-गौरव मौर्या, सामाजिक विचारक


कुछ दिन पहले 'संयुक्त राष्ट्र' ने जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर क्या प्रभाव पड़ रहे है इससे सम्बंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। विश्व के सैकड़ो विशेषज्ञों द्वारा तैयार "समरी फॉर पॉलिसीमेकर रिपोर्ट" को लगभग 132 देशों की एक बैठक में मान्यता दी गई। बैठक की अध्यक्षता करने वाले 'रॉबर्ट वाटसन' ने कहा कि पर्यावरण के वनों, महासागरों, भूमि और वायु के दशकों से हो रहे दोहन और उन्हें जहरीला बनाए जाने के कारण हुए बदलावों ने दुनिया को खतरे में डाल दिया है। इस रिपोर्ट में कई अन्य चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। सम्पूर्ण मानव जाति के लोग खूब आर्थिक विकास कर रहे हैं और जलवायु परिवर्तन भी हो रहा है। जिसका नतीजा ये हुआ है कि लगभग 10 लाख अभूतपूर्व प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है और लाखों प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।विशेषज्ञों ने बताया कि इस समय औद्योगिक खेती और मछली पकड़ना जैसे काम प्रजातियों के विलुप्त होने का एक बड़ा कारण है। पिछले कई सौ वर्षों की तुलना में इस समय सौगुना अधिक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है। रिपोर्ट में पाया गया कि उद्योग से निकलने वाला धुँआ, तेल और गैस के जलाने के कारण उत्पन्न हुए ज़हरीले कार्बन के कण से जलवायु परिवर्तन नकारात्मक रूप से हो रहा है,जिससे पर्यावरण और जीव-जंतुओं को नुकसान अधिक हो रहा है। आईपीबीईस की अध्यक्षता कर रहे ब्रिटिश पर्यावरण वैज्ञानिक राॅबर्ट वाटसन का कहना है कि प्रकृति का संरक्षण करना और उसका उपयोग करना तभी संभव होगा।
यूएन की यह रिपोर्ट हमें बताती है कि अभी भी सब कुछ सही करने में देर नहीं हुई है,लेकिन ये तभी संभव है जब हम स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक हर चरण पर इसकी शुरूआत करें। क्रांतिकारी परिवर्तन से हमारा मतलब है कि तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक कारकों में एक मौलिक प्रणाली का पुनर्गठन हो जिसमें प्रतिमान, लक्ष्य और मूल्य शामिल हों। इस रिपोर्ट को स्पष्ट भाषा में जलवायु परिवर्तन पर, संयुक्त राष्ट्र के पैनल को बताया गया, जिसमें कहा गया था कि एक गर्म दुनिया के सबसे विनाशकारी परिणामों को रोकने के लिए आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों की आवश्यकता होगी। अगले साल के आखिर में चीन में होने वाले जैव विविधता पर एक प्रमुख सम्मेलन होने वाला है। जहां इस रिपोर्ट के निष्कर्ष पर वन्यजीवों की रक्षा के लिए बोल्ड एक्शन पर मंजूरी के लिए देशों पर दवाब बढ़ेगा। साथ ही आपको बतातें चलें कि संयुक्त राष्ट्र की संस्था "ग्लोबल असेसमेंट" जिसने ये रिपोर्ट प्रकाशित की है लगभग 15 हजार वैज्ञानिकों का समूह है जिसने इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने के लिए लगातार तीन साल तक समीक्षा की, उसके बाद ये रिपोर्ट आज हमारे सामने है।जो वास्तव में प्रत्येक पृथ्वी वासी के लिए चिंता का विषय है। जैव-परिवर्तन पर यह रिपोर्ट पहली रिपोर्ट नही है जो पर्यावरण के आगामी खतरों को बताती है इससे पहले भी कई संस्थाओं द्वारा ऐसी ही जैव-परिवर्तन से सम्बंधित चिंताजनक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
किसी भी रिपोर्ट का प्रकाशित होकर हमारे सामने आना हमे वर्तमान और भविष्य के खतरों के बारे में सचेत करता है साथ ही इन खतरों से बचने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है। लेकिन आज के लोगों को अपना आर्थिक विकास करने से फुर्सत ही नही,कि वे इन रिपोर्ट पर ध्यान दे और पर्यावरण के बचाव के लिए उपयुक्त कदम उठाएं। हम खुद तो पैसों की लालच में पर्यावरण को नकारतें ही हैं साथ ही आपने बच्चों को भी इसके प्रति उदासीन ही बना देतें है, न तो उसका लगाव जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के प्रति और न ही पर्यावरण के प्रति होता है, उनका ध्यान तो बस हमारे सिखाये हुए आर्थिक विकास की ओर होता है। यदि हम अब नही सुधरे तो आने वाले वक्त में लोगों के पास धन तो पर्याप्त होगा लेकिन न तो खाने-पीने में शुद्धता होगी और न ही हवा में। इसलिए जरूरी है कि हम पर्यावरण के प्रति भी सचेत रहें और सतत विकास के आधार पर अपना विकास करें जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहें और हम भी।


जौनपुर उत्तर प्रदेश
मो. 8317036927

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें