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-संध्या चतुर्वेदी

उधर से निशा ने आते हुए कहा,आ रही हूँ रुको।
उतने में दूसरी बेल बज जाती हैं।
ओह हो बड़ी जल्दी है लगता हैं।
गेट खोला तो देखा एक डिलवरी बॉय पार्सल हाथ मे थमाते बोला,मैंम साइन किजये।
ठीक है ,कहाँ करना है साइन।
निशा ने पुछा ,मेंम यहाँ और उस ने हाथ मे पैन थमा दिया।
निशा ने साइन कर गेट बंद करके उत्साहित हो पार्सल खोला।
देखा तो उस मे एक चॉकलेट,एक साड़ी और एक चिट्ठी थी।
चॉकलेट देखते ही निशा को समझने में देर नही लगी कि ये अमित ने ही भेजा होगा।
उस ने चमकती आँखों से खत खोला
दिल की धड़कने बढ़ रही थी, जैसे ट्रैन का इंजन धुधकता है और पढ़ने लगी।
खत में लिखा था,
सुनो कल 14 फरवरी हैं ,वेलेंटाइन डे हैं और इस दिन भी तुम मुझसे इतनी दूर हो।जब तक तुम पास थी,कभी महसूस ही नही हुआ कि तुमसे मुझे इतना प्यार हो सकता है।पर उस दिन जब तुम्हे स्टेशन छोड़ ने आया तो जैसे ही गाड़ी में तुम्हे बिठाया,आँखों से अपने आप आँसुओ की बरसात होने लगी।मैने तुम्हे फोन भी लगाया था।पर शायद तुम्हारे नेटवर्क नही थे तो बात नही हो पाई।
मैं तुम्हे इस साड़ी में देखना चाहता हूँ और तुम्हारी पसंद की डेरी मिल्क सिल्क भी है।
जानता हूँ कि तुम वहाँ से भी ये खरीद सकती थी।पर उस मे मेरा प्यार ना होता।
हैप्पी वेलेंटाइन डे डिअर।
तुम मेरा पहला प्यार तो नही,पर मेरी जिंदगी हो ।
मेरे दिल की धड़कन हो तो ।तुम सब जानती ही हो।
ये दिखावे करना मुझे नही आता।बस इतना जानता हूँ कि प्यार जज्बात से होता हैं और जिंदगी जिम्मेदारी से,तो अपना ख्याल रखना।
मिलना तो हीर और रांझा की किस्मत में भी नही था।
खत पढ़ते- पढ़ते निशा की आंखें भींग चुकी थी।
वो भी जानती थी कि अमित उस की जिंदगी नही सिर्फ प्यार है और प्यार दिल में होता हैं।
साथ रहना जरूरी तो नहीं।।

अहमदाबाद, गुजरात

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