- योगेश कुमार गोयल


आज भी भले ही विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंटएवरेस्ट पर चढ़ना दुनिया का सबसे बड़ा कारनामा माना जाता है किन्तु वास्तविकता यही है कि यह सपना चंदपर्वतारोहियों का ही पूरा हो पाता है। प्रतिवर्ष हजारों लोग माउंटएवरेस्ट को छूने की कोशिश करते हैं किन्तु उनमें से गिने-चुने लोग ही चोटी तक पहुंचने में सफल हो पाते हैं और कुछ एवरेस्टफतेह करने की चाहत में अपनी जान गंवा देते हैं। कटु सत्य यही है कि प्रतिवर्ष जहां कुछ पर्वतारोहीएवरेस्टफतेह करने के अपने मंसूबों में सफल हो जाते हैं तो कई बर्फीले पहाड़ों की रहस्यमयी कब्रगाह में ही दफन हो जाते हैं। इस बार तो हालात इतने बदतर हुए हैं कि जहां दर्जनों लोग एवरेस्ट के बर्फीले रास्तों में मौत के आगोश में चले गए, वहीं 1953 में एडमंडहिलेरी तथा तेनजिंगनोर्गे द्वारा एवरेस्टफतेह किए जाने के अभियान के बाद पहली बार एवरेस्ट पर पृथ्वी की ही भांति ट्रैफिक जाम का भयावह नजारा देखने को मिला है। इस ट्रैफिक जाम की वजह से भी इस बार एवरेस्ट पर कुछ पर्वतारोहियों की मौतें हुई हैं। वर्ष 2014-15 के दौरान तीन दर्जन से भी अधिक लोगों ने एवरेस्ट पर चढ़ाई करते हुए अपनी जान गंवाई थी। इतिहास पर नजर डालें तो एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले हर 100पर्वतारोहियों में से 4 की मौत हो जाती है।
वैसे मई महीने का एवरेस्ट के संदर्भ में विशेष महत्व है क्योंकि हर साल अधिकांश रिकॉर्ड अमूमन इसी माह में ही बनते हैं। इस सीजन में जहां उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ जनपद की 24वर्षीयापर्वतारोही शीतल राज, मुरादाबाद के 27 वर्षीय विपिन चौधरी, गाजियाबाद के सागर कसाना, मुम्बई के केवल हिरेन कक्का सहित कुछ भारतीय पर्वतारोही दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंटएवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा लहराकर माउंटएवरेस्टफतेह करने में कामयाब हो गए तो दूसरी ओर एवरेस्टफतेह अभियान के दौरान कुछ भारतीयों की मौत होने तथा कुछ के लापता होने की दर्दनाक खबरें भी सामने आई। इनमें कुछ ऐसे पर्वतारोही भी शामिल थे, जिन्होंने एवरेस्टफतेह कर लिया था किन्तु उतरते समय मौत ने उन्हें गले लगा लिया, जिसकी एक बड़ी वजह एवरेस्टपर लगा ट्रैफिक जाम था। 27 वर्षीय निहाल भगवान, 49 वर्षीय कल्पना दास, 54 वर्षीय अंजली एस कुलकर्णी एवरेस्ट से उतरते हुए मौत की नींद सो गए। इनके अलावा रवि ठक्कर तथा नारायण सिंह की भी मौत हो गई जबकि कोलकाता के 52 वर्षीय दीपांकर घोष मकालू पर्वत शिखर से लौटते समय कैंप-4 के ऊपर ही लापता हो गए। एक आयरिशपर्वतारोही के अलावा 44 ब्रिटिश पर्वतारोहीरॉबिनफिशर की भी उस समय मौत हो गई, जब एवरेस्टफतेह करने के बाद ढ़लान से सिर्फ 150 मीटर नीचे उतरने पर वे गिर गए।
तमाम खतरों के बावजूद एवरेस्टफतेह कर रिकॉर्ड बनाने की चाहत में हर वर्ष हजारों पर्वतारोहीएवरेस्ट का रूख करते हैं लेकिन इनमें से कुछ ऐसे बदनसीब होते हैं, जिनकी एवरेस्ट के बर्फीले पहाड़ों पर ही कब्र बन जाती है और कई बार उनकी लाशों का कोई नामलेवा तक नहीं होता। जहां तक रिकॉर्डों की बात है तो एवरेस्ट पर अब तक सबसे ज्यादा बार चढ़ाई करने का रिकॉर्ड हाल ही में नेपाल के 50 वर्षीय कामी रीता शेरपा ने बनाया है, जिन्होंने माउंटएवरेस्ट पर सबसे ज्यादा 24वीं बार चढ़ाई पूरी कर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का अपना ही विश्व रिकार्ड तोड़ा है। 15 मई 2019 को उन्होंने 23वीं बार एवरेस्टफतेह किया था और उसके एक सप्ताह के ही अंदर एक बार फिर एवरेस्टफतेह करने के अपने सारे रिकॉर्डों को तोड़ते हुए एक सप्ताह में दो बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाले दुनिया के पहले पर्वतारोही बन गए। वे 11 भारतीय पुलिसकर्मियों के एक दल को लेकर एवरेस्ट पर पहुंचे थे। वर्ष 2018 में कामी रिता शेरपा ने ही 22वीं बार एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ाई कर माउंटएवरेस्ट के शिखर को सबसे ज्यादा बार फतेह करने का रिकॉर्ड बनाया था। नेपाल के सोलुखुम्बु जिले के थामे गांव के रहने वाले रीता शेरपामाउंटएवरेस्ट पर 1994 से ही लगातार चढ़ रहे हैं। वे 1995 में चढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे क्योंकि शिखर पर पहुंचने से पहले ही उनका एक साथी बीमार हो गया था। कामी रिता एवरेस्ट के अलावा आठ हजार मीटर ऊंचाई वाली अन्य चोटियों के-2, चोओयू, ल्होतसे, अन्नपूर्णा इत्यादि को भी फतेह कर चुके हैं।
सबसे कम समय में एवरेस्ट पर चढ़ने का रिकॉर्ड नेपाल के लाकपागेलुशेरपा के नाम दर्ज हुआ है। एवरेस्टफतेह करने के अभियान में जहां अधिकांश पर्वतारोहियों को एक सप्ताह तक का समय लगता है, वहीं उन्होंने यह रिकॉर्ड2005 में मात्र 10 घंटे 56 मिनट में एवरेस्ट पर चढ़कर बनाया था। हालांकि अगले ही वर्ष पेम्बादोरजेशेरपा ने दावा किया कि उसने सिर्फ 8 घंटे 10 मिनट में ही एवरेस्टफतेह कर लिया है। चूंकि पेम्बा अपने इस दावे के समर्थन में एवरेस्ट के शिखर पर खींची गई कोई भी फोटो दिखाने में असफल रहे, इसलिए अधिकांश पर्वतारोहियों को उनके दावे पर संदेह हुआ लेकिन फिर भी नेपाल पर्यटन विभाग द्वारा उसके दावे को मान्यता देने के बाद गिनीज बुक में भी इसे दर्ज कर लिया गया किन्तु लाकपागेलुशेरपा ने इसे नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अंततः नवम्बर 2017 में नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने पेम्बादोरजेशेरपा के दावे को खारिज करते हुए 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद लाकपागेलु के दावे को सही ठहराया। इस प्रकार वह एवरेस्ट पर सबसे कम समय में चढ़ने वाले पर्वतारोही बन गए। लाकपा को एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने और उतरने में महज18 घंटे और 20 मिनट का ही समय लगा था। अब उनकी इस उपलब्धि को इसी साल मार्च माह में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्डरिकार्ड्स में भी दर्ज कर लिया गया है। वैसे सबसे पहले 1998 में काजी शेरपा ने बगैर ऑक्सीजनसिलैंडर के 20 घंटे 24 मिनट में एवरेस्ट शिखर पर पहुंचकर सबसे कम समय में चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया था। उसके दो साल बाद यह रिकॉर्ड बाबू छीरीशेरपा ने 16 घंटे 56 मिनट में एवरेस्टफतेह कर अपने नाम किया था।
पिछले साल मई माह में जहां चार महिला नेपाली पत्रकारों ने माउंटएवरेस्ट का सफल आरोहण किया था, वहीं उत्तराखण्ड निवासी बीएसएफ के असिस्टेंडकमांडेंटलवराज सिंह माउंटएवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर सात बार एवरेस्टफतेह करने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले भारतीय पर्वतारोही बने थे तो हरियाणा की 16वर्षीयाशिवांगी पाठक ने एवरेस्टफतेह कर छोटी उम्र में यह कारनामा कर दिखाया था। इसके अलावा हरियाणा के अजीत बजाज और उनकी 24वर्षीया पुत्री दीया बजाज ने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर पिता-पुत्री द्वारा एक साथ एवरेस्टफतेह करने का रिकॉर्ड बनाया था। दूसरी ओर 6 महाद्वीपों के सबसे ऊंचे पर्वतों पर चढ़ने वाले पर्वतारोहीनोबूकाजीकोरिकी8 बार एवरेस्ट पर चढ़ने की नाकाम कोशिशें करने के बाद पिछले साल एवरेस्ट पर 7400 मीटर की ऊंचाई पर जिंदगी की जंग हार गए थे।

*(लेखक 30 वर्षों से पत्रकारिता एवं साहित्य में सक्रिय हैं तथा चार पुस्तकें भी लिख चुके हैं)

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