-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार)


भारत की राजनीति बड़ी अजब गजब है। हमारे देश में लोकतान्त्रिक प्रणाली है। लोकतंत्र अर्थात जनता द्वारा जनता के लिए चुना गया शासन। लोकतंत्र भी ऐसा जिसमें देश के सर्वोच्च पद के लिए चुने गए व्यक्ति को गाहे बगाहे आरोपित करने का अधिकार आपको मिल गया है। यानि देश के प्रधानमंत्री को अपशब्द आप जब चाहे बोल सकते है। एक समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के बारे में एक शेरनी सौ लंगूर का चुनावी नारा खूब गूंजा था। आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध विपक्ष एक जूट हो रहा है। होना भी चाहिए, यह उनका संवैधानिक अधिकार है। सरकार का मुखिया गलत रास्ते पर चले तो विपक्ष को जनता को सावचेत करना चाहिए। आज स्थिति इसके ठीक उलट है। विपक्ष कह रहा है सत्तारूढ़ पार्टी देश की संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट भ्रष्ट कर रही है तो सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है जिन लोगों ने देश को लूटा है वे सारे अपनी जान बचाने के लिए एक होने का नाटक कर रहे है ताकि उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र जाँच न हो। विपक्ष का आरोप है ये सारी कवायद लोकसभा चुनाव के नजदीक आने पर ही क्यों हो रही है जिसके जवाब में सरकार कह रही है न्यायालय के आदेश पर ऐसा हो रहा है।
खैर हम यहाँ यह विवेचना कर रहे क्या मोदी के खिलाफ वे ताकतें एक जूट हो रही है जिनके खिलाफ सीबीआई या दूसरी केंद्रीय एजेंसियां विभिन्न घोटालों की जाँच में सलंग्न है। आरोप है की केंद्रीय जाँच एजेंसियों को राज्यों के प्रशासन जाँच में सहयोग नहीं कर रहे है। ताजा प्रकरण प बंगाल में सारदा और नारदा नामक चिटफंड कंपनियों की जाँच से उठ खड़ा है जहाँ पूरे देश की सियासत में जबरदस्त संग्राम छिड़ गया है। सीबीआई की अर्जी पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है की कोलकत्ता के पुलिस कमिश्नर को हर हालत में सीबीआई की पूछताछ में सहयोग करना होगा। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सारदा चिटफंड घोटाले में पूछताछ के लिए कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने साथ ही यह साफ किया राजीव की फिलहाल गिरफ्तारी नहीं होगी। बता दें कि बंगाल की सीएम ममता सीबीआई के खिलाफ तीन दिन से धरने पर बैठीं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उनको झटका लगा है। अदालत ने साथ ही राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को सीबीआई की मानहानि याचिका पर नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। बताया जाता है सीबीआई जब कोलकत्ता के पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने उनके निवास पर गई तो स्थानीय पुलिस ने जाँच अधिकारीयों को न केवल रोका अपितु हिरासत में भी ले लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल अपने कमिशनर को क्लीन चिट देते हुए मोदी और शाह को आरोपित करते हुए धरने पर बैठ गई। इस सियासी ड्रामें से देश में पक्ष और विपक्ष में संवैधानिक संकट को लेकर अप्रिय विवाद शुरू हो गया। सीबीआई को सर्वोच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।
दूसरी तरफ भाजपा और केंद्र सरकार का कहना है जिन नेताओं के खिलाफ सीबीआई और दूसरी जाँच एजेंसियां जाँच कर रही है वे सभी जाँच से बचने के लिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे है। इनमें नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गाँधी, चारा मामले में सजायाप्ता लालू और उसका परिवार सहित खनन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश , आय से अधिक सम्पति अर्जित करने के मामले में बसपा सुप्रीमों मायावती , चिदंबरम परिवार ,चंद्र बाबू नायडू ,जमीन घोटाले में रोबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा शामिल है। पिछले कुछ महीनों में राजनीति के इन महारथियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच कर रही सीबीआई और ईडी ने छापेमारी की। इन सभी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं और इन्हीं मामलों में जांच को आगे बढ़ाते हुए दोनों केन्द्रीय एजेंसियों ने देशभर में इन नेताओं के कई ठिकानों पर छापा मारते हुए साक्ष्य बटोरने की कोशिश की है। इससे ये सभी घबराये हुए है।
विपक्षी नेताओ ने सीबीआई की कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए। वह आरोप लगाते हैं कि काफी लंबे समय से ये मामले ठंडे बस्ते में थे, लेकिन ऐन लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सीबीआई पर विपक्षी दलों और सरकारों को परेशान करने का कोई राजनैतिक दबाव है? तो इनके आरोपों में कितनी सच्चाई है।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता भी सीबीआई के निशाने पर हैं। शारदा, नारद और रोज वैली चिटफंड घोटाले में तृणमूल के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के नाम हैं। इसी महीने अखिलेश के करीबियों के खिलाफ सीबीआई के छापे पड़े। सीबीआई ने इससे पहले मायावती, पी. चिदंबरम और लालू परिवार के सदस्यों पर भी कार्रवाई की है। सीबीआई ने अवैध खनन के मामले में अखिलेश यादव के विधायक रमेश मिश्रा और उनके भाई दिनेश कुमार को आरोपी बनाया। बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के पीछे भी सीबीआई काफी लंबे समय से पड़ी है। ईडी के माध्यम से भी उनकी पत्नी नलिनी और बेटे कार्ति पर शिकंजा कसा गया है। पी. चिदंबरम और कार्ति के नाम एयरसेल-मैक्सिस मामले से जुड़ा है।


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