महिला क्रिकेट में इतिहास रचती मिताली राज - योगेश कुमार गोयल (राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार) खेल एक और कप्तान दो, एक पुरूष क्रिकेट टीम का तो दूसरी महिला क्रिकेट टीम की और अगर बात उपलब्धियों की करें तो दोनों का खेल बेमिसाल हैं और दोनों के ही खाते में ढ़ेरों रिकॉर्ड दर्ज हैं लेकिन इसे पितृसत्तात्मक सोच कहें या कुछ और कि पुरूष टीम के कप्तान सदैव सुर्खियों में बने रहते हैं, उन्हें खेल प्रेमियों के साथ-साथ खेल संघों द्वारा भी सिर-आंखों पर बिठाया जाता रहा है मगर महिला कप्तान के मामले में ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं पुरूष टीम के कप्तान विराट कोहली और महिला टीम की कप्तान मिताली दोराई राज की, जिन्हें ‘लेडी सचिन’ भी कहा जाता है। दरअसल मिताली की कुछ उपलब्धियां तो ऐसी हैं कि कुछ रिकॉर्डों के मामले में उन्होंने विराट कोहली सहित दूसरे पुरूष खिलाडि़यों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में मिताली ने अंतर्राष्ट्रीय टी-20 मैचों में रन बनाने के मामले में रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 87 टी-20 मुकाबलों में 2007 रन बनाए हैं जबकि कप्तान विराट कोहली 72 पारियों में अब तक 2102 रन बना सके हैं लेकिन मिताली 84 टी-20 मैचों में 2232 रन बनाकर सभी को पीछे छोड़ चुकी हैं। हालांकि हाल ही में छठे महिला टी-20 विश्व कप के भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल से मिताली को बाहर रखे जाने को लेकर टीम की कप्तान हरमनप्रीत, टीम के मैनेजमेंट को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। इसी वर्ष जून माह में मिताली ने कुआलालंपुर में टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच खेले गए टी-20 महिला एशिया कप में 2000 रन बनाकर एक इतिहास रच डाला था क्योंकि इसके साथ ही वह इतने रन बनाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बन गईं थी। यह रिकॉर्ड भारत के लिए ऐतिहासिक इसलिए भी था क्योंकि उस समय तक विराट हों या रोहित शर्मा अथवा सुरेश रैना या धोनी, कोई भी पुरुष क्रिकेटर इस रिकॉर्ड की बराबरी नहीं कर सका था किन्तु फिर भी आश्चर्य की बात है कि महिला क्रिकेट में खेल प्रेमियों की कोई खास दिलचस्पी नजर नहीं आती और न ही महिला क्रिकेट को लोकप्रियता दिलाने के लिए खेल विभागों द्वारा कोई कारगर कदम उठाए जाते हैं। बीसीसीआई द्वारा दोनों टीमों के लिए तय मानदेयों में बड़ा अंतर देखने को मिलता रहा है लेकिन भारतीय महिला टीम के लिए यह गर्व की बात है कि तमाम उपेक्षाओं के बावजूद वह अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। महिला एशिया कप टी-20 टूर्नामेंट के पहले ही मैच में मिताली की कप्तानी में भारतीय टीम ने पूरी मलेशियाई टीम को सिर्फ 13.4 ओवर में महज 27 रनों पर ही ढ़ेर कर दिया था और 142 रनों के बहुत बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इसी मैच में मिताली ने 69 गेंदों पर नाबाद 97 रनों की पारी खेली थी, जिसके लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया था लेकिन आप जानकर चौंक जाएंगे कि इसके लिए उन्हें पुरस्कार स्वरूप चैक मिला महज 17 हजार रुपये का जबकि यदि यही खिताब भारतीय पुरूष टीम के किसी खिलाड़ी को मिलता तो इसी पुरस्कार की राशि होती करीब एक लाख साठ हजार रुपये। हालांकि इसके बाद सोशल मीडिया पर खेल प्रेमियों ने बीसीसीआई के प्रति इसके लिए अपनी खूब भड़ास भी निकाली लेकिन बीसीसीआई के दोयम रवैये में अभी तक कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। वास्तविकता यही है कि विपरीत हालातों के बावजूद तमाम तरह के कीर्तिमान स्थापित करने वाली महिला क्रिकेटरों को वो स्थान और सम्मान नहीं मिलता, जो पुरूष टीम के खिलाडि़यों को मिलता है। इसके बावजूद मिताली राज के अलावा झूलन गोस्वामी, स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर, पूनम राउत इत्यादि महिला क्रिकेट टीम के कई ऐसे सितारे हैं, जिन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी है। झूलन गोस्वामी कुल 67 टी-20 मैचों में 56 विकेट चटकाने वाली पहली भारतीय गेंदबाज और 200 वनडे विकेट चटकाने वाली विश्व की इकलौती महिला क्रिकेटर हैं। 2017 के महिला वर्ल्ड कप फाइनल में भले ही भारत मेजबान इंग्लैंड से सिर्फ 9 रनों से हारकर विश्व कप से चूक गया था किन्तु जिस तरह की परिस्थितियों में भारतीय टीम ने अपने खेल की अनूठी शैली से हर किसी को मंत्रमुग्ध किया था, वह काबिले तारीफ था। मिताली की कप्तानी वाली टीम ने आईसीसी महिला विश्व कप 2017 में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया था। अगर बात करें भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली की तो वह पिछले 19 वर्षों से इस टीम का अहम हिस्सा हैं और इस दौरान उन्होंने अनेक रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। वह जहां अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली और एकदिवसीय मैचों में 6000 रनों से अधिक रन बनाने वाली विश्व की पहली महिला क्रिकेटर हैं, वहीं टी-20 में 2000 रनों के आंकड़े को पार करने वाली विश्व की सातवीं महिला क्रिकेटर भी हैं। इसके अलावा एकदिवसीय मैचों में सर्वाधिक हॉफ सेंचुरी और लगातार कई अर्द्धशतक ठोकने का रिकॉर्ड भी मिताली के ही नाम है। वह टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाली पहली महिला खिलाड़ी भी हैं। आईसीसी वर्ल्ड रैंकिंग में मिताली 2010, 2011 तथा 2012 में प्रथम स्थान पर रही हैं। मूल रूप से तमिल परिवार से संबंध रखने वाली हैदराबाद की मिताली का जन्म 3 दिसम्बर 1982 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था और 10 साल की उम्र में ही उसने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया तथा 17 साल की उम्र में वह भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गई थी। 26 जून 1999 को आयरलैंड के साथ हुए मैच से वनडे में मिताली के कैरियर का शानदार आगाज हुआ था, जब उन्होंने 114 रनों की नाबाद पारी खेली थी और तब से लेकर अभी तक उन्होंने कई कीर्तिमान भारत की झोली में डाले हैं। 14 जनवरी 2002 को इंग्लैंड के साथ खेले गए मैच से मिताली के टेस्ट कैरियर की शुरूआत हुई, जिसमें वह बिना खाता खोले पैवेलियन लौट गई थीं। 2005 में दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्व कप में मिताली की कप्तानी में भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा था लेकिन अगले ही साल 2006 में मिताली की ही कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड को उसी की जमीन पर धूल चटाते हुए एशिया कप अपने नाम किया था। मिताली ने बतौर कप्तान सितम्बर माह में अपने 118वें वनडे मैच में महिला क्रिकेट के इतिहास में वनडे में सर्वाधिक मैचों में कप्तानी करने वाली इंग्लैंड की पूर्व कप्तान चार्लोट एडवर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए एक और नया रिकॉर्ड कायम किया। चार्लोट ने जहां कुल 117 मैचों में कप्तानी की थी, वहीं मिताली इस रिकॉर्ड को तोड़कर आगे बढ़ चुकी हैं और इससे भी बड़ी बात यह है कि उनके नेतृत्व में खेले गए इन वनडे मैचों में से भारतीय टीम को 70 से भी अधिक मैचों में जीत हासिल हुई है। मिताली अपने वनडे कैरियर में अब तक 197 मैचों में 51.17 के औसत से 6550 रन बनाकर और 7 शतक तथा 51 अर्द्धशतक लगाकर इतिहास रच चुकी हैं। कुल 77 टी-20 मैचों की 74 पारियों में उन्होंने 38.6 की औसत से 2123 रन बनाए हैं, टी-20 में उनका बेहतरीन स्कोर 97 है और इस दौरान उन्होंने 15 अर्धशतक बनाए। सितम्बर माह में ही मिताली की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वनडे मैच में सीरीज 2-1 से अपने नाम कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी, जिसमें मिताली ने श्रीलंका के खिलाफ 125 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए अपने वनडे कैरियर का सबसे बड़ा स्कोर बनाने में सफलता हासिल की। उन्होंने 143 गेंदों पर न केवल 125 रनों की बड़ी पारी खेली बल्कि 14 चौके और एक छक्का भी लगाया। बहरहाल, महिला क्रिकेटरों की अनेक उपलब्धियों के बावजूद उनकी उपेक्षा से आहत मिताली कहती हैं कि महिलाओं के लिए क्रिकेट में अपार संभावनाएं हैं और देश में महिला खिलाडि़यों की कमी भी नहीं है, बस, जरूरत है उन्हें आगे बढ़ाने और मौके उपलब्ध कराने की। मिताली का कहना है कि लड़कियों को खेलों में पहचान दिलाने के लिए हर स्तर पर पहल की जरूरत है और इसके लिए जरूरी है कि उन्हें खेलों में भागीदारी करने दें। उनका कहना है कि एक मिताली से काम नहीं चलेगा बल्कि अगर हर घर से एक मिताली निकले तो दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बन जाएगी लेकिन इसके लिए बेटियों के अभिभावकों को भी बेटा-बेटी में भेदभाव की सोच बदलकर आगे आना होगा क्योंकि हमारे समाज में बेटियों की परवरिश को लेकर समाज की सोच अभी भी पूरी तरह बदली नहीं है। 114, गली नं. 6, वेस्ट गोपाल नगर, एम. डी. मार्ग, नजफगढ़, नई दिल्ली-110043. फोन: 9416740584, 9034304041. ई मेल: mediacaregroup@gmail.com

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