Editor

Editor

नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। अहमद ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 50 साल तक शासन वाले बयान को लेकर तंज कसा है। उन्होंने सोमवार को कहा कि वे (भाजपा) 50 सालों तक देश की सत्ता पर काबिज रहना चाहते हैं, लेकिन अब उन्हें डर है कि अगर वे हारे तो 200 साल तक वापसी नहीं कर पाएंगे।अहमद ने दावा किया कि जो लोग पहले भाजपा के 50 वर्षों तक सत्ता में बने रहने का दम भरते थे वे अब यह कहते घूम रहे हैं कि अगर वे इस बार हार गए तो 200 साल तक सत्ता में वापस नहीं आएंगे।उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'विपक्षी दलों का साथ आने का एक ही मकसद है कि भारत के संविधान की रक्षा की जाए। जिन लोगों ने संविधान को कमजोर किया है और इसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की है, वे विपक्षी एकजुटता से बहुत ज्यादा घबराए हुए हैं।विपक्षी एकजुटता के कारण उनका हाव-भाव बदल गया है। उनके अंदर डर साफ दिख रहा है। वे पहले कहा करते थे कि भाजपा 50 वर्षों तक सत्ता में रहेगी। वे अब कह रहे हैं कि अगर इस बार हार गए तो अगले 200 वर्षों तक सत्ता में नहीं आ सकेंगे।'
.. जब शाह बोले, 50 साल तक शासन करेगी भाजपा:-बतादें कि हाल ही में महाराष्ट्र के लातूर में अमित शाह ने शक्ति केंद्र प्रमुख सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा चुनावों की तुलना पानीपत की तीसरी लड़ाई से की थी। शाह ने कहा था कि उस लड़ाई के बाद देश 200 साल तक गुलाम रहा था। अगर हम यह चुनाव जीतते हैं तो हमारी विचारधारा अगले 50 साल तक शासन करेगी।

मुरादाबाद। दबंग छवि के नेता विजय यादव एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। पीतलनगरी में बसपा अध्यक्ष मायावती के जन्म दिवस पर भाजपाइयों को दौडा-दौड़ाकर पीटने की धमकी देकर सुर्खियों में आए ठाकुरद्वारा से बसपा के पूर्व विधायक विजय यादव ने भाजपा विधायक साधना सिंह का सिर कलम करने पर 50 लाख का ईनाम देने की घोषणा करके नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।ठाकुरद्वारा में पत्रकारवार्ता कर आज उन्होंने बसपा मुखिया मायावती के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने वाली भाजपा विधायक साधना सिंह का सिर कलम कर लाने वाले को पचास लाख का ईनाम देने की घोषणा की। लोकसभा चुनाव से पहले ही विजय यादव के लगातार विवादित बयान से राजनीतिक हलकों में खलबली मची है।विजय यादव ने अपने आवास, चुंगी काशीपुर में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि भाजपा विधायक साधना सिंह ने बसपा अध्यक्ष के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी पर समूचे देश का अपमान किया है।उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक 48 घंटे में बहन जी और देश की महिलाओं से माफी मांगे, वरना उनके खिलाफ खड़ा कदम उठाया जाएगा। उनका सिर कलम कर लाने वाले को पचास लाख रुपये का ईनाम देने की घोषणा की। पत्रकारों के पूछने पर ईनाम की रकम कहां से आएगी तो कहा कि समर्थकों से चंदा कर दी जाएगी। गौरतलब है कि 15 जनवरी को यहां के अंबेडकर पार्क में मायावती के जन्मदिन कार्यक्रम में विजय यादव ने भाजपाइयों को आगामी चुनाव में जनता द्वारा दौड़ा-दौड़कर पीटने की बात कही थी।
मायावती पर विवादित टिप्पणी के बाद बीजेपी विधायक साधना सिंह ने जताया खेद;-भारतीय जनता पार्टी की विधायक साधना सिंह ने कथित तौर पर बसपा प्रमुख मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। जिसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने बसपा प्रमुख पर की गई टिप्पणी पर स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग इस संबंध में साधना सिंह को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगेगा। मुगलसराय क्षेत्र से भाजपा विधायक साधना सिंह ने चंदौली जिले के करणपुरा गांव में शनिवार को किसान कुंभ कार्यक्रम में मायावती का जिक्र करते काफी अशोभनीय टिप्पणी की थी। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि ऐसी अभद्र टिप्पणी किसी नेता को शोभा नहीं देती और निंदनीय है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया और साधना सिंह को नोटिस भेजा जाएगा।
साधना सिंह ने माफी मांगी:-बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर अमर्यादित टिप्पणी करने के बाद भाजपा की महिला विधायक साधना सिंह ने माफी मांग ली है। साधना सिंह की ओर से जारी किए गए माफीनामे में लिखा कि मेरा मकसद किसी को अपमान करने का नहीं था। मैं बस 2 जून, 1995 को गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती की भाजपा नेताओं द्वारा की गई मदद को याद दिलाना चाहती थी। साधना सिंह ने कहा कि मेरी मंशा एक दम किसी को अपमानित नहीं करने की थी। अगर किसी को मेरी बातों से कष्ट पहुंचा है तो मैं खेद प्रकट करती हूं।

नई दिल्ली। दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फोन पर जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बाबत दिल्ली पुलिस को जानकारी भी दी गई है। इससे जहां दिल्ली पुलिस हलकान है, वहीं AAP नेताओं-कार्यकर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है।समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के पर्सनल सिक्युरिटी ऑफिसर (Personal Security Officer) ने पुलिस को सूचना दी है कि एक फोन आया था, जिसमें सीएम पर हमला करने की धमकी दी थी।
विकासपुरी से दी गई धमकी:-केजरीवाल के पीएसओ के मुताबिक, धमकी भरा यह फोन दिल्ली के विकास पुरी से आया था। इसमें उस अंजान शख्स ने फोन पर कहा कि सीएम केजरीवाल पर हमला हो सकता है। वहीं, बताया जा रहा है कि इस बाबत कोई जानकारी हाथ नहीं लगी है, क्योंकि वहां कोई कॉलर आइडी नहीं लगा है। बता दें कि 9 जनवरी को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी का अपहरण करने की धमकी भरा ईमेल मिला था। शिकायत पर दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ईमेल भेजने वाले को रायबरेली से गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित छात्र है और दिल्ली में रहकर सिविल सेवा समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह इलाज से असंतुष्ट था, इसलिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने को उसने यह ईमेल की थी। आरोपित के पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया है, जिससे उसने सीएम को ईमेल भेजी थी।
अरविंद केजरीवाल पर कभी थप्पड़, कभी स्याही तो कभी फेंके गए अंडे:-दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर हमले का यह पहला मामला नहीं था, इससे पहले भी कई बार उन पर इस तरह के हमले हो चुके हैं। अप्रैल, 2016 में दिल्ली सचिवालय में ही पत्रकार वार्ता के दौरान उन पर जूता फेंका गया था। जूता फेंकने वाला आम आदमी सेना का कार्यकर्ता वेदप्रकाश शर्मा था। जूते के अलावा केजरीवाल की ओर सीडी भी उछाली गई।
लुधियाना में गाड़ी पर हमला:-फरवरी, 2016 में ही पंजाब के लुधियाना में अरविंद केजरीवाल की कार पर कुछ लोगों ने लोहे की रॉड और डंडों से हमला किया था, जिससे कार का सामने वाला शीशा टूट गया था।
महिला ने फेंकी थी स्याही फेंकी:-जनवरी, 2016 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ऑड ईवन फॉर्मूले के 15 दिवसीय ट्रायल की सफलता का जश्न मना रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया था। मुख्यमंत्री जब मंच से सभा को संबोधि‍त कर रहे थे, तभी एक महिला ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन पर स्याही फेंकी थी।इससे पहले 27 दिसंबर 2014 को दिल्ली में रैली के दौरान एक लड़के ने केजरीवाल पर पत्थर मारा था, यह अलग बात है कि उन्हें कोई चोट नहीं आई थी। फिर 26 दिसंबर 2014 को दिल्ली में रैली के दौरान उन पर अंडे फेंके गए थे।इससे भी पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली में रोड शो के दौरान केजरीवाल को एक ऑटो ड्राइवर ने थप्पड़ मारा था। केजरीवाल को थप्पड़ मारने वाला व्यक्ति अपने हाथ में एक माला लिए हुए था। उसने एक जीप पर सवार केजरीवाल को पहले माला पहनाई फिर उसके बाद उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

लखनऊ। सहायक शिक्षक के लिए करीब 69000 पद की भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रोक लगा दी है। फिलहाल इसका परिणाम 28 जनवरी तक नहीं घोषित किया जा सकेगा।इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार की दूसरी सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम पर 28 जनवरी तक रोक लगा दी है। 6 जनवरी 2019 को 69 हजार पदों के लिए हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम 22 जनवरी को घोषित किया जाना था। उत्तर प्रदेश में सहायक शिक्षकों के 69 हजार पदों पर भर्ती की परीक्षा के क्वालिफाइंग मार्क्स को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष चुनौती दी गई थी।सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम में कट ऑफ को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इससे पहले कोर्ट ने आज तक परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई थी। आज भी करीब दो घंटे चली बहस के बाद कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने के दिए आदेश। अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तिथि तय की है। बहस के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि अध्यापक का पद महत्तवपूर्ण है, लिहाजा मेरिट से हम समझौता नहीं कर सकते हैं।गौरतलब है कि सामान्य वर्ग में 65 और आरिक्षत वर्ग में 60 फीसदी अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही इस परीक्षा में क्वालिफाई मानें जाएंगे जो शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह कटऑफ 2018 की शिक्षक भर्ती के मुकाबले 20 फीसदी अधिक है। 2018 की शिक्षक भर्ती परीक्षा में 40 और 45 फीसदी कटऑफ अंक रखे गए थे।इससे पहले शिक्षामित्रों का कहना है कि जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जब उनका समायोजन रद्द किया तो यह भी कहा था कि आगामी दो भर्तियों में उनको वेटेज अंक और उम्र में छूट दी जाएगी। इसमें से 68500 पदों की एक भर्ती 2018 में हो चुकी है और 69 हजार पदों की दूसरी परीक्षा हाल ही में 6 जनवरी को हुई है। परीक्षा से पहले किसी तरह का कटऑफ तय नहीं किया गया था।
कोर्ट बेहद सख्त-कहा अभ्यर्थियों का ख्याल न होता तो निरस्त कर देते भर्ती:-हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 18 जनवरी को 69 हजार सहायक शिक्षकों के भर्ती परीक्षा के संबंध में अधिकारियों के रवैये पर कई बार सख्ता टिप्पणियां की। कोर्ट ने कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का ख्याल न होता तो पूरी परीक्षा ही निरस्त कर देते। कोर्ट ने हैरानी जताई कि समझ नहीं आता कि राज्य सरकार के अधिकारी भर्ती प्रक्रिया पूरी कराना भी चाहते हैं अथवा नहीं। दरअसल, कोर्ट ने तय सिद्धांतों को अनदेखा कर छह जनवरी को लिखित परीक्षा होने के बाद नियमों में परिवर्तन कर उत्तीर्ण प्रतिशत तय किये जाने के विधिक औचित्य पर यह टिप्पणी की। साथ ही कोर्ट ने परीक्षा परिणाम पर गुरुवार को यथास्थिति बरकरार रखने संबधित आपने आदेश को 21 जनवरी तक बढ़ा दी थी। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान की बेंच ने मो. रिजवान व अन्य समेत दर्जनों अभ्यर्थियों की करीब एक दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया।याचियों ने राज्य सरकार की ओर से सात जनवरी को जारी उत्तीर्ण प्रतिशत तय करने संबधी नियम को चुनौती दी गई है। नए नियम के तहत सरकार ने 65 प्रतिशत सामान्य वर्ग के और 60 प्रतिशत आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए उत्तीर्ण प्रतिशत घोषित किया है। याचिकाओं में कहा गया है कि कि एक दिसंबर, 2018 को भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में कोई उत्तीर्ण प्रतिशत नहीं तय किया गया था। छह जनवरी को लिखित परीक्षा हो गई, जिसके बाद सरकार ने नियमों में परिवर्तन करते हुए उत्तीर्ण प्रतिशत तय कर दिए, जबकि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों मे परिवर्तन नहीं किया जा सकता।राज्य सरकार के वकील सुनवाई के दौरान इस तर्क का जवाब नहीं दे सके कि पूर्व में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण प्रतिशत 45 व 40 प्रतिशत तय किया गया था तो इस बार लिखित परीक्षा के बाद सात जनवरी को अचानक 65 व 60 प्रतिशत क्यों तय कर दिया गया।कोर्ट ने छह मार्च, 2018 को टीईटी 2017 परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के संबंध में दिये आदेश का अब तक अनुपालन न किये जाने पर भी नाराजगी जताई। उल्लेखनीय है कि उक्त आदेश पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने रोक लगा दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खंडपीठ के आदेश को इस आधार पर खारिज कर दिया कि एकल पीठ के समक्ष याचिकाएं दाखिल करने वाले सभी याचियों को सरकार की विशेष अपील में पक्षकार नहीं बनाया गया था। शीर्ष अदालत ने दो सदस्यीय खंडपीठ पीठ को मामले को पुन: सुनने को कहा था लेकिन, सरकार की ओर से दिसंबर 2018 तक याचियों को पक्षकार नहीं बनाया गया और न ही छह मार्च, 2018 के आदेश का अनुपालन किया गया, जबकि टीईटी 2017 की परीक्षा देने वाले शिक्षामित्रों के लिए सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 आखिरी मौका है। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें मात्र दो परीक्षाओं में 25 नंबरों का वेटेज मिलना है।
पहले परीक्षा, अब परिणाम पर असमंजस:-अजीब संयोग है परिषदीय स्कूलों की 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती की पहले लिखित परीक्षा और अब परिणाम हाईकोर्ट के आदेश के अधीन हो गया है। इम्तिहान के ठीक एक दिन पहले ही यह तय हो सका कि परीक्षा तय तारीख पर होगी। परीक्षा परिणाम के एक दिन पहले यह तय होगा कि रिजल्ट में उत्तीर्ण प्रतिशत क्या होगा। बेसिक शिक्षा परिषद की 68500 और 69 हजार शिक्षक भर्ती का लगभग हर निर्णय कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। परीक्षा के पहले यूपी टीईटी 2017 के 16 प्रश्नों का जवाब का मामला सबसे पहले कोर्ट में पहुंचा।सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने 68500 भर्ती की लिखित परीक्षा के पहले कटऑफ अंक घटाकर 33 व 30 प्रतिशत कर दिए थे। उसे भी कोर्ट में चुनौती दी गई, कोर्ट ने पांच अगस्त 2017 को निर्णय दिया कि परिणाम शासनादेश में तय 45 व 40 प्रतिशत पर जारी होगा। रिजल्ट आया तो मूल्यांकन में गड़बड़ी को लेकर याचिका दाखिल हुई। कोर्ट की टिप्पणी के बाद ही उच्च स्तरीय जांच और पुनर्मूल्यांकन तक के निर्णय हुए। भर्ती की सीबीआइ जांच का प्रकरण फिलहाल ठंडे बस्ते में है।अब 69 हजार भर्ती में परीक्षा के पहले टीईटी 2018 के 15 प्रश्नों के जवाब को लेकर हिमांशु कुमार व अन्य ने याचिका दाखिल की। इस मामले में पांच जनवरी को फैसला आया। सात जनवरी को शासन ने उत्तीर्ण प्रतिशत तय किया। अब उसे लखनऊ खंडपीठ मोहम्मद रिजवान व अन्य ने चुनौती दी है। इस पर निर्णय 21 जनवरी को आना है, जबकि 22 जनवरी को परीक्षा परिणाम घोषित करने की तारीख पहले से तय है। कोर्ट के फैसले से ही तय होगा कि रिजल्ट का उत्तीर्ण प्रतिशत आखिर क्या होगा।

नई दिल्ली। भारतीय संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भारत में अपनी फाइबर-टू-होम सर्विस Bharat Fiber लॉन्च कर दी है। यह सर्विस यूजर्स के डाटा की जरुरत को पूरा करेगी। इसके तहत यूजर्स को 35 जीबी डाटा प्रतिदिन दिया जा रहा है। Fiber to Home तकनीक को अपग्रेड कर दिया गया है और हम Bharat Fiber को लॉन्च कर रहे हैं। देखा जाए तो यूजर्स को इस सर्विस के तहत 1.1 रुपये में 1 जीबी डाटा दिया जा रहा है। BSNL फाइबर-टू-होम सर्विस को Reliance Jio के गीगाफाइबर की टक्कर में पेश किया गया है। यह प्लान तब पेश किया गया है जब Jio अपनी गीगाफाइबर सर्विस को देश के 1400 शहरों में टेस्ट कर रहा है।
BSNL फाइबर-टू-होम सर्विस को यहां से करें बुक:इस सर्विस को बुक करने के लिए यूजर्स कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर जा सकते हैं। इस सर्विस के तहत यूजर्स को 256 Kbps से 100 Mbps तक की हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड स्पीड दी जाएगी। जो भी यूजर इस सर्विस को लेते हैं उन्हें CPE दिया जाएगा जिसे Home Optical Network Termination (HONT) कहा जाता है। इसमें 4X100 Mbps इथरनेट पोर्ट्स समेत दो नॉर्मल टेलिफोटो पोर्ट्स हैं। इस नई सर्विस को लेकर CFA के डायरेक्टर विवेक बंसल ने कहा है कि इस तकनीक के जरिए हम यूजर्स को सुपर फास्ट सर्विस देना चाहते हैं।
जानें Jio GigaFiber के बारे में:इस सर्विस को कंपनी की 41वीं एनुअल जनरल मीटिंग में पेश किया गया था। यह कंपनी की पहली Fibre-to-the-Home (FTTH) ब्रॉडबैंड सर्विस है। कंपनी का लक्ष्य इस सर्विस को 50 मिलियन घरों तक पहुंचाना है। इस सेटअप में Jio GigaFiber router और Jio GigaTV सेट-टॉप बॉक्स दिया जाएगा। GigaFiber router को एक साथ कई डिवाइसेज में इंटरनेट चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। वहीं, Jio GigaTV को टेलिविजन सर्विस के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। Jio के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि Jio GigaFiber सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड फिक्सड-लाइन ब्रॉडबैंड रोलआउट होगा। इशे 1100 शहरों में लगातार रोलआउट किया जाएगा।

भोपाल। यहां मध्यप्रदेश स्थित कान्हा नेशनल पार्क में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। पार्क में एक बाघ ने बाघिन को अपना शिकार बनाया है। कान्हा पार्क के डायरेक्टर के. कृष्णमूर्ति ने कहा, 'हालांकि जानवर एक-दूसरे का शिकार करते रहते हैं लेकिन बाघ द्वारा बाघिन को शिकार बनाए जाने का यह अनोखा मामला है।' शनिवार को पार्क की पैट्रोल टीम को बाघिन के अवशेष मिले। कृष्णमूर्ति ने कहा, 'यह बहुत अजीब बात है कि बाघिन का शरीर पूरी तरह चबा लिया गया है, जबकि यहां शिकार की भी कोई कमी नहीं है।'
पंजाब में शेर-शेरनी ने युवक को मार डाला:-उधर, मोहाली के मशहूर छतबीड़ चिडिय़ाघर की लॉयन सफारी में एशियन शेर-शेरनी की जोड़ी ने एक युवक को नोंच नोंच कर मार डाला। युवक की पहचान नहीं हो सकी है। युवक लाॅयन सफारी में कैसे पहुंचा यह भी मालूम नहीं हो सका है, लेकिन समझा जाता है कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्‍त था और रेलिंग फांद कर शेरों के बाड़े में कूद गया था। इस घटना से चिडि़याघर और इसके आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

 

नई दिल्ली। ‘जरा सी देर को रुकता तो है सफर लेकिन, किसी के जाने से कब जिंदगी ठहरती है।' ये पंक्तियां जिंदगी की एक कड़वी सच्चाई हैं और इसका सामना देर-सबेर हम सबको करना पड़ता है, लेकिन दिल्ली की कृतिका सिंह ने सिर्फ 19 साल की उम्र में इन पंक्तियों को हकीकत में जिया है। प्यारे पिता लाल सिंह को 48 घंटे पहले खोने वाली कृतिका को ‘The show must go on’ का फलसफा याद आया और वह दिल्ली में मंडी हाउस के श्रीराम सेंटर में नाटक ‘खबसूरत बहू’ में दी गई ‘चाची’ की भूमिका को निभाने के लिए मंच पर उतर गईं। नाटक का मंचन समाप्त हुआ तो तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कृतिका के चेहरे पर उदास मुस्कान थी, तो आंखों में पिता की याद में आंसू मोतियों की तरह चमक रहे थे और कुछ आंसू गालों पर लुढ़क आए थे।थिएटर की मझी हुई कलाकार ने ऑडिटोरियम में साथी कलाकारों और दर्शकों को यह अहसास तक नहीं होने दिया कि उसने अपने सबसे करीबी और जन्मदाता पिता को खोया है। नाटक खत्‍म होने के बाद निर्देशक सुमन कुमार ने यह जानकारी दर्शकों से साझा की। दरअसल, 16-18 जनवरी तक दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्री राम सेंटर सभागार में आयोजित पांचवां रंगशीर्ष जयदेव नाट्य उत्सव मनाया गया था, इसी दौरान का यह वाकया है।
याद आया ‘द शो मस्ट गो ऑन’का मंत्र:-दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले आत्मा राम सनातन धर्म महाविद्यालय में बी कॉम (प्रोग्राम) सेकेंड ईयर की छात्रा कृतिका कहती हैं, ‘फैसला थोड़ा मुश्किल था, लेकिन ‘द शो मस्ट गो ऑन’ मंत्र याद आया कि थिएटर (रंगमंच) भी एक जिंदगी है और इस दुनिया में कुछ भी ठहरता-थमता नहीं है। हमारी जिंदगी कभी हंसती-गाती तो कभी चुपचाप चलती रहती है और इस दौरान थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव भी आता रहता है। इन पंक्तियों ने मुझे बहुत हौसला दिया।’
दर्शक बजा रहे थे तालियां, कृतिका की आंखों में थे आंसू:-17 जनवरी, 2019 की शाम 8:30 बजे दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर सभागार में जब नाटक खत्म हुआ तो इसके निर्देशक व वरिष्ठ रंगकर्मी ने कृतिका के साथ हुए इस हादसे की जानकारी दी। ऑडिटोरियम में मौजूद हर दर्शकों कृतिका की हिम्मत की दाद देते हुए उसके लिए तालिया बजा रहा था। इस पर कृतिका कहती हैं, ‘पूरे ऑडिटोरियम में तालियां बज रही थीं, लेकिन न चाहते हुए मेरी आंखों में आंसू आ गए। ...लेकिन मैंने झट से आंसू पोछे और मंच पर दर्शकों के सामने आ गई।’
मुश्किल था फैसला पर संभाल लिया मां ने:-ऐसे विपरीत हालात पर भावुक होकर कृतिका की मां संगीता सिंह कहती हैं,‘कभी ऐसा सोचा ही नहीं था कि ऐसा लम्हा भी जिंदगी में आएगा। 15 जनवरी की रात को मैंने अपने पति को खोया था, उस वक्त लग रहा था मेरा सबकुछ लुट गया है। वह रात मेरे लिए जिंदगी की सबसे भारी और मुश्किल रात थी। एक अंधेरा उस रात का था और दूसरा अंधेरा मेरी जिंदगी में हो गया था।’ कृतिका के ऐसे विपरीत हालात में नाटक में भूमिका अदा करने पर मां संगीता बताती हैं, ‘मैंने अपनी बेटी को इस नाटक को तैयार करते देखा था। वह हर समय ‘खूबसूरत बहू’ नाटक में अपने ‘चाची’ के चुनौती भरे किरदार के बारे में बात करती थी। 16 जनवरी को इस बारे में कृतिका ने कोई बात नहीं की, फिर हिम्मत जुटाकर 17 जनवरी को मुझसे गुजारिश की तो मैंने खुद को संभाला और इजाजत दी। कृतिका सही मायने में हिम्मती है। उसने इस मुश्किल हालात में मुझे और छोटी बहन को तो संभाला ही, साथ ही नाटक का मंचन भी किया।’
कुछ तो लोग कहेंगे:-मां संगीता की मानें तो कृतिका को मंच पर उतरने के लिए हां कहना मुश्किल भरा फैसला था। एक तरफ पिता की आग की चिता भी ठंडी नहीं हुई थी और बेटी नाटक का मंचन करने जा रही थी। संगीता बताती हैं, ‘परिवार का कोई सदस्य मानसिक रूप से तैयार नहीं था। पहले तो मैंने कृतिका को साफ मना कर दिया कि लोग क्या कहेंगे? फिर ख्याल आया जिस रोल के लिए मेरी बेटी ने महीनों मेहनत की और सपने देखें, ऐसे में कृतिका के मन को पढ़ते हुए हां कह दिया। उस समय एक और ख्याल मन में आया था कि जो घट गया उसे बदल तो नहीं सकते हैं, लेकिन उस शख्स को कुछ समर्पित तो कर ही सकते हैं जो अपनी बेटी को बेइंतेहा प्यार-दुलार करता था।’
पिता को समर्पित है मेरी नाटक में निभाई गई भूमिका:9वीं क्लास से थिएटर कर रहीं कृतिका कहती हैं, ‘पिता की मौत के बाद 16-17 जनवरी दोनों दिन मेरा, मेरी छोटी बहन और मम्मी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के लोग जब भी एक-दूसरे से बात करते तो पिता का जिक्र कर रो पड़ते। मुझे ख्याल आया कि जब भी मैं नाटक की रिहर्सल करके लौटती तो पिता यही पूछते ‘मैं तुम्हारा नाटक जरूर देखने आऊंगा...देखता हूं तुम क्या तीर मारती हो।’ पिता के नहीं होने का एक तीर परिवार के हर सदस्य के सीने में धंसा था और उस दर्द से हम लोग कराह रहे थे। कृतिका कहती हैं, ‘मैंने तय किया मैं पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए नाटक करूंगी और ऐसा ही हुआ।‘
दर्शकों के बीच खड़े होकर तालियां बजा रहे थे पिता:-पिता का जिक्र करते हुए कृतिका भावुक हो जाती हैं। बताती हैं, ‘पिता के साथ मेरा रिश्ता दोस्त के जैसा था। उन्होंने खुद वादा किया था वह नाटक देखने ऑडिटोरियम आएंगे। नाटक खत्म होने के बाद जब लोग तालियां बजा रहे थे तो मुझे एक बारगी लगा कि मेरे पिता भी इन्हीं दर्शकों में शामिल हैं। कुछ देर में मेरी आंखों में इतने आंसू आ गए कि वह मेरे आंसुओं में तैरते नजर आए और फिर कुछ लम्हों बाद ओझल हो गए।’वरिष्ठ रंगकर्मी और खूबरसूरत बहू नाटक के निर्देशक सुमन कुमार ने बताया कि हम सबकी जिंदगी में ऐसे हालात आते हैं, जब हम दोराहे पर खड़े होते हैं और ऐसे में मुश्किल भरा फैसला लेना होता है। कृतिका की इस बात के लिए तारीफ करनी होगी कि उसने ऐसी मुश्किल घड़ी में न केवल पूरे परिवार को संभाला, बल्कि खुद को नाटक करने के लिए तैयार कर पायी। पिता की इच्छा पूरी करने के साथ अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी निभाई। नाटक यही सिखाता है कि भावना में बहो नहीं, बल्कि भावनाओं पर काबू रखो। वहीं, डॉ. ज्ञानतोष कुमार झा ( प्राचार्य, आत्म राम सनातन धर्म, कॉलेज) के मुताबिक, जब छात्रा कृतिका के पिता की मौत की जानकारी मिली तो हमें दोहरा झटका लगा। नाटक मंचन का संकट था, बावजूद इसके इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी हिम्मत जुटाकर इस छात्रा ने सच्चे रंगकर्मी का धर्म निभाया है। रंगमंच इसी का नाम है, जहां कुछ भी हो जाए हमें ठहरना नहीं आगे बढ़ते जाना है।आपको बता दें कि कृतिका के पिता रेलवे में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर थे। उनका 15 जनवरी को आकस्मिक निधन हो गया था।

नैनीताल। कुमाऊं में शहर और गांवों को जोड़ने वाले कई पुल अंतिम सांस गिन रहे हैं। बावजूद इसके इन पुलों पर आवागमन जारी है। हर दिन इन पर से स्कूली बच्चों के साथ ही हजारों की तादाद में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। जानलेवा हो चुके इन पुलों पर सफर रोजना खतरनाक हो रहा है। पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, चम्पावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले में कई ऐसे पुल हैं जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। जरूरत है इनका नए सिरे से मरम्मत कराने की।
हर दिन करीब दो सौ बच्चे करते हैं इस पुल पर जानलेवा सफर
पिथौरागढ़ : नाचनी के पास नामिक ग्लेशियर क्षेत्र से निकलने वाली रामगंगा नदी बहती है। रामगंगा नदी यहां पर बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की सीमा है। बागेश्वर के चार गांवों के बच्चे नर्सरी से लेकर इंटर तक की पढ़ाई के लिए रामगंगा नदी के दूसरी तरफ नाचनी आते हैं। 11 जुलाई को बादल फटने से रामगंगा नदी में बना विशाल झूला पुल बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों की आवाजाही के लिए गरारी लगाई गई। गरारी चलाने के लिए एक तरफ से रस्सी खींचनी पड़ती है। चार माह तक बच्चों की माताएं गरारी खींच कर बच्चों को स्कूल भेजती थीं। शीतकाल आने के बाद जब नदी का जलस्तर घटा तो ग्रामीणों ने श्रमदान से एक पुल बनाया। इस पुल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। प्रतिदिन दो सौ से अधिक बच्चे इस पुल से विद्यालय आते जाते हैं। सरकार को अभी भी यहां पुल निर्माण की सुध नहीं आई है। गर्मी शुरू होते ही बर्फ पिघलते ही नदी का जल स्तर बढ़ेगा और पुल बह जाएगा। इस पुल से बच्चों के अलावा दर्जनों गांवों के लोग इधर उधर जाते हैं।
इस कांपते पुल पर चलते हैं भारी वाहन:-अस्कोट-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग में थल में रामगंगा नदी पर बना मोटर पुल लंबे समय से कांप रहा है। वर्ष 1962 में बना पुल अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है। भारी वाहनों के चलते ही पुल कांपता है। पुल पर बिछाया गया सीमेंट टूट चुका है। सरिया नजर आने लगी है। कभी भी इस पर हादसा हो सकता है। यहां सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगाकर कोरम पूरा किया गया है। यह पुल सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। इस पुल से जिले का आधा हिस्सा शेष जगत से जुड़ा है। रामगंगा नदी पर दूसरा पुल 85 किमी की दूरी पर है।
दो वर्ष पूर्व ध्वस्त पुल के स्थान पर नहीं बना दूसरा पुल:-तहसील के बारह गांवों को जोडऩे के लिए कुलूर नदी पर बना पुल दो वर्ष पूर्व दो भार वाहनों के एक साथ गुजरने के दौरान टूट गया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। आगामी फरवरी माह में पुल ध्वस्त हुए दो साल पूरे होने जा रहे हैं , लेकिन अभी तक व्यवस्था चुप है। यहां पर भी एक गरारी लगा कर इतिश्री कर ली गई थी। बारह गांवों के रोड होने के बाद भी आठ से दस किमी पैदल चलते हैं। कुलूर नदी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डाले गए पत्थरों पर चल कर आवाजाही कर रहे हैं।
धारचूला, मुनस्यारी में 31 स्थानों पर हैं अस्थाई पुल और पुलिया:-धारचूला और मुनस्यारी में अभी भी सैकड़ों गांवों की लाइफ लाइन पुल और पुलिया हैं। प्रतिवर्ष आपदा में पुल और पुलिया बह जाती है। सरकार के स्तर से पुल और पुलिया बनाने के लिए ढाई लाख से लेकर पांच लाख तक की धनराशि मिलती है। पुल निर्माण करने वाले विभाग ठीक मानसून काल से पूर्व पुल और पुलिया निर्माण की रस्म भर अदा कर देते हैं। पहली मानसूनी वर्षा में आधे से अधिक पुल और पुलिया बह जाती है। क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण श्रमदान से सदियों से पूर्व की भॉति कच्चे पुल बनाते हैं। ये कच्चे पुल और पुलिया ही उनकी लाइफ लाइन रहती हैं।
नब्बे लाख का भेजा गया है प्रस्ताव;-एके वर्मन अधिशासी अभियंता लोनिवि डीडीहाट ने बताया कि थल मोटर पुल के लिए नब्बे लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके तहत पुल की मरम्मत होनी है। पुल पर एक साथ दोनों तरफ से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। नाचनी में भी रामगंगा नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
नैनीताल में पांच पुल हो चुके हैं उम्रदराज:-नैनीताल जिले में छोटे-बड़े मिलाकर कुल पांच पुल ऐसे हैं जो कि उम्रदराज हो चुके हैं। इन्हें मरम्मत की जरूरत है। इसमें मुख्य ब्रिटिश दौर में बना वीरभट्टी पुल भी शामिल है। 2017 में सिलेंडर विस्फोट के कारण यह पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। अभी अस्थायी बैली पुल बनाकर काम चलाया जा रहा है। नया पुल कब बनेगा यह तय नहीं हो सका है। रानीबाग-भीमताल पुल, काठगोदाम नैनीताल पुल, काकड़ीघाट, भुजियाघाट, खैरना पुल की उम्र 50 साल से अधिक है। लिहाजा हर साल बरसात से पहले व बाद में इनकी मरम्मत करना जरूरी है।
ऊधमसिंहनगर जिले में भी पुल पर लटक रही है जिंदगी
किच्छा:-चार करोड़ रुपया खर्च करने के बाद भी धौरा डैम से जुड़े दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों को गौला नदी पर रपटा पुल का लाभ नहीं मिल पाया है। पुल के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाने के कारण मामला जांच में लंबित है और निर्माण एजेंसी से जुड़े आरोपितों के खिलाफ एफआईआर भले ही दर्ज कर ली गई हो पर इसका खामियाजा आज भी दर्जनों गांवों की जनता को भुगतना पड़ रहा है। रपटा पुल पर निर्माण प्रारंभ होने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। रपटा पुल बन जाने परर पिपलिया मोड़ से किच्छा मात्र दो किमी रह जाता है जबकि पुलभट्टा से घूम कर आने में दस किमी से भी अधिक हाईवे के भीड़ भाड़ भरे माहौल में चलना पड़ता है। जिससे दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहता है
काशीपुर:-बाजपुर हाईवे स्थित बहल्ला नदी पर बनी सकरी पुलिया जान की मुसीबत बनी है। पुलिया से एक ही चौपहिया वाहन गुजर सकता है। पुलिया की दीवारें टूटी हुई हैं। थोड़ी सी चूक होने पर चालक वाहन लेकर नदी में गिर सकता है। कुछ माह पहले पुलिया से एक वाहन नदी में गिर गया था। ऐसे तो छोटी घटनाएं तो अक्सर होती रहती हैं। यहीं पुलिया पर अक्सर जाम ही लगा रहता है। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन का ध्यान नहीं जाता है। खास बात यह है कि हल्द्वानी व रुद्रपुर जाने वाले राज्य व जिले के आला अफसर गुजरते हैं, मगर इसे ठीक कराने की कोशिश की नहीं की गई। इसी तरह सुल्तानपुरपट़टी में इसी हाइवे पर बनी पुलिया जर्जर स्थिति में है और यहां पर जाम ही जाम लगा रहता है। एक बार जाम लगता है तो पुलिया पार करने में कम से कम एक घंटा समय लगता है।
खटीमा:-पहेनिया-सैजना मार्ग पर परवीन नदी पर बना पुल डेढ़ माह से भी अधिक समय से क्षतिग्रस्त स्थिति में है। वहां से भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।नदी पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए रपटा बना रखा है। वह भी दो बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। बावजूद इसके वहां से वाहनों की आवाजाही हो रही है। कोई और वैकल्पिक मार्ग न होने की वजह से करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों को वहीं से आवागमन करना पड़ रहा है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिध भी मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने आश्वासन के सिवाय लोगों को कुछ और नहीं दिया। वहीं सत्रहमील- नानकमत्ता मार्ग पर नौसर में परवीन नदी पर बना पुल पिछले तीन सालों से नहीं बन सका है। हालांकि वहां पर नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन जो कार्यदायी संस्था की लेटलतीफी की वजह से अधर में लटका हुआ है। बता दें कि यह मार्ग ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब को उततर प्रदेश से जोड़ता है। बड़ी संख्या में श्रद्घालु इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ब्रिटिश कालीन इस पुल के जर्जर होने की वजह से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुमाऊं-गढवाल को जोडऩे वाला पुल हो चुका है जर्जर
अल्मोडा : अल्मोड़ा जिले की भिकियासैंण तहसील में वर्ष 1970 के समय में बना हुआ पुल वर्तमान में जर्जर हालत में हैं। पुल के दोनों तरफ बने पिलर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जबकि वर्षों से पुल की मरम्मत भी नहीं की गई है। यह पुल कुमाऊं और गढ़वाल के कई क्षेत्रों को जोडऩे वाला है। इसके अलावा जिले के क्वारब और मरचूला में बने पुल भी जर्जर हालत में हैं।
सरयू-गोमती के ऊपर बने पुल जर्जर हालत में
बागेश्वर : जिला मुख्यालय में दो पुल राष्ट्रीय राज मार्ग 309 ए में जर्जर हालत में हैं। जर्जर पुलों पर आवागमन जारी है। स्थानीय लोग जीणोद्धार की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। सरयू और गोमती नदी के ऊपर बने हैं।
मियाद पूरी कर चुका है शारदा बैराज
चम्पावत : भारत-नेपाल के बीच ब्रिटिश शासनकाल में बना शारदा बैराज पुल दोनों देशों के बीच आवागमन का मुख्य मार्ग है। 1928 में बना एक किमी लंबा यह पुल अब अपनी मियाद पूरी कर चुका है। जिस कारण पुल से भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रशासन ने रोक लगा दी है, मगर हल्के वाहनों का आवागमन जारी है। बारिश के दिनों में शारदा का जल स्तर बढऩे पर छोटे वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है। इस पुल पर वाहन चलने पर पुल के कंपन को आसानी से महसूस किया जा सकता है। शारदा बैराज के पुल अपनी मियाद पूरी कर चुका है यह जानते हुए भी आज तक आवागमन के लिए शारदा नदी पर नया पुल नहीं बनाया गया है।

