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-नवेन्दु उन्मेषपाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय सेना के द्वारा बम गिराये जाने से पाकिस्तान के लोगों से ज्यादा कुछ भारतीय राजनेताओं के दिल को चोट पहुंची है। इसका कारण यह है कि वे खाते हिन्दुस्तान का हैं और गाते पाकिस्तान का हैंे। ऐसे लोग बालाकोट में बम गिराये जाने के बाद वहां मारे गये लोगों की गिनती करने में व्यस्त हैं। उन्हें आतंकवादियों के द्वारा कश्मीर में मचाये जा रहे…
-डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा दुनिया के देशों में संभवतः यह हमारा देश ही होगा जहां सेना के मनोबल को बढ़ाने की जगह उससे प्रूफ मांगा जाता है। दुश्मन से लोहा लेते सरहदों की रक्षा की जिम्मेदारी संभाले सैनिकों, अर्द्धसैनिकों, आंतरिक सुरक्षा में जुटे जवानों की शहादत को राजनीति का मोहरा बनाना हमारे राजनीतिक दलों, कथित मानवाधिकारवादियों, प्रतिक्रियावादियों का शगल रहा है। किसने क्या किया या किसके समय क्या हुआ यह…
-बाल मुकुन्द ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) भारत में अकाल मौतों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। मलेरिया, स्वाइन फ्लू , डेंगू ,कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों, गरीबी और भूख, कुपोषण वायु ,जल और ध्वनि प्रदूषण, नशे, मिलावट, तथा सड़क दुर्घटना आदि से प्रति वर्ष लाखों की संख्या में होने वाली अकाल मौतों की खबरें आये दिन मीडिया में छायी रहती है। मगर अब वाहनों के धुंवे से…
-डॉ नीलम महेंद्र (Best editorial writing award winner) ये वो नया भारत है जो पुराने मिथक तोड़ रहा है,ये वो भारत है जो नई परिभाषाएं गढ़ रहा है,ये वो भारत है जो आत्मरक्षा में जवाब दे रहा हैये वो भारत है जिसके जवाब पर विश्व सवाल नहीं उठा रहा है । पुलवामा हमले के जवाब में पाक स्थित आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करने के बाद अब भारतीय सेना का…
-शिवांकित तिवारी "शिवा" बात मार्च माह की है,जब सर्दियों का मौसम धीरे-धीरे खिसक रहा था और ग्रीष्म ऋतु दहलीज पर थी।विवान अपनी कक्षा 12वीं की परीक्षाओं की तैयारियों में पूरी तरह से व्यस्त था,क्योंकि विवान ने पहले से निश्चय कर लिया था की इस वर्ष कक्षा 12वीं वह प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करेगा बस रात-दिन उसके दिलों-दिमाग में सिर्फ एक ही बात गूंज रही थी की वह इस परीक्षा में…
-"आशुतोष", पटना बिहार राष्ट्रबाद और राजनीति दोनों को मिक्स नहीं किया जा सकता राजनीति एक सोच और विचारघारा हो सकती है जो हमेशा महत्वाकांक्षा को बढ़ावा देती रही है। उसके उलट राष्ट्रबाद आपके खून में दौड़ता हुआ लहू है आपकी सांसे है आपकी ईज्जत है।इन दोनो को कभी एक परिधि में नही आंका जा सकता।पुलवामा हमले के बाद से राष्ट्र की एकजुटता अनेक कार्यक्रमो और जूलूसो में प्रदर्शित हुई है…

मां की जरूरत

- अवधेश कुमार निषाद मझवारसपने में खोकर श्याम अपनी पत्नि मनु की मृत्यु के बाद ये सपना देखता है, कि उसकी पत्नि उसे किचिन से आवाज लगा रही है, कि उसका खाने का टिफिन तैयार है | लेकिन श्याम नहाने के बाद किचिन में देखता है कि उसका दूध चूले पर निकल जाता है और उसका खाना चूल्हे पर जला हुआ मिलता है | कहता है कि आज मनु होती…
-अभिषेक राज शर्माजूते की महानता तुम क्या जानो बाबू,शादी में साली के नखरे देखने से लेकर पार्लियामेंटतक जूते की महिमा देखने को मिल रहा है।आज टीवी पर देखाजूते पर जूते चल रहेमानो परसाई जी के आत्मा मेरे कलम में प्रवेश कर गई,उछल-उछल कर जूते को प्रणाम करने का दिल करने लगा ।क्या लिखूं अरे गुरू जी छी ऐसे उन्नति करते हो,नेताओ के सभा में लहराये जाते है एक नेता ने…
-आकांक्षा सक्सेना "हादसों का क्या कि कब कोई हादसा ज़िन्दगी की कच्ची रशीद पर पक्की मोहर लगा कर आगें बढ़ जाये........" हिन्दी की प्रोफेसर हिमानी तेजवानी जिन्हें अपनी मात्र भाषा हिंदी से काफी प्यार था।उनका मानना था कि शिक्षा की प्राप्ति अपनी मातृभाषा में ही होनी चाहिये।उनका एक सपना था कि अगर ईश्वर ने मुझे एक बच्ची को जन्म देने का सुअवसर प्रदान किया तो अपनी बच्ची का नाम इरादतन…
-आकांक्षा सक्सेना दुनिया के रचियता ने सबसे बुद्धिमान प्राणी को रचा जिसमें प्रेम, दया,परोपकार, बुद्धि, विवेक, सोचने -समझने की शक्ति व मुस्कुरा के सभी के हृदय को जीतने की शक्ति और सहानुभूति और प्रार्थना स्वरों से किसी पीड़ित को नवजीवन देने की अपार शक्ति निहित थी | जिसमें सपनों और कल्पनाओं को साकार रूप देने की अनंत ऊर्जा विद्दमान थी जोकि दुनिया के रचियता की सबसे भरोसेमन्द और प्रिय रचना…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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