Editor

Editor

बेंगलुरु।कर्नाटक में एक पखवाड़े से चल रहा सियासी नाटक खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। स्‍पीकर की ओर से अभी तक फ्लोर टेस्‍ट को लेकर वोटिंग नहीं कराई गई है। इस पर राज्‍यपाल वजूभाई वाला ने कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार को एकबार फि‍र बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार शाम छह बजे तक का वक्‍त दिया है। इधर कांग्रेस ने राज्‍यपाल की दखलंदाजियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव ने याचिका देकर सर्वोच्‍च न्‍यायालय से 17 जुलाई का आदेश स्पष्ट करने के लिए कहा है। कांग्रेस नेता ने याचिका में गुजारिश की है कि कोर्ट स्पष्ट करे कि 15 विधायकों को सदन की कार्यवाही से छूट देने का आदेश पार्टी व्हिप जारी करने के संवैधानिक अधिकार पर लागू नहीं होता है।इससे पहले राज्यपाल ने कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार को बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे तक का वक्‍त दिया था। लेकिन आज नेताओं की बहस के कारण यह डेडलाइन बिना किसी फैसले के खत्‍म हो गई। विधानसभा को संबोधित करते हुए कुमारस्‍वामी ने अपने संबोधन में भाजपा पर तीखे हमले बोले और कहा कि उनके विधायकों को खरीदने की कोशिशें की गईं। वहीं स्‍पीकर ने कहा है कि वह फ्लोर टेस्‍ट को लेकर वोटिंग में देर नहीं कर रहे हैं जो लोग ऐसा आरोप लगा रहे हैं वे पहले अपने अतीत पर भी गौर करें।
हमारे विधायकों को दिए गए 40 से 50 करोड़ के ऑफर:-मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा पर दल बदल रोधी कानून के उल्‍लंघन का आरोप भी लगाया। उन्‍होंने कहा कि 14 महीने सत्ता में रहने के बाद हम अंतिम चरण में हैं। आइये चर्चा करते हैं। जल्‍दबाजी किस बात की। हमारे विधायकों को लुभाने के लिए 40 से 50 करोड़ रुपये की पेशकश की गई। यह पैसे किसके हैं। हमारी पार्टी के विधायक श्रीनिवास गौडा (Srinivas Gowda) ने आरोप लगाया है कि उन्‍हें भाजपा की ओर से सरकार गिराने के लिए पांच करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया। कुमारस्‍वामी ने कहा कि आपकी सरकार उन लोगों के साथ कितनी स्थिर होगी जो अभी आपकी मदद कर रहे हैं। इस बात को मैं भी देखूंगा।

गुवाहाटी।भयानक बाढ़ का सामना कर रहे असम में शुक्रवार को दोपहर दो बजकर 51 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये झटके दूसरे पूर्वोत्‍तर के दूसरे राज्‍यों में भी महसूस किए गए। रिक्‍टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.9 नौ मापी गई। भूकंप का केंद्र अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग में था। फिलहाल, भूकंप से किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप के झटकों से लोगों में घबराहट फैल गई। बाढ़ के चलते सुरक्षित स्थानों में ठहरे हुए लोग भूकंप के झटकों के कारण खुले मैदान की ओर भागने लगे। बता दें कि असम के लोग इस समय भयानक बाढ़ की चपेट में हैं। राज्‍य में बाढ़ के कारण 54 लाख लोग विस्थापित हुए हैं जबकि मरने वालों की संख्या 37 हो गई है। राज्‍य के 33 में से 28 जिले बाढ़ की चपेट में हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के मुताबिक, 53,52,107 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उल्‍लेखनीय है कि इसी साल अप्रैल में 5.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से 50 किलोमीटर गहराई में था। इस भूकंप के बाद दहशत के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए थे। भूकंप से जानमान का नुकसान नहीं हुआ था।गुवाहाटी एवं अन्य हिस्सों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से पार बह रही हैं। असम में 4000 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। असम में सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बारपेटा है जहां 13.48 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। आपदा प्रबंधन ने बताया है कि 1080 कैंपों में 2.6 लाख विस्थापितों ने शरण ली है। जिला प्रशासनों ने 689 राहत कैंप स्थापित किए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें फंसे लोगों को निकालने में दिन-रात जुटी हैं।

मिर्जापुर। सोनभद्र में नरसंहार के पीडितों से मिलने जा रहीं प्रियंका गांधी को शुक्रवार की दोपहर मिर्जापुर जिला प्रशासन ने हिरासत में ले लिया। इससे पूर्व वाराणसी ट्रामा सेंटर से प्रियंका का काफ‍िला जैसे ही मिर्जापुर के रास्‍ते सोनभद्र रवाना हुआ वैसे ही नारायणपुर के पास उनको रोक दिया गया।रोके जाने के विरोध में प्रियंका गांधी और कांग्रेसी नेता मौके पर ही धरने पर बैठ गए। वहीं प्रियंका को हिरासत में लिए जाने की जानकारी होने के बाद पूर्वांचल में सियासी सरगर्मी भी बढ़ गई है। जबकि प्रियंका सोनभद्र जाने को लेकर डाक बंगले में भी अड़ी हुर्इ हैं।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी दोपहर बाद भी सोनभद्र में पीड़ितों से मिलने के लिए अड़ी हुई हैं। चुनार डाक बंगले में ही पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी समेत कुछ पार्टी पदाधिकारियों के साथ मौजूद हैं। प्रियंका का कहना है कि वह कुछ लोगों के साथ ही सही, लेकिन पीड़ितों से मिलने जरूर जाएंगी। वहां पहुंचे जिलाधिकारी अनुराग पटेल, पुलिस अधीक्षक अवधेश पांडेय, एसडीएम सत्य प्रकाश सिंह उन्हें सोनभद्र न जाने के लिए मनाने में जुटे हैं। वहीं डाक बंगले के बाहर कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा भी शुरु हो गया है। प्रशासन ने मौके पर भारी भीड़ को देखते हुए गेस्ट हाउस के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया है। गेट पर ही कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार के विरोध में नारेबाजी कर रहे हैं।
मैं पीड़ितों से मिलने आई हूं, मिलकर ही रहूंगी:-चुनार किले में गेस्ट हाउस के गेट के बाहार भी कुछ देर के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा धरने पर बैठ गईं और कार्यकर्ताओं की भीड़ के बीच उन्‍होंने कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया। प्रियंका ने अपने संबोधन में कहा कि - ''मेरी गिरफ्तारी का कोई भी कागज प्रशासन नहीं दिखा रहा है। राज्‍य में कानून व्‍सवस्‍था की स्थिति ठीक नहीं है। अधिकार मांग रहे लोगों पर हमला किया गया, गाेली चलाई गई। सोनभद्र में हुई जमीनी विवाद में हत्या में मारे गए लोगों के परिजनों से मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है। मीरजापुर की सीमा में नरायनपुर के पास गिरफ्तार कर चुनार किला लाया गया है। यहां से चाहे मुझे कहीं भी ले जाया जाय परन्तु मैं पीड़ितों से मिले बिना नहीं जाऊंगी। सोनभद्र में धारा 144 लगने की स्थिति में मैं तीन लोगों के साथ परिजनों से मिलने वहां जाऊंगी जिससे धारा 144 का उल्‍लंघन न हो सके। उन्होंने कहा कि जिस तरह सोनभद्र के घोरावल क्षेत्र में जमीनी विवाद में नर संहार किया गया उसकी कांग्रेस भर्त्सना करती है। नरसंहार में जिनकी भी मौत हुई है उनके परिजनों के पुनर्वास की व्यवस्था के साथ मुआवजा राज्‍य सरकार दे।''हिरासत में लिए जाने के बाद चुनार गेस्ट हाउस पहुंची प्रियंका वाड्रा ने सबसे पहले एसडीएम से वारंट मांगते हुए पूछा कि बिना वारंट के मुझे कैसे यहां लाए हैं। इसके बाद अधिकारियों ने उनको निषेधाज्ञा लागू होने की बात कहते हुए समझाने की कोशिश की। सोनभद्र में पीडि़त परिवार वालों से मिलने के लिए जाते समय रोकी गईं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चुनार किले पर सीओ से कहा कि बिना वारंट के गिरफ्तारी नहीं होती है। यह तो किडनैपिंग है। इसके बाद सीओ हितेंद्र कृष्ण ने कहा कि मैम बगैर वारंट के भी गिरफ्तारी हो सकती है। प्रियंका गांधी को इसके बाद चुनाव गेस्ट हाउस ले जाया गया। हालांकि, इस दौरान किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।धरने पर बैठीं प्रियंका ने कहा कि वह सोनभद्र में हुई झड़प में मारे गए लोगों के परिवार से मिलने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से जा रहीं थी लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक लिया। वह चाहती हैं कि उन्हें वहां जाने से रोकने का लिखित आदेश दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि वह पीड़ितों से मिलने के लिए सिर्फ चार लोगों के साथ भी सोनभद्र जाने को तैयार हैं। प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने को लेकर यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है। उन्हें केवल रोका गया। उन्होंने कहा कि प्रियंका को चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया है।
वाराणसी में ट्रामा सेंटर में पीडितों से मुलाकात;-नई दिल्ली से वाराणसी आने वाले इंडिगो एयरलाइंस के विमान 6इ906 से प्रियंका गांधी वाड्रा सुबह 9:50 बजे वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचीं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर पहुंचते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और एयरपोर्ट से वह सीधा ट्रामा सेंटर रवाना हो गईं। दरअसल प्रियंका गांधी सोनभद्र नरसंहार में गंभीर रुप से घायलों से मिलने ट्रामा सेंटर पहुंचीं। प्रियंका के पहुंचने से पहले ट्रामा सेंटर छावनी में तब्दील कर दिया गया और सुरक्षा व्‍यवस्‍था कड़ी कर दी गई। हादसे में घायल दिनेश को देखकर उन्‍होंने चोट के बारे में पूछा और हालचाल लिया।उसके बाद प्रियंका ने घायल जयप्रकाश से और पिता संतलाल की तरफ देखा और कहा कि घबराइए मत जल्द ही ठीक हो जाएगा तो संतलाल ने घायल पत्नी सुखवंती को दिखाते हुए कहा कि पत्नी है, कहते हुए गला रुंध गया।प्रियंका ने ढांढस देते हुए कहा कि पूरी मदद होगी आपलोगों की। घायल महेंद्र के भाई नंदलाल से भी प्रियंका ने पूछा कि कोई दिक्कत तो नही है आप लोगों के इलाज में। घायल नागेंद्र से मिलने के बाद प्रियंका कुछ देर वार्ड में घायलों को देखती रहीं। परिजन भी उम्मीद लगाए देख रहे थे कि प्रियंका जी कुछ मदद की घोषणा करेंगी लेकिन प्रिंयका अपनी भावनाओं को अंदर लिए वार्ड से बाहर निकल गर्इं।
प्रियंका गांधी को उभ्भा गांव जाने से रोकने की तैयारी:-सोनभद्र जिले में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा को मृतक के परिजनों से मिलने जाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने घोरावल क्षेत्र की सीमा को उनके आने की जानकारी होते ही सील करा दिया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर घोरावल क्षेत्र के उभ्भा एवं सपही में भूमि पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में दस के मारे जाने व 28 के घायल होने को लेकर पूरे क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इलाके को अत्यंत संवेदनसील माना गया है। इसे लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा को गांव में जाने से रोकने के लिए घोरावल की सीमा को सील कर दिया गया। वहीं घोरावल जा रहे पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ को तीन अन्य समर्थकों के साथ दुद्धी पुलिस ने शुक्रवार को हिरासत में ले लिया। जबकि सोनभद्र जिले में मीडिया को भी घटनास्‍थल पर जाने और कवरेज से प्रशासन ने रोक दिया है। उभ्‍भा गांव पहुंचने की कोशिश कर रहे सपा और कांग्रेस के लोगों को पुलिस ने वापस लौटा दिया है।
चर्चा में रहा प्रियंका का दौरा:-लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में मची उठापटक के बीच उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता का यह पहला पूर्वांचल दौरा है। पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के प्रभारी के तौर पर प्रियंका के इस नरसंहार पर सोनभद्र आगमन को सियासी हलके में उनकी सक्रियता के तौर पर भी लिया जा रहा है। वहीं कांग्रेसियों की भी लंबे समय से प्रियंका के यहां पर लगातार सक्रिय रहने की अपेक्षा रही है। पार्टी में शीर्ष स्‍तर पर अध्‍यक्ष पद को लेकर मचे विवाद के बीच उनका वाराणसी में अचानक आगमन भी चर्चा में बना हुआ है। वहीं प्रियंका के मीरजापुर में धरने और उनको हिरासत में लिए जाने के बाद लखनऊ तक पदाधिकारियों के फोन बजने लगे और प्रदेश भर में कांग्रेसियों की सक्रियता भी बढ़ गई।
मीडिया से मीरजापुर में की बातचीत:-प्रियंका गांधी से यूपी में कानून व्यवस्था को लेकर बाबतपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं अभी घायलों और मृतक के परिजनों से मिलने जा रही हूं, अभी इस बारे में कोई बात नहीं करूंगी। वहीं ट्रामा सेंटर में भी उन्‍होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी और सीधे मीरजापुर होते हुए सोनभद्र रवाना हो गईं। हालांकि हिरासत में लिए जाने से पूर्व मीरजापुर में धरना देते समय उन्‍होंने राज्‍य सरकार पर कानून व्‍यवस्‍था को लेकर आरोप लगाया और पीडितों से न मिलने देने को लेकर भी उन्‍होंने प्रशासनिक मंशा को कठघरे में खड़ा किया।
पूर्वांचल में शुरु हुआ प्रदर्शन;-प्रियंका गांधी की मीरजापुर जिले में गिरफ्तारी के खिलाफ के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बलिया जिले में रोडवेज तिराहे के समीप सड़क जाम कर सरकार विरोधी नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं की मांग थी कि प्रियंका को तत्‍काल रिहा किया जाए नहीं तो कार्यकर्ता आंदोलन को बाध्‍य होंगे। वहीं प्रियंका को हिरासत में लिए जाने और सोनभद्र में घोरावल के उभ्‍भा गांव में दस ग्रामीणों की हत्‍या के बाद कांग्रेस नेता को न जाने देने को लेकर विभिन्‍न जिलों में कार्यकर्ताओं ने रोष जाहिर किया है। पूर्वांचल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह जगह विरोध प्रदर्शन करते हुए कई जगहाें पर सरकार का प्रतीक पुतला भी फूंका है।

नई दिल्ली। PM Narendra Modi की Modi 2.0 में सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार एक्शन मोड में आ गई है। दरअसल Nitin Gadkari (नितिन गडकरी) ने लोकसभा में Motor Vehicle Amendment बिल को पेश करते हुए कहा था कि भारत में हर साल 1.5 लाख लोगों की सड़क हादसे में मौत हो जाती है और 5 लाख लोग एक्सीडेंट का शिकार हो जाते हैं। सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री Nitin Gadkari (नितिन गडकरी) ने कहा कि पांच साल कोशिश करने के बाद भी केवल 3 से 4 फीसद हादसे कम हो पाए हैं, जिसे वो अपने विभाग की सबसे बड़ी नाकामी मानते हैं। इस मौके पर उन्होंने सदन में बैठे सभी सासंदों से बिल को पास करने का निवेदन किया। गडकरी ने कहा कि अब इस बिल को पास करते हैं और लोगों की जान बचाते हैं।सड़क हादसों के आकड़ों को पेश करते हुए गडकरी ने बताया कि उनके कई कोशिशों के बाद भी सड़क हादसों में केवल 3 से 4 फीसद की कमी आई है। हालांकि, इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि इस राज्य में 15 फीसद की सड़क हादसों में कमी आई है। गडकरी ने कहा कि तमिलनाडु ने जो एक्सपेरिमेंट किया उसे अपना कर आगे जाएंगे। दरअसल Motor Vehicle Amendment बिल के जरिए सरकार सड़क हादसों पर लगाम लगाना चाहती है। इस बिल में ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा इस बिल के लागू होने के बाद फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर भी रोक लगेगी।
10 गुना तक ज्यादा लगेगा जुर्माना;-मोटर व्हीकल संशोधित बिल में जुर्माने की राशि को 10 फीसद तक बढ़ाया गया है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो सीटबेल्ट न लगाने पर वाहन मालिक को 1000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। जबकि, पहले बिला हेल्मेट पाए जाने पर 100 रुपये का ही जुर्माना भरना पड़ता था। वहीं, स्पीड लिमिट पार करने पर 500 रुपये की जगह 5000 रुपये का फाइन भरना पड़ेगा। इस बिल में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे में अगर कोई ड्रिंक एंड ड्राइव करने हुए पाया गया तो उसे 2000 रुपये की जगह 10000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।
2016 से अटका है बिल;-मोटर व्हीकल (संशोधित) बिल सबसे पहले साल 2016 में पेश किया गया था, जो राज्यसभा में जाकर अटक गया। इसके बाद यह बिल मोदी सरकार के पहले टर्म में पास नहीं हो पाया। इस बिल में 18 रास्यों के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के सुझाव के साथ स्टैंडिंग कमेटीज की राय भी ली गई है।

वॉशिंगटन। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के अमेरिकी दौरे से पहले पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से बड़ा झटका मिला है। इमरान खान के अमेरिकी दौरे से पहले पाकिस्तान ने मोस्ट वॉन्टेड आतंकी हाफिज सईद को गिरफ्तार कर अमेरिका को खुश करने की बहुत कोशिश की है। बताया जा रहा है पाकिस्तान ने मोस्ट वॉन्टेड आतंकी हाफिज सईद की गिरफ्तारी अमेरिका को ध्यान में रखते हुए की थी। लेकिन लगता है अमेरिका किसी भी तरह से पाकिस्तान को बख्शने वाला नहीं है। अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी समूहों के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से निर्णायक कार्रवाई न होने तक उसे अमेरिकी की ओर से मिलने वाली सुरक्षा सहायता बंद रहेगी।बता दें, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिका ने जनवरी 2018 में पाकिस्तान को दी जाने वाली अपनी सभी सुरक्षा सहायता बंद कर दी थी। ट्रम्प प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यह पहली उच्च स्तरीय यात्रा है।स्वतंत्र कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने कहा कि पाकिस्तान कई इस्लामी चरमपंथी और आतंकवादी समूहों के लिए एक अड्डा है, और क्रमिक रूप से पाकिस्तानी सरकारों को व्यापक रूप से सहन करने और यहां तक ​​कि इस्लामाबाद के अपने पड़ोसियों के साथ ऐतिहासिक संघर्षों में समर्थक के रूप में समर्थन करने के लिए माना जाता है। सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस का एक स्वतंत्र और द्विदलीय शोध विंग है, जो सांसदों को सूचित निर्णय लेने के लिए ब्याज के मुद्दों पर आवधिक रिपोर्ट तैयार करता है। इसकी रिपोर्ट क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाती है और इसे कांग्रेस का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जाता है।कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने पाकिस्तान पर एक हालिया रिपोर्ट में कहा, 'पाकिस्तान कई इस्लामी चरमपंथियों एवं आतंकवादी समूहों का पनाहगाह है और पाकिस्तान में आने वाली सरकारों के बारे में माना जाता है कि उन्होंने इसे बर्दाश्त किया और पाकिस्तान के उसके पड़ोसियों के साथ ऐतिहासिक संघर्षों में कुछ ने प्रतिनिधि बनकर इनका समर्थन भी किया है।'सीआरएस की नवीनतम रिपोर्ट ने सांसदों को बताया कि 2011 में अलकायदा के आतंकी ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तान में वर्षों से शरण का आनंद लिया था। जिससे द्विपक्षीय संबंधों की गहन अमेरिकी सरकार ने जांच की।

नई दिल्‍ली।केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एनआरसी का समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय 31 जुलाई की डेडलाइन में बदलाव करे। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 23 जुलाई को सुनवाई करेगा। बता दें कि असम में बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है। राज्‍य में बाढ़ के कारण 54 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। राज्‍य के 33 में से 28 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। केंद्र और असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सीमा से लगे जिलों मे 20 फीसद नमूनों की दोबारा जांच किए जाने की बात कही। उन्‍होंने कहा कि स्थानीय साठगांठ के चलते लाखों अवैध घुसपैठिये NRC में शामिल हो गए हैं जिसकी जांच जरूरी है। इसके लिए फाइनल NRC की डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाए जाने की जरूरत है। अत अदालत से गुजारिश है कि वह इस मांग पर गौर करे। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अवैध घुसपैठियों से कड़ाई से निबटने के लिए प्रतिबद्ध है। देश को शरणार्थियों की राजधानी नहीं बनने दिया जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मंगलवार को फिर से विचार करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने नैशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स (NRC) संयोजक प्रतीक हजेला को अपनी 10 और 18 जुलाई की रिपोर्ट केंद्र को सौंपने का भी निर्देश दिया। अभी कुछ ही दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स (NRC) को लेकर केंद्र और असम सरकार द्वारा दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। बता दें कि सबसे पहले छह दिसंबर, 2013 को केंद्र सरकार ने पहली अधिसूचना जारी कर तीन साल में एनआरसी बनाने का कार्य पूरा करके उसे प्रकाशित करने की घोषणा की थी। इसके बाद से अभी तक समयसीमा को छह बार बढ़ाया जा चुका है।