- देवेंद्रराज सुथार
छमिया लोमड़ी ने न्यू ईयर की पार्टी के लिए जंगल के सभी दोस्तों को आमंत्रित किया। लेकिन, उसने डबू हाथी को आमंत्रण नहीं भिजवाया क्योंकि डबू हाथी से छमिया लोमड़ी जलती थी। डबू को वो अकड़ू समझती थी जबकि डबू बड़ा मस्तमौला और दलायु था। जंगल के दोस्त फटकू बंदर, चिंकू हिरण, भिकू भालू, कालू कौआ, चंदू तोता, शेरू कुत्ता सभी पार्टी के लिए छमिया के घर जाने लगे।
मिक्कू खरगोश ने अपने पड़ोसी डबू हाथी से कहा, 'दादा, आप पार्टी में नहीं चल रहे हैं क्या, अभी तक तैयार नहीं हुए?' डबू बेचारा उदास होकर बोला, 'यार मिक्कू मुझे तो छमिया ने आमंत्रित ही नहीं किया। बिना आमंत्रण के तो मैं कैसे आ जाऊं।' मिक्कू से अपने प्रिय मित्र डबू की हालत देखी नहीं गई और उसने भी पार्टी में जाने से इंकार कर दिया। लेकिन, डबू ने समझाते हुए कहा, 'नहीं मिक्कू तुम मेरे लिए अपना मूड खराब मत करो, तुम जाओ तुम्हें मेरी कसम।' मिक्कू डबू की कसम के आगे कुछ बोल नहीं पाया और बेमन से पार्टी में चला गया।
छमिया लोमड़ी ने बड़े ही अनोखे अंदाज में सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया। सभी दोस्त एक दूसरे से गले मिलें और तारीफ करने लगे। हीरा कुत्ता ने फटकू बंदर से कहा, 'यार फटकू तुमने जो यह टोपी पहनी है इसमें तो तुम बिलकुल माइकल जैक्सन लग रहे हों।' इतना सुनते ही फटकू ने भी कह डाला, 'यार हीरा तुम भी इस काले चश्मे में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन लग रहो हों।' तभी डीजे की धुन बजने लगीं और जंगल के सभी जानवर नाचने लगे। छमिया लोमड़ी ने नागिन डांस कर सबकी खूब वाहवाही लूटी। सभी दोस्तों ने जमकर पार्टी में मिठाइयों का आनंद लिया। लेकिन, बेचारे मिक्कू खरगोश को अपने यार डबू की याद सताने लगीं और वह पार्टी को बीच में ही छोड़कर घर आ गया।
न्यू ईयर पार्टी के दो दिन बाद ही जंगल आग की लपटों के साथ धधक कर जलने लगा। सभी जानवर अपनी जान बचाकर भागने लगे। तभी फटकू बंदर डबू के पास रोता हुआ आया और बोला, 'दादा जंगल में आग लगी है और आप यहां नाश्ता कर रहे हैं। एक ओर नदी अपने उफान पर है, तो दूसरी ओर आग अपने आगोश में लेने के लिए बेसब्र होए जा रही है।' तभी चिंकू हिरण, भिकू भालू, हीरा कुत्ता भी आकर डबू के सामने दुखी होकर रोने लगे।
डबू ने कहा, 'टेंशन तुम लो, यारों। तुम सब मेरी पीठ पर बैठ जाना और हम नदी पार कर लेंगे।' डबू अपने दोस्तों को पीठ पर बैठाकर नदी पार करा था तभी उसे छमिया लोमड़ी का ख्याल आया। उसने अपने दोस्तों से पूछते हुए कहा, 'छमिया कहीं नजर नहीं आ रही है।' तभी मिक्कू ने छमिया को पेड़ के पीछे छुपते हुए देखा। डबू ने आवाज लगाई, 'बहिन छमिया जल्दी आ जाओ वरना जलकर भस्म हो जाऊंगी।' छमिया अपनी गलती के लिए डबू के पास आकर फूट-फूटकर रोने लगीं। डबू ने बड़ा दिल रखकर उसे माफ कर दिया और जंगल के सभी दोस्त डबू की पीठ पर सवार होकर नदी पार करने लगे।


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