्था देखी, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने इस महायज्ञ में आहुति देने के लिए सात समंदर पार का सफर तय किया। कोई अपनी फिल्म की शूटिंग छोड़कर मीलों दूर केवल वोट करने आया। क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी क्वालिफायर मैच से ठीक एक दिन पहले चार्टड प्लेन से रांची मतदान करने पहुंचे और फिर वापस जाकर मैच खेला। सेलिब्रिटी की बात छोड़ भी दें तो तमाम ऐसे लोग हैं, जो दूर-दराज के इलाकों से अपना काम-धंधा छोड़, नौकरी से छुट्टी लेकर और किराया-भाड़ा लगाकर वोट करने पहुंचे थे। कई जोड़ों ने शादी के फेरों से पहले मतदान किया। ऐसे एक-दो नहीं, सैकड़ों उदाहरण हैं।
ऑस्ट्रेलिया से आई वोट देने;-राजस्थान के रायसिंह नगर के छोटे से गांव एनपी निवासी सज्जन कुमार बिश्नोई की पत्नी एकता बिश्नोई ने वार्ड नंबर दस में मतदान किया और सुर्खियों में छा गईं। सज्जन ऑस्ट्रेलिया में एक निर्माण कंपनी में काम करते हैं। एकता भी उन्हीं के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह केवल मतदान करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत आई हैं। उनके इस जज्बे को पति ने भी पूरा समर्थन किया।
जवान बेटे की अंत्येष्ठि कर सीधे पहुंचे मतदान केंद्र;-वाराणसी में अजगरा के खरदहां गांव निवासी शिव प्रकाश सिंह ने लोकतंत्र का माखौल उड़ाने वालों के लिए एक मिशाल पेश की है। रविवार को मणिकर्णिका घाट पर अपने इकलौते पुत्र वेद प्रकाश सिंह (24) की अंत्येष्ठि कर शाम साढ़े पांच बजे वह सीधे मतदान करने पहुंचे थे। उनका बेटा वेद प्रकाश बेंगलुरू में इंजीनियरिंग का छात्र था। बीमारी की वजह से दिल्ली के एक अस्पताल में 17 मई को उसकी मौत हुई थी। इसके बाद रविवार को शव वाराणसी स्थित उनके पैतृक निवास पहुंचा था। शिव प्रकाश सिंह की पत्नी की 15 साल पहले ही मौत हो चुकी है और अब इकलौता बेटा ही उनका आखिरी सहारा था।
वोट देने के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नौकरी:-कर्नाटक के सुधींद्र हेब्बार, सिडनी एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग ऑफिसर हैं। वह वोट करने के लिए भारत आना चाहते थे, लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं मिल रही थी। सुधींद्र ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें 5 से 12 अप्रैल की छुट्टी मिली थी। उनकी छुट्टियां आगे नहीं बढ़ सकती थीं, क्योंकि आने वाले दिनों में ईस्टर और रमजान पर एयरपोर्ट पर काफी भीड़ होने वाली थी और उन्हें हर हाल में वोट देना था। लिहाजा उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

रांची।Exit Poll 2019 - झारखंड के लिए तमाम एजेंसियों के मिले-जुले एग्जिट पोल सामने आए हैं। आज तक ने जहां कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा, राष्‍ट्रीय जनता दल का सूपड़ा साफ होने का अनुमान लगाया है। वहीं एबीपी न्‍यूज, न्‍यूज 24, सीएनएक्‍स आदि सर्वे एजेंसियों ने यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर के आसार बताए हैं। लोकसभा चुनाव का एग्जिट पोल सामने आने के बाद बहस-मुबाहिसे और विश्‍लेषण से सोशल मीडिया भी अछूता नहीं है। उत्‍साही सोशल माडिया यूजर्स का जोश देखते बन रहा है। चाहे फेसबुक हो या ट्विटर। यहां यूजर्स मीम्स और जोक्स के जरिए अपनी खासी क्रिएटिविटी दिखा रहे हैं। एक्जिट पोल के बाद सोशल माडिया पर सबसे ज्यादा 'आएगा तो मोदी ही' हैशटैग छाया रहा। लोग कांग्रेस पर करारे तंज कसने से भी बाज नहीं आ रहे। चौकीदार राज मिश्रा नाम के ट्विटर यूजर ने अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए लिखा, 'एग्जिट पोल देखने के बाद मिठाई दुकान वालों ने कांग्रेस और महागठबंधन वालों से मिठाई का ऑर्डर लेना बंद कर दिया, कहा- पहले पूरा पेमेंट करिए'। यूजर ने चुटकी ली कि जानकारी मिल रही है कि मिठाई दुकानों पर एडवांस वापस करने को लेकर कांग्रेस और महागठबंधन के लोग दुकानदारों से भिड़ रहे हैं।राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने अपने ट्वीट में लिखा है कि एग्जिट पोल के नतीजे भी भाजपा-एनडीए के पक्ष में, कांग्रेस की मायूसी बढ़ी, हार का ठीकरा फोड़ने के लिए उपयुक्त चेहरे की तलाश जारी। वे अपने दूसरे ट्वीट में कहते हैं- बाकी जो है सो है, लेकिन नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे भटककर चंदा (विपक्षी एकता) को ढूंढ़ने निकले सितारे। चंद्रबाबू जी को एग्जिट पोल वाले 4-6 पर ही सलटा दे रहे हैं। अब इनकी कोई सुनेगा भी? बेचारे... सिर मुंडाते ही ओले पड़े।कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी एग्जिट पोल के लिए मीडिया को दोषी ठहरा रहे हैं। वे अपने ट्वीट में लिखते हैं- आंकड़ों और अंकों का खेल शुरू हो गया है। गोदी मीडिया के सभी एग्जिट पोल मोदी एंड कंपनी को 300+ सीटें देने की होड़ में लग गए हैं। लेकिन देश की जनता सब जानती है। 23 मई को जब नतीजे आने शुरू होंगे, तब हर बार की तरह एग्जिट पोल फ्लॉप होंगे।एग्जिट पोल में महागठबंधन के पूरी तरह फ्लॉप होने पर यूजर्स तंज भी कस रहे हैं। ट्विटर पर एक यूजर सुनील वर्मा ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को निशाने पर लिया है। उन्हें टैग करते हुए वे लिखते हैं- क्या आप एग्जिट पोल देख रहे हैं सर? चुनाव नहीं लड़ने का आपका फैसला बहुत ही अच्छा रहा। सच दीवार पर लिखा हुआ साफ नजर आ रहा है। लेकिन मुझे आश्चर्य हो रहा है कि आप इसे पढ़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर जवाब देते हुए डॉ अजय कुमार ने उन्हें 23 मई का इंतजार करने को कहा है।

जयपुर। राजस्थान में अलवर के थानागाजी में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता राजस्थान पुलिस की सिपाही बनकर उदयपुर में तैनात होगी। गृह विभाग ने सोमवार को पीड़िता को पुलिस का सिपाही बनाने से संबंधित आदेश तैयार कर लिए है। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनुमति मिलते ही आदेश जारी कर दिए जाएंगे। आदेश जारी होने के बाद वह जयपुर स्थित पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग लेगी।गहलोत के पास गृह विभाग का भी जिम्मा है। दरअसल, सामूहिक दुष्कर्म की शिकार पीड़िता ने सरकारी नौकरी की मांग की थी। उसके बाद उसकी शिक्षा और उसकी इच्छा के अनुरूप सरकार ने पीड़िता को पुलिस में सिपाही बनाने का निर्णय कर लिया है।
पीड़िता ने दी थी आत्महत्या की चेतावनी:-जानकारी के अनुसार पीड़िता और उसके परिवार से सलाह लेने के लिए गृह विभाग के निर्देश पर दो वरिष्ठ महिला कॉन्स्टेबल की एक टीम उसके घर गई थी। सरकार की ओर से टीम से यह पूछने को कहा गया था कि पीड़ित महिला से पूछ कर आए कि वह राजस्थान पुलिस में या फिर जेल पुलिस में सिपाही का पद चाहती है। इस पर पीड़िता ने राजस्थान पुलिस में नौकरी के लिए सहमति दी थी। पीड़िता की सहमति के बाद शनिवार को छुट्टी के दिन सरकारी दफ्तर खुले और पूरी कार्रवाई की गई।सोमवार को इस बारे में अधिकारिक आदेश तैयार कर अनुमति में लिए मुख्यमंत्री के पास फाइल भेज दी गई। पीड़िता को आर्थिक सहायता के भी आदेश जारी कर दिए गए है। उधर पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में दो दिन पहले कहा था कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। इस बीच एफआईआर में पीड़िता ने कहा था कि उसने अपने वायरल वीडियो और फोटो यूट्यूब पर बने एक चैनल में देखे थे।सरकार ने पहली बार किसी यूट्यूब चैनल वीडियो वायरल करने का मुकदमा दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि थानागाजी में एक 19 वर्षीय दलित महिला के साथ उसके पति के सामने ही 26 अप्रैल को चार युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। यह मामला देशभर में गूंजा था। लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस सरकार में हुए इस दुष्कर्म से चिंतित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद थानागाजी आकर पीड़िता से मिलकर गए थे।

देहरादून। गर्मियों का मौसम। देश के मैदानी इलाकों में प्रचंड गर्मी। बच्चों के स्कूल की छुट्टियां और उत्तराखंड की वादियां। इन सबका आपस में बड़ा गहरा संबंध है। इसके अलावा उत्तराखंड में इसी दौरान चारधाम की यात्रा भी होती है। श्रद्धालु इस दौरान बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की धार्मिक यात्रा करके न सिर्फ पुण्य कमाते हैं बल्कि गर्मी के मौसम में ठंडी वादियों के दिव्य दर्शन भी करते हैं। चुनावी गहमागहमी थमने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड का ही रास्ता चुना। यहां उन्होंने एक गुफा में करीब 17 घंटे एकांतवास में बिताए। आप भी उस गुफा में कुछ दिन गुजार सकते हैं।
पीएम मोदी का चैप्टर:-देश में 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में मतदान हुआ। पहले चरण से पहले ही चुनावी रैलियां शुरू हो गई थीं और पीएम मोदी ही भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारक रहे। इस दौरान उन्होंने देशभर में यात्राएं कीं और अपने व एनडीए की सहयोगी पार्टियों के प्रत्याशियों के लिए जमकर प्रचार किया। इसमें रोडशो भी शामिल रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री के तौर पर वे अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाते रहे। फिर 17 मई को जैसे ही अंतिम चरण के मतदान के लिए प्रचार का शोर थमा, वैसे ही उन्होंने केदारनाथ की ओर रुख किया। यहां पीएम मोदी ने करीब 17 घंटे तक एक गुफा में योग-ध्यान किया। उन्होंने 18 मई को बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और फिर 19 मई को बदरीनाथ पहुंचकर भगवान बदरी विशाल के आगे शीश नवाया। बता दें कि इसी दिन यानि 19 मई को ही अंतिम चरण का मतदान भी था और इसी चरण में वाराणसी से पीएम मोदी भी उम्मीदवार थे।
गुफा के बारे में...:-इस गुफा का नाम रुद्र मेडिटेशन केव रखा गया है। इसे पहाड़ पर चट्टानें काटकर बनाया गया है। इस गुफा के निर्माण में साढ़े 8 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। बता दें कि खास तौर पर पीएम मोदी के आगमन के लिए यहां CCTV लगाया गया था। प्रधानमंत्री के आने से पहले गुफा के बाहर कैंप लगाकर कई सुरक्षा गार्ड्स की व्यवस्था भी करवाई गई। 5 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी यह गुफा 3583 मीटर यानि करीब 12 हजार फिट की ऊंचाई पर है। बता दें कि इस गुफा को खास तौर पर पर्यटकों के लिए ही बनाया गया है। वैसे तो गुफा पिछले साल ही बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन इसे बुकिंग कम ही मिल रही थीं। अब उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी के योग-साधना के बाद यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
जुड़ गया टूरिज्म का चैप्टर;-जिस गुफा में पीएम नरेंद्र मोदी ने करीब 17 घंटे एकांतवास में बिताए वहां अब आप भी जा सकते हैं। गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) ने अब उसी गुफा को टूरिज्म के लिए खोल दिया है। यानि आप भी वहां जाकर रह सकते हैं। GMVN ने इस गुफा के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू की है। यही नहीं इसके लिए निगम ने अपनी वेबसाइट पर दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। बता दें कि पिछले ही साल सरकार ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण के तहत भैरवनाथ मंदिर के सामने इस प्राचीन गुफा को ध्यान के लिए तैयार किया था। प्रधानमंत्री मोदी के यहां आकर योग-ध्यान करने के बाद देशभर से लोग GMVN से यहां के बारे में जानने को उत्सुक दिख रहे हैं।
कब कर सकते हैं यहां की यात्रा:-प्रयटन को बढ़ावा देने के लिए GMVN ने इस गुफा तक देशभर से लोगों को पहुंचाने की योजना बनाई है। निगम के अनुसार पूरे यात्रा सीजन तक इस गुफा को ध्यान के लिए बुकिंग की जा सकती है। यानि इस साल जब तक चारधाम यात्रा चलेगी, तब तक आप इस गुफा को भी बुक करा सकते हैं।
कितने रुपये होंगे खर्च:-पीएम मोदी ने जिस गुफा में योग-साधना की वहां जाने का मन तो आपने बना ही लिया है। अब बात आती है इसमें खर्च कितना होगा। बता दें कि अगर आप इस गुफा को बुक करना चाहते हैं तो GMVN आपसे प्रतिदिन 990 रुपये किराया लेगा। इसके साथ ही यह भी बता दें कि कोई भी पर्यटक गुफा को 3 दिन से ज्यादा समय के लिए बुक नहीं करवा सकता। अगर आप चाहते हैं कि आप इससे ज्यादा समय तक इस गुफा में रहें तो आपको इसके लिए नए सिरे से अनुमति की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेगी। ध्यान रहे कि गुफा में एक समय में सिर्फ एक ही इंसान ध्यान लगाने जा सकेगा। एक बार बुकिंग हो जाने के बाद पैसा रिफंड नहीं किया जाएगा, भले ही आप गुफा में रहना चाहें या न चाहें।
फिट होंगे तभी गुफा में जा पाएंगे:-अगर आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं तो बता दें कि इसके लिए आपको शारीरिक तौर पर पूरी तरह से स्वस्थ होना पड़ेगा। मेडिकल जांच के बाद ही आपको इस गुफा में योग-ध्यान करने के लिए अनुमति मिलेगी। GMVN ने ध्यान गुफा की बुकिंग कराने वालों के लिए गुप्तकाशी में मेडिकल कराने की सुविधा मुहैया कराई है। अगर आप इस गुफा में योग-ध्यान करना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन बुकिंग के बाद यात्रा से दो दिन पहले ही गुप्तकाशी में मेडिकल जांच करानी होगी।
अब बात गुफा में सुविधाओं की:-इस ध्यान गुफा में बिजली और पानी की मूलभूत सुविधा तो है ही। इसके अलावा सुबह की चाय, ब्रेक फास्ट, दिन में लंच, शाम की चाय और डिनर भी उपलब्ध कराया जाएगा। यही नहीं चौबीसों घंटे GMVN का स्टाफ गुफा में सेवा देने को तैयार रहेगा। इसके लिए लोकल फोन की व्यवस्था भी दी गई है।
एक नहीं चार और गुफाएं होंगी तैयार::-केदारनाथ धाम में चार प्राचीन गुफाएं जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। इन गुफाओं में भी निगम जिला प्रशासन की मदद से सुधार कार्य कराएगा। इसमें प्राचीन स्वरूप को बरकरार रख वहां पर सुविधाएं जुटाई जाएंगी। गरुड़ चट्टी से लेकर गांधी सरोवर के बीच यह गुफाएं बनाई जाएंगी।
कैसे पहुंचे गुफा तक;-रुद्र मेडिटेशन केव तक पहुंचने के लिए आपको वही रास्ता चुनना है जो रास्ता केदारनाथ पहुंचने के लिए है। यहां जाने के लिए आप हवाई जहाज से देहरादून स्थित जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं। यहां से हेलिकॉप्टर और सड़क मार्ग के जरिए भी केदारनाथ पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा ट्रेन से हरिद्वार पहुंचने के बाद यहां सड़क मार्ग के जरिए केदारनाथ पहुंच सकते हैं। केदारनाथ मंदिर से इस गुफा की दूरी मजह 1.5 किलोमीटर है और यहां तक आपको पैदल ही जाना होगा।

