-अभिषेक राज शर्मा

राजनीति पर चर्चा हो रही हो तभी जेहन में विचारो की धारा बहने लगती हैं,
मानो जैसे विचार विमर्श के बिना राजनीति सूना सा लगता है।
विचारधारा राजनीति का फैशन बन गया जो बडे़ पोस्टर और प्रलाप द्वारा दिखाई देता है, जब विचारधारा की सत्ता हो तब परवाह नही होती लेकिन जब आप सत्ता से बाहर हो तब विचारधारा उमड़कर शरीर को तोड़मरोड़ करती है।
विचारधारा से समझ आता कि पार्टी के विकास का रास्ता जो बडंल भरके बोरी में भर जाये।
विचारधारा का रास्ता बेहद सकरा होता मगर देखो नेताओ ने हाईवे बनाकर रख दिया, जब चाहा विचारधारा को दौडा़कर हालत पतली कर लेते है।
विचारधारा की मोटी किताब धूल से खुद को बचाने की जंग लड़ रही है मानो कह रही हो "हे मनुष्य तेरे भला के लिये मैं अपनी हाड़-मांस सब कुर्बान कर रही हूं।
फिर क्या कुर्बानी का नाम सुनकर बडे़ लोग टूट पड़ते है!
विचारधारा नेताओ का आभूषण है जो उनका अंलकार करती है, तगमा देता कि फला विचारधारा के सुरछाकर्मी है मानो इनके गोंद में विचारधारा सुरछित आराम कर रही है।
कोई विचारधारा को तेल लेने भेजता है,कोई विचारधारा को ठोकर मारता है।
कल उस पार्टी में विचारधारा को ढो रहे थे,
लडा़ई लड़ रहे मानो ये जनता की हर समस्या को चुटकी में समाप्त कर देगें।मगर किसी बात को लेकर बात बिगड़ गई,
फिर जिस विचारधारा से करोडो़ की कमाई किया हो उसी विचारधारा से आपकी दम घुटने लगता है।
एक नेता मित्र ने अपने पार्टी कार्यालय पर आंमत्रित किया,
उनके विचारधारा के गुरू का जन्मदिन पर हमला करना था कि सत्ता वाले गुरू के नाम को हड़पना चाहते है,
पार्टी पर मेरे स्वागत की कोई तैयारी नही थी बस दस कुर्सी और कुछ बुजुर्ग नेता अपनी धौंस दिखा रहे कि वे विचारधारा को जिदां रखने के लिये क्या नही किया।कार्यालय पर मोटे किताब बडे़ तस्वीर लगी लगाई गई थी जो मानो आज ही साफ करके लगाई गई हो।
जब नेता जी भाषण देने बैठे मोटे आंसू बहाने लगे
उन्हे हर पल गरीबो और किसानो की चिंता खाये जा रही है।
वो पत्रकार बंधु से हाथ जोड़कर बोले आप सभी खाना खाकर जायें और मेरे समाचार को ध्यान में रखकर प्रकाशित करवाये।
वो मेरे पास आये मुझे लिफाफा दिया
मैं बोला" अरे भाई आप लोगो विचारधारा की क्या जरूरत आप ईमानदारी से काम करें
आपको जनता हमेशा चुनेगी।

जौनपुर उप्र०
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