-प्रमेन्द्र शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार
राजस्थान में नए साल में एक बार फिर स्वाइन फ्लू ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। प्रदेश में सर्दी का प्रकोप अभी जारी है। इस वर्ष फरवरी माह में भी ठण्ड कम नहीं हुई है जिससे मौसमी बीमारियां फैलती जा रही है। इनमें स्वाइन फ्लू मुख्य है।
राजस्थान सरकार ने स्वाइन फ्लू की रोकथाम, जागरूकता के लिए गांव स्तर तक अभियान चलाने के साथ उपचार की बेहतर व्यवस्था का दावा किया है। मगर अब तक यह बीमारी पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी है जिससे आम जन भयाक्रांत है। आंकड़ों पर नजर डाले तो इस साल फरवरी के प्रथम सप्ताह तक लगभग 100 लोग इसके शिकार होने के साथ 2500 मरीज इस बीमारी में पॉजीटिव पाए गए है। हर साल देश के आम लोगों में स्वाइन फ्लू का कहर होता है। इस बार नए साल की शुरुआत में ही इस बीमारी ने लोगों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है। इस समय स्वाइन फ्लू का प्रकोप समूचे देश में फेल रहा है। दिल्ली सहित उत्तर भारत के अनेक राज्यों में कई जनों को यह बीमारी लील चुकी है। सैंकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती है। देश में इन दिनों हर तरफ स्वाइन फ्लू की ही चर्चा है। हर व्यक्ति चिंतित है कि कहीं उसे भी स्वाइन फ्लू न हो जाये। देश के कई प्रदेशों में इन दिनों स्वाइन फ्लू का कहर बरपा हुआ है। गरीब से अमीर तक इसकी चपेट में आ रहे है। डॉक्टरों के समझ में नहीं आरहा है कि आखिर इस बीमारी से कैसे निपटे। देश के बड़े अस्पतालों में जाँच और उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध है मगर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह सुविधा सुलभ नहीं होने से मरीजों की अकाल मौत की खबरें आरही है।
स्वाइन फ्लू- वायरल बुखार है जो वायरस से फैलता है। ठंड की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ ही ये ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यदि ठंड के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो तुरंत एच1एन1 की जांच कराएं। जब लोग स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित होते हैं, तो उनके लक्षण आमतौर पर मौसमी इन्फ्लूएंजा के समान ही होते हैं। इसमें बुखार, थकान, और भूख की कमी, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू उन्हीं व्यक्तियों में होता है, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। साथ ही प्रभावित व्यक्ति पहले से बीमार चल रहे हो। अगर घर में कोई सदस्य स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो, घर के बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू की तरह ही होते हैं। इसका असर 15 दिनों तक या उससे अधिक भी रह सकता है। स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा होता है, जिसका समय पर इलाज मुमकिन है। हालांकि ज्यादातर लोग दवा दुकान से सर्दी-जुकाम के लक्षण के अनुसार दवा खा लेते हैं ऐसे में जब स्वाइन फ्लू के वायरस पूरी तरह जकड़ने लगते हैं, तब लोग उसका इलाज कराने अस्पताल में पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से मस्तिष्क, नाक, गला, फेफड़ा, किडनी, लिवर आदि को नुकसान पहुंचाता है। जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक डिजीज जैसे- डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, हाइ या लो ब्लड प्रेशर या अस्थमा आदि हो उन पर इस वायरस का असर ज्यादा खतरनाक होता है. उनका इम्यून सिस्टम पहले से कमजोर होता है और इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण उनकी तबीयत और खराब होने लगती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है। आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।

चैबे भवन ,नाहर गढ़ रोड
जयपुर राजस्थान

 

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