पिछले साल 30 जुलाई को जब एनआरसी की अंतरिम सूची का प्रकाशन हुआ तो उसे लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया था। उसमें राजनीतिक दलों और प्रभावित लोगों ने 40.7 लाख लोगों के नाम दर्ज न करने पर सवाल उठाए। रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए आए कुल 3.29 करोड़ आवेदनों में से 2.9 करोड़ को नागरिक माना गया, बाकी का नाम भारतीय नागरिक के तौर पर रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया।

नई दिल्‍ली। भारतीय रेल को अगर हिंदुस्‍तान के लोगों की लाइफलाइन कहें, तो गलत नहीं होगा। रोजाना लाखों लोग ट्रेन में सफर करते हैं। ऐसे में मोदी सरकार ने ट्रेनों में मिलने वाली सुविधाओं और साफ-सफाई पर विशेष ध्‍यान दिया है। भारतीय रेलवे ने कई बड़े बदलाव किए हैं, जिनका यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचा है। अब रेल मंत्रालय ने ट्रेन और स्‍टेशनों पर सामान बेचने वालों पर नकेल कसने का फैसला किया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो सोशल मीडिया में शेयर किया है, जिसमें उन्‍होंने कहा कि अगर कोई सामान बेचने वाला आपको बिल नहीं देता है, तो उसके पैसे देने की भी जरूरत नहीं है। वो सामान आपके लिए फ्री होगा।ट्रेन में सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए रेल मंत्रालय द्वारा लिया गया, ये एक बड़ा फैसला किया है। रेलवे ने 'नो बिल, नो पेमेंट' की नीति गुरुवार को पूरी तरह से सभी स्टेशनों और ट्रेनों में लागू कर दी है। इसके तहत स्टेशन या ट्रेन में सामान बेचने वाला कोई वेंडर आपको बिल नहीं देता है, तो खरीदा गया सामान पूरी तरह मुफ्त होगा। इससे सही दाम पर यात्रियों को सामान मिलेगा और भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगेगी। अगर सख्‍ती से लागू होता है, तो मोदी सरकार का ये कदम काबिले तारीफ है।पीयूष गोयल ने इस योजना को अच्‍छी तरह से समझाने के लिए एक वीडियो भी अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। रेल मंत्री ने लिखा, 'रेलवे द्वारा No Bill, No Payment की नीति अपनाते हुए विक्रेताओं द्वारा ग्राहकों को बिल देना अनिवार्य किया गया है। ट्रेन अथवा रेलवे प्‍लेटफॉर्म पर यदि कोई विक्रेता आपको बिल देने से इंकार करता है तो आपको उसे पैसे देने की आवश्यकता नहीं है।'ट्रेन और प्‍लेटफॉर्मों पर आए दिन वेंडरों की मनमानी की शिकायतें मिलती रहती हैं। आमतौर पर वेंडर पानी की बोतलों की कीमत से ज्यादा पैसे वसूलते थे और खाद्य सामग्री को लेकर कई जगह कोई तय कीमत नहीं होती थी। हालांकि, रेलवे की सख्ती के बाद अब वेंडरों को 5 रुपये की चीज का भी बिल देना पड़ेगा और पारदर्शिता आएगी। इसका सीधा फायदा रोजाना ट्रेन में सफर करने वाले लाखों लोगों को होगा।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से एक याचिका पर सहायता मांगी है। दरअसल, राष्ट्रीय डेटा के बजाय राज्य-वार (state wise) जनसंख्या डेटा के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय की घोषणा करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल सहायता मांगी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की याचिका पर ध्यान दिया। जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय डेटा के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय की घोषणा करने वाला कानून अवैध था।पीठ ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय को याचिका की एक कॉपी अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को देने के लिए कहा और इस मामले पर चार सप्ताह के बाद सुनवाई करने का फैसला लिया। बता दें कि उपाध्याय ने इस याचिका में केंद्र के 26 वर्षीय अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई है, जिसमें पांच समुदायों - मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी को अल्पसंख्यक घोषित किया गया है। इसने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) अधिनियम 1992 की धारा 2 (c) को अघोषित करने की मांग की गई है। जिसके तहत 23 अक्टूबर, 1993 को अधिसूचना जारी की गई थी।उपाध्याय ने राष्ट्रीय औसत के बजाय किसी समुदाय की राज्य-वार (state wise) जनसंख्या के आधार पर 'अल्पसंख्यक' शब्द को परिभाषित करने के लिए दिशानिर्देश देने की मांग की है। उन्होंने याचिका में कहा है कि यह अधिसूचना स्वास्थ्य, शिक्षा, आश्रय और आजीविका के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

नई दिल्ली। आजादी के महानायक मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को संयुक्त प्रांत के बलिया जिले (उत्तर प्रदेश) के नगवां गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडेय तथा माता का नाम अभय रानी था। मंगल पांडे बचपन से ही सेना में भर्ती होना चाहते थे। 22 साल की उम्र में ही वह ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़कर अंग्रेजों की सेना में भर्ती हो गए। अंग्रेजी सेना में उनकी पहली नियुक्ति अकबरपुर की एक ब्रिगेड में हुई थी।अंग्रेजी सेना में मंगल पांडे का ज्यादा दिन मन नहीं लगा। भारतीय नागरिकों और सैनिकों पर किए जा रहे अंग्रेज अधिकारियों के अन्याय और ज्यादतियों से बहुत जल्द ही सेना की नौकरी से उनका मन भरने लगा। इसी दौरान एक घटना ने मंगल पांडे की दिशा बदल थी। ये घटना थी उस वक्त अंग्रेजी सेना द्वारा लॉच की गई 'एनफील्ड पी.53' राइफल। इस राइफल में जानवरों की चर्बी से बने एक खास तरह के कारतूस का इस्तेमाल होता था, जिसे राइफल में डालने से पहले मुंह से छीलना पड़ता था।अंग्रेज, इस कारतूस में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल करते थे। मंगल पांडे को जैसे ही इस बात का पता लगा उन्होंने अंग्रेज अधिकारियों के सामने आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद मंगल पांडे ने साथी सैनिकों को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह के लिए तैयार किया। उन्हें बताया कि अंग्रेज अधिकारी कैसे कारतूस में गाय और सूअर के चर्बी का इस्तेमाल कर भारतीयों की भावना के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके मन में ये बात घर कर गयी कि अंग्रेज, हिन्दुस्तानियों का धर्म भ्रष्ट करने पर आमादा हैं, क्योंकि ये हिन्दू और मुसलमानों दोनों के लिए नापाक था।इसके बाद 29 मार्च 1857 में जब गाय और सूआर के चर्बी वाला नया कारतूस पैदल सेना को बांटा जाने लगा, तो मंगल पांडेय ने उसे लेने से इनकार कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप अंग्रेजों ने उनके हथियार छीन लिये जाने व वर्दी उतार लेने का हुक्म हुआ। मंगल पांडेय ने उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। उनकी राइफल छीनने के लिए जब अंग्रेज अफसर मेजर ह्यूसन आगे बढे तो मंगल ने उन पर आक्रमण कर दिया। मंगल पांडेय ने मदद के लिए साथियों की ओर देखा, सेना में उनके सहयोगी ईश्वरी प्रसाद ही उनका साथ देने के लिए आगे बढ़े।इस आक्रमण में मंगल पांडे ने अंग्रेज सैन्य अधिकारी ह्यूसन को मौत के घाट उतार दिया। मंगल ने ह्यूसन को मारने के बाद एक और अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेन्ट बॉब को भी मार डाला, लेकिन इसके बाद मंगल पाण्डेय और उनके सहयोगी ईश्वरी प्रसाद को अंग्रेज सिपाहियों ने पकड़ लिया। तब तक उनके विद्रोह ने सेना के बाहर आम भारतीयों में भी आजादी का अंकुर बो दिया था। इस घटना को ‘1857 का गदर’ नाम दिया गया, जिसने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी। अंग्रेजों को सेना में बगावत का अंदाजा भी नहीं था।
अंग्रेजों ने गद्दार घोषित किया तो बन गए महानायक;-मंगल पांडेय ने एक ऐसे विद्रोह को जन्म दिया था, जो जंगल में आग की तरह सम्पूर्ण उत्तर भारत और देश के दूसरे भागों में भी फैल गई थी। यह भले ही भारत के स्वाधीनता का प्रथम संग्राम न रहा हो, पर यह क्रांति निरंतर आगे बढ़ती रही। अंग्रेजी हुकुमत ने उन्हें मंगल पांडे को गद्दार और विद्रोही घोषित कर दिया। तब तक मंगल पांडेय प्रत्येक भारतीय के लिए महानायक बन चुके थे। उनके विद्रोह के पश्चात अंग्रेजों के बीच 'पैंडी' शब्द बहुत प्रचलित हुआ जिसका अभिप्राय था गद्दार या विद्रोही।
तय समय से 10 दिन पहले ही दे दी फांसी:-मंगल पांडेय का कोर्ट मार्शल कर मुकदमा चलाया गया। छह अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई। फैसले के अनुसार उन्हें 18 अप्रैल 1857 को फांसी दी जानी थी। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने मंगल पाण्डेय को निर्धारित तिथि से 10 दिन पूर्व ही आठ अप्रैल सन 1857 को फांसी पर लटका दिया। यह भी गौर करने वाली बात है कि स्थानीय बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडेय जैसे भारत मां के वीर सपूत को फांसी देने से मना कर दिया था। इसके बाद कलकत्ता से चार जल्लादों को बुलाकर मंगल पांडे को फांसी दी गई। उनके बाद 21 अप्रैल को उनके सहयोगी ईश्वरी प्रसाद को भी फांसी दे दी गई।
एक महीने बाद सेना में भड़की बगावत;-मंगल पांडेय तो खुद फांसी पर लटक गए, लेकिन उनकी मौत ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा दिया। उनकी फांसी के ठीक एक महीने बाद ही 10 मई 1857 को मेरठ की सैनिक छावनी में भी बगावत हो गयी और यह विद्रोह देखते-देखते पूरे उत्तरी भारत में फैल गया। इस संग्राम को अंग्रेजों ने दबा दिया, लेकिन वो भारतीयों के अंदर उनके खिलाफ भरी नफरत को खत्म नहीं कर पाए और उन्हें आगे चलकर भारत को छोड़ना ही पड़ा।

नई दिल्‍ली। अयोध्‍या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आरोपियों भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी आदि पर चल रहे केस में 9 महीने के भीतर फैसला होना चाहिए। अयोध्या केस की सुनवाई कर रहे स्पेशल सीबीआइ कोर्ट, लखनऊ के जज एसके यादव का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रायबरेली और लखनऊ की अदालत में लंबित इन दोनों मुकदमों को मिलाने और लखनऊ में ही इस पर सुनवाई का आदेश दिया था। आडवाणी, जोशी और उमा भारती सहित 13 आरोपियों के खिलाफ इस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप हटा दिए गए थे। इसके बाद हाजी महबूब अहमद और सीबीआइ ने भाजपा नेताओं सहित 21 आरोपियों के खिलाफ साजिश के आरोप हटाने के आदेश को चुनौती दी थी।अयोध्या केस की सुनवाई कर रहे स्पेशल सीबीआइ कोर्ट, लखनऊ के जज एसके यादव का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है। दरअसल, ट्रायल कोर्ट जज 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं उन्होंने SC मे अर्जी देकर कहा था कि ट्रायल पूरा होने मे छह महीने और लगेंगे। कोर्ट ने जज का कार्यकाल बढाने पर यूपी से जवाब माँगा था। यूपी सरकार ने आज कोर्ट से कहा जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चाहते हैं जब तक ट्रायल पूरा न हो यही जज सुनवाई करें चाहें दो वर्ष का भी समय लगे। कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि वह हाईकोर्ट के परामर्श से ट्रायल जज का कार्यकाल बढ़ाए और मुख्य सचिव इस आदेश पर अमल का चार सप्ताह मे हलफ़नामा दाखिल कर बताएं।बता दें किे पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या विवादित ढांचा गिराने की साजिश के मामले में उत्‍तर प्रदेश सरकार को 19 जुलाई तक यह बताने के लिए कहा था कि केस की सुनवाई कर रहे जज के सेवानिवृत्त होने पर क्या नियम और कानून हैं। दरअसल, इस केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज एसके यादव को 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होना है। इसलिए उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए छह महीने का और समय मांगा था।गौरतलब है कि इस मामले में वरिष्‍ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी आरोपी है। इस मामले में ट्रायल 19 अप्रैल को खत्‍म होने है।

Page 1 of 718

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें