*सुभाष चन्दर,गिरीश पंकज,आलोक पुराणिक,राम किशोर उपाध्याय आदि व्यंग्य पुरोधाओ की उपस्थिति में संपन्न हुआ व्यंग्य की महा पंचायत

नई दिल्ली मुंबई (हम हिंदुस्तानी)- हिन्दी भवन नई दिल्ली में 11 जनवरी 2018 को संध्या 4:30 बजे से माध्यम साहित्य संस्थान के तात्वाधान एवं व्यंग्य श्री सुभाष चन्दर की अध्यक्षता में ‘व्यंग्य की महापंचायत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में 6 पुस्तकों एवं दो पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया। जिसमें विनोद कुमार विक्की के अतिथि संपादक में प्रकाशित ‘‘अट्टहास’’ का जनवरी पूर्वोत्तर/पूर्वांचल व्यंग्य विशेषांक और उनका स्वयं का व्यंग्य संग्रह ‘‘हास्य-व्यंग्य की भेलपूरी’’ भी शामिल था। इसी कड़ी में डाॅ. ममता मेहता का व्यंग्य संग्रह ‘‘धोबी का व्यंग्य पाट‘‘ और डाॅ. स्नेहलता पाठक का व्यंग्य संग्रह ‘‘सच बोले कौवा काटे’’ का भी लोकार्पण किया गया। साथ ही साथ सुश्री वीना सिंह की पुस्तक ‘‘बेवजह यूं ही’’ और डाॅ. संगीता की पुस्तक ‘‘तुम्हारे लिये’’,राम किशोर उपाध्याय के संपादन वाली पत्रिका उत्कर्ष की ओर एवं अंशु प्रधान की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
विदित हो कि माध्यम साहित्यिक संस्थान की स्थापना 54 वर्ष पूर्व प्रसिद्ध कवि डाॅ. हरिवंश राय बच्चन, डाॅ. शिव मंगल सिंह सुमन, डाॅ. विद्या निवास मिश्र, ठाकुर प्रसाद सिंह, डाॅ. चन्द्र देव सिंह और वर्तमान महासचिव श्री अनूप श्रीवास्तव ने की थी।
इस महा पंचायत मे एमपी,छत्तीसगढ़,चंडीगढ़,यूपी,उतराखण्ड,बिहार सहित दिल्ली के कई दिग्गज व्यंग्यकारों की उपस्थिति देखने को मिली।
मंचस्थ अध्यक्ष सुभाष चन्दर एवं विशिष्ट अतिथि अरूण अर्णव खरे,गुरमीत बेदी,आलोक पुराणिक,गिरीश पंकज,श्रवण कुमार उर्मलिया,राजशेखर चौबे के अलावा अनूप श्रीवास्तव, अंशुप्रधान, आलोक खरे,निर्मल गुप्त,सुनील जैन राही,खगड़िया के गज़लकार शिवकुमार सुमन,अवधेश्वर प्रसाद सिंह,राजेश कुमार,मेट्रो रेलवे राजभाषा अधिकारी डाॅ राजाराम यादव,ममता मेहता,स्नेह लता पाठक,डाॅ.संगीता,शिल्पा श्रीवास्तव,राजशेखर भट्ट,विनोद कुमार विक्की,संतराम पांडेय,कैलाश झा किंकर,सुधांशु माथुर, अंजु निगम (संयुक्त सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) , ओम प्रकाश शुक्ल
सहित दर्जनों व्यंग्यकार व साहित्यकार श्रोता के रूप में उपस्थित थे।
अतिथियों का सम्मान शिल्पा सुधांशु,विनोद कुमार विक्की,राम किशोर उपाध्याय ने किया।सम्मान समारोह में शिल्पा सुधांशु की नन्ही सुपुत्री परी की भूमिका भी सराहनीय रही।
‘व्यंग्य की महापंचायत’’ कार्यक्रम में सभी वरिष्ठ व्यंग्यकारों द्वारा चर्चा-परिचर्चा का दौर चला। जिसमें ‘‘व्यंग्य के मानक और संप्रेषणीयता की चुनौती’’ पर चर्चा की गयी। इस चर्चा में श्री सुभाष चन्दर, श्री अरविंद तिवारी, श्री गुरमीत बेदी, श्री आलोक पुराणिक, श्री राजेन्द्र वर्मा, श्री रामकिशोर उपाध्याय, श्री अनूप श्रीवास्तव, डाॅ. स्नेहलता पाठक, श्री महेन्द्र ठाकुर , श्री राजशेखर चैबे, श्री अरूण अर्णव खरे, श्री अरूण कुमार उर्मेलिया, श्री गिरीश पंकज, श्री निर्मण गुप्त, सुश्री वीणा सिंह और श्री विनोद कुमार विक्की ने भाग लिया। इस परिचर्चा में व्यंग्य के गिरते स्तर और पाठकों के घटते स्तर गहन मंथन किया गया। व्यंग्य के मानकों और व्यंग्य विधा के बदलते स्वरूप पर भी सभी व्यंग्यकारों ने अपनी-अपनी टिप्पणी से अनेक नये तथ्य उजागर किये। जाहिर है कि विसंगतियों से व्यंग्य पैदा होता है, लेकिन अब वर्तमान समय और नये लेखकों की नयी मंत्रणा से व्यंग्य स्वयं विसंगति बनता जा रहा है। जिसके उपचार की आवश्यकता है और नये व्यंग्यकारों को पठन-पाठन, चिंतन-मनन करने की जरूरत है।
सुभाष चन्दर ने व्यंग्य विमर्श में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इन दिनों छपने की होड़ में व्यंग्य कार अपनी मौलिकता खो रहे है। महज कुछ पत्र पत्रिकाओं में छप जाना किसी भी कसौटी से आपके व्यंग्यकार होने का प्रमाण नहीं है।उन्हें पहले व्यंग्य को जीना व समझना चाहिए।अरविंद तिवारी ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।
गिरीश पंकज ने स्पष्ट तौर पर कहा कि व्यंग्य के नाम पर आने वाली पुस्तकों में अधिकांश रचनाएँ व्यंग्य शून्य व सपाटबयानी होती है।स्नेह लता पाठक ने व्यंग्य साहित्य में महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की तो महिला की अधिकाधिक प्रोत्साहन की वकालत भी की।महेन्द्र ठाकुर ने महिलाओं के नाम पर सहानूभूति तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बेटे को मार दो।उन्होंने कहा कि हर जगह स्त्रियों,माँ आदि की अहमियत व महत्ता बताई जाती है और पुरुष या पिता की जयकार कोई नहीं करता। आलोक पुराणिक ने व्यंग्यकारों को ना केवल राष्ट्रीय परिदृश्य अपितु अंतराष्ट्रीय जानकारी रखने की नसीहत दी ताकि रचना धर्मिता में कोई चूक ना रह जाए।
राजेंद्र वर्मा ने व्यंग्य के प्रेषण व संप्रेषण पर काफी बारीकी से मुद्दे को उठाया।
अरूण अर्णव खरे एवं श्रवण कुमार उर्मलिया ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि व्यंग्य का कोई भी मानक सुनिश्चित नहीं किया जा सकता बस व्यंग्यकार की सोच ही व्यंग्य का सृजन कर सकती हैं।वीना सिंह,गुरमीत बेदी,राजशेखर चौबे, निर्मल गुप्त ने भी संक्षेप में व्यंग्य के मानक व संप्रेषणीयता पर चर्चा की तो विनोद कुमार विक्की ने कामचलाऊ लेखक संघ पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
इस मौके पर व्यंग्य साहित्य जगत के सात साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।
मेरठ के संतराम पाण्डेय हिन्दी साहित्य संवर्धन एवं प्रोत्साहन हेतु तो देहरादून के राज शेखर भट्ट युवा संपादक सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया।
बिहार के विनोद कुमार विक्की को युवा व्यंग्यकार सारस्वत सम्मान से नवाजा गया।
पिथौरागढ़ के ललित शौर्य नवलेखन हेतु तो बिहार के कैलाश झा किंकर को अंगिका भाषा में व्यंग्य लेखन हेतु सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया दिल्ली की शशि पाण्डेय को युवा महिला व्यंग्यकार हेतु सारस्वत सम्मान एवं अर्चना चतुर्वेदी को सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया। ललित शौर्य दुर्घटना में चोटिल होने की वजह से एवं अर्चना चतुर्वेदी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाएं।
मंच का संचालन श्री राम किशोर उपाध्याय ने एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री अनूप श्रीवास्तव ने किया।

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें