articles

--प्रकाश दर्पे बैंकिंग सेवा में हर तीन वर्ष में स्थानांतरण होते रहते है ।एक बार एक शाखा प्रबंधक का स्थानांतरण एक छोटे क़सबे में हुआ। वे हर शनिवार को बस से अपने शहर को जाते थे।घर जाने के उतावलेपन के कारण जो भी बस पहले मिलती उससे घर निकल जाते । परंतु बस में भीड़ होने के कारण कभी जगह मिलती या नहीं मिलती । इससे उन्हें बहुत परेशानी होती…
-इं. ललित शौर्यचुनाव आते ही नेताजी को वोटरों के चरणों में जन्नत नजर आने लगती है। कभी 180 डिग्री पर घूरने वाली उनकी आखें अब सीधे 90 डिग्री पर झुककर विनम्रता की आइकन बन रही हैं। ये नेताजी के झुकने का सर्वोच्च है, वो पांच साल में चुनाव आने पर ही इतना झुकते हैं। चुनाव से पहले और चुनाव के बाद उनकी गर्दन अकड़ सी जाती है, उसमें हल्का सा…
-ओम प्रकाश उनियालराम हमारे आराध्य हैं, आदर्श हैं। 'राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट ..... ' का संबोधन अध्यात्म के अनुसार मानव जीवन को सुधारने के लिए किया गया है। लेकिन उसका उपयोग राजनीति के लिए होने लगा। पूरी तरह हावी हो चुकी है राजनीति राम नाम पर। इसका मतलब यह हुआ कि राम शब्द कि महिमा की समझ किसी को नहीं है। बहुत ही हल्का समझा…
-प्रभुनाथ शुक्ल [Journalist] कुछ माह बाद 2019 में लोकसभा के आम चुनाव होने हैं। लिहाजा देश का मूड चुनावी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हो रहे आम चुनाव गुलाबी ठंड में भी तपिस बढ़ा दी है। कर्नाटक में हुए उपचुनाव और उसके बाद आए परिणाम ने इस सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। गैर भाजपाई दल राज्य विधानसभा चुनाओं को जहां भाजपा और मोदी के लिए प्री-पालटिक्स टेस्ट…

बाल दिवस

-राजीव डोगरा बाल दिवस हर वर्ष 14 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिवस नन्हें मुन्नों का दिवस हैं।नेहरु जी के जन्मदिन पर मनाया जाने वाला बाल दिवस, नेहरु जी का बच्चों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में कई तरह के कार्यक्रम किए जाते हैं।और साथ ही नेहरू जी को याद कर उनको श्रद्धांजलि दी जाती है।नेहरू जी को बच्चों से बड़ा प्रेम था बच्चों…

विचारधारा

-अभिषेक राज शर्मा राजनीति पर चर्चा हो रही हो तभी जेहन में विचारो की धारा बहने लगती हैं,मानो जैसे विचार विमर्श के बिना राजनीति सूना सा लगता है।विचारधारा राजनीति का फैशन बन गया जो बडे़ पोस्टर और प्रलाप द्वारा दिखाई देता है, जब विचारधारा की सत्ता हो तब परवाह नही होती लेकिन जब आप सत्ता से बाहर हो तब विचारधारा उमड़कर शरीर को तोड़मरोड़ करती है।विचारधारा से समझ आता कि…
-बाल मुकुन्द ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) मधुमेह शब्द मधु और मेह दो शब्दों से मिलकर बना है। मधुमेह शब्द में मधु का अर्थ होता है मीठा यानी शक्कर और मेह का अर्थ होता है मूत्र यानी पेशाब। मधुमेह या डाइबिटीज जिसे बोलचाल की भाषा में शुगर भी कहा जाता है आखिर है क्या जिसकी चर्चा आजकल घर घर में सुनी जा रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक हर आयु…
-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार) राजस्थान विधानसभा के लिये अगले माह होने वाले चुनाव में प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा व मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा तीसरा मोर्चा कितना दम दिखा पायेगा। आज यह सवाल हर मतदाता के मन में उठ रहा हैं, क्योंकि राजस्थान में हर बार बनने से पहले ही बिखर जाता है तीसरा मोर्चा। राजस्थान में अब तक कांग्रेस व भाजपा की ही सरकारे बनी है। अब…
-इति शिवहरेआज गौरी कोचिंग जाने के लिए घर से निकली ही थी कि तभी देखा कि एक आलीशान बंगले से काफी जोर जोर से आवाज आ रही थी ।देखा तो पता चला कि जन्मदिन की पार्टी हो रही थी। तभी वह आगे बढ़ने ही वाली थी कि अचानक उसकी नजर एक बच्चे पर पड़ी जो काफी गौर से देख रहा था। वह उसके पास गई और पूछा कि आप ऐसे…
-सुरेन्द्र कुमार (लेखक एवं विचारक) हिम के आँचल में बसा हिमाचल भौगोलिक दृष्टि से बेहद कठिन प्रदेश है। यहाँ की कुल आबादी 68 लाख 64 हजार 602 है। जिसमें आधी जनसंख्या युवाओं की है। लेकिन युवाओं को बीते कुछ वर्षों से यहाँ बढ़ती बेरोजगारी की समस्या प्रमुखता से झकझोर रही है। इस विकराल समस्या ने हमारे शिक्षित युवाओं के दिन का चैन और रात की नींद को हराम कर रखा…
Page 84 of 89

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें