-गौरव मौर्या हठ और बचपन का बहुत गहरा सम्बन्ध होता है।बाल्यवस्था में ये दोनों सामान्यतः एक दूसरे के पूरक होतें हैं। इसीलिए कहा जाता है कि बालहठ से बड़ा कोई हठ नही होता अतः इसी हठ के कारण बच्चों के मन में जो भी चाहत उठती है,उसे वे पूरा करना चाहतें हैं।आजकल बच्चों में विभिन्न प्रकार की कामनाएं उभारने के अनेकोनेक साधन उपलब्ध हैं,उनकी पूर्ति की व्यग्रता बालमन में एक हठ का रूप धारण कर लेती है। इस उम्र में परिपक्वता का आभाव होता है इसलिए वे उन चीजों के लिए भी जिद करतें है जो वस्तु उनके उपयोग की है ही नही और यह सब वे केवल बालसुलभ चपलता के कारण करतें है। एक दो दशक पहले और आज के बालकों में और उनकी हठ वाली सोच में बहुत परिवर्तन हुए हैं। आज के बच्चों की इच्छाएं ही बदल गयी हैं कल तक के जो बच्चे लकड़ी के खिलौनों से संतुष्ट हो जाया करते थे,आज वे बच्चे मंहगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्राप्त किये बिना सन्तुष्ट नही होते हैं।बच्चों के बार बार मांगने के दबाव में आकर यदि माता पिता उनकी यह आकांक्षा एक बार पूरी कर भी दे लेकिन धीरे धीरे उनकी बढ़ती जिद एवं माता-पिता की उसे पूरी न कर पाने की असमर्थता परिवार में एक अनचाहे तनाव को जन्म देती है,जिससे आज लगभग प्रत्येक परिवार जूझता नजर आ रहा है।इस कलयुग में भौतिक संस्कृति की बढ़ती चकाचौंध नें हमारे समाज को बुरी तरह से प्रभावित किया है और एक तरह की "दिखावा संस्कृति"को जन्म दिया है जो केवल दूसरों को दिखाने के लिए और धन न होते हुए भी उसके प्रदर्शन के लिए है। हमारे बच्चे जैसे ही थोड़े बड़े होते हैं और स्कूल जाने लगतें हैं तो उनका अपनी ही उम्र के दूसरे बच्चों से सम्पर्क होता है।यदि उनके सहपाठियों के पास कोई ऐसी वस्तु है जो उन्हें आकर्षित करती है तो वे उसे पाने के लिए जिद करने लगते हैं।भले ही उस वस्तु की जरूरत उन्हें न हो लेकिन अपने सहपाठी के बराबर दिखने के लिए वे भी उस वस्तु को पाना चाहतें हैं।इसी कारण आज के बच्चों में आवश्यक चीजों का उतना महत्व नहीं रहा जितना दिखावे की चीज का हो गया है।आज हमारे सामाजिक और पारिवारिक परिवेश में अनेक ऐसी घटनाएं होने लगी हैं जो बच्चों में दिखावे की सोच के बीज बो रही हैं।यहां तक की बच्चे स्कूलों में भी भेदभावपूर्ण व्यवहार करने लगें हैं। स्कूलों में भी बच्चे ऐसे बच्चों के साथ ज्यादा रहते है ,जिनके पास अच्छी किताबे ,कपड़े ,खिलौने और कीमती सामान होतें है। मीडिया टीवी का भी बच्चों के जीवन मे गलत प्रभाव ज्यादा पड़ता है वे इनसे काम की चीज कर लेकिन गलत चीजे ज्यादा सीखतें हैं। बच्चों की जिद को यदि अभिभावक नजरअंदाज करते है या मना करते है तो वे नाराज होकर कोई भी अनुचित कदम उठा लेतें है जैसे घर छोड़ना,भोजन छोड़ना, खुद को कमरे में बंद कर लेना यहां तक कि आत्महत्या भी करने की कोशिश करतें हैं। ऐसे अनेकों उदाहरण हमे अपने आस पास देखने को मिल जातें हैं। आज इन्ही हरकतों के डर से लगभग सभी अभिभाक जूझते नजर आ रहें हैं। कुछ अभिभाक तो बच्चों की जिद और रोने से बचने के लिए उनकी हर मांग पूरी कर देतें है और यही बच्चे आगे चलकर उनके लिए समस्या बन जातें है। अब प्रश्न आता है कि आखिर बच्चों और अभिभावकों की इस वैश्विक समस्या से कैसे बचा जाए,आखिर इसकी शुरुआत कहां से और कैसे की जाय? तो इसका जवाब है कि प्रत्येक माता पिता को अपने बच्चों के लिए अन्य कामों से वक्त निकालकर उन्हें बचपन से ही समझदार बनाने और उन्हें उनकी सीमाओं से परिचित करवाने के लिए प्रयास करना चाहिए। बच्चों को बचपन से ही इस बात का बोध करवाना आवश्यक है कि उनके परिवार को परिस्थितियां क्या हैं।हर छोटी छोटी बातों को ध्यान में रखकर उनका पालन पोषण करना चाहिए। बच्चों के आगे बढ़ने में माता पिता जो सहयोग कर सकतें है उन्हें अवश्य करना चाहिए,लेकिन इतना भी नही करना चाहिए कि बच्चे स्वम् प्रयास ही न करें और अपने अभिभावकों पर निर्भर हो जाय। उन्हें जिद और जरूरत के बीच का फर्क बचपन से ही समझना चाहिए। बच्चे तभी समझदार बनेंगे जब वे जिद और जरूरत मध्य का अंतर समझेंगे। वास्तव में देखा जाय तो आज का युग आर्थिक युग है प्रत्येक मनुष्य केवल धन प्राप्ति के विषय मे सोचता है। समाज,परिवार और मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन मे होने वाली अधिकतर समस्याओं की जड़ धन है। माता पिता दोनो नौकरी वाले, बच्चों को दाई के भरोसे छोड़कर नौकरी करने चले जातें है और बच्चों के भविष्य को लेकर अनेक अच्छे सपने संजोते हैं कि मेरा बच्चा बड़ा होकर डॉक्टर,इंजीनियरिंग,आईएएस पीसीएस बनेगा और बहुत पैसे कमाएगा।लेकिन कोई ये नही सोचता कि मेरा बच्चा बड़ा होकर एक अच्छा इंसान बनेगा। इसलिए जरूरत है समाज मे एक ऐसी सोच विकसित करने की जो दिखावे और धन के प्रति न होकर सभ्यता,संस्कार और अच्छाई के प्रति हो।तभी हम स्वम् में सकारात्मक बदलाव ला पाएंगे और आपने बच्चों को नकारात्मकता से परे बेहतर भविष्य दे पाएंगे। __________________ सामाजिक विचारक, जौनपुर,उत्तर प्रदेश 8317036927

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