-डॉ प्रदीप उपाध्याय

हाल ही में पड़ोसी मुल्क के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ सम्बन्धों में सुधार के मुद्दे पर उनकी सरकार, सेना और उनके देश की सभी राजनीतिक पार्टियाँ एकमत हैं।दोनों देशों के सामने एक ही समस्या है,वह है कश्मीर।वाह!क्या बात कही है वजीरे आला ने।अब एक बात तो पक्की हो गई कि उनके लिए गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा, पिछड़ापन जैसी बातें समस्या नहीं है।मजहब के नाम पर लड़ाई समस्या नहीं है। आतंकवाद और आतंकवादी गतिविधियाँ समस्या नहीं है।देश का खाली खजाना समस्या नहीं है।खाली कटोरा लेकर इधर-उधर जाने पर धुत्कार के अलावा कुछ न मिलना भी समस्या नहीं है।
एकमात्र समस्या है तो बस कश्मीर समस्या है।उसकी यानी कश्मीर की अपनी मर्जी क्या है, यह समस्या नहीं है।समस्या यह है कि वजीरे आला और उनकी सेना के मनोनुकूल कुछ नहीं हो रहा है।बड़ी समस्या यही है।और इसी बात पर वे एकमत हैं।अच्छा है हम चाँद पर पहले नहीं पहुँचे वरना कश्मीर एकमात्र समस्या नहीं होती।एकमात्र समस्या चाँद होता।वे कहते कि चाँद तो हमारा है।चाँद के मामले में सेना भी उनके साथ होती।उनके देश की पॉलिटिकल पार्टीज भी उनके साथ होती और वे सारी दुनिया में इसी बात का ढोल पिटते कि चाँद हमारा है और यह हमारा दुश्मन पड़ोसी कैसे वहाँ पहुँच गया।यानी तब की स्थिति में कश्मीर नहीं, चाँद दोनों देशों के दरमियान एकमात्र समस्या होता।
बहरहाल, उनका कहना तो सही है कि अगर आदमी चाँद पर चल सकता है तो कौन सी समस्याएँ हैं जिनका हल नहीं किया जा सकता तो भाई मियां अब क्रिकेट को तो भूल ही जाना चाहिए और इधर कश्मीर को याद रखने से क्या हासिल!यदि कश्मीर एकमात्र समस्या है तो उसपर कश्मीरियों को सोचने-विचारने देना चाहिए।स्वयं क्यों दाल-भात में मूसलचंद बने बैठे हैं और इसमें अपना पेट दुखाने से कुछ हांसिल भी नहीं।वैसे भी इस एक समस्या को अगर वे भूला दें तो उन्हें मालूम पड़ेगा कि देशभर में कितनी समस्या मुँह बायें खड़ी हैं!
वैसे फरमाया तो सही है जनाबे आली ने।वे क्या उनके पूर्ववर्ती भी तो सदैव एकमत रहे हैं,पड़ोसी के साथ सम्बन्धों में सुधार करने के मुद्दे पर!जैसा वे मानते हैं वैसा ही उनके पूर्ववर्ती भी मानते आये हैं कि दोनों के बीच एक ही समस्या है और वह है कश्मीर।लेकिन मानने से क्या होता है।मान लेने से केवल यही हो सकता है कि समस्या का भ्रम पैदा हो सकता है।एक कश्मीर ही है जिसने उनका दिन का चैन और रातों की नींद हराम कर रखी है।
उन्होंने कहा है तो ठीक ही कहा होगा कि इंसान चाँद पर जा चुका है और हम एक कश्मीर पर ही अटके हुए हैं।चलिए, समय रहते उन्हें समझ तो आई।वैसे चाँद पर जाना इंसान ने आसान बना दिया है और भी हैरतअंगेज कारनामे वह कर ही लेगा और कर ही रहा है लेकिन उनके लिए कश्मीर की बात भूला पाना आसान नहीं लगती।अब वे इसी पसोपेश में कि अपने घर के हालात सुधारें कि पड़ोसी के आगे बढ़ते कदमों में टांग फंसाए!आखिर पड़ोसी हैं तो पड़ोसी धर्म तो निभाना ही पड़ेगा।अभी चाँद बहुत दूर है ,शायद इसीलिये अटके पड़े हैं!हमें भी चाँद पर पहुँचकर एकमात्र नई समस्या उनके पेशे खिदमत कर देना चाहिए!वे तो वहाँ पहुँचने से रहे।


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