मुंबई। मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई कर रही एनआइए की विशेष कोर्ट ने सोमवार को नासिक पुलिस से बचाव पक्ष के वकीलों को सुरक्षा प्रदान करने को कहा है। कोर्ट ने उन वकीलों को सुरक्षा देने को कहा है जो घटनास्थल का दौरा करना चाहते हैं। इससे पहले शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपितों के गैरमौजूदगी पर नाखुशी जाहिर की थी। इस दौरान उसने सभी सातों आरोपितों को सप्ताह में एक बार पेश होने के लिए कहा है। बता दें कि इस मामले में भोपाल से भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी आरोपितों में शामिल हैं।कोर्ट ने इस दौरान यह भी निर्देश दिया था कि बिना पर्याप्त कारण के पेशी से छूट नहीं दी जाएगी। कोर्ट में अभी मामले के गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले पर अगली सुनवाई 20 मई को होगी। इस मामले में पुरोहित और ठाकुर के अलावा मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय रहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी भी आरोपित हैं। ये सभी अभी जमानत पर हैं।पिछले वर्ष अक्टूबर में कोर्ट ने सातों आरोपितों के खिलाफ आतंकी गतिविधि, आपराधिक साजिश और हत्या एवं अन्य का आरोप तय किया था। आरोपित गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत सुनवाई का सामना कर रहे हैं। इनके खिलाफ यूएपीए की धारा 16 (आतंकी गतिविधि अंजाम देना) और 18 (आतंकी गतिविधि की साजिश रचना) के तहत आरोप लगाया गया है।आइपीसी के तहत सभी के खिलाफ धारा 120 (बी) (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 324 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाना) और 153 (ए) (दो धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाना) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के तहत भी आरोप लगाया गया है।गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के समीप हुए धमाके में छह लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हो गए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल बांधे गए विस्फोटक पदार्थ से इसे अंजाम दिया गया था।

 

 

 

 

 

नई दिल्ली। तमिलनाडु के ट्रिची से उड़ान भरकर सिंगापुर जाने वाली एक फ्लाइट की चेन्नई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई है। बताया जा रहा है कि कार्गो में धुआं दिखने के बाद फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिग का फैसला लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्लाइट में चिंगारी दिखने के बाद लैंडिंग करवाई गई। फ्लाइट का नंबर टीआर 567 है और इसकी सुबह 3.40 बजे इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई। हालांकि इस घटना में किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है।घटना के वक्त 161 यात्री और क्रू मेंबर्स एयरक्राफ्ट में सवार थे। आधिकारी जानकारी के अनुसार, सभी यात्रियों को बचा लिया गया है और चेन्नई एयरपोर्ट पर लैंडिंग करवाई गई है। उम्मीद है कि शाम तक फ्लाइट सिंगापुर के लिए उड़ान भरेगी। बता दें कि फ्लाइट में धुआं निकलने की जानकारी भारत की सीमा में ही मिल गई थी, जिसके बाद फ्लाइट को चेन्नई में उतारा गया और एयरपोर्ट पर अन्य सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए थे।हाल ही में रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर गो एयरवेज विमान G8 373 की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। दरअसल, पायलट की सतर्कता से फ्लाइट में सवार 180 यात्रियों की जान बच गई। बेंगलुरु से उड़ान भरने के बाद इस विमान को (Go Airways Flight To Bengaluru Patna Ranchi) पहले पटना और फिर रांची आना था। इस दौरान पायलट को विमान में तकनीकी खराबी का पता चला।

नई दिल्ली। तीन दिन बाद यह तय होगा कि अब तक के इतिहास में सबसे लंबे रहे चुनावी अभियान में विजयी कौन रहा, जनता ने किसके अभियान को सराहा और किसे नकारा। लेकिन इस पूरे अभियान की एक बड़ी खासियत यह भी रही कि पिछले कई चुनावी अभियानों से परे इस बार राजनीतिक दल गौण हो गए। चुनावी अभियान मुख्यतया व्यक्तिवादी हो गया। विपक्ष ने भी व्यक्ति को मुद्दा बनाया, पक्ष ने भी और जनता के दिलो दिमाग में भी व्यक्ति का चेहरा हावी रहा। एक मायने में 1971 के लंबे अरसे बाद ऐसे चुनाव की झलक दिखी, जहां सत्ताधारी दल के खिलाफ छोटा मोटा गठबंधन भी बना, लेकिन सामंजस्य की काली छाया से नहीं उबर पाया, जबकि राष्ट्रवाद और व्यक्ति का मुद्दा मुखर हो गया। हां, आरोप प्रत्यारोप, तीखे बयानों और कटाक्षों की बात हो तो यह चुनाव अभियान शायद सभी सीमाएं तोड़ गया।अप्रैल के दूसरे सप्ताह में जब चुनाव आयोग ने शंखनाद किया था उससे काफी पहले की राजनीतिक आहट तो यह थी कि यह गठबंधन बनाम गठबंधन का चुनाव होगा, लेकिन धीरे- धीरे और खासतौर से बालाकोट की घटना के बाद जिस तरह विपक्षी दलों में बिखराव शुरू हुआ, उससे स्पष्ट हो गया कि कमोबेश यह चुनाव व्यक्ति पर केंद्रित हो गया। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े हो गए।उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां गठबंधन का थोड़ा स्वरूप दिखा भी, वहां के नेताओं ने यह स्पष्ट कर ही दिया कि वह एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं। सपा और बसपा नेतृत्व की ओर से भी मोदी को ही निशाना बनाया गया। सबसे अलग-थलग होकर चुनाव लड़ी कांग्रेस और राहुल गांधी के निशाने पर भी मोदी रहे। अकेली रह गई आम आदमी पार्टी भी यह बोलने से नहीं बच पाई कि मोदी उसे स्वीकार नहीं। कहा जा सकता है कि ऐसे में विपक्ष शायद भाजपा की रणनीतिक फांस मे उलझ गया। दरअसल राजग का नेतृत्व कर रही भाजपा यही चाहती भी थी कि चुनावी अभियान का केंद्र बिंदु मोदी बनें। खुद भाजपा के अभियान में ‘मोदी है तो मुमकिन है’, ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ जैसे नारे ही गढ़े गए थे।भाजपा में यहां तक ख्याल रखा गया था कि घोषणापत्र के ऊपर कमल निशान के साथ केवल मोदी की फोटो लगाई गई, जबकि सामान्यतया ऐसे दस्तावेज पर पार्टी अध्यक्ष की फोटो भी होती है। अगर जमीनी अभियान की बात की जाए तो वहां भी केवल भाजपा ही नहीं राजग सहयोगी दलों के अधिकतर उम्मीदवारों के चुनावी संपर्क अभियान में मोदी ही रहे। यही कारण है कि बाद के चरणों में मोदी यह बोलते सुने गए कि जनता का हर वोट सीधे मोदी के खाते में आएगा। वहीं विपक्ष की ओर से मोदी विरोधी अभियान ने यह सुनिश्चित कर दिया कि चर्चा में मोदी रहें और कई जमीनी मुद्दों पर पानी फिर गया।

नई दिल्‍ली। टेक्नोलॉजी एवं डिजिटल डोमेन में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले एंटरप्रेन्योर अनुज सयाल ने 2013 में ‘एडीजी ऑनलाइन’ की नींव रखी। आज ये शीर्ष फार्च्‍यून 500 कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं, जिनमें ब्लू चिप कंपनियों के अलावा सरकारी संस्थान भी शामिल हैं। हाल ही में इन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ दीपोत्सव एवं कुंभ मेले के लिए डिजिटल कैंपेन चलाया। एडीजी ऑनलाइन के ग्रुप चेयरमैन अनुज सयाल कहते हैं कि अगर आप दिल से एंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं, तभी इस क्षेत्र में आएं। यहां शुरुआत में अनेक प्रकार की चुनौतियां आती हैं। उन असफलताओं से डरना नहीं, बल्कि सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि असफलता से अनुभव मिलता है और अनुभव से सफलता...।मेरा जन्म चंडीगढ़ में हुआ। वहीं पला-बढ़ा। बचपन से खेलों का शौक रहा है। क्रिकेट, बैडमिंटन के अलावा स्क्वैश खेलता रहा हूं। पंजाब यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद आइआइएम कलकत्ता से मैनेजमेंट किया। उसके बाद 1999 में इंटेल टेक्नोलॉजीज इंडिया के साथ टेरिटरी हेड (चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा एवं जम्मू-कश्मीर) के रूप में नौकरी की शुरुआत की। यहां करियर में अच्छी ग्रोथ मिली। दो साल के बाद मुझे प्रोन्नति देकर दिल्ली भेज दिया गया, जहां दक्षिण एशिया के मदरबोर्ड बिजनेस को संभालने की जिम्मेदारी मिली।
इंटेल में मिला एक्सपोजर:-इंटेल अमेरिका की एक बड़ी कंपनी थी। मैं खुशनसीब रहा कि करियर की शुरुआत इससे हुई। यहां मुझे काफी एक्सपोजर मिला। बड़ा और कुछ अलग हटकर सोचने का अवसर मिला। जब आप सर्वश्रेष्ठ ब्रांड, टेक्नोलॉजी एवं टीम के साथ काम करते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया भी काफी सरल हो जाती है।
सोशल मीडिया की ओर रुझान:-एमएनसी में काम करते हुए आप सीख पाते हैं कि कैसे बड़ा सोचा जाता है, बड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं, आइडिया दिए जाते हैं और फिर खुद का सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस देना होता है? अपने पेशेवर सफर में मैंने काफी कुछ सीखा है। 2007 में मेरा सोशल मीडिया की ओर रुझान हुआ। मैंने इंटेल के लिए सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी बनानी शुरू की। 2010 तक लोग मुझे सोशल मीडिया गुरु कहने लगे। तभी एहसास हुआ कि अब कुछ अपना शुरू करने का वक्त आ गया है, जिसके जरिये विभिन्न कंपनियों को सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी बनाने में मदद कर सकूं और फिर 2013 में शुरुआत हुई एडीजी ऑनलाइन की। इसे मैंने पत्नी के साथ मिलकर किया है।
चार जोन हैं जीवन में:-उद्यमिता में आना आसान नहीं था। यह एक यात्रा है, न कि पड़ाव। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि हमारे जीवन में चार प्रकार के जोन होते हैं-कंफर्ट जोन, फियर जोन, लर्निंग जोन एवं ग्रोथ जोन। नौकरी करते हुए हम कंफर्ट जोन में होते हैं, क्योंकि वहां सुरक्षित माहौल होता है। अच्छी सैलरी होती है। सब नियंत्रण में रहता है। फियर जोन में होने पर क्षमता होने के बावजूद आप सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। ऐसा परिजनों, करीबी रिश्तेदारों के प्रभाव या आत्मविश्वास की कमी के कारण भी होता है। लेकिन जैसे ही आप कंफर्ट जोन को विस्तार देते हैं, तो आप लर्निंग जोन में पहुंच जाते हैं। इससे नई चीजें, स्किल सीख पाते हैं। चुनौतियों का सामना करना और समस्याओं को सुलझाना आ जाता है। यहां आप सबसे ज्यादा सीखते हैं। ग्रोथ जोन में तब आते हैं, जब कुछ बड़ा सपना देखते हैं, अपने पेशेवर जीवन का उद्देश्य जान पाते हैं, कोई नया लक्ष्य बनाते हैं और फिर उसे हासिल करते हैं।
छह साल में एक भी छुट्टी नहीं:-एक दिलचस्प वाकया बताना चाहूंगा। एक बार इंटेल के शीर्ष पदाधिकारी ने मुझसे पूछा कि छुट्टियों में कहां जाता हूं? तब पहली बार एहसास हुआ कि मैंने छह साल में एक भी छुट्टी नहीं ली थी। वह एक क्षण था, जब मैंने तय किया कि कड़ी मेहनत के साथ खुद के लिए भी पूरा समय निकालूंगा। अब यह सुनिश्चित करता हूं कि परिवार के साथ छुट्टियों पर जाऊं। मेरे लिए सफलता का मतलब अच्छा स्वास्थ्य, पेशेवर जीवन और परिवार है। मैं मानता हूं कि अगर आपके पास संपत्ति है, लेकिन स्वास्थ्य नहीं, तो वह निरर्थक है। इसलिए मैं इन तीनों पर ध्यान देता हूं।

नई दिल्‍ली। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के गांव के उस बच्चे को अपने सफर के बारे में कुछ भी पता नहीं था, लेकिन पूरी तरह कर्म में विश्वास रखते हुए वे बढ़ते रहे। टेक्निकल पढ़ाई करने के बाद इंजीनियरिंग की कई नौकरियां करते हुए अंतत: अपने मन के काम टीचिंग में आए और करीब सवा पांच साल आइआइटी रुड़की के डायरेक्टर रहे। कर्मठता की राह पर चलते हुए आज वे नोएडा स्थित जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटी) के वाइस चांसलर हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रो. एस.सी. सक्सेना की। आज उन्हीं से जानते हैं उनके बचपन से अब तक के सफर के बारे में, जिससे युवाओं को भी तरक्की के कई संदेश मिलते हैं...
...हनुमान चालीसा पढ़ते हुए लगाते थे दौड़ :-मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक गांव में 22 मार्च, 1949 को हुआ था। शाहजहांपुर जिले में गंगा के किनारे के एक गांव नरौरा में। मेरे पिता पटवारी थे। दादाजी के जल्दी निधन के बाद उन्हें यह नौकरी मिली थी। पिताजी की पदोन्नति कानूनगो पद पर और फिर तहसीलदार पद पर हुई। जब वे कानूनगो थे, तो उनका स्थानांतरण होता रहता था। उनके साथ हम भी मूव करते रहते थे। मैंने पांचवीं तक की पढ़ाई गांव में रहकर की। स्कूल 5 किलोमीटर दूर था। पैदल जाना पड़ता था। बैठने के लिए चटाई लेकर जाते थे। रास्ते में एक तालाब पड़ता था। कहते थे कि वहां एक भूत रहता है। हम बच्चे वापसी में जब वहां पहुंचते थे, तो हनुमान चालीसा पढ़ते हुए वहीं से घर तक दौड़ लगाते थे। चप्पल हाथ में लेकर।
रैगिंग के चलते 15-20 दिन में ही लौट आए घर:-उसके बाद पांचवीं से लेकर बारहवीं तक मुरादाबाद में पढ़ाई की। उस समय मुझे इंजीनियरिंग के बारे में कुछ भी पता नहीं था। उस दौरान पिता बुलंदशहर में कानूनगो थे। एक दिन गांव में हमारे घर के बाहर कई पटवारी बैठे थे। उनमें से एक जागरूक पटवारी ने पिताजी से पूछा, बाबूजी आपका बेटा क्या कर रहा है? उन्होंने बताया कि अभी इंटर किया है और आगे बीएससी करेगा। फिर टीचर वगैरह बन जाएगा। उसी ने कहा कि आजकल इंजीनियरिंग का बड़ा क्रेज है, क्यों नहीं इसे इंजीनियरिंग ही करा देते। पिताजी ने कहा, मुझे तो कुछ नहीं पता, तुम देख लो। पटवारी साहब ने ही तीन जगह के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज का फॉर्म भरवा दिया। गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से बुलावा आ गया। वहां दाखिला भी मिल गया। पर वहां रैगिंग बहुत होती थी। इस कारण मैं 15-20 दिन बाद ही वहां से लौट आया।
यूं मिला बीटेक में प्रवेश:-पिताजी ने काफी समझाया और फिर वहां छोड़ गए। उसी दौरान इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज (अब एनआइटी) से भी बुलावा आ गया। मैं पिताजी के साथ वहां गया। वहां बताया गया कि प्रिंसिपल से मिल लो। अगर वह जगह होने के बारे में लिखकर दे देंगे, तो दाखिला हो जाएगा। हम इक्के से संगम के किनारे रहने वाले प्रिंसिपल साहब के घर पहुंचे। वहां पिताजी ने उनसे बात की। उन्होंने लिखकर दे दिया कि जिसमें सीट खाली हो, उसमें प्रवेश दे दिया जाए। फीस काउंटर पर क्लर्क ने बताया कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में जगह है। अंतत: उसी में बीटेक में प्रवेश ले लिया। वहां चार साल पढ़ाई की। सेशन 6 माह लेट गया, क्योंकि वहां हड़ताल बहुत होती थी। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के लोगों को तब नौकरी जल्दी नहीं मिलती थी। हालांकि मुझे जेई/ओवरसियर की नौकरी मिल गई।
इलाहाबाद से रुड़की:-मैंने नौकरी तो कर ली थी, पर मुझे इससे संतोष नहीं था। मुझ से लोग कहते थे कि जहां से शुरू करोगे, उतना ही ऊपर जाओगे। यह सोच कर मैंने नौकरी छोड़ दी और रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक के लिए चल पड़े। पंजाब मेल प्रतापगढ़ से मिलती थी। मेरे पास एक टिन का बक्सा और बेडरोल था। रुड़की छोटी जगह थी। रात दो-ढाई बजे वहां ट्रेन पहुंची, तो वहां स्टेशन पर लालटेन जल रही थी। लोगों ने रात में बाहर जाने से मना किया। सुबह हॉस्टल पहुंचे। उसी बीच इलाहाबाद में भी एमटेक शुरू हो गया था, तो वहां चले गए। लेकिन फिर वापस रुड़की आ गए।
इंजीनियरिंग की नौकरियों में नहीं रमा मन:-एमटेक पूरा करने के बाद मुझे चार नौकरियां मिलीं। पहली नौकरी दुर्गापुर स्टील प्‍लांट में मिली। वहां एमटेक को काफी पढ़ा-लिखा माना जाता था। हम पीजी ट्रेनी थी। वहां देशभर के लोग मिलते थे। पर वहां भी मन नहीं लगा। इसके बाद भेल, हरिद्वार में नौकरी मिली। इसके बाद यूपी इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में एई पद पर चयन हो गया। जब लखनऊ के सरोजनी नगर में ट्रेनिंग के लिए पहुंचे तो वहां अपने से कमजोर लोगों को बड़े पद पर देखा। फिर उसे भी छोड़ दिया।
टीचिंग बना टर्निंग प्वाइंट:-लखनऊ के बाद सीधे पहुंच गए रुड़की। वहां अपने जानकार एचओडी से मिले। उनसे आग्रह किया कि मुझे किसी भी तरह पढ़ाने के लिए रख लीजिए। उन्होंने कहा कि अच्छा एक एप्लीकेशन लिख दो। डायरेक्टर से मिलकर बात करता हूं। आखिर मुझे वहां एडहॉक रख लिया गया। मैंने 1976 में पीएचडी कर ली। मैंने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। इसके आधार पर प्रमोशन मिल गया, जिससे मैं वहां पहले से पढ़ा रहे अध्यापकों से काफी आगे हो गया। यह मेरी टीचिंग लाइफ का टर्निंग प्वाइंट था। उसी दौरान मैं रीडर हो गया। हालांकि मैंने खुद को टीचिंग तक ही सीमित नहीं रखा। मैं प्रशासनिक कार्य भी संभालता रहा। इस दौरान वार्डन, डीन आदि भी रहा। 1983 में जब इराक में युद्ध अपने चरम पर था, तो मैं वहां के मिलिट्री कॉलेज में भी पढ़ाने के लिए गया। बगदाद से तीन साल बाद लौटकर फिर रुड़की आया। तब भी मैं रीडर ही था। इसके बाद मैंने आइआइटी
रुडकी से ली वॉलंटरी रिटायरमेंट:-बॉम्बे में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया। वहां मिलने के लिए बुलाया गया। उसी दौरान मंडल आंदोलन शुरू हो गया था। जगह-जगह आगजनी हो रही थी। ट्रेने रद हो रही थीं। मैं स्टेशन आकर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। उस समय दिमाग में आया कि मैं यहां इतने समय से हूं। सबको जानता हूं। सब मुझे जानते हैं। वहां जाने पर फिर जीरो से शुरुआत करनी होगी। यह सोचकर मैंने जाने का इरादा छोड़ दिया। 1994 में मुझे एआइसीटीई में सलाहकार बनने का प्रस्ताव मिला, जिसे मैंने स्वीकार कर लिया। पर मेरा परिवार रुड़की में रहा। मैं वहां से सोमवार को सुबह आता और फिर शुक्रवार शाम को जाता। इस बीच मेरी अनुपस्थिति में बेटी काफी बीमार रहने लगी। इसके बाद मैं दो साल का अवकाश लेकर पंजाब के थॉपर कॉलेज में डायरेक्टर बनकर चला गया। फिर मैंने रुड़की से वालंटरी रिटायरमेंट ले लिया।चार साल बाद वहां डायरेक्टर की जगह खाली हुई। मुझ से आवेदन के लिए कहा गया। मैंने किया और 2006 में मुझे डायरेक्टर चुन लिया गया। इस पद पर मैं वहां सवा पांच साल रहा। इसी बीच इसे आइआइटी का दर्जा भी मिल गया। तब वहां चेयरमैन जयप्रकाश गौड़ साहब थे। उनका भी गांव गंगा के इस छोर पर था। उनसे मेरी गहरी छनती थी। वह मुझे पहले से ही काफी सम्मान देते थे। रुड़की से रिटायर होने के बाद उन्होंने मुझे जेपी ग्रुप के संस्थानों को निदेशक और वीसी के रूप में संभालने का प्रस्ताव दिया। मैंने 2011 में इसे स्वीकार कर लिया और तब से यहां के सभी संस्थानों का मार्गदर्शन कर रहा हूं।

 

 

 

 

 

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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