नई दिल्ली। दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इसके लिए सेना ने फ्रांस से करीब 3 हजार मिलान 2T एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि यह डील करीब एक हजार करोड़ रुपये की होगी।रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही उच्च स्तरीय वार्ता बैठक में निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि सेना को इस वक्त करीब 70 हजार एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों की जरूरत है।बता दें कि मिलान-2 फ्रांस की एक सेकंड जेनरेशन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जो कि हिंदुस्तान में ही भारत डायनैमिक्स लिमिटेड द्वारा बनाई जाती है। उल्लेखनीय है कि भारत ने इजरायल से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल लेने का प्रस्ताव रद कर दिया था, क्योंकि अपने ही देश में इस दिशा में काम चल रहा था।

 

 

बेंगलुरु। लिंगायत समुदाय के धर्मगुरू और कर्नाटक के तुमकुरू स्थित सिद्धगंगा मठ के महंत श्री शिवकुमार स्वामी ( Shivakumara Swamiji) का सोमवार को निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। स्वामी जी के निधन की सूचना देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, स्वामी जी का 11.44 मिनट पर निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार कल दोपहर बाद साढ़े चार बजे होगा।'महंत श्री शिवकुमार स्वामी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, 'वे जीवित भगवान थे, देश के लिए उनकी सेवा का बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता। उनका निधन देश के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक क्षेत्र के लिए भारी क्षति है।'
तीन दिन का शोक और एक दिन की छुट्टी घोषित:-मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने धर्मगुरू के निधन पर प्रदेश में तीन का राजकीय शोक घोषित किया है, जिसमें से एक दिन की छुट्टी भी शामिल है। सरकार ने ये आदेश प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालयों के लिए जारी किए हैं।
PM मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने शोक जताया:-महंत श्री शिवकुमार स्वामी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, 'महंत श्री शिवकुमार स्वामी जी लोगों के लिए जीये, विशेष रूप से गरीब और कमजोर लोगों के लिए। उन्होंने खुद को गरीबी, भुखमरी और सामाजिक अन्याय जैसी बीमारियों को कम करने के लिए समर्पित किया।'कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा 'सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी जी के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। स्वामी जी सभी धर्मों और समुदायों के करोड़ों भारतीयों के प्रति आदर और सम्मान करते थे। उनके सभी अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदना।'कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुयुरप्पा ने ट्वीट करते हुए ल‍िखा, 'राष्ट्र ने एक महान हस्ती खो दी है। उनका जाना एक बड़ा नुकसान है। उन्होंने वह पूरा जीवन ज‍िया जो इतिहास में अद्वितीय है। वह 90 साल तक काम करते रहे।'गौरतलब है कर्नाटक की राजनीति में सिद्धगंगा मठ और यहां के महंत श्री शिवकुमार स्वामी का काफी प्रभाव रहता है। यहां तक की पीएम मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गांधी परिवार तक सभी उनका सम्मान करते थे।
कौन थे महंत डॉ. शिवकुमार स्वामी?
-कर्नाटक के तुमकुरु में स्थित सिद्धगंगा मठ के महंत थे डॉ शिवकुमार स्वामी।
-वे लिंगायत समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु हैं।
-कर्नाटक में सबसे अधिक दबदबे वाले लिंगायत समुदाय की संख्या 18 फीसद हैं।
-इसी समुदाय का मुख्य मठ सिद्धगंगा है, जो बेंगलूरू से लगभग 80 किलोमीटर दूर तुमकुरु में स्थित है।
-कर्नाटक से लेकर केंद्र की राजनीति पर इस मठ का काफी प्रभाव रहा है।

Page 1 of 3576

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें