-डॉ मोनिका ओझा
(वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र की व्याख्याता)

विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत ने एक बार फिर लंबी छलांग मार कर देश और दुनियां को चैंका दिया है। विश्व बैंक ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की 2019 के लिए रैंकिंग जारी कर दी है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध करने वालों की एक बारगी बोलती बंद हो गई है। रिपोर्ट ने भारत को खुश होने का मौका दिया है। मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों का असर अब दिखने लगा है। जैसा कि सरकार को उम्मीद थी बुधवार को विश्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट में भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग्स में लंबी छलांग लगाई है। 23 अंकों की छलांग लगाते हुए भारत 77वें पायदान पर पहुंच गया है। साल 2014 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत 142 और साल 2017 में 100वें पायदान था। अब इस इंडेक्स में भारत 77वें पायदान पर पहुंचा गया है। कंस्ट्रक्शन परमिट के क्षेत्र में 129 अंकों का सुधार हुआ है, जबकि ट्रेडिंग अक्रॉस बॉर्डर्स में 66 अंक, स्टार्टिंग बिजनेस में 19 अंक, गेटिंग क्रेडिट में 7 समेत अन्य क्षेत्र में सुधार हुआ है। मोदी सरकार के कार्यकाल में इस रैंकिंग में भारत को 65 स्थान का फायदा हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो कारोबार करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार से कई क्षेत्रों में लाभ होगा।
सरकार ने भी विश्व बैंक की रिपोर्ट को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सबसे बड़ी छलांग टैक्स सुधारों के जरिए मिली है और इसकी वजह रहा ऑनलाइन व्यवस्था को सही तरीके से अमल में लाना। वित्त मंत्री अरुण जेटली का मानना है कि आने वाले सालों में भारत के लिए 50वीं रैंकिंग हासिल करना मुमकिन है। भारत इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 50 नंबर पर जल्द आ सकता है। जीएसटी और नोटबंदी जैसे आर्थिक सुधारों को लेकर विपक्ष की आलोचना झेल रही मोदी सरकार के लिए इसे राहत की खबर माना जा रहा है। भारत बेहतर करने वाले टॉप 10 देशों में शामिल है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट विश्व बैंक द्वारा जारी की जाती है. इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से दस मानदंड है. जिनके आधार पर तय किया जाता है कि कौन सा देश कारोबार की सुगमता की लिहाज से पहले स्थान पर हैं और कौन निचले पायदान पर है. विश्वबैंक की डूइंग बिजनेस की पिछली सूची में न्यूजीलैंड पहले स्थान पर जबकि सिंगापुर दूसरे पायदान पर था। आर्थिक सुधारों के इस कदम से देश में निवेश का माहौल बनता है। इससे रैंकिंग सुधारों को मान्यता मिली है। रैंकिंग बढ़ने से निवेश का माहौल बनेगा। सरकार की कोशिशों से बिजनेस शुरू करना आसान हुआ है। रिपोर्ट में कई सुधारों को मान्यता मिली है। अभी कई हिस्सों में सुधार करने की जरूरत है।
भारत की जीडीपी ग्रोथ के हिसाब से देश में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस और बेहतर होना चाहिए। अभी कई क्षेत्रों में अभी सुधार की गुंजाईश है। जीडीपी रैंकिंग में भारत चैथे स्थान पर है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में और सुधार जरूरी है। हालांकि ये भारत की बड़ी उपलब्धि है। कई क्षेत्रों में अभी सुधार की गुंजाईश है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मतलब होता है किसी भी देश में कारोबार कितनी सरलता से शुरू किया जा सकता है। विश्व बैंक हर साल डूइंग बिजनेस रिपोर्ट जारी करता है जिसमें वह 10 पैमानों पर 190 देशों की रैकिंग करता है जिसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग’ कहते हैं। इसका मकसद यह जानना है कि किस देश में कारोबार शुरू करना आसान है और किस देश में कठिन। जिन 10 पैमानों के आधार पर देशों की रैंक तय की जाती है वे हैं- बिजली कनेक्शन लेने में लगने वाला वक्त, कॉन्ट्रैक्ट लागू करना, बिजनेस शुरू करना, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, दिवालियापन के मामले सुलझाना, कंस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट, लोन लेने में लगने वाला वक्त, माइनॉरिटी इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा, टैक्स पेमेंट और ट्रेडिंग अक्रोस बॉर्डर (सीमापार व्यापार) शामिल हैं। एक 11वां पैमाना ‘श्रम बाजार के नियम’ भी होता है लेकिन देशों की रैंकिंग तय करते समय इसके मूल्य को नहीं जोड़ा जाता।
किसी देश के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग बेहद महत्वपूर्ण है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसी देश में निवेश से पहले वहां की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर निर्णय लेती हैं। देश की रैंकिंग में सुधार आए और पूरे देश में कारोबार की प्रक्रिया आसान बने इसके लिए सरकार ने राज्यों के लिए भी एक एक्शन एजेंडा तैयार किया है। प्रत्येक राज्य को यह एजेंडा लागू करना है और इसके आधार पर राज्यों की रैंकिंग भी की जा रही है। हालांकि यह रैंकिंग विश्व बैंक द्वारा तैयार की जाने वाली देशों की रैंकिंग से अलग है।

 


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