-चाँदनी सेठी कोच


राधे श्याम का एक बेटा था, वह उसे बहुत प्यार करता था , वह चाहता था , कि उसके बेटे की शादी बहुत धूम-धाम से हो , जैसे हर पिता का अरमान होता है ! राधे श्याम का बेटा आज ऑफिस के काम से १ साल के लिए जर्मनी जा रहा था, तभी पिता ने बेटे से जाते हुए कहा कि

" तुम जल्दी आना , अब जब तुम आओगे तब हम तुम्हारी शादी करवा देंगे , क्योंकि अकेले बाहर आते -जाते हो तो हमें तुम्हारी चिंता लगी रहती है, कम से कम शादी बाद तुम्हारे साथ कोई तो होगी ,जो वहाँ तुम्हारा ख्याल रख सके "

रणजीत ने कहा " ठीक है पिता जी, जैसा आप कहेंगे वैसा ही होगा "

और रणजीत एक साल के लिए जर्मनी चला गया , पर उसके माता - पिता यहाँ पर उसके लिए लड़कियाँ देख रहे थे ! और नई - नई योजनाएँ बना रहे थे , कि कैसे शादी करनी है , कहाँ करनी है आदि तरह - तरह की योजनाएं बना रहे थे ! वहाँ रणजीत मन लगाकर अपना काम कर रहा था , और रोज अपने माता - पिता को फ़ोन करता , ताकि उसके माता-पिता खुश रहे , और उसकी फिक्र ना करें !

और देखते ही देखते समय कैसे बीता चला गया , पता ही ना चला ,और मानो कल ही की बात हो जैसे , रणजीत को गए हुए आज एक साल कैसे बीत गया मालूम ही न चला !

कल रणजीत घर वापस आ रहा था , इसलिए उसके माता - पिता बहुत खुश थे , क्योंकि अब तो वह बस रणजीत की शादी करना ही चाहते थे ! और रणजीत के आने की ख़ुशी में कैसे रात बीत गई उन्हें पता नहीं लगा और कब ना जाने सुबह हो गई !

रणजीत की माँ सुबह से ही किचन में तरह - तरह के पकवान बनाने में व्यस्त थी , और राधे श्याम ने रणजीत को लाने के लिए एयरपोर्ट पर कार भेज दी थी, ताकि उनका बेटा आराम से घर आ सके ! कुछ देर बाद घर की घंटी बजी , और राधे श्याम ने भागते - भागते हुए दरवाज़ा खोला !

दरवाजे खोलते ही , रणजीत उनके सामने था , उनकी तो ख़ुशी का ठिनका ना था , इतने में रजीत की माँ भी आई और अपने बेटे को देखकर फूले न समायी और उसे देखती ही रही !

रणजीत ने माँ से कहा कि
“बस माँ और कितना देखोगी, अब मैं यही हु, जी भर कर देखती रहना, अभी मुझे बहुत भूख लगी है, कुछ खिला दो”
माँ " हाँ , बेटा अभी लाई , जाओ तब तक तुम मुंह हाथ धो आओ "

रणजीत हाथ मुंह धोने चला गया , इतने में रणजीत के पिता ने रणजीत की माता से कहा कि -
"आज तो मैं रण जीत से सोनिया बारे में बात कर के ही रहूँगा "
सोनिया वही लड़की थी , जिसको राधे श्याम और उसकी पत्नी ने रणजीत के लिए पसंद किया था !

रण जीत की माँ ने कहा " ठीक है , खाना खाते -खाते आप बात शुरू कर देना बाकि मैं भी आपका बात करने में साथ दे दुगी !

रण जीत खाने की मेज़ पर आता है , और फिर रणजीत और उसके माता - पिता मिलकर आज काफी समय बाद खाना साथ खाते है , तभी राधे श्याम ने सोनिया के बारे में रणजीत को बताया !
रण जीत " पिता जी इतनी जल्दी क्या है अभी ?
राधे श्याम - " बेटा जल्दी नहीं है , तुम आराम से एक बार सोनिया से मिल लो , उसे देख लो ,फिर ही हम बात आगे बढ़ेंगे !

रण जीत - " ठीक है , पिता जी कल ही चलते है , क्योंकि परसो मुझे ऑफिस जाना है !

राधे श्याम : "ठीक है , मैं सोनिया के पिता जी को बता देता हु , कि हम लोग कल आ रहे है !

रण जीत : " ठीक है , पिता जी" !

अगली सुबह रण जीत अपने माता - पिता के साथ लड़की देखने चला जाता है !

सोनिया एक पढ़ी लिखी लड़की है , उसने मास्टर किया हुआ है , और वह एक एनजीओ में करती है

रण जीत को सोनिया देखते ही पसंद आ जाती है , और घर वालो ने दोनों को थोड़ी देर अलग बात करने के लिए भेज दिया , ताकि दोनों एक दूसरे को अच्छे से जान- पहचान सके !

सोनिया रणजीत को अपना पूरा घर दिखती है , और साथ साथ दोनों बाते करते रहते है !

रण जीत : सुना है आप एनजीओ में काम करती है !

सोनिया : जी है , मुझे एनजीओ में काम करना बहुत पसंद है , मैं काफी समय से एनजीओ में काम कर रही हु !

रणजीत : अच्छा है , आप बहुत नेक कार्य कर रही है !
सोनिया : शुक्रिया जी , अब आप अपने बारे में कुछ बताये !

रणजीत : मैं एक इंजीनियर हु ,और कभी - कभी मुझे इंडिया से बाहर भी जाना होता है !

सोनिया : जी ये तो अच्छी बात है , अलग - अलग जगह जा कर कुछ ना कुछ सिखाने को ही मिलता होगा आपको !
रणजीत : जी आप सही कहे रही है , मुझे वहाँ रहे कर, वहाँ के कल्चर को जाने का मौका भी मिला !
सोनिया : अच्छा मैं आप से एक बात पूछ सकती हु क्या ?
रणजीत : जी बिलकुल , बिना संकोच करें , आप कुछ भी पूछ सकती है !
सोनिया : अगर हम दोनों की शादी होती है , तो क्या आप मुझे एनजीओ में काम करें देंगे !
रणजीत : जी इस बात के जवाब देने से पहले मैं भी आपसे एक बात पूछना चाहता हु !
सोनिया : जी कहिये !
रणजीत : अगर हमारी शादी होती है , तो क्या आप मुझे ऐसी नौकरी करने देगी , जिसमें मुझे कभी - कभी इंडिया से बाहर जाना होता है
सोनिया : जी , यह कैसा सवाल हुआ , बिलकुल यह तो आपका काम है , जो आपको करना ही होगा , और मैं आपको क्यों मना करूँगी !
रणजीत : इसलिए क्योंकि आपने भी मेरे से यही सामान प्रश्न किया , आखिर मैं आपको एनजीओ में काम करने के लिए क्यों रुकूंगा , बल्कि इस काम में तो मैं भी आपका साथ दुगा !
सोनिया : शुक्रिया रणजीत जी !
रणजीत : आपको भी शुक्रिया !
दोनों अपनी बाते खत्म करके अपने घर वालो के पास चले जाते है , और शादी के लिए हां कर देते है!

शादी में अभी ६ महीने बाकी थे , इसलिए दोनों एक दूसरे से मिलते और खूब बाते करते , यहाँ तक रणजीत सोनिया के एनजीओ में भी जाने लगा था , और वहाँ वक़्त भी बिताने लगा था !
एक दिन सोनिया ने रणजीत से कहा, कि ऐसा नहीं हो सकता की हम शादी बहुत साधारण तरह से करें , और जितना खर्च हमने शादी में करना है ,उतने पैसो में हम इन बच्चों के लिए स्कूल बनवा दे , ताकि इनका जीवन अच्छा हो जाये !

रणजीत : हां , बिलकुल सोनिया तुम सही कहे रही हो , आखिर एक दिन में इतना ख़र्च करके क्या फ़ायदा , आखिर शादी हमें करनी है , चाहे हम जैसे भी करें, यह हमारी मर्जी है !
सोनिया : पर एक बात रणजीत ,मुझे नहीं लगता हमारे माता - पिता इस बात को कभी मानेंगे , क्योंकि वह सब तो हमारी शादी की तैयारी दिन - रात एक कर रहे है !

रणजीत : तुम चिंता मत करो , मैं अपने माता - पिता से बात करता हु !

सोनिया : ठीक है ,मैं भी अपने घर बात करती हु !
रणजीत : अपने पिता जी को सारी बात बता देता है , लेकिन पिता जी के तो अपने ही अरमान थे , और वो गुस्सा हो जाते है !

राधेश्याम ने अपनी पत्नी से कहा , " क्या हो गया है , आज कल के बच्चों को , ज्यादा ही लड़ - प्यार का ही ये नतीज़ है , कि हमारी ख़ुशी के लिए कुछ नहीं कर सकते !

माँ : एक बात कहु मैं आप से अगर आप बुरा ना मानने !
राधेश्याम : हां कहो (गुस्से में )
माँ : आखिर क्या ग़लत कहा उसने , सोच जरूर नई है , पर सही है , अपने भी तो अपने समय में मेरे घर वालो से दहेज़ लेने से इनकार कर दिया था , तब आपको क्या हुआ था

थोड़ी देर कुर्सी पर बैठ कर राधेशयाम ने कुछ सोचा और रणजीत और सोनिया को बुलाया और कहा -
“तुम बच्चों के लिए स्कूल कहाँ बनवाने का सोच रहे हो, कोई जगह सोची है या उमसे मैं तुम्हारी मदद करूँ "
रणजीत : मैं कुछ समझा नहीं पिता जी , आप क्या कहे रहे है !

राधे श्याम : मतलब यह है , कि स्कूल कैसा होना चाहिए , कहाँ चाहिए , ये सब सोचा है , ताकि हम आगे का काम शुरू करे !
रण जीत : मतलब पिता जी , आपको हमारी बात मंजूर है !

पिता : हाँ बिलकुल , बल्कि इस नेक काम में मैं भी तुम लोगों की मदद करुगा , और कोई जरूरत हो तो मुझसे कहना , पर स्कूल एक दम बढ़िया होना चाहिए, और बच्चों को कोई परेशानी , मुझे हर चीज अच्छे से चाहिए !

सोनिया : जी पिता जी बिलकुल , शुक्रिया पिता जी , हमारी बात माने के लिए और आपके साथ के लिए !
पिता : शुक्रिया किस बात का बच्चों।

" आखिर मैं भी तो आज की पीढ़ी का हु "

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