-इं. ललित शौर्य

देशभक्ति फुल'टू डिजिटल हो चुकी है। ये दौर डिजिटल देशभक्ति का है। अगर आप डिजिटल देशभक्ति शो नहीँ कर रहे, तो आप देशभक्त हो ही नहीँ सकते।आज देशभक्त होने के लिए पहली शर्त है की आपका फेसबुक, व्हाट्स एप्प और ट्विटर अकाउंट होना चाहिए। और उस अकाउंट की डीपी पर बड़ा सा तिरंगा फहरना चाहिए। आपके द्वारा स्टेटस पर गूगल से चोरी की गई किसी बड़े लेखक की कविताओं की पंक्तियाँ चेपी गई हों। अगर ऐसा है तो आप बड़े वाले देशभक्त हैं। इसके साथ ही अगर आपने अपने शहर के हर गली, महोल्ले,नुक्कड़ और चौराहे पर अपने थोबड़े के साथ बड़े-बड़े होर्डिंग लटकाये हुए हैं ,उस पर 15 अगस्त की शुभकामनाये लिखी हैं तो आप निसंदेह टॉप क्लास के देशभक्त कहे जाएंगे। डिजिटल दौर में डिजिटल शुभकामनाएं और डिजिटल देशभक्ति ही चर्चा में है। बाकी सब कुएं का अंधकार है।
अगर ये समय आजादी के लिए जद्दोजहद का होता तो, आजाद, भगत सिंह , सुभाषचंद्र बोस से भी बड़े देशभक्त फेसबुकिए कहलाते। ये डिजिटल देशभक्त सोशल मीडिया के माध्यम से ही अंग्रेजो भारत छोड़ो का आंदोलन चलाते। निश्चित रूप से दो चार अंग्रेज इनके इस आंदोलन से भयभीत होकर इनकी फ्रेंडलिस्ट छोड़कर भाग खड़े होते। घर बैठे, रजाई के भीतर घुसे-घुसे क्रांतियाँ दौडने लगती। देश में देश भक्ति का ज्वार फूट पड़ता। लोग लाइक,कमेंट और शेयर रूपी हथियारों से ही आजादी का युद्ध लड़ते। फेसबुकिये क्रांतिकारियों के लाइक्स और फॉलोवर देखकर ही ब्रितानी हुकूमत की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती। उनकी सत्ता के पेंच ढीले हो जाते। डिजिटल देशभक्त अंग्रेजी शासन को ऐसा ट्रोल करते की वो भाग खड़े होते।
अब वो दौर है जहां देशभक्ति दिखाने में मजा है। देशभक्ति टपकनी चाहिए। देशभक्ति वायरल होनी चाहिए। अगर अगस्त का महीना आते ही आपके व्हाट्स एप्प और फेसबुक देशभक्ति के गीत ना उगलने लगे तो समझ लो मामला कुछ गड़बड़ है। आपको शक की नजरों से देखा जा सकता है। अपने देश में 11 महीने देशभक्ति फ्रिज के अंदर ठंडी पड़ी रहती है। अगस्त आते ही देशभक्ति में उबाल आने लगता है। देशभक्ति गर्म होना चालू हो जाती है। फिर वो देशभक्ति हमारी अंगुलियों में थिरकते हुए मोबाइल की-पैड में कत्थक करती हुई फेसबुक स्क्रीन में नृत्य करने लगती है। इजहारे देशभक्ति बहुत जरूरी है। बिना मुजाहिरा किये वो रौनक नहीँ है। अगस्त के महीने में देश का हर नागरिक खासकर फेसबुकिये खुद को देशभक्त साबित करने में व्यस्त रहते हैं। उनकी व्यस्तता देशभक्ति की पोस्टों को इधर से उधर, कॉपी पेस्ट में रहती है। जैसे उनकी देशभक्ति मौलिक नहीँ होती वैसे ही उनके विचार भी मौलिक नही होते।उधारी के स्टेटस से नगद और खरी वाली देशभक्ति का जुगाड़ देखा जा सकता है।
डिजिटल देशभक्ति के दौर में उसूल उल्लू के घोंसले में रखे जाते हैं। समर्पण और त्याग घोड़े के अस्तबल में दबा दिए जाते हैं। ईमानदारी को सियार के गले में लटका दिया जाता है। यहां बस येन केन प्रकारेण लाइक्स और कमेंट जुटाने होते हैं। असल जीवन में आप कितने भी अराष्ट्रीय क्यों न हों पर फेसबुक की एक पोस्ट आपको राष्ट्रवादी और प्रखर देशभक्त का मैडल देने के लिए काफी है। आप भले ही बिजली चोरी करते हों, रेल का टिकट मार लेते हों, सार्वजनिक स्थानों पर पीक मारकर दीवारें रंगने का काम करते हों, सरकारी वस्तुओं की ऐसी की तैसी करते हों पर आपके ये सारे पाप अगस्त के माह में धुल सकते हैं। अगस्त का महीना देशभक्ति का महाकुम्भ है। जिसमें फेसबुक रूपी गंगा में पोस्ट रूपी डुबकी लगाकर देशभक्ति रूपी पुण्य कमाया जा सकता है।
आज के देशभक्तों के लिए फोटोज का बड़ा महत्व है। सेल्फ़ी विथ तिरंगा लेकर फेसबुक में पोस्ट करते ही आपको भारत माँ का लाल सरीखे सम्बोधन मिलने शुरू हो जाएंगे। शायद आपको वीर,पराक्रमी, शौर्यवान के ख़िताब भी मुफ़्त में मिल जायें। फेसबुक में फोकट की उपमा बांटने वालों की कमी नहीँ है। यहां पर बंदा चंद मिनटों में ही महान बन जाता है। शहीदों को अपना नाम कमाने और नाम बनाने के लिए फाँसी के फन्दों को चूमना पड़ा, घर छोड़ना पड़ा, घास- फूस की रोटियां खानी पड़ी। परन्तु आज ऐसा नहीँ है। अब तो बस एक ट्वीट से बंदा देशभक्ति की हद पार कर लेता है। अब देशभक्त बनने के लिए राष्ट्रोन्नति के कार्य करने उतने जरूरी नहीँ हैं जितना जरूरी है खुद को देशभक्त का लेबल लगाकर वायरल करना। वायरल होते रहिये, देशभक्त बने रहिये।


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उत्तराखंड

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