-सुरेन्द्र कुमार (लेखक एवं विचारक)


हिम के आँचल में बसा हिमाचल भौगोलिक दृष्टि से बेहद कठिन प्रदेश है। यहाँ की कुल आबादी 68 लाख 64 हजार 602 है। जिसमें आधी जनसंख्या युवाओं की है। लेकिन युवाओं को बीते कुछ वर्षों से यहाँ बढ़ती बेरोजगारी की समस्या प्रमुखता से झकझोर रही है। इस विकराल समस्या ने हमारे शिक्षित युवाओं के दिन का चैन और रात की नींद को हराम कर रखा है। राज्य में रोजगार सृजन की रफ्तार मुश्किल से रेंग रही है। फलस्वरूप हमारा युवा बेरोजगारी से हताशा होकर जहां एक ओर अपराधिक गतिविधियों में स्लिप हो रहा है वहीं दूसरी ओर वह भांग, शराब,चिट्ठा जैसे जानलेवा नशों के आदी होते जा रहे है। हिमाचल देश का एक छोटा राज्य आवश्य है किन्तु यहाँ की बेरोजगारी किसी बड़े राज्य से कम नही है। प्रदेश में निर्वाचित अब तक की कोई भी सरकार इस सामाजिक कलंक को समाप्त करने में सफल नहीं हुई है। चुनाव के वक्त जो प्रमुख दल इस ज्वलंत मुद्दे को अपना चुनावी हत्यार बनाकर जनमत हासिल करता है। चुनाव जीतने के उपरांत वह दल इस गंभीर मुद्दे को सहजता से भुला देता है। राज्य में बेरोजगारों को ठगना एक आम धारणा बनती जा रही है। शिक्षा प्रदान करने के लिए यहाँ सरकारें अनेकों शैक्षणिक संस्थान खोल रही है। परंतु उन संस्थानों से निकलने वाले शिक्षितों को रोजगार देना वह भूलती ही जा रही है। एक अभिभावक आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में कड़ी जद्दोजहद करके अपने बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। लेकिन काबिल बनने के बाद जब बेटा बेरोजगारों की भीड़ में शामिल हो जाता है तो उस निर्दोष अभिभावक की पीड़ा असहनीय हो जाती है। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में पढ़ें लिखें युवा बेरोजगारों की तादाद साल दर साल बढ़ रही है। वर्ष 2016-17 में राज्य में कुल 08 लाख 24 हजार 478 बेरोजगार थे जो अपने नसीब को बारम्बार कोस रहे थे। जिसमें 05 लाख 23 हजार 684 पुरुष तथा 03 लाख 794 बेरोजगार महिलाएँ थी। वर्तमान में प्रदेश में 67 हजार 816 पोस्ट ग्रेजुएट, 01 लाख 17 हजार 795 ग्रेजुएट, 06 लाख 44 हजार 407 अंडर ग्रेजुएट व मैट्रिक, 61 हजार 871 अंडर मैट्रिक और 01 हजार 99 के करीब अनपढ़ बेरोजगार रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत है। जबकि आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के आँकड़ों के आधार पर राज्य में बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 08 लाख 34 हजार 714 हो गई है। सर्वेक्षण ने कांगडा को सबसे अधिक व लाहौल स्पिति को सबसे कम बेरोजगार जिला दर्शाया है। हिमाचल में बेरोजगारी किस कद्र परवान चढ़ रही है इसका एक जीवंत उदाहरण हमें बीते सप्ताह संपन्न हुई राज्य सचिवालय कलर्क भर्ती परीक्षा में देखने को मिला। जिसमें 156 पदों के लिए करीब 90 हजार परीक्षार्थियों ने अपना भाग्य आजमाया। जो दर्शाता है कि यहाँ शासकीय रोजगार प्राप्त करने के लिए युवाओं को कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस परीक्षा में कहीं अभ्यार्थी जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हुए तो कहीं रोल नंबर न मिलने की वजह से स्टाफ से उलझते रहे। जिस आयोग को राज्य की एक आम प्रतियोगी परीक्षा से करोड़ों की कमाई होती है उसके द्वारा ऐसे घटिया इंतजाम करना सरकारी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करती है। यदि कलर्क भर्ती की एक परीक्षा राज्य सरकार को 02 करोड़ 50 लाख की आमदनी प्रदान कर सकती है तो हिमाचल में आयोजित होने वाली ऐसी दर्जनों परीक्षाएं सरकार को कितना राजस्व एकत्रित कर सकती है। इसका अंदाजा शायद ही हमें हो। इसी प्रकार राज्य में बेरोजगारी की बेरहम मार हमारे प्रशिक्षित बेरोजगार अध्यापक भी लंबे समय से झेल रहे हैं। अपने व्यावसायिक प्रशिक्षण पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद भी वे अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी टेट परीक्षा के फेर में बुरी उलझे हुए हैं। प्रदेश में गत माह आयोजित टेट परीक्षा में लगभग 75 हजार प्रशिक्षित युवा बैठे। जिसमें सबसे अधिक 34 हजार 032 टीजीटी आर्टस में तथा सबसे कम उर्दू टेट परीक्षा में बैठे। इन परीक्षाओं के संचालन से भी हिमाचल शिक्षा बोर्ड को करोड़ की फीस एकत्रित हुई। लेकिन प्रबंध के नाम पर यहाँ भी परीक्षार्थियों को खासा हतोत्साहित होना पड़ा। लेकिन यह हमारी व्यवस्था की विडंबना ही है कि यहाँ महँगे प्रशिक्षण और टेट पास करने के बाद भी युवाओं को रोजगार नसीब नहीं होता है। इतना ही नहीं बेरोजगारी का एक भयानक रूप हम बीते साल नियुक्ति प्राप्त 1120 पटवारीयों की भर्ती परीक्षा में भी बखूबी देखा। जिसमें लगभग डेढ़ लाख बेरोजगार अपनी किस्मत अजमाने परीक्षा भवन पहुँचे थे। बेरोजगारों की फौज का यह अब तक का सबसे बड़ा मूर्त रूप था। जिससे प्रदेश राजस्व विभाग को रिकार्ड तोड़ कमाई हुई थीं। लेकिन व्यवस्था यहाँ भी अभ्यार्थियों को जमीन पर बैठ कर गत्ते पर पेपर देने को मजबूर कर गई। राज्य में बढ़ती बेरोजगारी और घटते रोजगार के लिए यदि एक अनार सौ बीमार लकोक्ति की संज्ञा दी जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरकार के लिए कमाई का धंधा बनती हमारी बेरोजगारी जहां शासकीय तिजोरी को लबालब भर रही है वहीं प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों को यह सामाजिक अभिशाप कंगाल कर रहा है। साथ ही यह समस्या हमारे नौजवानों को जघन्य अपराधों की ओर भी धकेल रही है। हिमाचल में सरकार धूमल की हो, वीरभद्र की हो या फिर ठाकुर जयराम की। सभी सरकारें यहाँ बेरोजगारों को लूटने पर तुली हुई है। अभी तक सभी सरकारें इस विकराल समस्या से ग्रस्त युवाओं की पीड़ा को समझने में असमर्थ ही रही है। वर्तमान जयराम सरकार से प्रदेश के लाखों शिक्षित बेरोजगारों को खासी उम्मीदें जागृत हुई थी। परंतु समय के साथ वह भी इस संगीन मुद्दे पर धूमल और वीरभद्र सरिखे राजनीतिज्ञों जैसी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय ही दे रहे हैं। अब उन्हें भी हिमाचल में किसी तरह की बेरोजगारी दिखाई नहीं दे रही है। परिणामस्वरूप प्रदेश के शिक्षित नौजवानों को सब्जी व रेडी बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। अतः राज्य सरकार को चाहिए कि हिमाचल प्रदेश के पढ़े लिखे बेरोजगारों की दयनीय हालत को समझे तथा यथासंभव उन्हें रोजगार प्रदान करने का प्रयास करें। ताकि उन्हें भी अपनी अर्जित शिक्षा के प्रतिफल का सुखद एहसास हो सकें।

हिमाचल प्रदेश।
surenderkchaun@gmail.com

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें